पोषक तत्व क्यों घूमते हैं: मृतजीवियों की भूमिका
पृथ्वी को नाइट्रोजन या फॉस्फोरस के नए परमाणु नहीं मिलते। वही परमाणु बार-बार काम आते हैं। इसे पोषक चक्र कहते हैं।
मृतजीवी (saprobionts) अपघटक कवक और जीवाणु हैं। वे:
- मृत पत्तियों, मृत जंतुओं और अपशिष्ट पर एंज़ाइम छोड़ते हैं;
- घुले हुए छोटे अणु सोखते हैं (इसे कोशिका-बाह्य पाचन कहते हैं);
- अमोनियम (NH₄⁺) और फॉस्फेट (PO₄³⁻) जैसे खनिज आयन मिट्टी में लौटाते हैं।
मृतजीवियों के बिना पोषक तत्व मृत शरीरों में बंद रहते और पौधों को कमी पड़ती।
नाइट्रोजन चक्र
पौधों और जंतुओं को अमीनो अम्ल, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल (DNA, RNA) और ATP बनाने के लिए नाइट्रोजन चाहिए। हवा का लगभग 78% भाग N₂ गैस है, पर ज़्यादातर जीव इसे सीधे नहीं ले सकते। मुख्य काम जीवाणु करते हैं।
1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण (N₂ → अमोनिया / अमोनियम)
- सहोपकारी जीवाणु जैसे राइज़ोबियम दलहनी पौधों (मटर, सेम, दालें) की जड़-ग्रंथिकाओं में रहते हैं। वे पौधे को नाइट्रोजन यौगिक देते हैं; पौधा उन्हें शर्करा देता है।
- मिट्टी में मुक्त-जीवी स्थिरीकारी जीवाणु (जैसे एज़ोटोबैक्टर)।
- बिजली कड़कना, और खाद बनाने की औद्योगिक हेबर विधि।
2. अमोनीकरण
मृतजीवी मृत जीवों, यूरिया और मल की नाइट्रोजन को अमोनिया में बदलते हैं, जो मिट्टी में अमोनियम आयन बनता है।
3. नाइट्रीकरण (ऑक्सीजन चाहिए)
नाइट्रीकारी जीवाणु अमोनियम को नाइट्राइट (NO₂⁻) (जैसे नाइट्रोसोमोनास) और फिर नाइट्राइट को नाइट्रेट (NO₃⁻) (जैसे नाइट्रोबैक्टर) में ऑक्सीकृत करते हैं। ये वायवीय हैं, इसलिए जुताई और अच्छा जल-निकास मदद करते हैं। पौधे नाइट्रेट को सक्रिय परिवहन से सोखते हैं।
4. विनाइट्रीकरण (ऑक्सीजन नहीं)
जलभराव वाली, अवायवीय मिट्टी में विनाइट्रीकारी जीवाणु नाइट्रेट को फिर N₂ गैस बना देते हैं। मिट्टी की उर्वरता घटती है।
फॉस्फोरस चक्र
फॉस्फोरस DNA, RNA, ATP, NADP और झिल्ली के फॉस्फोलिपिड के लिए ज़रूरी है। नाइट्रोजन के उलट इसकी कोई गैस अवस्था नहीं, इसलिए चक्र बहुत धीमा है।
- चट्टानों के अपक्षय और अपरदन से फॉस्फेट आयन मिट्टी और पानी में आते हैं।
- पौधे फॉस्फेट आयन सोखते हैं (माइकोराइज़ा की मदद से)।
- जंतु पौधे या दूसरे जंतु खाकर फॉस्फेट पाते हैं।
- मृतजीवी मृत पदार्थ और अपशिष्ट से फॉस्फेट छोड़ते हैं। ग्वानो (समुद्री पक्षियों की बीट) फॉस्फेट से भरपूर है।
- नदियों और समुद्र में बहा फॉस्फेट तलछट बनकर बैठता है। लाखों वर्षों में यह फिर चट्टान बनता है, और भू-उत्थान उसे वापस ज़मीन पर ला सकता है।
माइकोराइज़ा
माइकोराइज़ा कवक और पौधों की जड़ों की साझेदारी है। पतले कवक-धागे, जिन्हें कवक-तंतु (hyphae) कहते हैं, मिट्टी में फैलते हैं।
- ये पानी और खनिज आयन, ख़ासकर फॉस्फेट (जो मिट्टी में कम खिसकता है), सोखने का सतही क्षेत्रफल बहुत बढ़ा देते हैं।
- ये स्पंज की तरह पानी पकड़ते हैं, सूखे में पौधे की मदद करते हैं।
- पौधा प्रकाश-संश्लेषण की शर्करा कवक को देता है।
दोनों को लाभ है, इसलिए यह सहोपकारिता (mutualism) है। ज़्यादातर ज़मीनी पौधों में माइकोराइज़ा होते हैं।
खाद, निक्षालन और सुपोषण
प्राकृतिक पारितंत्र में जीव मरकर उसी मिट्टी में आयन लौटाते हैं। खेत में फ़सल काटकर ले जाई जाती है, तो आयन खो जाते हैं। किसान उन्हें लौटाने और उपज बढ़ाने के लिए खाद (उर्वरक) डालते हैं।
- प्राकृतिक (जैविक): गोबर, कंपोस्ट, फ़सल-अवशेष। सड़ते हुए धीरे-धीरे आयन छोड़ते हैं; मिट्टी की बनावट भी सुधारते हैं।
- कृत्रिम (अजैविक): खनन या कारख़ाने के रसायन, जैसे अमोनियम नाइट्रेट या यूरिया। सटीक मात्रा, तेज़ असर, पर आसानी से बह जाते हैं।
