उपापचय क्या है?
उपापचय (metabolism) यानी किसी जीव के अंदर होने वाली सभी रासायनिक क्रियाएँ. रासायनिक क्रिया में कुछ अणु बदलकर नए अणु बन जाते हैं.
यही क्रियाएँ हमें ज़िंदा रखती हैं. ये ऊर्जा देती हैं, शरीर बनाती हैं और कचरा हटाती हैं. ये हर कोशिका में हर समय चलती हैं, सोते समय भी.
जिस अणु से क्रिया शुरू होती है उसे क्रियाधार (substrate) कहते हैं और जो नया बनता है उसे उत्पाद (product).
अपचय और उपचय
उपापचय के दो हिस्से हैं.
अपचय (catabolism): तोड़ना
बड़े अणु छोटे टुकड़ों में टूटते हैं. ऊर्जा निकलती है. उदाहरण: श्वसन (ग्लूकोज़ → कार्बन डाइऑक्साइड + पानी), स्टार्च का पाचन, भूख में वसा का टूटना.
उपचय (anabolism): बनाना
छोटे अणु जुड़कर बड़े बनते हैं. ऊर्जा लगती है. उदाहरण: ऐमीनो अम्लों से प्रोटीन बनना, पौधों में प्रकाश संश्लेषण, यकृत में ग्लूकोज़ को ग्लाइकोजन बनाकर रखना.
दोनों कैसे जुड़े हैं
अपचय ऊर्जा और छोटे टुकड़े देता है. उपचय उसी ऊर्जा और टुकड़ों से नया बनाता है. दोनों एक ही चक्र के दो आधे हिस्से हैं. बढ़ने के समय उपचय ज़्यादा होता है; उपवास या कड़ी कसरत में अपचय ज़्यादा.
| अपचय | उपचय | |
|---|---|---|
| अणु | बड़ा → छोटा | छोटा → बड़ा |
| ऊर्जा | निकलती है | लगती है |
| उदाहरण | श्वसन | प्रोटीन बनना |
ATP: कोशिका का ऊर्जा सिक्का
ATP यानी ऐडिनोसीन ट्राइफॉस्फेट. इसमें एक ऐडिनोसीन भाग और कतार में तीन फॉस्फेट समूह होते हैं.
आख़िरी फॉस्फेट टूटते ही ऊर्जा निकलती है:
ATP → ADP + P + ऊर्जा
ADP (ऐडिनोसीन डाइफॉस्फेट) में सिर्फ़ दो फॉस्फेट होते हैं. श्वसन से मिली ऊर्जा फॉस्फेट को फिर जोड़ देती है और ADP फिर ATP बन जाता है. यह ATP–ADP चक्र है.
कोशिका ATP की ऊर्जा से: बड़े अणु बनाती है, मांसपेशी सिकोड़ती है, झिल्ली के पार पदार्थ पंप करती है (सक्रिय परिवहन), तंत्रिका संदेश भेजती है और शरीर गर्म रखती है.
ग्लूकोज़ सीधे क्यों नहीं? ग्लूकोज़ में एक साथ बहुत ज़्यादा ऊर्जा होती है. ATP छोटी-छोटी, काम की मात्रा में ऊर्जा देता है, ठीक वहीं जहाँ ज़रूरत है. इसलिए इसे ऊर्जा की "मुद्रा" कहते हैं.
एंज़ाइम और उपापचयी पथ
शरीर के तापमान पर ज़्यादातर क्रियाएँ बहुत धीमी होतीं. एंज़ाइम प्रोटीन होते हैं जो इन्हें तेज़ करते हैं. हर एंज़ाइम एक ही तरह के क्रियाधार पर फिट होता है, जैसे एक चाबी एक ताले में.
क्रियाएँ कड़ियों में जुड़ी होती हैं, इन्हें उपापचयी पथ (metabolic pathway) कहते हैं: A → B → C → D. एक कदम का उत्पाद अगले कदम का क्रियाधार बनता है. हर कदम का अपना एंज़ाइम होता है.
