South 고등학교 3학년 Chemistry II
अध्याय: 4
1. States of matter and solutions
Gas variables · Ideal gas equation · Mole fractions and partial pressure · Intermolecular forces · Special properties of water · Vapour pressure and boiling · Types of solids · Concentration units · Colligative properties · Osmosis
- आदर्श गैस समीकरण PV = nRT और गैस को दबाने में कार्य – गैस अनगिनत छोटे-छोटे अणुओं से बनी है जो हर तरफ़ भागते रहते हैं। दीवारों पर उनकी टक्कर से दाब बनता है। कम घनत्व वाली गैस के लिए तीन आसान नियम हैं: ताप स्थिर हो तो P × V स्थिर (बॉयल); दाब स्थिर हो तो V केल्विन ताप के साथ बढ़ता है (चार्ल्स); एक जैसे P और T पर बराबर आयतन में बराबर अणु (आवोगाद्रो)। तीनों मिलकर बनते हैं PV = nRT = N k T। एक मोल में 6.022 × 10²³ कण होते हैं, यही आवोगाद्रो संख्या है। पिस्टन को अंदर धकेलने में गैस पर कार्य होता है; यह कार्य P–V ग्राफ़ के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर है, और स्थिर ताप पर W = nRT ln(V₁/V₂)।
- गैस के नियम: दाब, आयतन और ताप का आपसी रिश्ता – गैस का दाब कणों के दीवार से टकराने से बनता है। गैस की तय मात्रा के लिए: बॉयल का नियम P₁V₁ = P₂V₂ (ताप स्थिर); चार्ल्स का नियम V₁/T₁ = V₂/T₂ (दाब स्थिर); दाब (गे-लुसाक) नियम P₁/T₁ = P₂/T₂ (आयतन स्थिर)। ताप हमेशा केल्विन में। संयुक्त नियम: P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂। डाल्टन: मिश्रण का कुल दाब = आंशिक दाबों का योग; आंशिक दाब = मोल अंश × कुल दाब।
- अंतराअणुक बल – अंतराअणुक बल अणुओं के बीच के कमज़ोर आकर्षण हैं। समान आकार के अणुओं में कमज़ोर से मज़बूत: लंदन परिक्षेपण < द्विध्रुव–द्विध्रुव < हाइड्रोजन आबंध। बल जितना मज़बूत, गलनांक और क्वथनांक, श्यानता और पृष्ठ तनाव उतने ज़्यादा; यही तय करते हैं कि क्या किसमें घुलेगा।
- जल: छोटा-सा अणु जो जीवन संभव बनाता है – जल का अणु (H₂O) मुड़ा हुआ और ध्रुवीय है: ऑक्सीजन थोड़ा ऋण आवेशित और हाइड्रोजन थोड़े धन आवेशित। इसी कारण जल के अणु हाइड्रोजन बंध से आपस में चिपकते हैं। इन्हीं बंधों से जल बहुत-से पदार्थ घोलता है, बहुत ऊष्मा जमा करता है, भाप बनने में बहुत ऊर्जा लेता है, आपस में (संसंजन) और सतहों से (आसंजन) चिपकता है, और बर्फ़ तैरती है। जीव जल को अभिक्रियाओं, परिवहन और कोशिकाओं को कसा रखने में भी इस्तेमाल करते हैं। जल में घुले खनिज लवण Na⁺, K⁺, Ca²⁺, Fe²⁺ और फ़ॉस्फ़ेट जैसे आयन देते हैं।
- अवस्था परिवर्तन: गुप्त ऊष्मा, वाष्प दाब और प्रावस्था आरेख – अवस्था परिवर्तन में पदार्थ ठोस, द्रव और गैस के बीच बदलता है। बदलते समय तापमान वही रहता है; लगी ऊष्मा गुप्त ऊष्मा है (Q = m × L)। द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब बाहर के दाब के बराबर हो जाए, इसलिए कम दाब पर क्वथनांक घटता है। प्रावस्था आरेख हर तापमान और दाब पर अवस्था दिखाता है; इसकी रेखाएँ त्रिक बिंदु पर मिलती हैं और द्रव-गैस रेखा क्रांतिक बिंदु पर ख़त्म होती है।
