कोशिका झिल्ली
हर कोशिका की एक पतली खाल होती है, जिसे कोशिका झिल्ली कहते हैं. यह फॉस्फोलिपिड (वसा जैसे अणु) की दो परतों से बनी है, जिसमें प्रोटीन तैरते हैं. इसे तरल मोज़ेक मॉडल कहते हैं: परत तेल की तरह हिल सकती है और प्रोटीन उसमें टाइलों की तरह जड़े हैं.
झिल्ली चयनात्मक पारगम्य है. यानी यह कुछ पदार्थ जाने देती है, कुछ नहीं.
- आसानी से निकलते हैं: छोटे, बिना आवेश वाले अणु जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और (धीरे) पानी.
- मदद चाहिए: आयन (Na⁺, K⁺) और ग्लूकोज़ जैसे बड़े अणु.
- ख़ुद नहीं जा सकते: प्रोटीन और स्टार्च जैसे बहुत बड़े अणु.
विसरण और सुसाध्य विसरण
विसरण (diffusion) यानी कणों का ज़्यादा सांद्रता वाली जगह से कम सांद्रता वाली जगह की ओर कुल मिलाकर जाना. सांद्रता का मतलब है कण कितने भीड़ में हैं. विसरण निष्क्रिय है: कोशिका कोई ऊर्जा नहीं लगाती.
उदाहरण: फेफड़ों की वायु-कोष्ठिकाओं से ऑक्सीजन ख़ून में जाती है; पत्ती के वायु-स्थानों से CO₂ कोशिकाओं में जाती है.
विसरण तेज़ कब होता है?
- सांद्रता का अंतर ज़्यादा हो
- तापमान ज़्यादा हो (कण तेज़ चलते हैं)
- सतह का क्षेत्रफल बड़ा हो (जैसे आँत के रसांकुर)
- झिल्ली पतली हो, दूरी कम हो
सुसाध्य विसरण (facilitated diffusion)
आयन और ग्लूकोज़ झिल्ली के तेल वाले बीच से नहीं निकल पाते. वे चैनल प्रोटीन या वाहक प्रोटीन से जाते हैं. फिर भी ज़्यादा से कम की ओर, और बिना ऊर्जा. यानी दरवाज़े वाला विसरण.
परासरण और घोल के प्रकार
परासरण (osmosis) यानी आंशिक पारगम्य झिल्ली से पानी का विसरण, तनु घोल (ज़्यादा पानी) से सांद्र घोल (कम पानी) की ओर. घुला पदार्थ (विलेय) पार नहीं जा सकता, इसलिए पानी चलता है.
कोशिका के बाहर के घोल की तुलना अंदर से करते हैं:
| बाहर का घोल | पानी जाता है | जंतु कोशिका | पादप कोशिका |
|---|---|---|---|
| अल्पपरासारी (कम विलेय) | कोशिका में | फूलती, फट सकती है | कड़ी (स्फीत); भित्ति फटने नहीं देती |
| समपरासारी (बराबर) | अंदर = बाहर | कोई बदलाव नहीं | थोड़ी ढीली (श्लथ) |
| अतिपरासारी (ज़्यादा विलेय) | कोशिका से बाहर | सिकुड़ती, झुर्रीदार | झिल्ली भित्ति से हटती (जीवद्रव्यकुंचन) |
जीव अपने पानी का संतुलन बनाए रखते हैं; इसे परासरण नियमन (osmoregulation) कहते हैं. मीठे पानी की मछली बहुत पतला मूत्र बनाती है; पैरामीशियम संकुचनशील रिक्तिका से ज़्यादा पानी बाहर फेंकता है.
सक्रिय परिवहन
सक्रिय परिवहन (active transport) कणों को कम से ज़्यादा सांद्रता की ओर, ढलान के उलटे, ले जाता है. इसके लिए वाहक प्रोटीन (पंप) और श्वसन से बनी ATP की ऊर्जा चाहिए.
उदाहरण:
- मूल रोम कोशिकाएँ मिट्टी से खनिज आयन (जैसे नाइट्रेट) लेती हैं, जबकि मिट्टी में वे कम होते हैं.
- आँत की कोशिकाएँ भोजन से बचा हुआ आख़िरी ग्लूकोज़ खींचती हैं.
- तंत्रिका कोशिका का सोडियम–पोटैशियम पंप हर ATP पर 3 Na⁺ बाहर और 2 K⁺ अंदर करता है.
अगर कोई ज़हर श्वसन रोक दे तो सक्रिय परिवहन रुक जाता है, पर विसरण और परासरण चलते रहते हैं.
