Spain 2º Bachillerato Biology
अध्याय: 6
1. Biomolecules
Organic and inorganic biomolecules · Water and mineral salts · Carbohydrates overview · Monosaccharides · Disaccharides and polysaccharides · Lipids · Proteins · Vitamins and salts as cofactors · Nucleic acids · Biomolecules and health
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- जल: छोटा-सा अणु जो जीवन संभव बनाता है – जल का अणु (H₂O) मुड़ा हुआ और ध्रुवीय है: ऑक्सीजन थोड़ा ऋण आवेशित और हाइड्रोजन थोड़े धन आवेशित। इसी कारण जल के अणु हाइड्रोजन बंध से आपस में चिपकते हैं। इन्हीं बंधों से जल बहुत-से पदार्थ घोलता है, बहुत ऊष्मा जमा करता है, भाप बनने में बहुत ऊर्जा लेता है, आपस में (संसंजन) और सतहों से (आसंजन) चिपकता है, और बर्फ़ तैरती है। जीव जल को अभिक्रियाओं, परिवहन और कोशिकाओं को कसा रखने में भी इस्तेमाल करते हैं। जल में घुले खनिज लवण Na⁺, K⁺, Ca²⁺, Fe²⁺ और फ़ॉस्फ़ेट जैसे आयन देते हैं।
- कार्बोहाइड्रेट: वर्गीकरण, ग्लूकोज़, डाइसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड – कार्बोहाइड्रेट यानी शर्कराएँ और शर्करा से बने बड़े अणु। रसायन की भाषा में ये पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन हैं (बहुत सारे –OH और एक C=O), या वे पदार्थ जो जल-अपघटन पर ऐसे अणु देते हैं। इकाइयों की गिनती से इन्हें बाँटते हैं: एक (मोनोसैकेराइड), दो से दस (ऑलिगोसैकेराइड), बहुत सारी (पॉलीसैकेराइड)। ग्लूकोज़ छह कार्बन वाला ऐल्डोज़ है, फ्रक्टोज़ कीटोज़। दो इकाइयाँ –O– पुल (ग्लाइकोसाइडी बंध) से जुड़कर सुक्रोज़, माल्टोज़, लैक्टोज़ बनाती हैं; सैकड़ों जुड़कर स्टार्च, सेलुलोज़, ग्लाइकोजन।
- लिपिड: वसा, तेल और अन्य – लिपिड वे जैव-अणु हैं जो पानी में नहीं घुलते। मुख्य हैं वसा और तेल (ट्राइग्लिसराइड): एक ग्लिसरॉल से तीन वसीय अम्ल एस्टर बंध से जुड़े। संतृप्त वसीय अम्लों की पूँछ सीधी होती है और ठोस वसा बनती है; असंतृप्त में C=C द्विबंध, मुड़ी पूँछ और द्रव तेल। फ़ॉस्फ़ोलिपिड कोशिका झिल्ली बनाते हैं और कोलेस्ट्रॉल जैसे स्टेरॉयड हार्मोन बनाते हैं।
- प्रोटीन और एंज़ाइम: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड बंध, संरचना और विकृतीकरण – प्रोटीन ऐमीनो अम्लों की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर ऐमीनो अम्ल के एक कार्बन पर ऐमीनो समूह (–NH₂), अम्ल समूह (–COOH), एक हाइड्रोजन और एक पार्श्व समूह R होता है। एक का –COOH अगले के –NH₂ से पानी निकालकर जुड़ता है: यह पेप्टाइड बंध (–CO–NH–) है। ऐमीनो अम्लों का क्रम प्राथमिक संरचना; कुंडली और परत द्वितीयक; पूरा 3D मोड़ तृतीयक; कई शृंखलाएँ साथ में चतुर्धातुक संरचना। गर्मी, अम्ल या ऐल्कोहॉल मोड़ खोल देते हैं (विकृतीकरण)। एंज़ाइम ज़्यादातर प्रोटीन हैं जो शरीर की अभिक्रियाएँ तेज़ करते हैं।
- विटामिन, न्यूक्लिक अम्ल और हॉर्मोन: प्रकार, कार्य, DNA और RNA – विटामिन छोटे कार्बनिक यौगिक हैं जो भोजन से बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए; A, D, E, K वसा में और B, C पानी में घुलते हैं, और हर एक की कमी से एक खास रोग होता है। न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) न्यूक्लियोटाइड की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर न्यूक्लियोटाइड = पेंटोज़ शर्करा + फॉस्फेट + नाइट्रोजनी क्षार। DNA में डीऑक्सीराइबोज़, क्षार A, G, C, T और द्विकुंडली में दो लड़ियाँ, जहाँ A–T और G–C जोड़े बनते हैं। RNA में राइबोज़, T की जगह U, और प्रायः एक लड़ी। हॉर्मोन ग्रंथियों के बनाए रासायनिक संदेशवाहक हैं: स्टेरॉयड, प्रोटीन/पेप्टाइड या ऐमीनो अम्ल व्युत्पन्न।