- ठोस अवस्था (Solid State) – ठोस में कण पास-पास होते हैं और अपनी जगह पर सिर्फ़ कंपन करते हैं, इसलिए ठोस का आकार तय रहता है। क्रिस्टलीय ठोस में कण एक नियमित पैटर्न में दोहराते हैं; अक्रिस्टलीय ठोस (जैसे काँच) में नहीं। सबसे छोटा दोहराने वाला डिब्बा एकक कोष्ठिका है। सरल घन में 1, अंतःकेंद्रित घन में 2 और फलक-केंद्रित घन में 4 कण होते हैं। बंधन के आधार पर क्रिस्टल आयनिक, सहसंयोजक जालक, आण्विक या धात्विक होते हैं।
- विलयन: प्रकार, सांद्रता और हेनरी का नियम – विलयन दो या ज़्यादा पदार्थों का एकसमान मिश्रण है। जो ज़्यादा मात्रा में हो वह विलायक, जो कम हो वह विलेय। विलयन कितना 'गाढ़ा' है, यह सांद्रता के पदों से बताते हैं: द्रव्यमान %, आयतन %, ppm, मोल अंश, मोलरता (1 लीटर विलयन में) और मोललता (1 kg विलायक में)। ठोस अक्सर गर्म करने पर ज़्यादा घुलते हैं। गैस दाब बढ़ाने पर ज़्यादा घुलती है (हेनरी का नियम, p = KH·x) और गर्म करने पर कम।
- अणुसंख्य गुणधर्म: कणों की गिनती, उनकी किस्म नहीं – अणुसंख्य गुणधर्म सिर्फ़ इस पर निर्भर हैं कि विलयन में विलेय के कितने कण हैं, वे कौन-से हैं इस पर नहीं। चार हैं: वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Δp/p° = x₂), क्वथनांक उन्नयन (ΔTb = Kb·m), हिमांक अवनमन (ΔTf = Kf·m) और परासरण दाब (π = CRT)। इनसे मोलर द्रव्यमान निकालते हैं। जो लवण आयनों में टूटते हैं (NaCl) या जो अणु जोड़े बनाते हैं (बेंज़ीन में एसिटिक अम्ल), वे असामान्य मोलर द्रव्यमान देते हैं, जिसे वान्ट हॉफ़ गुणक i से ठीक करते हैं।
2. Reaction enthalpy and equilibrium
Thermochemical equations · Bond energies and Hess's law · Equilibrium constant · Le Chatelier · Phase diagrams · Ionisation constants · Buffers
- एन्थैल्पी, कैलोरीमिति और हेस का नियम – एन्थैल्पी H = U + pV। स्थिर दाब पर ली या दी गई ऊष्मा ΔH के बराबर होती है; स्थिर आयतन पर ΔU के बराबर। ΔU को बंद बम कैलोरीमीटर में और ΔH को खुले कप कैलोरीमीटर में मापते हैं: q = CΔT या q = mcΔT। गैसों के लिए ΔH = ΔU + Δn_g RT। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔrH ऋणात्मक, ऊष्माशोषी में धनात्मक; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। हेस का नियम: अभिक्रिया एक चरण में हो या कई में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन एक ही रहता है, इसलिए ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणित की तरह जोड़ सकते हैं।
