विज्ञान के रूप में पारिस्थितिकी और जीवों की प्रतिक्रिया
पारिस्थितिकी (ecology) पढ़ती है कि जीव एक-दूसरे से और अपने निर्जीव परिवेश से कैसे जुड़ते हैं। पारिस्थितिकीविद् मैदान में अवलोकन करते हैं, प्रयोग करते हैं (जैसे एक भूखंड को बाड़ से चरने वालों से बचाना) और मॉडल बनाते हैं। स्तर: जीव → समष्टि → समुदाय → पारितंत्र → बायोम → जैवमंडल।
जीव परिवेश पर प्रतिक्रिया करते हैं। कुछ व्यवहार हैं (पक्षियों का प्रवास, गर्मी से छिपना)। कुछ जीवन के दौरान शरीर में बदलाव हैं: एक जैसे जीन अलग परिस्थिति में अलग लक्षणप्रारूप (phenotype) देते हैं। उदाहरण: हाइड्रेंजिया के फूल अम्लीय मिट्टी में नीले, क्षारीय में गुलाबी; कुछ कछुओं के अंडों से नर या मादा तापमान से तय होते हैं; छाँव में उगा पौधा लंबा और पतला होता है।
स्थलीय बायोम
बायोम एक बड़ा क्षेत्र है जिसकी जलवायु और पौधे-जंतु मिलते-जुलते हों। ज़मीन पर औसत तापमान और सालाना वर्षा इसे तय करते हैं।
- टुंड्रा: बहुत ठंडा, जमी हुई निचली मिट्टी (पर्माफ़्रॉस्ट), काई और लाइकेन।
- टैगा (बोरियल वन): कड़ी सर्दी, स्प्रूस जैसे शंकुधारी पेड़।
- शीतोष्ण वन: चार ऋतुएँ, पत्ते गिराने वाले चौड़ी पत्ती के पेड़।
- घास के मैदान (प्रेयरी, स्टेपी, सवाना): घास, कम पेड़, चरने वाले जंतु, आग।
- मरुस्थल: साल में लगभग 250 mm से कम वर्षा; कैक्टस, गहरी जड़ें, रात में सक्रिय जंतु।
- उष्णकटिबंधीय वर्षावन: साल भर गरम और गीला, 2,000 mm से ज़्यादा वर्षा, सबसे ज़्यादा जैव-विविधता।
पहाड़ों पर बायोम परतों में दिखते हैं: 1,000 m ऊपर जाना ध्रुवों की ओर सैकड़ों किलोमीटर जाने जैसा है।
जलीय और समुद्री पारितंत्र
पृथ्वी का लगभग 71% भाग पानी है। जलीय बायोम खारापन, गहराई, रोशनी, तापमान और बहाव से तय होते हैं।
- मीठा पानी: तालाब-झील (ठहरा) और नदी-धारा (बहता); आर्द्रभूमि पानी छानती है।
- ज्वारनदमुख (estuary): जहाँ नदी समुद्र से मिलती है; आधा खारा पानी; मछलियों की बहुत उपजाऊ नर्सरी। सुंदरबन जैसे मैंग्रोव यहीं उगते हैं।
- समुद्री: प्रवाल भित्तियाँ (गरम, उथला, साफ़ पानी), खुला समुद्र और गहरा समुद्र।
रोशनी के हिसाब से क्षेत्र: प्रकाशित (photic) क्षेत्र (ऊपरी ~200 m) में प्रकाश-संश्लेषण लायक़ रोशनी; नीचे अप्रकाशित (aphotic) अँधेरा; तल नितल (benthic) क्षेत्र। प्रकाशित क्षेत्र के पादप-प्लवक पृथ्वी की बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन बनाते हैं।
पोषक चक्र: नाइट्रोजन और फ़ॉस्फ़ोरस
ऊर्जा पारितंत्र से एक बार बहती है, पर पदार्थ का पुनर्चक्रण होता है।
