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समाकलित वेग समीकरण: शून्य और प्रथम कोटि

समाकलित वेग समीकरण सांद्रता को समय से जोड़ते हैं। शून्य कोटि: [R] = [R]₀ − kt (सीधी रेखा), t½ = [R]₀/2k। प्रथम कोटि: k = (2.303/t) log([R]₀/[R]); ln[R] बनाम t सीधी रेखा, ढलान −k; t½ = 0.693/k, जो शुरुआती मात्रा पर निर्भर नहीं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. शून्य कोटि: हर सेकंड बराबर मात्रा घटती है। ब्लॉक एक-एक करके एक जैसी रफ़्तार से गायब होते हैं, ग्राफ़ सीधी रेखा है।
  2. प्रथम कोटि: जितना ज़्यादा बचा, उतनी तेज़ी से घटता है। शुरू में तेज़, बाद में धीमा, इसलिए ग्राफ़ वक्र है।
  3. [R] की जगह ln[R] खींचो। प्रथम कोटि में सीधी रेखा मिलती है। इसका ढलान −k है। इसी से प्रथम कोटि पहचानते हैं।
  4. प्रथम कोटि की अर्धायु: 16 ब्लॉक 8, फिर 4, फिर 2 होते हैं, हर बार बराबर समय t½ = 0.693/k में। शुरुआती मात्रा से फ़र्क नहीं पड़ता।
  5. शून्य कोटि की अर्धायु: t½ = [R]₀/2k। स्लेटी रन दोगुनी मात्रा से शुरू होता है, उसकी अर्धायु भी दोगुनी है।
  6. अब खुद खेलो: कोटि, k और शुरुआती मात्रा बदलो; ब्लॉक, ग्राफ़ और t½ देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

शून्य कोटि अभिक्रिया हमेशा एक ही रफ़्तार से क्यों चलती है?

कोई और चीज़ रफ़्तार सीमित करती है, जैसे पूरी भरी उत्प्रेरक सतह। अभिकारक बढ़ाने से फ़ायदा नहीं, इसलिए हर सेकंड बराबर मात्रा जाती है।

प्रथम कोटि अभिक्रिया धीमी क्यों होती जाती है?

इसका वेग बची मात्रा पर निर्भर है। मात्रा घटती है तो वेग भी घटता है और वक्र चपटा होता है।

ln[R] क्यों लें? सीधा [R] क्यों नहीं?

वक्र पढ़ना कठिन है, सीधी रेखा आसान। ln प्रथम कोटि के वक्र को सीधी रेखा बना देता है जिसका ढलान सीधे −k देता है।

क्या प्रथम कोटि अभिक्रिया कभी पूरी ख़त्म होती है?

सिद्धांत में यह हमेशा आधी होती रहती है। व्यवहार में लगभग 10 अर्धायु के बाद 1/1024 बचता है, जिसे पूरा मान लेते हैं।

शून्य कोटि की अर्धायु [R]₀ के साथ क्यों बढ़ती है?

प्रति सेकंड घटने वाली मात्रा तय है। आधे तक पहुँचने के लिए ज़्यादा घटाना हो तो ज़्यादा समय लगेगा।

समाकलित समीकरण क्यों चाहिए?

वेग नियम एक पल की रफ़्तार बताता है। पर प्रयोगशाला में हमें जानना होता है: 10 मिनट बाद कितना बचेगा? इसके लिए छोटे-छोटे बदलावों को समय के साथ जोड़ते हैं (समाकलन)। नतीजा है समाकलित वेग समीकरण।

शून्य कोटि अभिक्रियाएँ

वेग = −d[R]/dt = k[R]⁰ = k। यानी हर सेकंड बराबर मात्रा घटती है।

व्युत्पत्ति, चरण-दर-चरण:

  1. d[R] = −k dt
  2. समाकलन: [R] = −kt + I
  3. t = 0 पर [R] = [R]₀, इसलिए I = [R]₀
  4. [R] = [R]₀ − kt, या k = ([R]₀ − [R])/t

[R] बनाम t: सीधी रेखा, ढलान −k, अंतःखंड [R]₀। उदाहरण: उच्च दाब पर गर्म प्लैटिनम सतह पर NH₃ का विघटन; कुछ एंज़ाइम अभिक्रियाएँ जब एंज़ाइम पूरा व्यस्त हो।

प्रथम कोटि अभिक्रियाएँ

वेग = −d[R]/dt = k[R]।

व्युत्पत्ति, चरण-दर-चरण:

  1. d[R]/[R] = −k dt
  2. समाकलन: ln[R] = −kt + I
  3. t = 0 पर: I = ln[R]₀
  4. ln[R] = ln[R]₀ − kt, इसलिए k = (1/t) ln([R]₀/[R])
  5. आधार 10 के log में: k = (2.303/t) log([R]₀/[R])
  6. साथ ही [R] = [R]₀ e^(−kt)

ग्राफ़: [R] बनाम t गिरता वक्र; ln[R] (या log[R]) बनाम t सीधी रेखा, ढलान −k (या −k/2.303)। उदाहरण: रेडियोधर्मी क्षय, N₂O₅ का विघटन, एथीन का हाइड्रोजनीकरण।

