आनुवंशिक विकार क्या है?
जीन DNA का छोटा हिस्सा है। यह एक प्रोटीन बनाने का निर्देश है। उस निर्देश में बदलाव को उत्परिवर्तन (mutation) कहते हैं। कई बदलाव कुछ नहीं करते। कुछ से प्रोटीन ठीक से काम नहीं करता। तब आनुवंशिक विकार हो सकता है।
तीन मुख्य समूह:
- एक-जीन विकार: एक जीन ख़राब (सिस्टिक फाइब्रोसिस, सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, हंटिंगटन रोग, हीमोफीलिया)।
- गुणसूत्र विकार: पूरे गुणसूत्र ज़्यादा, कम या टूटे हुए (डाउन, टर्नर, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम)।
- बहुकारकीय विकार: कई जीन और जीवनशैली मिलकर (टाइप 2 मधुमेह, कुछ हृदय रोग)।
ये रोग छूने से नहीं फैलते। ये परिवार में आगे जाते हैं, या किसी एक अंडाणु/शुक्राणु में नए बनते हैं।
अप्रभावी और प्रभावी एक-जीन विकार
हर जीन की एक प्रति माँ से और एक पिता से मिलती है। सामान्य एलील को बड़े अक्षर और ख़राब को छोटे अक्षर से लिखते हैं।
अलिंगसूत्री अप्रभावी (autosomal recessive)
रोग के लिए दो ख़राब प्रतियाँ (aa) चाहिए। Aa व्यक्ति वाहक है: स्वस्थ, पर ख़राब प्रति आगे दे सकता है। दो वाहक: AA : Aa : aa = 1 : 2 : 1, यानी 25% रोगी संतान की संभावना। उदाहरण: सिस्टिक फाइब्रोसिस, सिकल सेल एनीमिया (लाल रक्त कोशिकाएँ हँसिए जैसी मुड़ जाती हैं), थैलेसीमिया (हीमोग्लोबिन कम बनता है), फिनाइलकीटोनूरिया।
अलिंगसूत्री प्रभावी (autosomal dominant)
एक ख़राब प्रति (D) काफ़ी है। रोगी (Dd) और स्वस्थ (dd) माता-पिता: हर बच्चे में 50% संभावना। उदाहरण: हंटिंगटन रोग (तंत्रिका कोशिकाएँ धीरे-धीरे ख़राब, लक्षण अक्सर बड़ी उम्र में), एकॉन्ड्रोप्लेसिया (एक तरह का बौनापन)।
“अलिंगसूत्री” का मतलब: जीन गुणसूत्र 1 से 22 पर है, X या Y पर नहीं, इसलिए लड़के-लड़कियाँ बराबर प्रभावित होते हैं।
लिंग सहलग्न (X-लिंक्ड) विकार
लड़कियाँ XX और लड़के XY होते हैं। Y पर बहुत कम जीन होते हैं। अगर ख़राब अप्रभावी एलील (Xʰ) X पर है, तो लड़के के पास उसे ढकने के लिए दूसरा X नहीं होता। इसलिए X-लिंक्ड अप्रभावी रोग लड़कों में बहुत ज़्यादा मिलते हैं।
वाहक माँ (XᴴXʰ) × स्वस्थ पिता (XᴴY): बेटियाँ XᴴXᴴ या XᴴXʰ (आधी वाहक, कोई रोगी नहीं), बेटे XᴴY या XʰY (आधे रोगी)।
उदाहरण: हीमोफीलिया (खून ठीक से नहीं जमता; रानी विक्टोरिया के वंशजों में प्रसिद्ध), लाल-हरी वर्णांधता, ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी। पिता अपने बेटे को X-लिंक्ड एलील कभी नहीं देता, क्योंकि बेटे को वह Y देता है।
गुणसूत्र विकार
कभी-कभी अंडाणु या शुक्राणु बनते समय गुणसूत्रों के जोड़े ठीक से अलग नहीं होते। इसे असंयोजन (non-disjunction) कहते हैं। तब युग्मक में एक गुणसूत्र ज़्यादा या कम रह जाता है।
- डाउन सिंड्रोम (ट्राइसोमी 21): 21वें गुणसूत्र की तीन प्रतियाँ, कुल 47। सीखने में कठिनाई, चपटा चेहरा, हृदय की समस्या आम। माँ की उम्र बढ़ने पर संभावना बढ़ती है।
- टर्नर सिंड्रोम (45, X): एक X वाली लड़की। कम लंबाई, अंडाशय विकसित नहीं होते।
- क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (47, XXY): अतिरिक्त X वाला लड़का। अक्सर लंबा, प्रजनन क्षमता कम।
