जैविक लय क्या है?
जैविक लय जीव की वह गतिविधि है जो नियमित चक्र में दोहराई जाती है। ये लय अनुकूलन हैं: ये जीव को सही समय पर सही काम कराती हैं, जैसे भोजन मिलने के समय खाना या तपती दोपहर से बचना।
लय जीव के भीतर की जैविक घड़ी से आती है (मनुष्य में मस्तिष्क का एक छोटा भाग)। घड़ी पूरे अँधेरे में भी चलती है, पर थोड़ी खिसक जाती है। प्रकाश रोज़ इसे ठीक कर देता है, ताकि यह असली दिन के साथ चले।
अनुकूली लय के प्रकार
- दैनिक (सर्कैडियन) लय, लगभग 24 घंटे: सोना-जागना, शरीर का ताप, दिन में खिलते फूल, रात में शिकार करते उल्लू। "सर्कैडियन" का अर्थ है "लगभग एक दिन"।
- ज्वारीय लय, लगभग 12.4 घंटे: केकड़े और सीप जैसे तटीय जीव समुद्र के चढ़ने-उतरने के साथ छिपते या खाते हैं।
- चंद्र (मासिक) लय, लगभग एक महीना: कुछ मूँगे और कीड़े किसी चंद्र कला पर अंडे छोड़ते हैं; मानव मासिक चक्र भी लगभग एक महीने का है।
- वार्षिक (मौसमी) लय, लगभग एक साल: पतझड़, शीतनिद्रा, प्रवास, प्रजनन ऋतु।
लय अंतर्जात (भीतरी घड़ी से चलने वाली) होती है और बाह्य संकेतों, जैसे प्रकाश और ताप, से ठीक होती है।
प्रकाशकालिता (फ़ोटोपीरियडिज़्म)
प्रकाशकाल 24 घंटे में दिन की रोशनी की अवधि है। प्रकाशकालिता जीवों की उस पर प्रतिक्रिया है। दिन की लंबाई बहुत भरोसेमंद संकेत है: यह हर साल एक जैसे बदलती है, जबकि तापमान और बारिश धोखा दे सकते हैं।
पौधों में फ़ाइटोक्रोम नाम का वर्णक प्रकाश और अँधेरे की अवधि को भाँपता है। असली मायने रखती है बिना टूटी रात की लंबाई।
पौधों में प्रकाशकालिता
- दीर्घ-दिवसीय पौधे (जैसे पालक, सलाद, गेहूँ) तब फूलते हैं जब दिन एक क्रांतिक दिन-लंबाई से लंबे हों।
- लघु-दिवसीय पौधे (जैसे गुलदाउदी, धान, सोयाबीन, कपास) तब फूलते हैं जब दिन क्रांतिक लंबाई से छोटे हों।
- दिवस-उदासीन पौधे (जैसे टमाटर, खीरा, मक्का) किसी भी दिन-लंबाई में फूलते हैं।
किसान इसका उपयोग करते हैं: फूल उगाने वाले गुलदाउदी को काले कपड़े से ढककर लंबी रात देते हैं, या बत्ती जलाकर लंबा दिन, ताकि त्योहार पर फूल मिलें।
जंतुओं में प्रकाशकालिता
जंतु भी दिन की लंबाई नापते हैं। वसंत में दिन बढ़ने पर कई पक्षी गाने, घोंसला बनाने और अंडे देने लगते हैं; पतझड़ में दिन घटने पर कई पक्षी प्रवास करते हैं, स्तनधारी मोटे बाल उगाते हैं और कुछ शीतनिद्रा की तैयारी करते हैं। मस्तिष्क के हार्मोन रोशनी की मात्रा के साथ बदलकर ये काम चालू या बंद करते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सर्कैडियन लय ≈ 24 घंटे
- ज्वारीय लय ≈ 12.4 घंटे
- प्रकाशकाल = दिन में रोशनी की लंबाई
- दीर्घ-दिवसीय पौधा फूलता है: दिन > क्रांतिक लंबाई
- लघु-दिवसीय पौधा फूलता है: दिन < क्रांतिक लंबाई (असल में रात > क्रांतिक लंबाई)
हल किए गए उदाहरण
1. एक पौधा तभी फूलता है जब दिन 12 घंटे से छोटा हो। यह किस प्रकार का है?
लघु-दिवसीय पौधा।
2. जून में किसी जगह दिन 14 घंटे का है। रात कितनी लंबी है? क्रांतिक लंबाई 13 घंटे वाला दीर्घ-दिवसीय पौधा फूलेगा?
रात = 24 − 14 = 10 घंटे। दिन (14 घंटे) 13 घंटे से लंबा है, इसलिए पौधा फूलेगा।
3. केकड़ा ऊँचे ज्वार के साथ दिन में दो बार रेत में छिपता है। दो ऊँचे ज्वारों में लगभग कितना अंतर है?
लगभग 12.4 घंटे, यह ज्वारीय लय है।
4. किसान गर्मी में, जब दिन 15 घंटे का है, लघु-दिवसीय पौधा खिलाना चाहता है। वह क्या करे?
दिन के कुछ हिस्से में पौधों को काले कपड़े से ढक दे ताकि दिन क्रांतिक लंबाई से छोटा हो जाए (रात काफ़ी लंबी हो जाए)।
आम गलतियाँ
- पौधे दिन गिनते हैं, यह मानना। वे रात (अँधेरे) की लंबाई नापते हैं।
- लय के लिए हर समय सूर्य ज़रूरी मानना। भीतरी घड़ी प्रकाश के बिना भी चलती है, पर प्रकाश उसे ठीक करता है।
- दीर्घ-दिवसीय और लघु-दिवसीय में गड़बड़: नाम बताता है कि कितने लंबे दिन पर फूल आते हैं, पौधे की उम्र नहीं।
- केवल तापमान से प्रवास तय मानना। दिन की लंबाई मुख्य भरोसेमंद संकेत है।