समुदाय क्या है?
एक जगह एक ही जाति के जीव समष्टि (population) कहलाते हैं, जैसे मैदान के सारे हिरण। समुदाय (community) में एक जगह की सारी अलग-अलग जातियाँ आती हैं: घास, हिरण, पक्षी, कीड़े, कवक और मिट्टी के सूक्ष्मजीव।
- समष्टि = एक जाति।
- समुदाय = कई जातियाँ साथ (सिर्फ़ जीव)।
- पारितंत्र (ecosystem) = समुदाय + निर्जीव चीज़ें (धूप, पानी, मिट्टी, हवा)।
समुदाय के सदस्य भोजन और आश्रय के लिए एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
समुदाय अलग-अलग क्यों होते हैं?
पौधे हर समुदाय का आधार हैं। जो पौधे उग सकते हैं वही तय करते हैं कि कौन-से जानवर रहेंगे। पौधों को पानी, गर्मी और मिट्टी चाहिए। मरुस्थल, घास के मैदान और वन में सबसे बड़ा अंतर साल भर की बारिश का है। तापमान और मिट्टी भी असर डालते हैं। बहुत ठंडी जगह पर टुंड्रा जैसा अलग समुदाय बनता है।
मरुस्थल समुदाय
मरुस्थल में बारिश बहुत कम होती है, साल में लगभग 25 cm से कम, और धूप तेज़ होती है।
- पौधे दूर-दूर होते हैं। ये मोटे तनों में पानी जमा करते हैं (कैक्टस), पत्तियाँ छोटी या काँटे होते हैं और जड़ें लंबी होती हैं।
- जानवर भी पानी बचाते हैं: छिपकली, साँप, ऊँट, रेगिस्तानी चूहे। कई रात में निकलते हैं जब ठंडक होती है।
- जातियाँ कम होती हैं और खाद्य शृंखलाएँ छोटी।
घास के मैदान का समुदाय
घास के मैदान में मध्यम बारिश होती है, लगभग 25 से 100 cm साल में, और एक सूखा मौसम होता है। घना वन बनने के लिए कम, मरुस्थल के लिए ज़्यादा।
- पौधे ज़्यादातर घास होते हैं, कुछ झाड़ियाँ और इक्का-दुक्का पेड़। घास नीचे से बढ़ती है, इसलिए चरने या आग से नहीं मरती।
- जानवर चरने वाले हैं: हिरण, ज़ेबरा, बाइसन, उनके शिकारी (शेर, भेड़िये) और कीड़े-पक्षी।
- घास की घनी जड़ें मिट्टी को बहुत उपजाऊ बना देती हैं।
वन समुदाय
वन में खूब बारिश होती है, अक्सर साल में 100 cm से ज़्यादा, और पेड़ ही पेड़ होते हैं। उष्णकटिबंधीय वर्षावन में ज़मीन के किसी भी समुदाय से ज़्यादा जातियाँ होती हैं।
- परतें: ऊँचा वितान (canopy) सबसे ज़्यादा धूप पाता है, उसके नीचे झाड़ियाँ, फिर अँधेरा वन तल जहाँ फर्न, कवक और गिरी पत्तियाँ हैं।
- जानवर हर परत में रहते हैं: वितान में बंदर और पक्षी, ज़मीन पर हिरण और बाघ, पत्तियों के ढेर में कीड़े और केंचुए।
- मृत पत्तियाँ अपघटक जल्दी सड़ा देते हैं, इसलिए पोषक तत्व जल्दी लौटते हैं।
तीनों की तुलना
| मरुस्थल | घास का मैदान | वन | |
|---|---|---|---|
| साल की बारिश | बहुत कम | मध्यम | ज़्यादा |
| मुख्य पौधे | कैक्टस, झाड़ियाँ | घास | पेड़ |
| पौधों का ढकाव | बिखरा | घास की चादर | घना, परतों वाला |
| जातियाँ | कम | काफ़ी | सबसे ज़्यादा |
समुदाय बंद डिब्बे नहीं हैं। इनके बीच सवाना और झाड़ी जैसी जगहें होती हैं और लंबे समय में एक समुदाय दूसरे में बदल सकता है। इस धीमे बदलाव को पारिस्थितिक अनुक्रमण (succession) कहते हैं।
करके देखो: तीन जगहें
एक सूखी, एक घास वाली और एक पेड़ों वाली जगह चुनो। हर जगह के तीन पौधे और दो जानवर लिखो। बताओ कौन-सी बनावट उसे वहाँ जीने में मदद करती है, जैसे मोटा तना, दोबारा उगने वाली घास या धूप तक पहुँचने वाला ऊँचा तना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समष्टि = एक जगह में एक जाति
- समुदाय = एक जगह की सारी समष्टियाँ (सिर्फ़ जीव)
- पारितंत्र = समुदाय + निर्जीव चीज़ें
- मरुस्थल: बहुत कम बारिश; घास का मैदान: मध्यम; वन: ज़्यादा (मोटा अंदाज़ा)
- वन की परतें: वितान, मध्य परत, वन तल
हल किए गए उदाहरण
1. एक तालाब में मेंढक, मछली, सरकंडे, शैवाल और घोंघे हैं। यह समष्टि है या समुदाय? क्यों?
समुदाय। इसमें कई अलग जातियाँ साथ रहती हैं। समष्टि सिर्फ़ एक जाति होती, जैसे केवल मेंढक।
2. एक जगह साल में 15 cm बारिश होती है और वहाँ कैक्टस और छिपकलियाँ हैं। यह कौन-सा समुदाय है?
मरुस्थल समुदाय। बहुत कम बारिश और पानी जमा करने वाले पौधे मरुस्थल बताते हैं।
3. हिरण ज़्यादातर घास के मैदान में क्यों रहते हैं, मरुस्थल में क्यों नहीं?
हिरण घास और पौधे खाते हैं। घास के मैदान में बहुत घास है, मरुस्थल में इतने पौधे नहीं कि बहुत चरने वाले पल सकें।
4. वर्षावन में मरुस्थल से ज़्यादा जातियाँ क्यों होती हैं?
वहाँ पानी बहुत है और कई तरह के पौधे परतों में उगते हैं। हर परत अलग जानवरों को भोजन और आश्रय देती है। मरुस्थल में पौधे कम हैं, इसलिए जानवर भी कम।
5. चरागाह में गाय घास को ज़मीन तक चर लेती है और वह फिर उग आती है। यह घास के मैदान के लिए ठीक क्यों है?
घास पत्ती के निचले हिस्से से बढ़ती है जो ज़मीन के पास है, इसलिए चरने वाले उसे आसानी से नहीं मार पाते। इसी से घास चरने या आग के बाद भी बची रहती है।
आम गलतियाँ
- समुदाय और पारितंत्र को एक मान लेना। समुदाय में सिर्फ़ जीव हैं; पारितंत्र में निर्जीव चीज़ें भी हैं।
- समष्टि और समुदाय को एक मान लेना। समष्टि एक जाति है; समुदाय कई जातियों का समूह है।
- हर मरुस्थल को गर्म और रेतीला समझना। मरुस्थल का मतलब बहुत कम बारिश है; कुछ ठंडे और पथरीले भी होते हैं।
- सोचना कि सिर्फ़ बारिश ही मायने रखती है। तापमान और मिट्टी भी असर डालते हैं; इस पाठ में बारिश सबसे बड़ा कारण है।