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शरीर द्रव तथा परिसंचरण

रक्त और लसीका शरीर के परिवहन द्रव हैं। रक्त = प्लाज़्मा (लगभग 55%) + संगठित पदार्थ: RBC, WBC और प्लेटलेट्स। रक्त समूह (ABO, Rh) RBC पर लगे प्रतिजनों से तय होते हैं। फाइब्रिनोजन से फाइब्रिन धागे बनकर थक्का बनाते हैं। मानव हृदय में चार कक्ष हैं और रक्त दो परिपथों में जाता है: फेफड़ों तक और शरीर तक (दोहरा परिसंचरण)। SA पर्व हर धड़कन शुरू करता है; एक धड़कन लगभग 0.8 s का हृद चक्र है, जिसे ECG में P, QRS, T तरंगों में देखा जाता है। हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर ≈ 5 L/मिनट।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. रक्त को नली में घुमाएँ। ऊपर पीला प्लाज़्मा, नीचे लाल कणिकाएँ, बीच में एक पतली सफ़ेद परत।
  2. चार लाल कणिकाएँ देखें। हर एक पर अलग झंडे हैं, जिन्हें प्रतिजन कहते हैं। यही झंडे रक्त समूह तय करते हैं: A, B, AB या O।
  3. एक रक्त वाहिका कट गई। देखिए, पीले फाइब्रिन धागे कट पर जाल बनाते हैं। वे कोशिकाएँ फँसाकर थक्का बनाते हैं।
  4. हृदय से मिलिए: चार कमरे। दायाँ भाग रक्त फेफड़ों को भेजता है। बायाँ भाग पूरे शरीर को। यही दोहरा परिसंचरण है।
  5. एक धड़कन एक हृद चक्र है। हरी ECG रेखा इसे बनाती है: P तरंग, फिर ऊँची QRS चोटी, फिर T तरंग।
  6. खुला खेल: हृदय दर और प्रवाह आयतन बदलें। देखें हृद निकास कैसे बदलता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

प्लाज़्मा लाल क्यों नहीं, पीला क्यों है?

लाल रंग RBC के हीमोग्लोबिन से है। कोशिकाएँ नीचे बैठ जाएँ तो ऊपर बचा प्लाज़्मा हल्का पीला दिखता है।

A समूह वाले को B रक्त क्यों नहीं दे सकते?

A के प्लाज़्मा में anti-B प्रतिरक्षी हैं। ये दाता की कोशिकाओं के B झंडों से चिपककर उन्हें गुच्छा बना देते हैं।

स्वस्थ वाहिकाओं में रक्त क्यों नहीं जमता?

थक्का तभी शुरू होता है जब चोट से कारक निकलकर थ्रोम्बोकाइनेज़ बनाते हैं। स्वस्थ रक्त में हिपैरिन भी जमने से रोकता है।

रक्त को हृदय से दो बार क्यों गुज़रना पड़ता है?

फेफड़ों के बाद दाब कम हो जाता है। हृदय में लौटकर बायाँ निलय इसे पूरे शरीर तक ज़ोर से भेजता है, और शुद्ध-अशुद्ध रक्त अलग रहते हैं।

क्या ECG रक्त प्रवाह नापता है?

नहीं। यह हृदय के विद्युत संकेत दर्ज करता है। P अलिंद, QRS निलय संकुचन, T निलय शिथिलन से जुड़ा है।

व्यायाम में हृद निकास कैसे बढ़ता है?

हृदय दर और प्रवाह आयतन दोनों बढ़ते हैं। दोनों स्लाइडर बढ़ाकर देखें: निकास 5 से 20 L/मिनट से ऊपर जा सकता है।

रक्त: प्लाज़्मा और संगठित पदार्थ

रक्त एक विशेष संयोजी ऊतक है: तरल आधार (प्लाज़्मा) में तैरती कोशिकाएँ (संगठित पदार्थ)।

प्लाज़्मा (लगभग 55%)

संगठित पदार्थ (लगभग 45%)

रक्त समूह: ABO और Rh

RBC की सतह पर प्रतिजन होते हैं। प्लाज़्मा में वे प्रतिरक्षी हो सकते हैं जो उन प्रतिजनों पर हमला करें जो ख़ुद में नहीं हैं।

समूहRBC पर प्रतिजनप्लाज़्मा में प्रतिरक्षीकिससे ले सकता है
AAanti-BA, O
BBanti-AB, O
ABA और Bकोई नहींA, B, AB, O
Oकोई नहींanti-A और anti-BO