अगर एक एंज़ाइम न हो या रुक जाए तो कड़ी वहीं रुक जाती है. कुछ आनुवंशिक रोग ऐसे ही होते हैं. कई पथ अपने अंतिम उत्पाद से नियंत्रित होते हैं: जब D काफ़ी बन जाए तो D पहले एंज़ाइम को धीमा कर देता है (पुनर्निवेश संदमन, feedback inhibition), ताकि सामान बर्बाद न हो.
उपापचयी दर और ऊर्जा संतुलन
उपापचयी दर यानी शरीर कितनी तेज़ी से ऊर्जा ख़र्च करता है. आराम में भी साँस, धड़कन और गर्मी बनाए रखने में ऊर्जा लगती है; इसे आधारीय उपापचयी दर (BMR) कहते हैं. एक औसत वयस्क आराम में रोज़ लगभग 6,000–8,000 kJ ख़र्च करता है.
कसरत, बढ़ती उम्र, बुख़ार और ठंड में यह दर बढ़ती है. थायरॉइड हॉर्मोन थायरॉक्सिन इसे नियंत्रित करता है.
अगर भोजन की ऊर्जा ख़र्च से ज़्यादा है तो बची ऊर्जा जमा होती है (वसा, ग्लाइकोजन). कम है तो भंडार टूटते हैं और वज़न घटता है.
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपापचय = अपचय + उपचय
- अपचय: बड़ा अणु → छोटे अणु + ऊर्जा
- उपचय: छोटे अणु + ऊर्जा → बड़ा अणु
- ATP → ADP + P + ऊर्जा (लगभग 30 kJ प्रति मोल)
- वायवीय श्वसन: ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + ऊर्जा (ATP)
- ऊर्जा संतुलन: भोजन से ऊर्जा − ख़र्च ऊर्जा = जमा ऊर्जा
हल किए गए उदाहरण
1. इन्हें अपचय या उपचय में बाँटो: (a) श्वसन, (b) प्रकाश संश्लेषण, (c) स्टार्च का पाचन, (d) मांसपेशी प्रोटीन बनना.
(a) अपचय: ग्लूकोज़ टूटता है. (b) उपचय: CO₂ और पानी से ग्लूकोज़ बनता है. (c) अपचय: स्टार्च शर्करा में टूटता है. (d) उपचय: ऐमीनो अम्ल जुड़कर प्रोटीन बनते हैं.
2. पथ A → B → C → D में एंज़ाइम 2 (B → C) काम करना बंद कर दे. B और D की मात्रा का क्या होगा?
B, C में नहीं बदल पाएगा, तो B जमा होगा. C नहीं बनेगा तो D भी नहीं बनेगा. B बढ़ेगा, D घटेगा.
3. एक किशोर रोज़ 10,000 kJ का भोजन लेता है और 9,000 kJ ख़र्च करता है. कुल मिलाकर उपचय ज़्यादा है या अपचय? बची ऊर्जा का क्या होगा?
ऊर्जा ख़र्च से 1,000 kJ ज़्यादा आई, तो बनाना और जमा करना (उपचय) ज़्यादा है. बचे 1,000 kJ ग्लाइकोजन, वसा या शरीर की बढ़त में जाते हैं.
4. ठंड में इंसान काँपता क्यों है?
काँपना यानी मांसपेशियों का तेज़ सिकुड़ना. इसमें ज़्यादा ग्लूकोज़ टूटता है (अपचय) और ज़्यादा ATP लगता है. उस ऊर्जा का कुछ भाग गर्मी बनकर शरीर को गर्म करता है.
आम गलतियाँ
- उपापचय को सिर्फ़ "चर्बी कितनी जल्दी जलती है" समझना. असल में यह शरीर की हर रासायनिक क्रिया है.
- नाम उलट देना. अपचय तोड़ता है (ऊर्जा बाहर); उपचय बनाता है (ऊर्जा अंदर).
- यह मानना कि ATP लंबे समय तक ऊर्जा जमा रखता है. ATP कुछ ही सेकंड में ख़र्च हो जाता है; लंबा भंडार वसा और ग्लाइकोजन हैं.
- यह सोचना कि एंज़ाइम ख़र्च हो जाता है. एंज़ाइम क्रिया से बदलता नहीं और बार-बार काम आता है.