नाइट्रोजन चक्र
- स्थिरीकरण: जीवाणु (जैसे दलहन की जड़-ग्रंथिकाओं में राइज़ोबियम) और बिजली N₂ को अमोनिया/अमोनियम में बदलते हैं।
- नाइट्रीकरण: मिट्टी के जीवाणु अमोनियम को नाइट्राइट, फिर नाइट्रेट बनाते हैं।
- स्वांगीकरण: पौधे नाइट्रेट लेकर प्रोटीन और DNA बनाते हैं; जंतु पौधे खाते हैं।
- अमोनीकरण: अपघटक अपशिष्ट और मृत शरीर को फिर अमोनियम बनाते हैं।
- विनाइट्रीकरण: पानी भरी, कम ऑक्सीजन वाली मिट्टी में जीवाणु नाइट्रेट को फिर N₂ बनाते हैं।
फ़ॉस्फ़ोरस चक्र
फ़ॉस्फ़ोरस का कोई गैस रूप नहीं। चट्टान के अपक्षय से फ़ॉस्फ़ेट मिट्टी-पानी में आता है; पौधे इसे DNA, ATP और हड्डियों के लिए लेते हैं; अपशिष्ट और सड़न से लौटता है; कुछ तलछट बनकर लाखों साल में चट्टान बनता है। झीलों में अक्सर यही सीमाकारी पोषक होता है।
वायवीय और अवायवीय पुनर्चक्रण
ऑक्सीजन लेने वाले (वायवीय) अपघटक पदार्थ को पूरा CO₂, पानी और खनिज में तोड़ते हैं। ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय, जैसे दलदल, धान के खेत, कचरा-भराव) टूटना धीमा होता है और मीथेन जैसी गैसें निकलती हैं। विनाइट्रीकरण भी अवायवीय है।
दबाव में पारितंत्र: गड़बड़ी और समय के साथ बदलाव
पारितंत्र प्राकृतिक रूप से (अनुक्रमण, आग, बाढ़) और इंसानी कामों से बदलते हैं:
- सुपोषण (eutrophication): नाइट्रेट-फ़ॉस्फ़ेट बहाव → शैवाल प्रस्फुटन → शैवाल मरते हैं → अपघटक ऑक्सीजन ख़त्म करते हैं → मछलियाँ मरती हैं।
- आवास-नाश: खेत और शहरों के लिए जंगल कटना।
- आक्रामक प्रजातियाँ: जैसे जलकुंभी का झीलों को ढक लेना।
- जलवायु परिवर्तन: गरम समुद्र में प्रवाल विरंजन; बायोम पहाड़ों पर ऊपर खिसकते हैं।
- अति-दोहन: ज़्यादा मछली पकड़ने से भंडार ढह जाते हैं।
प्रतिरोध यह है कि गड़बड़ी में पारितंत्र कितना वैसा ही रहता है; लचीलापन (resilience) यह कि कितनी जल्दी ठीक होता है। ज़्यादा जैव-विविधता वाले तंत्र आमतौर पर ज़्यादा लचीले होते हैं।
समय के साथ बदलाव और केस स्टडी
पिछले हिमयुग के बाद कई शीतोष्ण इलाक़े टुंड्रा से वन बने; बाद में लोगों ने जंगल काटकर खेत, चरागाह और नगर बनाए। किसी स्थानीय पारितंत्र (तालाब, पार्क, आर्द्रभूमि) का अध्ययन कीजिए: प्रजातियाँ लिखिए, रोशनी, pH और तापमान मापिए, इंसानी दबाव नोट कीजिए। केस स्टडी: गरमी झेलती प्रवाल भित्ति, झींगा पालन से दबा मैंग्रोव तट, सीवेज उपचार के बाद सुधरती झील।
करके देखें: झील के डॉक्टर