O सर्वदाता, AB सर्वग्राही है।

Rh समूह

लगभग 80% लोगों पर Rh प्रतिजन होता है (Rh+)। Rh− व्यक्ति Rh+ रक्त के संपर्क के बाद ही anti-Rh प्रतिरक्षी बनाता है। Rh− माँ और Rh+ शिशु में पहली गर्भावस्था आमतौर पर सुरक्षित, पर प्रसव में माँ प्रतिरक्षी बना सकती है। अगली Rh+ गर्भावस्था में ये अपरा पार कर शिशु की RBC नष्ट करते हैं: गर्भ रक्ताणु कोरकता (एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस)। पहले प्रसव के तुरंत बाद माँ को anti-Rh इंजेक्शन देकर इससे बचाते हैं।

रक्त का स्कंदन (थक्का बनना)

  1. चोट से प्लेटलेट्स और क्षतिग्रस्त ऊतक कारक छोड़ते हैं।
  2. इनसे एंज़ाइम समूह थ्रोम्बोकाइनेज़ बनता है।
  3. थ्रोम्बोकाइनेज़ निष्क्रिय प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रोम्बिन बनाता है।
  4. थ्रोम्बिन घुलनशील फाइब्रिनोजन को अघुलनशील फाइब्रिन धागों में बदलता है।
  5. फाइब्रिन जाल कोशिकाएँ फँसाकर थक्का बनाता है।

कई चरणों में कैल्शियम आयन ज़रूरी हैं। छिले घुटने पर दिखने वाला गहरा लाल ढेला यही जाल है।

लसीका (ऊतक द्रव)

केशिकाओं से गुज़रते समय कुछ जल और छोटे अणु कोशिकाओं के बीच की जगह में रिस जाते हैं; बड़े प्रोटीन और ज़्यादातर कोशिकाएँ रक्त में रहती हैं। यह ऊतक द्रव है, जिसमें प्लाज़्मा जैसे ही लवण हैं।

ऊतक द्रव कोशिकाओं को भोजन-गैस देता है और अपशिष्ट लेता है। फिर पतली लसीका वाहिकाएँ इसे इकट्ठा करती हैं; अब इसे लसीका कहते हैं। लसीका बड़ी शिराओं में लौट जाती है।

परिसंचरण पथ और मानव हृदय

परिसंचरण खुला (रक्त वाहिकाओं से निकलकर खुली जगह भरता है, जैसे आर्थ्रोपोडा, मोलस्का) या बंद (रक्त हमेशा वाहिकाओं में, जैसे ऐनेलिडा, कॉर्डेटा) होता है। बंद ज़्यादा सटीक है।

मछली में 2 कक्षीय, उभयचर व ज़्यादातर सरीसृप में 3 कक्षीय (मगरमच्छ में 4), पक्षी व स्तनधारी में 4 कक्षीय हृदय।

मानव हृदय

रक्त वाहिकाएँ

धमनियाँ रक्त हृदय से दूर ले जाती हैं (मोटी दीवार, ज़्यादा दाब)। शिराएँ वापस लाती हैं (पतली दीवार, कपाट)। केशिकाएँ एक कोशिका मोटी, इनमें विनिमय होता है।

हृद चक्र और हृद निकास

अलिंदों और निलयों के एक पूरे संकुचन (प्रकुंचन) और शिथिलन (अनुशिथिलन) को हृद चक्र कहते हैं। 72 धड़कन/मिनट पर यह 60 ÷ 72 ≈ 0.8 s का है।

  1. संयुक्त अनुशिथिलन: चारों कक्ष ढीले; त्रिवलनी-द्विवलनी खुले, रक्त शिराओं से अलिंद होकर निलय में। अर्धचंद्र कपाट बंद।
  2. अलिंद प्रकुंचन: SA पर्व संकेत देता है; अलिंद सिकुड़कर लगभग 30% और रक्त निलयों में डालते हैं।
  3. निलय प्रकुंचन: संकेत AV पर्व → हिस बंडल → पुरकिंजे तंतु। निलय सिकुड़ते, AV कपाट बंद (पहली ध्वनि लब), दाब बढ़ता, अर्धचंद्र कपाट खुलते, रक्त फुप्फुसीय धमनी व महाधमनी में।
  4. निलय अनुशिथिलन: निलय ढीले, अर्धचंद्र कपाट बंद (दूसरी ध्वनि डब)। AV कपाट फिर खुलते, चक्र दोहराता है।

प्रवाह आयतन: हर धड़कन में एक निलय से निकला रक्त, लगभग 70 mL। हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर ≈ 70 × 72 ≈ 5 L प्रति मिनट। खिलाड़ियों में यह बहुत बढ़ सकता है।