निक्षालन (leaching)
निक्षालन यानी बारिश घुलनशील आयनों (ख़ासकर नाइट्रेट) को घोलकर जड़ों के नीचे या नालों-झीलों में ले जाती है। कृत्रिम खाद, भारी बारिश और ज़रूरत से ज़्यादा खाद से यह बढ़ता है।
सुपोषण (eutrophication), क्रम से
- बहा हुआ नाइट्रेट या फॉस्फेट झील या नदी में पहुँचता है।
- सतह पर शैवाल तेज़ी से बढ़ते हैं (शैवाल प्रस्फुटन)।
- यह परत रोशनी रोक देती है; नीचे के पौधे प्रकाश-संश्लेषण नहीं कर पाते और मरते हैं।
- मृतजीवी जीवाणु मृत पदार्थ खाकर बढ़ते हैं और वायवीय श्वसन में घुली ऑक्सीजन ख़त्म करते हैं।
- मछलियाँ और दूसरे वायवीय जीव मरते हैं।
कम करने के उपाय: सही मात्रा और सही मौसम में खाद, नदियों के किनारे घास की पट्टियाँ, गोबर का सावधानी से उपयोग, और भारी बारिश से पहले खाद न डालना।
घर पर करके देखें
तालाब का पानी दो पारदर्शी जार में धूप वाली खिड़की पर रखिए। एक में चुटकी भर पौधों की खाद डालिए। एक हफ़्ते बाद देखिए: कौन ज़्यादा हरा हुआ?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण: N₂ → NH₃ / NH₄⁺ (राइज़ोबियम, एज़ोटोबैक्टर, बिजली, हेबर विधि)।
- अमोनीकरण: मृत पदार्थ की नाइट्रोजन → NH₄⁺ (मृतजीवी)।
- नाइट्रीकरण (वायवीय): NH₄⁺ → NO₂⁻ → NO₃⁻।
- विनाइट्रीकरण (अवायवीय): NO₃⁻ → N₂।
- फॉस्फोरस चक्र: चट्टान → PO₄³⁻ → पौधे → जंतु → अपघटक → तलछट → चट्टान (गैस अवस्था नहीं)।
- माइकोराइज़ा = कवक + जड़ सहोपकारिता; पानी और फॉस्फेट के लिए ↑ सतही क्षेत्रफल।
- सुपोषण: निक्षालन → शैवाल प्रस्फुटन → रोशनी रुकी → पौधे मरे → जीवाणु O₂ लेते → मछलियाँ मरती।
हल किए गए उदाहरण
1. एक किसान का खेत दो हफ़्ते पानी में डूबा रहा। बाद में फ़सल पीली और कमज़ोर दिखी। नाइट्रोजन चक्र से समझाइए।
1) जलभराव वाली मिट्टी में ऑक्सीजन कम होती है (अवायवीय)। 2) विनाइट्रीकारी जीवाणु पनपते हैं और नाइट्रेट को N₂ गैस बनाकर उड़ा देते हैं। 3) नाइट्रीकारी जीवाणुओं को ऑक्सीजन चाहिए, वे धीमे पड़ते हैं और कम नाइट्रेट बनता है। 4) नाइट्रेट कम होने से फ़सल पर्याप्त प्रोटीन और क्लोरोफ़िल नहीं बना पाती, पत्तियाँ पीली पड़ती हैं। पानी निकालना और जुताई मदद करेंगे।
2. मटर जैसी दालें कमज़ोर मिट्टी में भी अच्छी क्यों उगती हैं, और किसान उन्हें खेत में ही जोतकर क्यों मिला देता है?
दालें दलहनी पौधे हैं। उनकी जड़-ग्रंथिकाओं में राइज़ोबियम N₂ को अमोनियम में स्थिर करता है, इसलिए मिट्टी में नाइट्रेट कम होने पर भी पौधे को नाइट्रोजन मिलती है। जोतकर मिलाने पर मृतजीवी उन्हें सड़ाते हैं (अमोनीकरण), और नाइट्रीकरण अगली फ़सल के लिए नाइट्रेट बनाता है। यह प्राकृतिक खाद है।
3. एक झील में ऑक्सीजन शैवाल प्रस्फुटन से पहले 9 mg/L और उसके दौरान 2 mg/L मिली। प्रतिशत गिरावट निकालिए और कारण बताइए।
गिरावट = 9 − 2 = 7 mg/L। प्रतिशत गिरावट = 7 ÷ 9 × 100 ≈ 78%। कारण: शैवाल ने रोशनी रोकी, जलीय पौधे मरे, और उन्हें सड़ाने वाले मृतजीवी जीवाणुओं ने वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन ख़र्च कर दी, इसलिए घुली ऑक्सीजन तेज़ी से घटी।
आम गलतियाँ
- कहना कि पौधे हवा से N₂ गैस सोखते हैं। ज़्यादातर पौधे मिट्टी से नाइट्रेट (या अमोनियम) आयन सोखते हैं।
- नाइट्रीकरण (अमोनियम → नाइट्रेट, ऑक्सीजन चाहिए) और विनाइट्रीकरण (नाइट्रेट → N₂, ऑक्सीजन नहीं) को उलझाना।
- कहना कि शैवाल ऑक्सीजन ख़त्म करके मछलियाँ मारते हैं। ऑक्सीजन मुख्य रूप से सड़ाने वाले जीवाणु ख़र्च करते हैं।
- फॉस्फोरस चक्र में गैस अवस्था दिखाना। फॉस्फोरस चट्टान, मिट्टी, पानी और जीवों से होकर घूमता है।