आवास, निकेत और पर्यावरणीय कारक
आवास वह जगह है जहाँ जीव रहता है: तालाब, जंगल, मिट्टी। इसे उसका पता समझो।
पारिस्थितिक निकेत उस जगह में जीव की भूमिका है: क्या खाता है, उसे कौन खाता है, कहाँ और कब सक्रिय है, उसे कैसी परिस्थितियाँ चाहिए। इसे उसकी नौकरी समझो। एक आवास में कई जातियाँ रहती हैं, पर हर एक का अपना निकेत होता है।
जीवों पर असर डालने वाली चीज़ें पर्यावरणीय कारक कहलाती हैं:
- अजैविक (निर्जीव): तापमान, प्रकाश, पानी, नमी, हवा, मिट्टी का प्रकार, pH, लवणता, ऑक्सीजन।
- जैविक (सजीव): भोजन देने वाले जीव, शिकारी, परजीवी, प्रतिस्पर्धी, परागण करने वाले साथी, और मनुष्य।
निकेत के आयाम
निकेत के कई आयाम (भुजाएँ) होते हैं। मुख्य तीन हैं:
- पोषण (trophic): वह क्या खाता है और उसे कौन खाता है। जैसे बगुला मछली और मेंढक खाता है।
- स्थानिक (spatial): वह कहाँ रहता और खाता है, जैसे पेड़ की चोटी, ज़मीन, गहरा पानी या उथला कीचड़।
- कालिक (temporal): वह कब सक्रिय है: दिन या रात, किस मौसम में।
पारिस्थितिकीविद निकेत को इन सब कारकों से बने स्थान में एक डिब्बे (या बहुभुजी आकार) की तरह सोचते हैं। उल्लू और बाज़ दोनों चूहे खाते हैं, पर उल्लू रात में और बाज़ दिन में शिकार करता है: उनका कालिक आयाम अलग है।
पारिस्थितिक सहनशीलता
हर कारक के लिए जाति की एक सहनशीलता सीमा होती है: वह न्यूनतम और अधिकतम मान जिनके बीच वह जी सकती है।
- इष्टतम क्षेत्र: सबसे अच्छे मान; बढ़त और प्रजनन सबसे ज़्यादा।
- तनाव क्षेत्र: जी सकती है, पर बढ़त या प्रजनन कम।
- सीमाएँ: न्यूनतम या अधिकतम से आगे वह मर जाती है।
चौड़ी सीमा वाली जाति (चूहे, कॉकरोच) कई जगह रह सकती है। संकरी सीमा वाली जाति (जैसे प्रवाल, जिन्हें लगभग 20 से 29 °C का गर्म, साफ़, खारा पानी चाहिए) बहुत संवेदनशील होती है। जो कारक सबसे कम उपलब्ध हो, वही अक्सर तय करता है कि जाति कहाँ रहेगी: इसे सीमाकारी कारक कहते हैं।
संभावित और वास्तविक निकेत, अतिव्यापन और प्रतिस्पर्धी अपवर्जन
संभावित निकेत (जिसे मौलिक निकेत भी कहते हैं) वे सब परिस्थितियाँ और संसाधन हैं जो जाति अकेली रहकर इस्तेमाल कर सकती है। वास्तविक निकेत वह छोटा हिस्सा है जो वह प्रतिस्पर्धियों, शिकारियों और परजीवियों के रहते सच में इस्तेमाल करती है।
एक मशहूर उदाहरण: चट्टानी तट पर एक बार्नेकल जाति चट्टान के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों में रह सकती है, पर एक ताक़तवर बार्नेकल उसे निचले हिस्से से हटा देती है। इसलिए उसका वास्तविक निकेत सिर्फ़ ऊपरी हिस्सा है।
निकेत अतिव्यापन तब होता है जब दो जातियों को कुछ एक जैसे संसाधन चाहिए। जितना ज़्यादा अतिव्यापन, उतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा।
प्रतिस्पर्धी अपवर्जन का सिद्धांत: बिल्कुल एक जैसे निकेत वाली दो जातियाँ एक जगह लंबे समय तक साथ नहीं रह सकतीं। बेहतर प्रतिस्पर्धी जीतती है; दूसरी वहाँ से ख़त्म होती है, चली जाती है या अपना निकेत बदल लेती है।
आंशिक अतिव्यापन वाली जातियाँ अक्सर संसाधन बाँट लेती हैं (संसाधन विभाजन)। जैसे कई वार्बलर चिड़ियाँ एक ही पेड़ पर, पर अलग ऊँचाई और डालियों के अलग हिस्सों पर खाती हैं।
जैव-सूचक और मैदान में समष्टि का अध्ययन
जैव-सूचक वह जाति है जिसका होना, न होना या स्वास्थ्य पर्यावरण के बारे में बताता है। संकरी सहनशीलता वाली जातियाँ सबसे अच्छी सूचक हैं।
