Germany Jahrgangsstufe 13 Chemistry
अध्याय: 5
1. How chemists think and work
Chemistry subject knowledge · Scientific inquiry in chemistry · Communicating chemistry · Evaluating chemistry issues
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- शोध कौशल: प्रश्न से पूरे प्रोजेक्ट तक – शोध उत्तर खोजने का सावधान तरीका है। आप एक साफ़, सीमित प्रश्न पूछते हैं, उसका उत्तर पाने की योजना बनाते हैं, जानकारी खोजते हैं और हर स्रोत पर भरोसे की जाँच करते हैं, अपने आँकड़े जुटाकर विश्लेषण करते हैं, सबूत पर टिका निष्कर्ष निकालते हैं, और हर स्रोत को श्रेय देते हुए उसे साझा करते हैं।
2. Colour and dyes
Colour and dyes
- रंग और रंजक – कोई पदार्थ इसलिए रंगीन दिखता है क्योंकि उसके अणु सफ़ेद रोशनी के कुछ रंग सोख लेते हैं और बाकी आँख तक पहुँचते हैं। सोखा गया प्रकाश इलेक्ट्रॉन को HOMO-LUMO अंतराल के पार ऊपर उठाता है। एकांतर दोहरे बंधों की शृंखला जितनी लंबी, अंतराल उतना छोटा और सोखी गई तरंगदैर्घ्य उतनी लंबी। हमें पूरक रंग दिखता है। रंजक घुलता है, वर्णक ठोस कणों के रूप में रहता है।
3. Acid-base equilibria and quantitative analysis
Acid-base equilibria
- आयनिक साम्य: अम्ल, क्षारक, आयनन और pH – अम्ल और क्षारक की तीन परिभाषाएँ हैं: आरेनियस (पानी में H⁺ या OH⁻ देना), ब्रॉन्स्टेड–लोरी (प्रोटॉन दाता या ग्राही) और लुइस (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही या दाता)। प्रबल अम्ल-क्षारक पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल थोड़े, और उनका साम्य Ka या Kb से लिखा जाता है। पानी भी थोड़ा आयनित होता है: 25 °C पर Kw = [H⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴। pH = −log[H⁺], pH + pOH = 14। दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए α ≈ √(K/C), यानी तनु करने पर α बढ़ता है (ओस्टवाल्ड तनुता नियम)। संयुग्मी युग्म के लिए Ka × Kb = Kw। दुर्बल अम्ल या क्षारक से बने लवण पानी से क्रिया करते हैं (जल-अपघटन)।
4. Natural and synthetic macromolecules
From amino acids to proteins · Synthetic polymers and plastics
- प्रोटीन और एंज़ाइम: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड बंध, संरचना और विकृतीकरण – प्रोटीन ऐमीनो अम्लों की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर ऐमीनो अम्ल के एक कार्बन पर ऐमीनो समूह (–NH₂), अम्ल समूह (–COOH), एक हाइड्रोजन और एक पार्श्व समूह R होता है। एक का –COOH अगले के –NH₂ से पानी निकालकर जुड़ता है: यह पेप्टाइड बंध (–CO–NH–) है। ऐमीनो अम्लों का क्रम प्राथमिक संरचना; कुंडली और परत द्वितीयक; पूरा 3D मोड़ तृतीयक; कई शृंखलाएँ साथ में चतुर्धातुक संरचना। गर्मी, अम्ल या ऐल्कोहॉल मोड़ खोल देते हैं (विकृतीकरण)। एंज़ाइम ज़्यादातर प्रोटीन हैं जो शरीर की अभिक्रियाएँ तेज़ करते हैं।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
5. Energy and sustainability
Energy and sustainability
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।