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- ला-शातेलिए सिद्धांत: साम्य को प्रभावित करने वाले कारक – ला-शातेलिए सिद्धांत कहता है: साम्य पर किसी निकाय को छेड़ो, तो वह उस दिशा में खिसकता है जिससे वह छेड़छाड़ कम हो। अभिकारक डालो या उत्पाद निकालो → आगे। दाब बढ़ाओ (आयतन घटाओ) → कम गैस मोल वाली ओर। ताप बढ़ाओ → ऊष्माशोषी दिशा में, और K बदलता है। उत्प्रेरक सिर्फ़ जल्दी साम्य लाता है, उसे खिसकाता नहीं। स्थिर आयतन पर अक्रिय गैस से कुछ नहीं बदलता; स्थिर दाब पर यह दाब घटाने जैसा है। K सिर्फ़ ताप से बदलता है।
- अवस्था परिवर्तन: गुप्त ऊष्मा, वाष्प दाब और प्रावस्था आरेख – अवस्था परिवर्तन में पदार्थ ठोस, द्रव और गैस के बीच बदलता है। बदलते समय तापमान वही रहता है; लगी ऊष्मा गुप्त ऊष्मा है (Q = m × L)। द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब बाहर के दाब के बराबर हो जाए, इसलिए कम दाब पर क्वथनांक घटता है। प्रावस्था आरेख हर तापमान और दाब पर अवस्था दिखाता है; इसकी रेखाएँ त्रिक बिंदु पर मिलती हैं और द्रव-गैस रेखा क्रांतिक बिंदु पर ख़त्म होती है।
- आयनिक साम्य: अम्ल, क्षारक, आयनन और pH – अम्ल और क्षारक की तीन परिभाषाएँ हैं: आरेनियस (पानी में H⁺ या OH⁻ देना), ब्रॉन्स्टेड–लोरी (प्रोटॉन दाता या ग्राही) और लुइस (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही या दाता)। प्रबल अम्ल-क्षारक पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल थोड़े, और उनका साम्य Ka या Kb से लिखा जाता है। पानी भी थोड़ा आयनित होता है: 25 °C पर Kw = [H⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴। pH = −log[H⁺], pH + pOH = 14। दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए α ≈ √(K/C), यानी तनु करने पर α बढ़ता है (ओस्टवाल्ड तनुता नियम)। संयुग्मी युग्म के लिए Ka × Kb = Kw। दुर्बल अम्ल या क्षारक से बने लवण पानी से क्रिया करते हैं (जल-अपघटन)।
- बफ़र विलयन और विलेयता गुणनफल – बफ़र वह विलयन है जिसमें थोड़ा अम्ल या क्षारक डालने पर भी pH लगभग वही रहता है। अम्लीय बफ़र = दुर्बल अम्ल + उसका लवण (CH₃COOH + CH₃COONa); क्षारीय बफ़र = दुर्बल क्षारक + उसका लवण (NH₄OH + NH₄Cl)। pH हेंडरसन समीकरण से: pH = pKa + log([लवण]/[अम्ल])। अल्प-विलेय लवण अपने संतृप्त घोल में आयनों से साम्य बनाता है; आयन सांद्रताओं का गुणनफल (गुणांक की घात में) विलेयता गुणनफल Ksp है। AB के लिए Ksp = s², AB₂ या A₂B के लिए Ksp = 4s³। आयनिक गुणनफल Q > Ksp हो तो अवक्षेप बनता है। सम-आयन विलेयता घटाता है।
3. Reaction rates and catalysts
Rates vary · Rate laws from data · First-order half-life · Activation energy · Concentration effects · Temperature effects · Catalysts · Catalysts in life and industry
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
- समाकलित वेग समीकरण: शून्य और प्रथम कोटि – समाकलित वेग समीकरण सांद्रता को समय से जोड़ते हैं। शून्य कोटि: [R] = [R]₀ − kt (सीधी रेखा), t½ = [R]₀/2k। प्रथम कोटि: k = (2.303/t) log([R]₀/[R]); ln[R] बनाम t सीधी रेखा, ढलान −k; t½ = 0.693/k, जो शुरुआती मात्रा पर निर्भर नहीं।
