अम्ल, क्षारक और लवण: तीन परिभाषाएँ
वैद्युत-अपघट्य वे पदार्थ हैं जो पानी में आयन देते हैं। प्रबल (NaCl, HCl) लगभग पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल (ऐसीटिक अम्ल, NH₃) थोड़े।
1. आरेनियस: अम्ल पानी में H⁺ (असल में H₃O⁺) देता है; क्षारक OH⁻ देता है। कमी: सिर्फ़ पानी में, और NH₃ क्षारक क्यों है यह नहीं समझाता।
2. ब्रॉन्स्टेड–लोरी: अम्ल प्रोटॉन (H⁺) दाता; क्षारक प्रोटॉन ग्राही। अम्ल H⁺ देने के बाद अपना संयुग्मी क्षारक बनता है; क्षारक H⁺ लेकर संयुग्मी अम्ल। युग्म में एक H⁺ का अंतर होता है। NH₃ + H₂O ⇌ NH₄⁺ + OH⁻ में पानी अम्ल है (संयुग्मी क्षारक OH⁻), NH₃ क्षारक है (संयुग्मी अम्ल NH₄⁺)। पानी दोनों बन सकता है (उभयधर्मी)। प्रबल अम्ल → बहुत दुर्बल संयुग्मी क्षारक।
3. लुइस: अम्ल इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही; क्षारक इलेक्ट्रॉन-युग्म दाता। BF₃, AlCl₃, H⁺, Co³⁺ लुइस अम्ल; NH₃, H₂O, OH⁻ लुइस क्षारक। यह H⁺ के बिना भी काम करती है।
लवण अम्ल और क्षारक की क्रिया से बनते हैं। किस अम्ल-क्षारक से बने, इससे तय होता है कि घोल अम्लीय, क्षारीय या उदासीन होगा।
अम्लों और क्षारकों का आयनन: Ka, Kb और आयनन की मात्रा
दुर्बल अम्ल HA: HA + H₂O ⇌ H₃O⁺ + A⁻, Ka = [H₃O⁺][A⁻]/[HA]। दुर्बल क्षारक: B + H₂O ⇌ BH⁺ + OH⁻, Kb = [BH⁺][OH⁻]/[B]। बड़ा Ka = प्रबल अम्ल। pKa = −log Ka: छोटा pKa = प्रबल अम्ल।
आयनन की मात्रा α = टूटे अणुओं का भाग। सांद्रता C के लिए: Ka = Cα²/(1 − α) ≈ Cα²। इसलिए α ≈ √(Ka/C) और [H⁺] = Cα = √(Ka·C)।
ओस्टवाल्ड तनुता नियम: C घटने पर α बढ़ता है। ज़्यादा पानी में आयन दूर-दूर रह पाते हैं।
संयुग्मी युग्म: Ka × Kb = Kw, यानी 25 °C पर pKa + pKb = 14।
बहुक्षारकी अम्ल (H₂SO₄, H₂CO₃, H₃PO₄) एक-एक करके H⁺ छोड़ते हैं: Ka₁ > Ka₂ > Ka₃, क्योंकि ऋणात्मक आयन से H⁺ खींचना कठिन है।
अम्ल प्रबल क्यों? आवर्त में बाएँ से दाएँ विद्युत-ऋणता बढ़ती है (CH₄ < NH₃ < H₂O < HF)। वर्ग में नीचे H–A बंध कमज़ोर होता है (HF < HCl < HBr < HI)।
सम-आयन प्रभाव: साम्य में पहले से मौजूद आयन डालो (जैसे ऐसीटिक अम्ल में सोडियम ऐसीटेट), तो साम्य पीछे खिसकता है और दुर्बल अम्ल और कम आयनित होता है।
पानी का आयनन और pH पैमाना
पानी थोड़ा आयनित होता है: H₂O + H₂O ⇌ H₃O⁺ + OH⁻। Kw = [H₃O⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴ (298 K), जल का आयनिक गुणनफल। शुद्ध पानी में [H₃O⁺] = [OH⁻] = 10⁻⁷ M। ताप बढ़ने पर Kw बढ़ता है।
pH = −log[H₃O⁺], pOH = −log[OH⁻], 25 °C पर pH + pOH = 14।
- अम्लीय: pH < 7।
- उदासीन: pH = 7।
- क्षारीय: pH > 7।
1 pH का अंतर = [H⁺] में 10 गुना अंतर। बहुत तनु अम्ल (जैसे 10⁻⁸ M HCl) में पानी का 10⁻⁷ M भी जोड़ो, तो pH 7 से थोड़ा कम आता है, 8 नहीं।
घर पर करके देखो: लाल पत्तागोभी पानी में उबालकर ठंडा करो। कुछ बूँदें नींबू रस, पानी और साबुन-पानी में डालो। लाल = अम्लीय, बैंगनी = उदासीन, हरा-पीला = क्षारीय।
