रोशनी जोड़ना और रंग घटाना
आपकी स्क्रीन रोशनी जोड़कर रंग बनाती है। लाल, हरी और नीली रोशनी मिलकर सफ़ेद बनाती हैं। इसे योगात्मक मिश्रण (additive mixing) कहते हैं।
पेंट, स्याही और रंजक उल्टा करते हैं। वे सफ़ेद रोशनी से शुरू करके रंग घटाते हैं। यह व्यवकलनात्मक मिश्रण (subtractive mixing) है। इसके मुख्य रंग सियान, मैजेंटा और पीला हैं। तीनों मिलाओ तो लगभग सारी रोशनी घट जाती है और गहरा रंग बनता है।
पूरक रंग
दो रंग पूरक (complementary) होते हैं यदि जोड़ने पर वे सफ़ेद रोशनी बनाएँ। जोड़ियाँ: नीला-पीला, लाल-सियान, हरा-मैजेंटा।
जो रंजक नीला निकाल लेता है, उसमें लाल और हरा बचते हैं, जो मिलकर पीला बनाते हैं। इसलिए नीला सोखने वाला रंजक पीला दिखता है। दिखने वाला रंग, सोखे गए रंग का पूरक होता है।
HOMO-LUMO अंतराल
अणु के इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तरों में रहते हैं। HOMO वह सबसे ऊँचा स्तर है जिसमें इलेक्ट्रॉन हैं। LUMO सबसे नीचा खाली स्तर है। दोनों के बीच की दूरी HOMO-LUMO अंतराल है।
प्रकाश का फ़ोटॉन तभी सोखा जाता है जब उसकी ऊर्जा अंतराल के बराबर हो। तब इलेक्ट्रॉन ऊपर कूदता है। फ़ोटॉन की ऊर्जा: E = h × c / λ। बड़ा अंतराल छोटी तरंगदैर्घ्य (UV) माँगता है, इसलिए अणु रंगहीन दिखता है। छोटा अंतराल दिखने वाली लंबी तरंगदैर्घ्य माँगता है, इसलिए अणु रंगीन दिखता है।
दोहरे बंधों की शृंखला: पॉलीईन
पॉलीईन (polyene) वह शृंखला है जिसमें एकल और दोहरे बंध बारी-बारी से आते हैं (संयुग्मित शृंखला)। इसके इलेक्ट्रॉन पूरी शृंखला में फैल जाते हैं। शृंखला जितनी लंबी, अंतराल उतना छोटा और सोखी गई तरंगदैर्घ्य उतनी लंबी। छोटी शृंखला केवल UV सोखती है। लगभग आठ या अधिक दोहरे बंध अवशोषण को दिखने वाली सीमा में ले आते हैं, इसीलिए कैरोटीन नारंगी है।
ऐज़ो और ट्राइफ़ेनिलमेथेन रंजक
ऐज़ो रंजक (azo dyes) में –N=N– समूह दो वलय-तंत्रों को जोड़ता है। वलय और यह सेतु मिलकर एक बड़ा संयुग्मित तंत्र बनाते हैं, इसलिए प्रकाश सोखा जाता है। कई पीले, नारंगी और लाल रंजक ऐज़ो रंजक हैं। वलयों में –NH2 या –OH जैसे समूह जोड़ने से अंतराल बदलता है और रंग भी।
ट्राइफ़ेनिलमेथेन रंजक में एक केंद्रीय कार्बन तीन बेंज़ीन वलयों से जुड़ा होता है। आवेश तीनों वलयों में फैल जाता है। उदाहरण: हरा मैलाकाइट ग्रीन और बैंगनी क्रिस्टल वायलेट।
रंजक बनाम वर्णक
रंजक (dye) द्रव में घुल जाता है (या रेशों में समा जाता है) और उसे रंग देता है। वर्णक (pigment) नहीं घुलता। यह ठोस बारीक कणों का चूर्ण है जिसे पेंट की तरह बंधक (binder) में मिलाया जाता है और वह सतह पर टिका रहता है। वर्णक आम तौर पर धूप और धुलाई सह लेते हैं; रंजक अक्सर ज़्यादा चटक होते हैं और कपड़े पर लगाना आसान होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़ोटॉन की ऊर्जा: E = h × c / λ
- सोखा तभी जाता है जब फ़ोटॉन की ऊर्जा = HOMO-LUMO अंतराल
- लंबी संयुग्मित शृंखला → छोटा अंतराल → लंबी λ सोखी जाती है
- दिखने वाला रंग = सोखे गए रंग का पूरक
- मुख्य शब्द: HOMO, LUMO, संयुग्मन, वर्णमूलक (chromophore), ऐज़ो समूह (–N=N–), रंजक, वर्णक
हल किए गए उदाहरण
1. एक रंजक नीली रोशनी सोखता है। वह किस रंग का दिखेगा?
नीला और पीला पूरक हैं। इसलिए रंजक पीला दिखेगा।
2. एक घोल हरा दिखता है। वह कौन सा रंग सबसे ज़्यादा सोखता है?
हरे का पूरक मैजेंटा (लाल-बैंगनी) है। इसलिए यह मैजेंटा क्षेत्र की रोशनी, यानी ज़्यादातर लाल और नीला-बैंगनी सोखता है।
3. किसी अणु का HOMO-LUMO अंतराल 3.1 eV है। सोखी गई तरंगदैर्घ्य निकालिए। (h c = 1240 eV nm)
λ = 1240 / 3.1 = 400 nm। यह बैंगनी रोशनी का किनारा है, इसलिए अणु बैंगनी सोखता है और हल्का पीला दिखता है।
4. अणु X 300 nm पर और अणु Y 500 nm पर सोखता है। किसका अंतराल छोटा है?
E = hc/λ, इसलिए लंबी तरंगदैर्घ्य का मतलब कम ऊर्जा। Y (500 nm) का अंतराल छोटा है।
5. केवल दो दोहरे बंध वाला यौगिक रंगहीन क्यों होता है?
इसकी शृंखला छोटी है, इसलिए अंतराल बड़ा है। यह UV सोखता है, जो हमें दिखता नहीं। सारी दिखने वाली रोशनी निकल जाती है, इसलिए यह रंगहीन दिखता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि नीला रंजक नीला सोखता है। नीला दिखने वाला रंजक पूरक (नारंगी-पीला) सोखता है और नीला निकाल देता है।
- योगात्मक मिश्रण (रोशनियाँ) और व्यवकलनात्मक मिश्रण (पेंट, रंजक) को आपस में मिला देना।
- यह सोचना कि बड़ा अंतराल लंबी तरंगदैर्घ्य देता है। बड़ा अंतराल छोटी तरंगदैर्घ्य देता है।
- हर रंगीन पदार्थ को रंजक कह देना। वर्णक घुलते नहीं।