China 高二 Biology
अध्याय: 9
1. Sel.1 Ch.1 Internal environment
Body fluids and internal environment · Homeostasis (glucose, temperature, pH, osmolarity)
- शरीर द्रव तथा परिसंचरण – रक्त और लसीका शरीर के परिवहन द्रव हैं। रक्त = प्लाज़्मा (लगभग 55%) + संगठित पदार्थ: RBC, WBC और प्लेटलेट्स। रक्त समूह (ABO, Rh) RBC पर लगे प्रतिजनों से तय होते हैं। फाइब्रिनोजन से फाइब्रिन धागे बनकर थक्का बनाते हैं। मानव हृदय में चार कक्ष हैं और रक्त दो परिपथों में जाता है: फेफड़ों तक और शरीर तक (दोहरा परिसंचरण)। SA पर्व हर धड़कन शुरू करता है; एक धड़कन लगभग 0.8 s का हृद चक्र है, जिसे ECG में P, QRS, T तरंगों में देखा जाता है। हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर ≈ 5 L/मिनट।
- समस्थापन (Homeostasis) – समस्थापन वह तरीका है जिससे शरीर अपना आंतरिक वातावरण (रक्त और ऊतक द्रव) स्थिर रखता है, चाहे बाहर का मौसम बदले। यह शरीर का ताप (लगभग 37 °C), रक्त ग्लूकोज़ (लगभग 4–6 mmol/L), पानी-लवण और रक्त pH (लगभग 7.4) नियंत्रित करता है। ज़्यादातर यह ऋणात्मक पुनर्भरण से होता है: ग्राही बदलाव पहचानता है, नियंत्रण केंद्र तय करता है, और प्रभावक स्तर को निर्धारित बिंदु पर लौटाता है।
2. Sel.1 Ch.2 Nervous regulation
Structure of the nervous system; reflex · Nerve impulse; synapses · Hierarchical control; higher brain functions
- तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय – समन्वय यानी अंगों का मिलकर काम करना। तंत्रिका तंत्र यह तेज़ी से तंत्रिका कोशिकाओं से करता है। तंत्रिका कोशिका में कोशिका काय, द्रुमिकाएँ और तंत्रिकाक्ष हैं; कई तंत्रिकाक्षों पर रैनवियर पर्व वाला माइलिन आच्छद है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क, मेरुरज्जु) सूचना संसाधित करता है; परिधीय तंत्र (तंत्रिकाएँ) उसे ढोता है। PNS के दो भाग: कायिक (कंकाली पेशियाँ) और स्वायत्त (अनुकंपी, परानुकंपी), जो अंदर के अंगों यानी अंतरंग तंत्र को चलाता है। आराम में तंत्रिकाक्ष ध्रुवित है: अंदर −, बाहर +, लगभग −70 mV। उद्दीपन से Na+ अंदर आकर क्रिया विभव बनाता है जो आगे दौड़ता है। सिनैप्स पर तंत्रिका संचारी संकेत अगली कोशिका तक पहुँचाते हैं।
3. Sel.1 Ch.3 Humoral regulation
Hormones and endocrine system · Feedback and hierarchical regulation · Nervous–humoral cooperation (temperature, water balance)
- रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण – हॉर्मोन रासायनिक संदेशवाहक हैं जो नलिकाविहीन (अंतःस्रावी) ग्रंथियाँ बहुत कम मात्रा में बनाती हैं। ये रक्त में चलकर सही ग्राही वाली लक्ष्य कोशिकाओं पर काम करते हैं। हाइपोथैलेमस पीयूष को, और पीयूष कई ग्रंथियों को नियंत्रित करता है; ऋणात्मक पुनर्निवेशन स्तर स्थिर रखता है। मुख्य ग्रंथियाँ: पीनियल, पीयूष, थायरॉयड, पैराथायरॉयड, थाइमस, एड्रीनल, अग्न्याशय (द्वीप), वृषण, अंडाशय। हृदय, वृक्क, आहारनाल भी हॉर्मोन बनाते हैं। प्रोटीन हॉर्मोन झिल्ली ग्राही और cAMP जैसे द्वितीयक संदेशवाहक से; स्टेरॉयड व थायरॉयड हॉर्मोन कोशिका में जाकर जीन बदलते हैं। बहुत कम (अल्पस्राव) या बहुत ज़्यादा (अतिस्राव) हॉर्मोन से बौनापन, महाकायता, गलगंड, मधुमेह, एडिसन, कुशिंग जैसे रोग होते हैं।
4. Sel.1 Ch.4 Immune regulation
Immune system · Specific immunity (humoral, cellular) · Immune disorders (allergy, autoimmunity, HIV) · Applications (vaccines, transplants)