थोक परिवहन और तुलना
बहुत बड़े कण छोटे बुलबुलों में जाते हैं, जिन्हें पुटिका (vesicle) कहते हैं. इसमें भी ATP लगता है.
- एंडोसाइटोसिस (अंतःकोशिकता): झिल्ली अंदर मुड़कर किसी चीज़ को निगल लेती है. श्वेत रक्त कोशिका जीवाणु को ऐसे ही खाती है (भक्षकाणु क्रिया).
- एक्सोसाइटोसिस (बहिःकोशिकता): पुटिका झिल्ली से जुड़कर सामान बाहर छोड़ती है, जैसे ग्रंथि कोशिकाएँ गॉल्जी काय में बने हॉर्मोन या एंज़ाइम छोड़ती हैं.
| विसरण | सुसाध्य | परासरण | सक्रिय | |
|---|---|---|---|---|
| दिशा | ज़्यादा → कम | ज़्यादा → कम | पानी: तनु → सांद्र | कम → ज़्यादा |
| प्रोटीन? | नहीं | चैनल/वाहक | कभी-कभी (एक्वापोरिन) | पंप |
| ATP? | नहीं | नहीं | नहीं | हाँ |
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विसरण: कण ज़्यादा → कम सांद्रता, बिना ATP
- सुसाध्य विसरण: ज़्यादा → कम, चैनल/वाहक प्रोटीन से, बिना ATP
- परासरण: पानी तनु घोल से सांद्र घोल की ओर, आंशिक पारगम्य झिल्ली से
- सक्रिय परिवहन: कम → ज़्यादा, वाहक पंप + ATP
- सतह क्षेत्रफल : आयतन अनुपात = सतह क्षेत्रफल ÷ आयतन (छोटी कोशिका का अनुपात बड़ा)
- द्रव्यमान में प्रतिशत बदलाव = (अंतिम − प्रारंभिक) ÷ प्रारंभिक × 100
हल किए गए उदाहरण
1. 5.0 g की आलू पट्टी नमकीन पानी में रखने पर 4.6 g रह जाती है. द्रव्यमान में प्रतिशत बदलाव निकालो और कारण बताओ.
बदलाव = 4.6 − 5.0 = −0.4 g. % बदलाव = −0.4 ÷ 5.0 × 100 = −8%. नमकीन पानी अतिपरासारी था, इसलिए परासरण से पानी आलू की कोशिकाओं से बाहर निकला.
2. घन आकार की कोशिका की भुजा 2 µm है. सतह क्षेत्रफल : आयतन अनुपात निकालो.
सतह क्षेत्रफल = 6 × 2 × 2 = 24 µm². आयतन = 2 × 2 × 2 = 8 µm³. अनुपात = 24 ÷ 8 = 3 : 1. 1 µm के घन का 6 : 1 होता है, इसलिए छोटी कोशिकाएँ अपने आकार के हिसाब से तेज़ लेन-देन करती हैं.
3. मिट्टी में नाइट्रेट कम होने पर भी मूल रोम कोशिकाएँ नाइट्रेट लेती हैं. प्रक्रिया का नाम और ज़रूरत बताओ.
सक्रिय परिवहन. यह आयनों को कम से ज़्यादा की ओर ले जाता है, इसलिए वाहक प्रोटीन और श्वसन से ATP चाहिए. इसी कारण जड़ों को ऑक्सीजन चाहिए.
4. शुद्ध पानी में लाल रक्त कोशिका फट जाती है, प्याज़ की कोशिका क्यों नहीं?
शुद्ध पानी अल्पपरासारी है, तो दोनों में परासरण से पानी घुसता है. लाल कोशिका के पास सिर्फ़ झिल्ली है, वह फूलकर फट जाती है. प्याज़ की कोशिका की मज़बूत भित्ति है, वह बस कड़ी (स्फीत) हो जाती है.
आम गलतियाँ
- परासरण को नमक या शक्कर का चलना कहना. परासरण सिर्फ़ पानी का चलना है.
- यह कहना कि सांद्रता बराबर होने पर कण रुक जाते हैं. वे चलते रहते हैं; बस कुल बदलाव नहीं होता.
- यह सोचना कि सुसाध्य विसरण में प्रोटीन है तो ATP भी लगेगा. नहीं, यह निष्क्रिय ही है.
- अल्प और अति उलट देना. अति = बाहर ज़्यादा विलेय, तो पानी बाहर जाता है और कोशिका सिकुड़ती है.