कैरियोटाइप सभी गुणसूत्रों की तस्वीर है, आकार के क्रम में जोड़ों में सजी हुई। डॉक्टर इन्हें गिनकर ये विकार पहचानते हैं।
जाँच, परामर्श और इलाज
वंशावली चार्ट (pedigree) परिवार का पेड़ है जो दिखाता है किसमें गुण था। इससे अंदाज़ा लगता है कि विकार प्रभावी, अप्रभावी या X-लिंक्ड है।
आनुवंशिक जाँच DNA या गुणसूत्र देखती है: बड़ों के लिए वाहक जाँच, गर्भ में जाँच (माँ का खून, एमनियोटिक द्रव या प्लेसेंटा कोशिकाएँ) और नवजात जाँच (एड़ी से खून की बूँद)।
आनुवंशिक परामर्श: प्रशिक्षित विशेषज्ञ संभावनाएँ और विकल्प समझाता है, फ़ैसला थोपता नहीं।
इलाज: ख़ास आहार (फिनाइलकीटोनूरिया), थक्का बनाने वाले फ़ैक्टर के इंजेक्शन (हीमोफीलिया), खून चढ़ाना और बोन-मैरो प्रत्यारोपण (थैलेसीमिया)। जीन थेरेपी हानिरहित वायरस या जीन एडिटिंग (CRISPR) से कोशिकाओं में सही जीन डालती है। यह नई और महँगी है, और नैतिक सवाल उठाती है, जैसे भ्रूण के जीन बदलना ठीक है या नहीं।
करके देखो: अपना पनेट वर्ग बनाओ
एक काग़ज़ लो। 2 × 2 का खाना बनाओ। ऊपर माँ के दो एलील और बाईं ओर पिता के दो एलील लिखो। हर खाने में ऊपर से एक और बगल से एक अक्षर भरो। कितने खाने aa हैं, गिनो। अब 3D के खुद आज़माओ वाले चरण से मिलाओ। XᴴXʰ × XʰY आज़माओ: क्या कोई बेटी रोगी हो सकती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वाहक × वाहक (Aa × Aa) → 1 AA : 2 Aa : 1 aa → 25% रोगी, 50% वाहक
- प्रभावी रोगी × स्वस्थ (Dd × dd) → 50% रोगी
- वाहक माँ × स्वस्थ पिता (XᴴXʰ × XᴴY) → 50% बेटे रोगी, 50% बेटियाँ वाहक
- डाउन सिंड्रोम = ट्राइसोमी 21 → 47 गुणसूत्र
हल किए गए उदाहरण
1. माता-पिता दोनों सिस्टिक फाइब्रोसिस के वाहक (Ff) हैं। बच्चे को रोग होने की संभावना?
पनेट वर्ग: FF, Ff, Ff, ff। सिर्फ़ ff रोगी: 4 में 1 = 25%। 4 में 2 (50%) माता-पिता जैसे वाहक।
2. हंटिंगटन रोग वाला पुरुष (Hh) और hh महिला। कितने बच्चों को रोग हो सकता है?
पिता H या h देता है, माँ हमेशा h। बच्चे: Hh, Hh, hh, hh। एलील प्रभावी है, इसलिए Hh रोगी: 2/4 = 50%।
3. हीमोफीलिया की वाहक महिला (XᴴXʰ) और हीमोफीलिया वाला पुरुष (XʰY)। क्या बेटी को हीमोफीलिया हो सकता है?
बेटियों को पिता से Xʰ और माँ से Xᴴ या Xʰ: XᴴXʰ (वाहक) या XʰXʰ (रोगी)। हाँ, 50% बेटियाँ रोगी हो सकती हैं। बेटे: XᴴY या XʰY, 50% रोगी।
4. कैरियोटाइप में 47 गुणसूत्र और 21वें की तीन प्रतियाँ हैं। विकार और कारण बताओ।
डाउन सिंड्रोम (ट्राइसोमी 21)। कारण असंयोजन: अर्धसूत्री विभाजन में 21वाँ जोड़ा अलग नहीं हुआ, इसलिए एक युग्मक में दो प्रतियाँ चली गईं।
आम गलतियाँ
- वाहक को रोगी समझना। वाहक (Aa) स्वस्थ होता है; अप्रभावी रोग सिर्फ़ aa में दिखता है।
- 25% का मतलब यह मानना कि हर चार में ठीक एक बच्चा रोगी होगा। हर बच्चे की अपनी 4 में 1 संभावना है; परिवार में शून्य या कई रोगी हो सकते हैं।
- यह मानना कि पिता X-लिंक्ड रोग बेटे को देता है। पिता बेटे को Y देता है, X नहीं।
- जीन विकार और गुणसूत्र विकार को मिलाना। डाउन सिंड्रोम ख़राब जीन नहीं, पूरा अतिरिक्त गुणसूत्र है।