समाकलित समीकरण क्यों चाहिए?
वेग नियम एक पल की रफ़्तार बताता है। पर प्रयोगशाला में हमें जानना होता है: 10 मिनट बाद कितना बचेगा? इसके लिए छोटे-छोटे बदलावों को समय के साथ जोड़ते हैं (समाकलन)। नतीजा है समाकलित वेग समीकरण।
शून्य कोटि अभिक्रियाएँ
वेग = −d[R]/dt = k[R]⁰ = k। यानी हर सेकंड बराबर मात्रा घटती है।
व्युत्पत्ति, चरण-दर-चरण:
- d[R] = −k dt
- समाकलन: [R] = −kt + I
- t = 0 पर [R] = [R]₀, इसलिए I = [R]₀
- [R] = [R]₀ − kt, या k = ([R]₀ − [R])/t
[R] बनाम t: सीधी रेखा, ढलान −k, अंतःखंड [R]₀। उदाहरण: उच्च दाब पर गर्म प्लैटिनम सतह पर NH₃ का विघटन; कुछ एंज़ाइम अभिक्रियाएँ जब एंज़ाइम पूरा व्यस्त हो।
प्रथम कोटि अभिक्रियाएँ
वेग = −d[R]/dt = k[R]।
व्युत्पत्ति, चरण-दर-चरण:
- d[R]/[R] = −k dt
- समाकलन: ln[R] = −kt + I
- t = 0 पर: I = ln[R]₀
- ln[R] = ln[R]₀ − kt, इसलिए k = (1/t) ln([R]₀/[R])
- आधार 10 के log में: k = (2.303/t) log([R]₀/[R])
- साथ ही [R] = [R]₀ e^(−kt)
ग्राफ़: [R] बनाम t गिरता वक्र; ln[R] (या log[R]) बनाम t सीधी रेखा, ढलान −k (या −k/2.303)। उदाहरण: रेडियोधर्मी क्षय, N₂O₅ का विघटन, एथीन का हाइड्रोजनीकरण।
गैस प्रावस्था की प्रथम कोटि अभिक्रिया
A(g) → B(g) + C(g) स्थिर आयतन पर: शुरुआती दाब p₀ और समय t पर कुल दाब pₜ हो, तो बचे A का दाब = 2p₀ − pₜ। इसलिए
k = (2.303/t) log[p₀/(2p₀ − pₜ)]
अर्धायु (अर्ध-आयु काल)
अर्धायु (t½) वह समय है जिसमें सांद्रता शुरुआती मान की आधी रह जाए।
- शून्य कोटि: [R] = [R]₀/2 रखो → t½ = [R]₀/2k। ज़्यादा शुरुआती मात्रा → लंबी अर्धायु।
- प्रथम कोटि: [R] = [R]₀/2 रखो → t½ = 2.303 log 2 / k → t½ = 0.693/k। यह [R]₀ पर निर्भर नहीं।
प्रथम कोटि में n अर्धायु के बाद बचा = [R]₀ × (½)ⁿ।
छद्म प्रथम कोटि अभिक्रियाएँ
कुछ अभिक्रियाओं में दो अभिकारक होते हैं, पर एक बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए उसकी सांद्रता लगभग नहीं बदलती। उदाहरण: एथिल ऐसीटेट का अम्लीय जल-अपघटन, बहुत पानी में गन्ने की शक्कर का प्रतीपन। वेग = k′[एस्टर]; ये प्रथम कोटि समीकरण मानती हैं।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
3D में प्रथम कोटि चुनो। अनुमान लगाओ कि 3 अर्धायु के बाद कितने ब्लॉक बचेंगे (उत्तर: 16 × ⅛ = 2)। अब शून्य कोटि चुनकर [R]₀ दोगुना करो और t½ पढ़ने से पहले अनुमान लगाओ। घर पर: बोतल में पानी भरो, नीचे छोटा छेद करो और हर आधा ख़ाली होने का समय नापो। भरी बोतल तेज़ी से ख़ाली होती है, काफ़ी हद तक प्रथम कोटि जैसा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शून्य कोटि: [R] = [R]₀ − kt; t½ = [R]₀/2k; k की इकाई = mol L⁻¹ s⁻¹
- प्रथम कोटि: k = (2.303/t) log([R]₀/[R]); [R] = [R]₀e^(−kt)
- प्रथम कोटि: t½ = 0.693/k; k की इकाई = s⁻¹
- n अर्धायु के बाद बचा = [R]₀/2ⁿ
- गैस प्रावस्था: k = (2.303/t) log[p₀/(2p₀ − pₜ)]
हल किए गए उदाहरण
1. शून्य कोटि अभिक्रिया में k = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹ और [R]₀ = 1.0 mol/L। 20 s बाद [R] और अर्धायु निकालो।
[R] = 1.0 − 0.02 × 20 = 0.6 mol/L। t½ = [R]₀/2k = 1.0/0.04 = 25 s।
2. प्रथम कोटि अभिक्रिया का k = 0.0693 min⁻¹ है। अर्धायु निकालो।
t½ = 0.693/0.0693 = 10 min।
3. प्रथम कोटि की अर्धायु 30 min है। 80 g में से 2 घंटे बाद कितना बचेगा?
2 घंटे = 120 min = 4 अर्धायु। बचा = 80/2⁴ = 5 g।
4. प्रथम कोटि में [R] 40 min में 0.8 से 0.2 mol/L हो जाता है। k निकालो।
k = (2.303/40) log 4 = 0.0576 × 0.602 ≈ 0.0347 min⁻¹।
5. k = 0.0231 min⁻¹। 75% पूरा होने में कितना समय?
75% पूरा → [R] = [R]₀/4। t = (2.303/0.0231) log 4 = 99.7 × 0.602 ≈ 60 min (दो अर्धायु, 30 min वाली)।
6. दिखाओ कि प्रथम कोटि में 99.9% पूरा होने का समय अर्धायु का लगभग 10 गुना है।
99.9% → [R]₀/[R] = 1000। t = (2.303/k) × 3 = 6.909/k। t½ = 0.693/k। अनुपात ≈ 10।
7. प्रथम कोटि अभिक्रिया 10 min में 20% पूरी होती है। k और 50% का समय निकालो।
[R]₀/[R] = 1.25। k = 0.2303 × log 1.25 = 0.2303 × 0.0969 ≈ 0.0223 min⁻¹। t½ = 0.693/0.0223 ≈ 31 min।
8. गैस A → B + C (प्रथम कोटि, स्थिर आयतन)। p₀ = 0.5 atm; 100 s बाद कुल दाब 0.6 atm। k निकालो।
बचे A का दाब = 2 × 0.5 − 0.6 = 0.4 atm। k = (2.303/100) log(0.5/0.4) = 0.02303 × 0.0969 ≈ 2.23 × 10⁻³ s⁻¹।
आम गलतियाँ
- शून्य कोटि में t½ = 0.693/k लगाना। यह सूत्र सिर्फ़ प्रथम कोटि का है।
- log([R]₀/[R]) की जगह log([R]/[R]₀) लिखना; उत्तर ऋणात्मक आ जाता है।
- ln और log को मिलाना: ln x = 2.303 log x।
- समय की इकाई न मिलाना: k min⁻¹ में है तो समय मिनट में लो।