- मानव स्वास्थ्य तथा रोग – स्वास्थ्य का मतलब है शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों ठीक हों। रोग कई बार कीटाणुओं (रोगजनक) से होते हैं: जीवाणु, वायरस, प्रोटोज़ोआ, कृमि और कवक। शरीर दो तरह की प्रतिरक्षा से लड़ता है: सहज (जन्म से) और उपार्जित (सीखी हुई, याद रखने वाली)। टीके इसी याददाश्त का उपयोग करते हैं। HIV सहायक T कोशिकाओं को नष्ट करके एड्स करता है। कैंसर में कोशिकाएँ बिना रुके बँटती हैं। नशा और शराब किशोरों के शरीर और मन को नुकसान पहुँचाते हैं।
5. Sel.1 Ch.5 Plant regulation
Auxin · Other plant hormones · Plant growth regulators · Environmental factors (light, gravity, temperature)
- पादप वृद्धि एवं परिवर्धन – वृद्धि आकार में स्थायी बढ़त है। बीज पानी, ऑक्सीजन और सही ताप पाकर अंकुरित होता है। जड़ और तने की नोक पर कोशिकाएँ बँटती हैं, फिर लंबी होती हैं, फिर परिपक्व होती हैं। वृद्धि अंकगणितीय (हर दिन उतनी ही) या ज्यामितीय (जितना है उसका हिस्सा) हो सकती है, जो S-वक्र बनाती है। कोशिकाएँ ख़ास बनती हैं (विभेदन), फिर बँटने लग सकती हैं (निर्विभेदन) और फिर ख़ास बनती हैं (पुनर्विभेदन)। पाँच हार्मोन, ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एथिलीन और ABA, यह सब नियंत्रित करते हैं।
6. Sel.2 Ch.1 Populations
Population characteristics; density surveys · Population growth models (J, S) · Factors affecting populations
- जीव और समष्टियाँ: वृद्धि और पारस्परिक क्रिया – समष्टि (population) यानी एक ही जाति के वे सब जीव जो एक समय पर एक जगह रहते हैं। समष्टि के ऐसे गुण होते हैं जो अकेले जीव में नहीं होते: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। जन्म और आप्रवासन से N बढ़ता है, मृत्यु और उत्प्रवासन से घटता है। भोजन असीमित हो तो तेज़ वृद्धि (J-वक्र, dN/dt = rN); सीमित हो तो वृद्धि धीमी होकर वहन क्षमता K पर रुकती है (S-वक्र, dN/dt = rN(1 − N/K))। जातियाँ एक-दूसरे पर असर डालती हैं: सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (−/−), परभक्षण और परजीविता (+/−), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (−/0)।
7. Sel.2 Ch.2 Communities
Community structure · Main community types · Succession
- जीव और समष्टियाँ: वृद्धि और पारस्परिक क्रिया – समष्टि (population) यानी एक ही जाति के वे सब जीव जो एक समय पर एक जगह रहते हैं। समष्टि के ऐसे गुण होते हैं जो अकेले जीव में नहीं होते: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। जन्म और आप्रवासन से N बढ़ता है, मृत्यु और उत्प्रवासन से घटता है। भोजन असीमित हो तो तेज़ वृद्धि (J-वक्र, dN/dt = rN); सीमित हो तो वृद्धि धीमी होकर वहन क्षमता K पर रुकती है (S-वक्र, dN/dt = rN(1 − N/K))। जातियाँ एक-दूसरे पर असर डालती हैं: सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (−/−), परभक्षण और परजीविता (+/−), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (−/0)।
- समुदाय के प्रकार: मरुस्थल, घास का मैदान और वन – समुदाय (community) एक जगह साथ रहने वाले अलग-अलग जातियों के सारे जीवों (पौधे, जानवर, कवक, सूक्ष्मजीव) का समूह है। समुदाय का प्रकार मुख्य रूप से जलवायु, खासकर पानी पर निर्भर है। सूखे स्थान पर मरुस्थल, मध्यम नमी में घास का मैदान और ज़्यादा बारिश में वन समुदाय बनता है।
