जल का अणु: मुड़ा हुआ और ध्रुवीय
जल का अणु H₂O है: दो हाइड्रोजन, एक ऑक्सीजन से सहसंयोजी बंध (covalent bond) से जुड़े। बंधों के बीच कोण लगभग 104.5° है, इसलिए अणु मुड़ा हुआ है।
ऑक्सीजन ज़्यादा विद्युत-ऋणात्मक (electronegative) है, यानी साझा इलेक्ट्रॉनों को ज़ोर से खींचता है। इसलिए ऑक्सीजन पर हल्का ऋण आवेश δ− और हाइड्रोजन पर हल्का धन आवेश δ+ आता है।
जिस अणु का एक सिरा धन और दूसरा ऋण हो, वह ध्रुवीय (द्विध्रुव, dipole) है। अणु मुड़ा है, इसलिए आवेश एक-दूसरे को काटते नहीं।
जल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध
एक अणु का δ+ हाइड्रोजन पास वाले अणु के δ− ऑक्सीजन को खींचता है। इस खिंचाव को हाइड्रोजन बंध कहते हैं।
- एक हाइड्रोजन बंध कमज़ोर है (सहसंयोजी बंध का लगभग 1/20)।
- पर ये लाखों होते हैं, लगातार टूटते-बनते रहते हैं, इसलिए मिलकर मज़बूत हैं।
- एक जल अणु अधिकतम 4 हाइड्रोजन बंध बना सकता है।
जल के लगभग सारे खास गुण इन्हीं बंधों से आते हैं।
जल के गुण और जीवन में उनका महत्व
1. बहुत अच्छा विलायक (solvent)
आयन और ध्रुवीय अणु (नमक, ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल) जल में घुलते हैं क्योंकि जल के अणु उन्हें घेर लेते हैं। घुले पदार्थ अभिक्रिया कर सकते हैं और एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं। तेल और वसा जैसे अध्रुवीय पदार्थ नहीं घुलते (जलविरागी, hydrophobic)।
2. उच्च विशिष्ट ऊष्मा धारिता
1 g जल का तापमान 1 °C बढ़ाने में 4.18 J लगते हैं। पहले ऊर्जा हाइड्रोजन बंध तोड़ने में जाती है। इसलिए जल धीरे गरम और धीरे ठंडा होता है। शरीर, कोशिकाएँ, झीलें और समुद्र स्थिर तापमान पर रहते हैं।
3. वाष्पन की उच्च गुप्त ऊष्मा
जल को भाप बनाने में बहुत ऊर्जा (लगभग 2260 J प्रति g) लगती है। पसीना सूखते समय यह ऊष्मा त्वचा से लेता है, इसलिए थोड़े पानी में ही शरीर ठंडा हो जाता है।
4. संसंजन, आसंजन और पृष्ठ तनाव
संसंजन (cohesion) = जल का जल से चिपकना। आसंजन (adhesion) = जल का दूसरी सतह से चिपकना। दोनों मिलकर ऊँचे पेड़ों की जाइलम में पानी का लंबा स्तंभ ऊपर खींचते हैं। सतह पर संसंजन से पृष्ठ तनाव बनता है, इसलिए कुछ कीड़े पानी पर चल लेते हैं।
5. बर्फ़ जल से कम घनी
जल लगभग 4 °C पर सबसे घना होता है। बर्फ़ तैरती है और नीचे के पानी को ठंड से बचाती है, जिससे जलीय जीव सर्दी में बचे रहते हैं।
6. उपापचयज और परिवहन माध्यम
जल जल-अपघटन (hydrolysis) और प्रकाश-संश्लेषण में इस्तेमाल होता है, और संघनन अभिक्रियाओं व श्वसन में बनता है। रक्त प्लाज़्मा, पौधों का रस और मूत्र ज़्यादातर पानी हैं। कोशिकाओं में पानी का दबाव (स्फीति, turgor) पौधों को सीधा रखता है।
खनिज लवण (अकार्बनिक आयन)