- लाइकेन: हवा में सल्फ़र डाइऑक्साइड ज़्यादा हो तो कई ग़ायब हो जाते हैं।
- मेफ़्लाई और स्टोनफ़्लाई के लार्वा: सिर्फ़ साफ़, ऑक्सीजन-भरी धाराओं में रहते हैं।
- ब्लडवर्म और स्लज वर्म: कम ऑक्सीजन वाले गंदे पानी में भी जी लेते हैं।
समष्टि (population) एक क्षेत्र में एक जाति के सभी सदस्य हैं। इसकी मुख्य विशेषताएँ: आकार, घनत्व (प्रति m² या हेक्टेयर संख्या), वितरण (गुच्छों में, समान या बेतरतीब), आयु संरचना, जन्म और मृत्यु दर।
मैदानी तरीक़े
- क्वाड्रैट: एक चौकोर फ़्रेम (जैसे 1 m × 1 m)। कई बेतरतीब क्वाड्रैट में पौधे गिनो, फिर पूरे क्षेत्र के लिए बढ़ाओ।
- ट्रांसेक्ट: बदलते क्षेत्र (तट, जंगल का किनारा) के आर-पार एक रेखा; बराबर दूरी पर नमूने लेकर देखो कि जातियाँ कैसे बदलती हैं।
- चलने वाले जानवरों के लिए पकड़ो–निशान लगाओ–फिर पकड़ो: समष्टि ≈ (पहली पकड़ × दूसरी पकड़) ÷ दूसरी पकड़ में निशान वाले।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समष्टि घनत्व = जीवों की संख्या ÷ क्षेत्रफल
- अनुमानित समष्टि (क्वाड्रैट) = प्रति क्वाड्रैट औसत × (कुल क्षेत्रफल ÷ क्वाड्रैट क्षेत्रफल)
- पकड़-पुनर्पकड़ अनुमान N = (M × C) ÷ R
- मुख्य शब्द: आवास, निकेत, सहनशीलता सीमा, इष्टतम, सीमाकारी कारक, संभावित (मौलिक) निकेत, वास्तविक निकेत, प्रतिस्पर्धी अपवर्जन, संसाधन विभाजन, जैव-सूचक
हल किए गए उदाहरण
1. तालाब में मेंढक, कमल और ड्रैगनफ़्लाई हैं। 'तालाब' निकेत है या आवास? मेंढक का निकेत बताओ।
चरण 1: तालाब आवास है (जहाँ वे रहते हैं)। चरण 2: मेंढक का निकेत: कीड़े और केंचुए खाता है; बगुले और साँप उसे खाते हैं; ज़्यादातर शाम और रात में सक्रिय; प्रजनन के लिए पानी चाहिए; टैडपोल शैवाल खाते हैं।
2. एक मछली 4 °C से 30 °C के बीच जीती है और 15–20 °C पर सबसे अच्छी बढ़ती है। गर्मी में झील 32 °C हो जाती है। क्या होगा?
चरण 1: 32 °C उसकी अधिकतम सीमा 30 °C से ऊपर है। चरण 2: वह वहाँ गर्मी में नहीं जी सकती; उसे ठंडे, गहरे पानी में जाना होगा वरना मर जाएगी। तापमान सीमाकारी कारक है।
3. 200 m² के खेत में पाँच 1 m² क्वाड्रैट में 3, 5, 2, 6 और 4 डेज़ी मिलीं। डेज़ी की समष्टि का अनुमान लगाओ।
चरण 1: औसत = (3 + 5 + 2 + 6 + 4) ÷ 5 = 4 प्रति m²। चरण 2: समष्टि ≈ 4 × 200 = 800 डेज़ी।
4. 40 भृंग पकड़कर निशान लगाया। बाद में 50 पकड़े, जिनमें 10 पर निशान था। समष्टि का अनुमान?
चरण 1: N = (M × C) ÷ R। चरण 2: = (40 × 50) ÷ 10 = 200 भृंग।
5. एक द्वीप पर बीज खाने वाली दो मिलती-जुलती चिड़ियाँ हैं। समय के साथ एक जाति की चोंच मोटी हो जाती है और वह बड़े बीज खाने लगती है। समझाओ।
चरण 1: उनके निकेत बहुत मिलते थे, इसलिए प्रतिस्पर्धा कड़ी थी। चरण 2: अलग आकार के बीज खाने से अतिव्यापन घटता है (संसाधन विभाजन)। चरण 3: इससे दोनों साथ रह पाती हैं, एक दूसरी को बाहर नहीं करती।
आम गलतियाँ
- 'निकेत' और 'आवास' को एक ही मानना। आवास = कहाँ; निकेत = वहाँ कैसे जीता है।
- यह सोचना कि वास्तविक निकेत संभावित निकेत से बड़ा होता है। वह हमेशा बराबर या छोटा होता है।
- यह सोचना कि अपवर्जन में हारने वाली जाति हमेशा मर जाती है। वह कहीं और जा सकती है या अपना निकेत बदल सकती है।
- यह सोचना कि अजैविक का मतलब 'कम ज़रूरी' है। इसका मतलब सिर्फ़ निर्जीव है; तापमान या पानी अक्सर जीवन को सबसे ज़्यादा सीमित करते हैं।