- ताप, सक्रियण ऊर्जा, उत्प्रेरक और संघट्ट सिद्धांत – उत्पाद बनने के लिए अभिकारक अणुओं को एक ऊर्जा पहाड़ी चढ़नी होती है, जिसे सक्रियण ऊर्जा Ea कहते हैं। आरेनियस समीकरण k = A e^(−Ea/RT) बताता है कि ताप थोड़ा बढ़ने पर बहुत ज़्यादा अणु पहाड़ी पार करते हैं, इसलिए k तेज़ी से बढ़ता है। उत्प्रेरक नीची पहाड़ी देता है, ΔH नहीं बदलता। संघट्ट सिद्धांत: अणु तभी अभिक्रिया करते हैं जब पर्याप्त ऊर्जा और सही दिशा से टकराएँ।
- उत्प्रेरक: बिना ख़र्च हुए अभिक्रिया तेज़ करना – उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया को तेज़ करता है पर ख़ुद ख़र्च नहीं होता; अंत में उसका द्रव्यमान और रासायनिक स्वभाव वही रहता है। यह अभिक्रिया को कम सक्रियण ऊर्जा वाला दूसरा रास्ता देता है। मैंगनीज़ डाइऑक्साइड हाइड्रोजन परॉक्साइड को पानी और ऑक्सीजन में तेज़ी से तोड़ता है। एंज़ाइम जीवों के उत्प्रेरक हैं।
- एंजाइम (Enzymes) – एंजाइम प्रोटीन होते हैं जो जैव उत्प्रेरक (biological catalyst) का काम करते हैं: ये कोशिका की क्रियाओं को तेज़ करते हैं और ख़ुद ख़र्च नहीं होते। हर एंजाइम का एक सक्रिय स्थल (active site) होता है जिसमें सिर्फ़ एक तरह का सब्सट्रेट फिट होता है (विशिष्टता)। एंजाइम सक्रियण ऊर्जा घटाकर काम करते हैं। ये एक इष्टतम तापमान और pH पर सबसे अच्छा काम करते हैं; ज़्यादा गर्मी या ग़लत pH से इनका आकार बिगड़ जाता है (विकृतीकरण)।
4. Electrochemistry
Galvanic cells · Electrolysis · Hydrogen fuel cells
- गैल्वेनी सेल और नेर्न्स्ट समीकरण – गैल्वेनी सेल अपने-आप होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की ऊर्जा को बिजली में बदलता है। ऐनोड (−) पर ऑक्सीकरण और कैथोड (+) पर अपचयन होता है। हर इलेक्ट्रोड का विभव मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (0 V) से नापा जाता है। E°सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड। नेर्न्स्ट समीकरण E = E° − (0.059/n) log Q (298 K पर) किसी भी सांद्रता पर वोल्टेज बताता है, और ΔG = −nFE वोल्टेज को ऊर्जा से जोड़ता है।
- वैद्युत अपघटन, बैटरी, ईंधन सेल और संक्षारण – वैद्युत-अपघटनी सेल में बाहर का बिजली स्रोत ऐसी अभिक्रिया करवाता है जो अपने-आप नहीं होती: धनायन कैथोड (−) पर अपचयित और ऋणायन ऐनोड (+) पर ऑक्सीकृत होते हैं। फैराडे के नियम द्रव्यमान को आवेश से जोड़ते हैं: m = (M/nF) × I × t। कौन-सा उत्पाद बनेगा यह इलेक्ट्रोड विभव और अधिविभव पर निर्भर है। बैटरियाँ गैल्वेनी सेल हैं: प्राथमिक (शुष्क सेल, मर्करी सेल) दोबारा चार्ज नहीं होतीं; द्वितीयक (लेड संचायक, Ni–Cd) होती हैं। ईंधन सेल H₂ और O₂ से सीधे बिजली बनाता है। संक्षारण (जंग) धातु की सतह पर बना एक अनचाहा गैल्वेनी सेल है।