जीवों के पानी में घुले खनिज लवण आयनों के रूप में रहते हैं। हर एक का काम है:
- Na⁺, K⁺: तंत्रिका आवेग, पानी का संतुलन।
- Ca²⁺: हड्डियाँ और दाँत, मांसपेशी संकुचन, खून का थक्का।
- Fe²⁺: हीमोग्लोबिन का हिस्सा, ऑक्सीजन ढोता है।
- PO₄³⁻ (फ़ॉस्फ़ेट): DNA, RNA और ATP में।
- H⁺: pH तय करता है; Cl⁻: पेट का अम्ल और लवण संतुलन।
मानव शरीर का लगभग 60–70% पानी है। इसलिए पानी और लवण की कमी (निर्जलीकरण) खतरनाक है। ORS घोल दोनों की भरपाई करता है।
खुद करो: रसोई के तीन प्रयोग
- सिक्के पर बूँदें: गिनो कि छलकने से पहले सिक्के पर कितनी बूँदें टिकती हैं। ऊपर बना गुंबद पृष्ठ तनाव (संसंजन) है।
- तैरती बर्फ़: एक बर्फ़ का टुकड़ा पानी में और एक तेल में डालो। पानी में तैरता है, ज़्यादातर खाने के तेल में डूबता है।
- नमक बनाम तेल: पानी में एक चम्मच नमक और एक चम्मच तेल मिलाओ। नमक घुल जाता है, तेल बूँदें बनाता है (अध्रुवीय)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: ध्रुवीय अणु, δ+ / δ−, हाइड्रोजन बंध, विलायक, विलेय, जलरागी, जलविरागी
- जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता c ≈ 4.18 J g⁻¹ °C⁻¹; ऊष्मा Q = m × c × ΔT
- जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा ≈ 2260 J g⁻¹; ऊष्मा Q = m × L
- संसंजन = जल–जल आकर्षण; आसंजन = जल–सतह आकर्षण; द्रव जल 4 °C पर सबसे घना, बर्फ़ कम घनी
हल किए गए उदाहरण
1. 200 g पानी को 20 °C से 70 °C तक गरम करने में कितनी ऊष्मा लगेगी?
Q = m × c × ΔT = 200 × 4.18 × 50 = 41 800 J ≈ 41.8 kJ। थोड़ा तापमान बढ़ाने में भी पानी बहुत ऊर्जा लेता है।
2. एक धावक का 300 g पसीना भाप बनकर उड़ता है। लगभग कितनी ऊष्मा शरीर से निकली?
Q = m × L = 300 × 2260 = 678 000 J ≈ 678 kJ। इतनी ऊष्मा जाने से ही पसीना हमें ठंडा करता है।
3. ग्लूकोज़ प्लाज़्मा में घुल जाता है, पर कोलेस्ट्रॉल को खास कणों में क्यों ढोया जाता है?
ग्लूकोज़ में कई ध्रुवीय –OH समूह हैं, जिनसे जल हाइड्रोजन बंध बनाकर उसे घेर लेता है: वह घुल जाता है। कोलेस्ट्रॉल ज़्यादातर अध्रुवीय है, इसलिए जल उसे नहीं घेर पाता। उसे लाइपोप्रोटीन में लपेटकर ले जाया जाता है।
आम गलतियाँ
- अणु के अंदर के O–H बंध को हाइड्रोजन बंध कहना। अंदर वाले सहसंयोजी बंध हैं; हाइड्रोजन बंध अलग-अलग अणुओं के बीच होते हैं।
- सोचना कि जल में पूरे आवेश वाले आयन हैं। उसमें सिर्फ़ हल्के आंशिक आवेश (δ+ और δ−) हैं।
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता (गरम करने की ऊष्मा) और वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (भाप बनाने की ऊष्मा) को एक समझना।
- कहना कि बर्फ़ में हवा भरी है इसलिए तैरती है। असल में हाइड्रोजन बंध अणुओं को दूर-दूर रखते हैं, इसलिए बर्फ़ कम घनी है।