- पारितंत्र गहराई से: बायोम, पोषक चक्र और गड़बड़ी – बायोम बड़े क्षेत्र हैं जिनकी जलवायु और जीवन मिलते-जुलते हैं। ज़मीन पर तापमान और वर्षा बायोम तय करते हैं; पानी में खारापन, गहराई, रोशनी और बहाव क्षेत्र तय करते हैं। पदार्थ पारितंत्र में घूमता है: नाइट्रोजन स्थिरीकरण, नाइट्रीकरण, स्वांगीकरण, अमोनीकरण और विनाइट्रीकरण से हवा, मिट्टी, जीवों के बीच घूमकर लौटती है; फ़ॉस्फ़ोरस चट्टान, मिट्टी, पानी, जीव और तलछट के बीच धीरे घूमता है, बिना गैस चरण के। अपघटक ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) या बिना (अवायवीय) पदार्थ लौटाते हैं। उर्वरक बहाव, आवास-नाश, आक्रामक प्रजातियाँ और जलवायु परिवर्तन इन तंत्रों को बिगाड़ते हैं; पारितंत्र प्रतिरोध और लचीलेपन से जवाब देते हैं।
8. Sel.2 Ch.3 Ecosystems
Structure · Energy flow · Matter cycling; biomagnification · Information transfer · Stability
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
- पारितंत्र में सूचना संचरण – पारितंत्र के जीव एक-दूसरे को लगातार संदेश भेजते हैं। संदेश तीन तरह के होते हैं। भौतिक सूचना में ध्वनि, प्रकाश और रंग काम आते हैं। रासायनिक सूचना में गंध और फेरोमोन जैसे पदार्थ काम आते हैं। व्यवहार सूचना में नृत्य और हाव-भाव जैसी क्रियाएँ आती हैं। इनसे जीव भोजन और साथी ढूँढते हैं, खतरे की चेतावनी देते हैं और आबादी संतुलित रहती है। ऊर्जा के उलट, सूचना दोनों दिशाओं में जा सकती है।
- वायुमंडलीय स्थिरता और रुद्धोष्म प्रक्रियाएँ – जब हवा का एक पार्सल ऊपर उठता है, आसपास का दाब घटता है, तो वह फैलता है और बिना ऊष्मा लिए या दिए ठंडा होता है: रुद्धोष्म (adiabatic) शीतलन। सूखी (असंतृप्त) हवा हर km पर 10 °C ठंडी होती है (शुष्क रुद्धोष्म ह्रास दर)। ओसांक पर पहुँचकर वाष्प संघनित होकर बादल बनाती है और गुप्त ऊष्मा छोड़ती है, इसलिए अब यह सिर्फ़ लगभग 4 से 7 °C प्रति km ठंडी होती है (आर्द्र/संतृप्त रुद्धोष्म ह्रास दर, लगभग 6)। आसपास की हवा की अपनी पर्यावरणीय ह्रास दर होती है (औसत 6.5 °C प्रति km)। उठता पार्सल आसपास से ठंडा हो जाए तो भारी होकर रुक जाता है: स्थिर हवा, चपटे बादल, कोहरा, स्मॉग। गर्म रहे तो उठता रहता है: अस्थिर हवा, ऊँचे कपासी बादल और आँधी-तूफ़ान। दोनों दरों के बीच हवा सशर्त अस्थिर होती है। प्रतिलोमन (ऊपर हवा गर्म) बहुत स्थिर होता है।
9. Sel.2 Ch.4 Humans and environment
Human impact; ecological footprint · Biodiversity and its protection · Ecological engineering
- पर्यावरणीय समस्याएँ: कारण, प्रभाव और समाधान – पर्यावरणीय समस्याएँ हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों में होने वाले हानिकारक बदलाव हैं, जो ज़्यादातर इंसानों के कामों से होते हैं। मुख्य समस्याएँ हैं: वायु, जल और भूमि प्रदूषण, कचरा, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि और संसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल। ये लोगों की संख्या और हर व्यक्ति की खपत (पारिस्थितिक पदचिह्न) के साथ बढ़ती हैं। साफ़ ऊर्जा, बचत, रीसाइक्लिंग, गंदे पानी की सफ़ाई, जंगलों की रक्षा और अच्छे कानूनों से हम इन्हें घटा सकते हैं।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- पारिस्थितिक अभियांत्रिकी – पारिस्थितिक अभियांत्रिकी का मतलब है इंसानी गतिविधियों को ऐसे बनाना कि वे प्रकृति के पारितंत्रों के साथ मिलकर चलें, उनके खिलाफ़ नहीं। इसके मुख्य सिद्धांत हैं: प्रकृति की खुद को साफ़ और संतुलित करने की ताकत का उपयोग, कचरे का पुनर्चक्रण ताकि कुछ बेकार न जाए, कई तरह के जीवों को साथ रखना, और इंसान की ज़रूरतों व पारितंत्र की सेहत में संतुलन। उदाहरण हैं शहतूत-बाँध मछली तालाब, गंदा पानी साफ़ करने वाली बनावटी आर्द्रभूमि, अपशिष्ट जल के मछली तालाब और मैंग्रोव का दोबारा रोपण।