National Year 12 Physical Education
अध्याय: 3
1. 3.1.1 Applied anatomy and physiology
Cardiovascular system · Respiratory system · Neuromuscular system · Musculoskeletal system and movement analysis · Energy systems
- शरीर द्रव तथा परिसंचरण – रक्त और लसीका शरीर के परिवहन द्रव हैं। रक्त = प्लाज़्मा (लगभग 55%) + संगठित पदार्थ: RBC, WBC और प्लेटलेट्स। रक्त समूह (ABO, Rh) RBC पर लगे प्रतिजनों से तय होते हैं। फाइब्रिनोजन से फाइब्रिन धागे बनकर थक्का बनाते हैं। मानव हृदय में चार कक्ष हैं और रक्त दो परिपथों में जाता है: फेफड़ों तक और शरीर तक (दोहरा परिसंचरण)। SA पर्व हर धड़कन शुरू करता है; एक धड़कन लगभग 0.8 s का हृद चक्र है, जिसे ECG में P, QRS, T तरंगों में देखा जाता है। हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर ≈ 5 L/मिनट।
- श्वसन और गैसों का विनिमय – साँस लेने से हवा फेफड़ों में आती-जाती है। हवा का रास्ता: नाक → श्वासनली → श्वसनी → श्वसनिकाएँ → कूपिकाएँ। जब डायाफ्राम और बाहरी पसली-पेशियाँ सिकुड़ती हैं तो छाती बड़ी होती है, अंदर का दाब घटता है और हवा अंदर आती है। कूपिकाओं में O2 रक्त में जाती है और CO2 बाहर आती है, हमेशा ज़्यादा आंशिक दाब से कम की ओर। रक्त O2 ज़्यादातर हीमोग्लोबिन पर और CO2 ज़्यादातर बाइकार्बोनेट बनाकर ले जाता है। मस्तिष्क का एक केंद्र साँस की लय तय करता है। ज्वारीय आयतन, जैव क्षमता जैसे आयतन जोड़कर निकाले जाते हैं।
- तंत्रिका-पेशी तंत्र (Neuromuscular System) – तंत्रिका-पेशी तंत्र यानी तंत्रिकाएँ और पेशियाँ एक टीम की तरह काम करती हैं। मोटर यूनिट एक मोटर तंत्रिका कोशिका और उसके सारे पेशी तंतुओं से बनती है। मोटर यूनिट सब-या-कुछ-नहीं नियम मानती है: पूरा खिंचाव या कुछ नहीं। ज़्यादा बल के लिए दिमाग़ ज़्यादा यूनिट चालू करता है (रिक्रूटमेंट) और संकेत तेज़ भेजता है (वेव समेशन, टिटेनस तक)। पेशी में धीमे टाइप I (सहनशक्ति) और तेज़ टाइप IIa, IIx (ताक़त) तंतु होते हैं। PNF स्ट्रेचिंग पेशी के अपने सेंसर से उसे ढीला करके ज़्यादा खिंचाव देती है।
- कंकाल तंत्र – कंकाल शरीर का ढाँचा है; बड़े व्यक्ति में 206 हड्डियाँ होती हैं। इसके पाँच मुख्य कार्य हैं: सहारा और आकार, सुरक्षा, गति (मांसपेशियों के साथ), लाल अस्थि-मज्जा में रक्त कोशिकाएँ बनाना और कैल्शियम जैसे खनिज जमा करना। हड्डियाँ जोड़ों (संधि) पर मिलती हैं: कब्ज़ा जोड़ (कोहनी, घुटना) एक दिशा में मुड़ता है, कंदुक-खल्लिका जोड़ (कंधा, कूल्हा) हर दिशा में घूमता है। स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से, कंडरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, उपास्थि सिरों पर गद्दी है। मांसपेशियाँ सिर्फ़ खींचती हैं, इसलिए जोड़ी में काम करती हैं, जैसे बाइसेप्स और ट्राइसेप्स।
- ऊर्जा तंत्र: व्यायाम में मांसपेशियों को ऊर्जा कैसे मिलती है – मांसपेशी सीधे सिर्फ़ एक ईंधन इस्तेमाल करती है: ATP। ATP का भंडार 2–3 सेकंड ही चलता है, इसलिए शरीर उसे तीन तरीकों से दोबारा बनाता है। ATP-PC तंत्र क्रिएटिन फ़ॉस्फ़ेट से बहुत तेज़ ATP बनाता है, लगभग 10 सेकंड। अवायवीय ग्लाइकोलिसिस ग्लूकोज़ को बिना ऑक्सीजन तोड़ता है: तेज़, लगभग 10 सेकंड से 2 मिनट, और लैक्टेट बनता है। वायवीय (एरोबिक) तंत्र ऑक्सीजन से ग्लूकोज़ और वसा जलाता है: धीमा पर घंटों चलता है, सिर्फ़ CO₂ और पानी बनते हैं। तीनों साथ काम करते हैं; तीव्रता और समय तय करते हैं कौन आगे रहेगा। व्यायाम के बाद EPOC (अतिरिक्त ऑक्सीजन) भंडार भरती है और लैक्टेट हटाती है। ऊँचाई और गर्मी एरोबिक तंत्र पर बोझ बढ़ाते हैं।
2. 3.1.2 Skill acquisition
Skill continuums and transfer · Structure of practice · Theories of learning · Guidance and feedback · Memory models and information processing
- कौशल अर्जन: हम गति कौशल कैसे सीखते हैं – कौशल एक सीखी हुई क्रिया है जो तय लक्ष्य के लिए कम से कम समय और मेहनत में की जाती है। कौशल को सातत्य पर बाँटते हैं (खुला–बंद, स्थूल–सूक्ष्म, असतत–क्रमिक–सतत, स्व-गति–बाह्य-गति, सरल–जटिल, निम्न–उच्च संगठन)। हम सूचना एक चक्र में संसाधित करते हैं: इनपुट, निर्णय (स्मृति से), आउटपुट और फ़ीडबैक; ज़्यादा विकल्प प्रतिक्रिया धीमी करते हैं (हिक का नियम)। सीखने वाले संज्ञानात्मक, साहचर्य और स्वायत्त चरणों से गुज़रते हैं। कोच कौशल और खिलाड़ी के हिसाब से अभ्यास, मार्गदर्शन और फ़ीडबैक चुनते हैं, और पहले सीखे कौशल से स्थानांतरण का उपयोग करते हैं। सीखने के सिद्धांत बताते हैं कि यह क्यों काम करता है।
3. 3.1.3 Sport and society
Emergence and globalisation of sport · Sport and society: sociological theory and equal opportunities
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।