- स्वस्थ जीवनशैली: रोज़ की आदतें जो तुम्हें ठीक रखें – स्वस्थ जीवनशैली रोज़ की अच्छी आदतों का नाम है: पाँच भोजन-समूहों वाला संतुलित आहार, भरपूर पानी, स्कूली बच्चों के लिए 9–11 घंटे और किशोरों के लिए लगभग 8–10 घंटे नींद, रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल-कूद, सही मुद्रा, साफ-सुरक्षित भोजन, और तंबाकू, शराब व नशे से दूरी। इनसे टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसे जीवनशैली रोगों का खतरा घटता है।
2. Molecular genetics
DNA replication · Gene expression and genetic code · Mutations · Gene regulation · Prokaryotic and eukaryotic genomes
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
- प्रोटीन संश्लेषण: जीन से प्रोटीन तक – जीन DNA का एक हिस्सा है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की विधि लिखी होती है। अनुलेखन (transcription) में केंद्रक के अंदर जीन की नकल mRNA में बनती है; T की जगह U आता है। mRNA कोशिकाद्रव्य में राइबोसोम तक जाता है। स्थानांतरण (translation) में राइबोसोम mRNA को 3-3 क्षार (कोडॉन) करके पढ़ता है। हर कोडॉन एक अमीनो अम्ल से मेल खाता है जिसे tRNA लाता है। अमीनो अम्ल जुड़कर श्रृंखला बनाते हैं, जो मुड़कर प्रोटीन बनती है। DNA में बदलाव (उत्परिवर्तन) से प्रोटीन बदल सकता है।
- उत्परिवर्तन (Mutation) – उत्परिवर्तन DNA में अचानक होने वाला स्थायी बदलाव है। जीन (बिंदु) उत्परिवर्तन में एक या कुछ क्षार बदलते हैं: प्रतिस्थापन, जोड़ या विलोपन। जोड़ और विलोपन पढ़ने का ढाँचा खिसका देते हैं। गुणसूत्र उत्परिवर्तन में बड़े टुकड़े या गुणसूत्रों की संख्या बदलती है। ये संयोग से या उत्परिवर्तजनों (UV, X-किरणें, कुछ रसायन) से होते हैं। ये हानिकारक, तटस्थ या लाभदायक हो सकते हैं और हर आनुवंशिक विविधता की पहली जड़ हैं।
- जीन नियमन: कोशिका जीन को चालू और बंद कैसे करती है – हर कोशिका में एक जैसा DNA है, पर वह कुछ ही जीन इस्तेमाल करती है। नियंत्रण ज़्यादातर अनुलेखन (transcription) की शुरुआत पर होता है। बैक्टीरिया में लैक ऑपेरॉन कई जीनों का एक समूह है जिसका एक प्रमोटर और एक ऑपरेटर है: लैक्टोज़ न हो तो रिप्रेसर उसे बंद रखता है; लैक्टोज़ रिप्रेसर को हटा देता है और जीन पढ़े जाते हैं (प्रेरणीय ऑपेरॉन)। यूकैरियोट में ट्रांसक्रिप्शन फ़ैक्टर, एन्हांसर और साइलेंसर हर जीन को नियंत्रित करते हैं, और एपिजेनेटिक निशान (DNA मिथाइलेशन, हिस्टोन पैकिंग) DNA का क्रम बदले बिना जीन बंद रख सकते हैं। अलग-अलग चालू/बंद पैटर्न से अलग कोशिकाएँ बनती हैं (विभेदन)।
3. Cell biology
Cell theory · Light and electron microscopy · Plasma membrane · Osmosis in cells · Membrane transport and organelles · Cell cycle regulation · Mitosis and meiosis · Cancer
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- झिल्ली परिवहन: कोशिका में चीज़ें अंदर-बाहर कैसे जाती हैं – कोशिका झिल्ली वसा जैसे अणुओं की पतली दोहरी परत है जिसमें प्रोटीन लगे होते हैं. यह कुछ पदार्थों को जाने देती है और कुछ को रोकती है (चयनात्मक पारगम्य). विसरण में कण ज़्यादा सांद्रता से कम सांद्रता की ओर बिना ऊर्जा जाते हैं. सुसाध्य विसरण यही काम प्रोटीन चैनल से करता है. परासरण आंशिक पारगम्य झिल्ली से पानी का विसरण है. सक्रिय परिवहन ATP और प्रोटीन पंप से कणों को कम से ज़्यादा सांद्रता की ओर ले जाता है. बहुत बड़ी चीज़ें बुलबुलों में आती-जाती हैं (एंडोसाइटोसिस, एक्सोसाइटोसिस).
- कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन – कोशिका एक तय क्रम में बढ़ती है, DNA दोहराती है और बँटती है – इसे कोशिका चक्र कहते हैं: अंतरावस्था (G1, S, G2) और M प्रावस्था। S प्रावस्था में DNA दोगुना (2C → 4C) होता है, पर गुणसूत्र संख्या वही रहती है। समसूत्री विभाजन (पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था) और कोशिकाद्रव्य विभाजन से जनक जैसी दो कोशिकाएँ बनती हैं – यह समीकरणीय विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते हैं; अर्धसूत्री I में समजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं, जीन विनिमय करते हैं और अलग होते हैं, जिससे गुणसूत्र संख्या आधी (2n → n) होती है। इससे युग्मकों के लिए चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं और विविधता आती है।
4. Metabolism
Concept of metabolism · Anabolism and catabolism · Cellular respiration pathways · Energy yield of metabolism · Anabolic pathways
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।
- ATP: कोशिका की ऊर्जा मुद्रा – ATP (एडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट) एक न्यूक्लियोटाइड है जिसमें एडेनिन क्षार, राइबोज़ शर्करा और तीन फॉस्फेट समूह होते हैं। ATP हाइड्रोलेज़ एंज़ाइम पानी की मदद से आख़िरी फॉस्फेट अलग करता है (जल-अपघटन): ATP + H₂O → ADP + Pi, और लगभग 30 kJ प्रति मोल ऊर्जा छोटे, काम के हिस्सों में निकलती है। श्वसन और प्रकाश-संश्लेषण के समय ATP सिंथेज़ ADP और Pi को संघनन से फिर जोड़ता है। कोशिका ATP जमा नहीं करती, लगातार बनाती और खर्च करती है। एक ग्लूकोज से वायवीय श्वसन में लगभग 30–32 ATP, पर अवायवीय में सिर्फ़ 2 ATP मिलते हैं।
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
5. Biotechnology
Genetic engineering techniques · Impact of biotechnology
- जैव प्रौद्योगिकी: सिद्धांत व प्रक्रम (पुनर्योगज DNA तकनीक) – आनुवंशिक इंजीनियरिंग यानी किसी जीव के जीन जान-बूझकर बदलना। चाहा गया जीन प्रतिबंधन एंज़ाइम (आणविक कैंची) से काटते हैं, DNA लाइगेज़ (आणविक गोंद) से वाहक DNA में जोड़ते हैं, परपोषी कोशिका में डालते हैं, सही कोशिकाएँ चुनते हैं और बड़े टैंक (बायोरिएक्टर) में उगाकर उत्पाद निकालते हैं। PCR जीन की लाखों प्रतियाँ बनाता है और जेल वैद्युतकणसंचलन DNA टुकड़ों को आकार के हिसाब से अलग करता है।
- जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग – आनुवंशिक इंजीनियरिंग के औज़ार दवा, खेती और शोध में काम आते हैं। जीवाणु मानव इंसुलिन बनाते हैं; यीस्ट सुरक्षित टीका-प्रोटीन बनाता है। स्टेम कोशिकाएँ कई प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। जीन थेरेपी रोगी की कोशिकाओं में सही जीन डालती है। Bt कपास जैसी GM फसलों में कीट मारने वाले प्रोटीन का जीन होता है। पारजीनी जंतु रोग समझने या दवा बनाने में मदद करते हैं। ये शक्तिशाली हैं, इसलिए भारत में GEAC इन पर नज़र रखती है और कानून बायोपायरेसी व अनुचित पेटेंट से बचाते हैं।
6. Immunology
Concept of immunity · External barriers · Innate and specific immunity · Humoral and cellular immunity · Types of acquired immunity · Phases of infectious disease · Immune system disorders
- प्रतिरक्षा तंत्र: शरीर रोगाणुओं से कैसे लड़ता है – रोगाणु (रोगजनक) संक्रामक रोग करते हैं। शरीर में रक्षा की तीन पंक्तियाँ हैं: अवरोध (त्वचा, श्लेष्मा, अम्ल), तेज़ सामान्य (सहज) प्रतिरक्षा (सूजन, बुखार, भक्षक कोशिकाएँ) और धीमी पर विशिष्ट (उपार्जित) प्रतिरक्षा (B कोशिकाएँ एंटीबॉडी बनाती हैं, T कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाएँ मारती हैं)। स्मृति कोशिकाएँ दूसरे हमले को जल्दी रोकती हैं। टीका सुरक्षित रूप से स्मृति बनाता है। गड़बड़ी: एलर्जी, स्व-प्रतिरक्षी रोग, प्रतिरक्षा की कमी (जैसे HIV)।
- मानव स्वास्थ्य तथा रोग – स्वास्थ्य का मतलब है शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों ठीक हों। रोग कई बार कीटाणुओं (रोगजनक) से होते हैं: जीवाणु, वायरस, प्रोटोज़ोआ, कृमि और कवक। शरीर दो तरह की प्रतिरक्षा से लड़ता है: सहज (जन्म से) और उपार्जित (सीखी हुई, याद रखने वाली)। टीके इसी याददाश्त का उपयोग करते हैं। HIV सहायक T कोशिकाओं को नष्ट करके एड्स करता है। कैंसर में कोशिकाएँ बिना रुके बँटती हैं। नशा और शराब किशोरों के शरीर और मन को नुकसान पहुँचाते हैं।