आख़िरी 3D चरण में सबसे ज़्यादा वह बहाव ढूँढिए जिसमें पाँचों मछलियाँ बचें। फिर बढ़ाइए जब तक ऑक्सीजन 5 mg/L से नीचे न जाए। किसान उस सीमा से नीचे रहने को क्या करे? (संकेत: कम उर्वरक, नालों के किनारे पौधों की पट्टी, रासायनिक नाइट्रोजन की जगह दलहन।) घर पर: तालाब का पानी दो जार में लीजिए, एक में चुटकी भर पौधों का खाद डालिए, दोनों को एक हफ़्ता रोशनी में रखिए और देखिए कौन ज़्यादा हरा होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बायोम = जलवायु (तापमान + वर्षा) → पौधे → जंतु
- N₂ → (स्थिरीकरण) NH₄⁺ → (नाइट्रीकरण) NO₂⁻ → NO₃⁻ → (स्वांगीकरण) प्रोटीन → (अमोनीकरण) NH₄⁺ → (विनाइट्रीकरण) N₂
- फ़ॉस्फ़ोरस: चट्टान → मिट्टी/पानी PO₄³⁻ → जीव → तलछट → चट्टान (गैस नहीं)
- वायवीय अपघटन → CO₂ + H₂O + खनिज; अवायवीय → CH₄ आदि
- सुपोषण: पोषक ↑ → शैवाल ↑ → O₂ ↓ → मछलियाँ ↓
- प्रतिरोध = वैसा ही रहना; लचीलापन = जल्दी ठीक होना
हल किए गए उदाहरण
1. एक जगह का औसत तापमान 27 °C और सालाना वर्षा 2,500 mm है। कौन-सा बायोम होगा और क्यों?
चरण 1: गरम (साल भर ~20 °C से ऊपर)। चरण 2: बहुत गीला (2,000 mm से ज़्यादा)। चरण 3: गरम + बहुत गीला = उष्णकटिबंधीय वर्षावन, ऊँचे परतदार पेड़ और बहुत ज़्यादा जैव-विविधता।
2. एक किसान हर साल एक ही खेत में गेहूँ उगाती है और पैदावार घटती है। फिर एक मौसम सेम उगाती है और अगली गेहूँ फ़सल सुधरती है। नाइट्रोजन चक्र से समझाइए।
गेहूँ हर साल मिट्टी से नाइट्रेट लेता है (स्वांगीकरण)। सेम दलहन है: उसकी जड़-ग्रंथिकाओं में राइज़ोबियम हवा की N₂ को अमोनियम में स्थिर करता है। सेम की जड़ें सड़ने पर अमोनीकरण और नाइट्रीकरण से मिट्टी में नाइट्रेट बढ़ता है, तो अगले गेहूँ को ज़्यादा नाइट्रोजन मिलती है।
3. झील में ऑक्सीजन 8 mg/L थी। ज़्यादा उर्वरक बहाव के बाद यह हर हफ़्ते 1.5 mg/L घटती है। मछलियों को कम से कम 5 mg/L चाहिए। कितने हफ़्तों बाद ख़तरा है?
n हफ़्ते बाद ऑक्सीजन = 8 − 1.5n। 8 − 1.5n < 5 → 1.5n > 3 → n > 2। 2 हफ़्ते बाद ठीक 5 mg/L, और तीसरे हफ़्ते में 5 से नीचे: मछलियाँ ख़तरे में।
आम गलतियाँ
- कहना कि पौधे सीधे हवा से नाइट्रोजन लेते हैं। ज़्यादातर पौधों को मिट्टी का नाइट्रेट या अमोनियम चाहिए; N₂ सिर्फ़ स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु लेते हैं।
- सोचना कि फ़ॉस्फ़ोरस चक्र में कार्बन-नाइट्रोजन की तरह गैस चरण है। नहीं है।
- नाइट्रीकरण (अमोनियम → नाइट्रेट) और विनाइट्रीकरण (नाइट्रेट → N₂) को उलझा देना।
- कहना कि सुपोषण में मछलियाँ इसलिए मरती हैं क्योंकि शैवाल ज़हरीले हैं। मुख्य कारण: मरे शैवाल सड़ाने वाले अपघटक ऑक्सीजन ख़त्म कर देते हैं।