गैस प्रावस्था की प्रथम कोटि अभिक्रिया

A(g) → B(g) + C(g) स्थिर आयतन पर: शुरुआती दाब p₀ और समय t पर कुल दाब pₜ हो, तो बचे A का दाब = 2p₀ − pₜ। इसलिए

k = (2.303/t) log[p₀/(2p₀ − pₜ)]

अर्धायु (अर्ध-आयु काल)

अर्धायु (t½) वह समय है जिसमें सांद्रता शुरुआती मान की आधी रह जाए।

प्रथम कोटि में n अर्धायु के बाद बचा = [R]₀ × (½)ⁿ।

छद्म प्रथम कोटि अभिक्रियाएँ

कुछ अभिक्रियाओं में दो अभिकारक होते हैं, पर एक बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए उसकी सांद्रता लगभग नहीं बदलती। उदाहरण: एथिल ऐसीटेट का अम्लीय जल-अपघटन, बहुत पानी में गन्ने की शक्कर का प्रतीपन। वेग = k′[एस्टर]; ये प्रथम कोटि समीकरण मानती हैं।

करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच

3D में प्रथम कोटि चुनो। अनुमान लगाओ कि 3 अर्धायु के बाद कितने ब्लॉक बचेंगे (उत्तर: 16 × ⅛ = 2)। अब शून्य कोटि चुनकर [R]₀ दोगुना करो और t½ पढ़ने से पहले अनुमान लगाओ। घर पर: बोतल में पानी भरो, नीचे छोटा छेद करो और हर आधा ख़ाली होने का समय नापो। भरी बोतल तेज़ी से ख़ाली होती है, काफ़ी हद तक प्रथम कोटि जैसा।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. शून्य कोटि अभिक्रिया में k = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹ और [R]₀ = 1.0 mol/L। 20 s बाद [R] और अर्धायु निकालो।

[R] = 1.0 − 0.02 × 20 = 0.6 mol/L। t½ = [R]₀/2k = 1.0/0.04 = 25 s।

2. प्रथम कोटि अभिक्रिया का k = 0.0693 min⁻¹ है। अर्धायु निकालो।

t½ = 0.693/0.0693 = 10 min।

3. प्रथम कोटि की अर्धायु 30 min है। 80 g में से 2 घंटे बाद कितना बचेगा?

2 घंटे = 120 min = 4 अर्धायु। बचा = 80/2⁴ = 5 g।

4. प्रथम कोटि में [R] 40 min में 0.8 से 0.2 mol/L हो जाता है। k निकालो।

k = (2.303/40) log 4 = 0.0576 × 0.602 ≈ 0.0347 min⁻¹।

5. k = 0.0231 min⁻¹। 75% पूरा होने में कितना समय?

75% पूरा → [R] = [R]₀/4। t = (2.303/0.0231) log 4 = 99.7 × 0.602 ≈ 60 min (दो अर्धायु, 30 min वाली)।

6. दिखाओ कि प्रथम कोटि में 99.9% पूरा होने का समय अर्धायु का लगभग 10 गुना है।

99.9% → [R]₀/[R] = 1000। t = (2.303/k) × 3 = 6.909/k। t½ = 0.693/k। अनुपात ≈ 10।

7. प्रथम कोटि अभिक्रिया 10 min में 20% पूरी होती है। k और 50% का समय निकालो।

[R]₀/[R] = 1.25। k = 0.2303 × log 1.25 = 0.2303 × 0.0969 ≈ 0.0223 min⁻¹। t½ = 0.693/0.0223 ≈ 31 min।

8. गैस A → B + C (प्रथम कोटि, स्थिर आयतन)। p₀ = 0.5 atm; 100 s बाद कुल दाब 0.6 atm। k निकालो।

बचे A का दाब = 2 × 0.5 − 0.6 = 0.4 atm। k = (2.303/100) log(0.5/0.4) = 0.02303 × 0.0969 ≈ 2.23 × 10⁻³ s⁻¹।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. शून्य कोटि में [R] बनाम t ग्राफ़ होता है:
2. प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु:
3. प्रथम कोटि में कौन-सा ग्राफ़ सीधी रेखा है?
4. शून्य कोटि में [R]₀ दोगुना करने पर t½:
5. 3 अर्धायु के बाद प्रथम कोटि अभिकारक का बचा अंश:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रथम कोटि अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण क्या है?

k = (2.303/t) log([R]₀/[R]), या [R] = [R]₀e^(−kt)।

शून्य कोटि अभिक्रिया की अर्धायु क्या है?

t½ = [R]₀/2k, यानी शुरुआती सांद्रता के समानुपाती।

रेडियोधर्मी क्षय प्रथम कोटि क्यों है?

हर नाभिक अपने आप टूटता है, इसलिए प्रति सेकंड टूटने वाले नाभिक बचे नाभिकों के समानुपाती होते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12रासायनिक बलगतिकी
इंग्लैंडYear 133.1 Physical chemistry
अमेरिकाGrade 11Kinetics
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Reaction rates
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Reaction rates and catalysts

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