लवणों का जल-अपघटन और उनके घोल का pH
दुर्बल जनक से बने लवण के आयन पानी से क्रिया करते हैं: लवण जल-अपघटन।
- प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक (NaCl): जल-अपघटन नहीं, pH = 7।
- दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक (CH₃COONa): CH₃COO⁻ + H₂O ⇌ CH₃COOH + OH⁻, क्षारीय। pH = 7 + ½(pKa + log C)।
- प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक (NH₄Cl): अम्लीय। pH = 7 − ½(pKb + log C)।
- दुर्बल अम्ल + दुर्बल क्षारक (CH₃COONH₄): pH = 7 + ½(pKa − pKb), C पर निर्भर नहीं।
परीक्षा के लिए
अक्सर पूछा जाता है: संयुग्मी युग्म पहचानना, लुइस अम्ल-क्षारक, प्रबल और दुर्बल का pH, pH से Ka, Ka से α, Ka × Kb = Kw, और लवण घोल का pH। उत्तर जाँचो: अम्ल का pH 7 से कम होना चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Kw = [H₃O⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴ (25 °C); pH + pOH = 14
- pH = −log[H⁺]; pOH = −log[OH⁻]; pKa = −log Ka
- दुर्बल अम्ल: Ka = Cα²/(1 − α) ≈ Cα²; α ≈ √(Ka/C); [H⁺] = √(Ka·C)
- संयुग्मी युग्म: Ka × Kb = Kw; pKa + pKb = 14
- दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक का लवण: pH = 7 + ½(pKa + log C)
- प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक का लवण: pH = 7 − ½(pKb + log C); दुर्बल + दुर्बल: pH = 7 + ½(pKa − pKb)
हल किए गए उदाहरण
1. H₂SO₄ और HCO₃⁻ का संयुग्मी क्षारक, तथा NH₃ और H₂O का संयुग्मी अम्ल बताओ।
एक H⁺ हटाओ: HSO₄⁻ और CO₃²⁻। एक H⁺ जोड़ो: NH₄⁺ और H₃O⁺।
2. 0.001 M HCl का pH निकालो।
HCl प्रबल है, [H⁺] = 10⁻³ M। pH = 3।
3. 0.01 M NaOH का pH निकालो।
[OH⁻] = 10⁻² M, pOH = 2। pH = 14 − 2 = 12।
4. 0.1 M ऐसीटिक अम्ल (Ka = 1.8 × 10⁻⁵) का pH निकालो।
α = √(1.8 × 10⁻⁴) = 0.0134। [H⁺] = 1.34 × 10⁻³ M। pH = 3 − 0.13 = 2.87।
5. 0.1 M HCOOH का pH 2.39 है। Ka और α निकालो।
[H⁺] = 10⁻²·³⁹ = 4.07 × 10⁻³ M। α = 0.0407। Ka ≈ (4.07 × 10⁻³)²/0.1 = 1.66 × 10⁻⁴।
6. NH₃ का Kb = 1.8 × 10⁻⁵। NH₄⁺ का Ka निकालो।
Ka = Kw/Kb = 10⁻¹⁴/1.8 × 10⁻⁵ = 5.6 × 10⁻¹⁰। NH₃ क्षारक के रूप में, NH₄⁺ के अम्ल होने से कहीं ज़्यादा प्रबल है।
7. 10⁻⁸ M HCl का pH निकालो।
पानी भी H⁺ देता है। (10⁻⁸ + x)x = 10⁻¹⁴ → x ≈ 9.5 × 10⁻⁸। [H⁺] = 1.05 × 10⁻⁷ M। pH ≈ 6.98 (हल्का अम्लीय, 8 नहीं)।
8. 0.1 M सोडियम ऐसीटेट का pH निकालो (ऐसीटिक अम्ल pKa = 4.74)।
दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक: pH = 7 + ½(4.74 − 1) = 7 + 1.87 = 8.87। क्षारीय।
आम गलतियाँ
- प्रबल अम्ल के लिए Ka लगाना। प्रबल अम्ल पूरा आयनित होता है: [H⁺] = C।
- सोचना कि पतला करने से दुर्बल अम्ल प्रबल हो जाता है। α बढ़ता है, पर [H⁺] घटता है और pH बढ़ता है।
- बहुत तनु अम्ल में पानी का 10⁻⁷ M भूल जाना, और अम्ल का pH 7 से ऊपर निकाल देना।
- संयुग्मी युग्म में गड़बड़: अम्ल के संयुग्मी क्षारक में एक H⁺ कम होता है, एक OH⁻ ज़्यादा नहीं।