विद्युत हृद लेख (ECG)

ECG हृद चक्र में हृदय की विद्युत गतिविधि का ग्राफ़ है। तार कलाइयों, टखने और छाती पर लगते हैं।

तय समय में QRS गिनकर हृदय दर मिलती है। तरंगों के आकार या दूरी में बदलाव से डॉक्टर हृदय रोग पहचानते हैं।

दोहरा परिसंचरण

एक पूरे चक्कर में रक्त हृदय से दो बार गुज़रता है, इसलिए दोहरा परिसंचरण। शुद्ध और अशुद्ध रक्त नहीं मिलते, ऊतकों को ज़्यादा O2 मिलती है।

यकृत निवाहिका तंत्र: यकृत निवाहिका शिरा आंत से रक्त पहले यकृत ले जाती है। हृदय (कोरोनरी) परिसंचरण हृद पेशी को ख़ुद रक्त देता है।

हृदय क्रिया का नियमन

परिसंचरण तंत्र के रोग

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. प्रवाह आयतन = 70 mL, हृदय दर = 72/मिनट। हृद निकास निकालें।

CO = 70 × 72 = 5040 mL/मिनट ≈ 5.04 L/मिनट।

2. हृदय मिनट में 75 बार धड़कता है। एक हृद चक्र कितने समय का है?

समय = 60 ÷ 75 = 0.8 s।

3. एक धावक का हृद निकास 25 L/मिनट है और हृदय दर 180। प्रवाह आयतन निकालें।

SV = CO ÷ HR = 25000 mL ÷ 180 ≈ 139 mL।

4. ECG में 15 सेकंड में 18 QRS दिखे। हृदय दर निकालें।

धड़कन/मिनट = 18 × (60 ÷ 15) = 18 × 4 = 72।

5. शरीर में 5 L रक्त है और हृद निकास 5 L/मिनट। सारा रक्त बाएँ निलय से एक बार गुज़रने में कितना समय?

समय = 5 L ÷ 5 L/मिनट = 1 मिनट।

6. हृदय दर 70 से 120 और प्रवाह आयतन 70 से 100 mL हो गया। हृद निकास कितने गुना बढ़ा?

पहले: 70 × 70 = 4900 mL/मिनट। बाद में: 120 × 100 = 12000 mL/मिनट। अनुपात = 12000 ÷ 4900 ≈ 2.4 गुना।

7. B समूह वाले व्यक्ति को रक्त चाहिए। वह किन समूहों से ले सकता है?

B में anti-A प्रतिरक्षी हैं। इसलिए B और O से ले सकता है; A या AB से नहीं।

8. Rh− माँ के गर्भ में दूसरा Rh+ शिशु है और पहले प्रसव के बाद anti-Rh इंजेक्शन नहीं लगा। क्या हो सकता है?

पहले प्रसव के बाद माँ anti-Rh प्रतिरक्षी बना चुकी हो सकती है। ये अपरा पार कर शिशु की RBC नष्ट कर सकते हैं: एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस (शिशु में गंभीर रक्ताल्पता, पीलिया)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सबसे ज़्यादा संख्या में कौन-सी WBC है?
2. हृदय का पेसमेकर है:
3. QRS सम्मिश्र दिखाता है:
4. फाइब्रिनोजन से फाइब्रिन किसकी क्रिया से बनता है?
5. वयस्क का सामान्य हृद निकास लगभग:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दोहरा परिसंचरण क्या है?

एक चक्कर में रक्त हृदय से दो बार गुज़रता है: फुप्फुसीय परिपथ (हृदय–फेफड़े–हृदय) और दैहिक परिपथ (हृदय–शरीर–हृदय)।

हृद निकास क्या है?

हर निलय द्वारा प्रति मिनट पंप किया रक्त: प्रवाह आयतन × हृदय दर, आराम में लगभग 5 L/मिनट।

रक्त और लसीका में क्या अंतर है?

रक्त लाल है, इसमें RBC, प्लेटलेट्स और बहुत प्रोटीन हैं। लसीका रंगहीन, लिम्फोसाइट वाली, कम प्रोटीन, RBC नहीं; यह ऊतक द्रव को शिराओं में लौटाती है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIIXI. How animals function
रोमानियाClasa a X-aNutrition
रोमानियाClasa a XI-aNutrition functions
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11मानव कार्यिकी
इंग्लैंडYear 123.3 Organisms exchange substances with their environment
इंग्लैंडYear 123.1.1 Applied anatomy and physiology
फ्रांसPremièreHuman biology and pathophysiology
चीन高二Sel.1 Ch.1 Internal environment

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