उद्देश्य, सामग्री और सावधानी
उद्देश्य: अभिक्रियाओं से Fe²⁺ और Fe³⁺ आयनों की पहचान करना और दिखाना कि एक दूसरे में बदल सकता है।
सामग्री: आयरन(II) सल्फ़ेट का घोल (Fe²⁺), आयरन(III) क्लोराइड का घोल (Fe³⁺), तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम थायोसायनेट (KSCN) का घोल, तनु हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (H₂O₂), थोड़ा लोहे का चूर्ण, साफ़ परखनलियाँ, स्टैंड और ड्रॉपर।
सावधानी: चश्मा पहनो; NaOH त्वचा और आँखों को जला सकता है। सिर्फ़ कुछ बूँदें लो। कभी कुछ चखो मत। प्रयोग के बाद हाथ धोओ। आयरन(II) का ताज़ा घोल लो, क्योंकि पुराने घोल में पहले से कुछ Fe³⁺ होता है।
जाँच 1: सोडियम हाइड्रॉक्साइड
अलग-अलग नलियों में हर घोल लगभग 2 cm लो। NaOH बूँद-बूँद करके डालो।
| नमूना | क्या दिखता है | समीकरण |
|---|---|---|
| Fe²⁺ | सफ़ेद-हरा ठोस, जो हवा में धीरे-धीरे धूसर-हरा फिर लाल-भूरा हो जाता है | Fe²⁺ + 2OH⁻ → Fe(OH)₂ |
| Fe³⁺ | तुरंत लाल-भूरा ठोस | Fe³⁺ + 3OH⁻ → Fe(OH)₃ |
ये ठोस अवक्षेप हैं: ज़्यादा NaOH डालने पर भी नहीं घुलते। Fe(OH)₂ पर भूरा रंग बताता है कि ऑक्सीजन Fe²⁺ को Fe³⁺ बना रही है: 4Fe(OH)₂ + O₂ + 2H₂O → 4Fe(OH)₃।
जाँच 2: पोटैशियम थायोसायनेट (KSCN)
साफ़ नलियों में हर घोल का नया 2 cm लो। KSCN के 2 से 3 बूँद डालो।
- Fe³⁺: खून जैसा लाल रंग, क्योंकि Fe³⁺ + SCN⁻ → [Fe(SCN)]²⁺ (एक संकुल आयन) बनता है।
- Fe²⁺: लाल नहीं। घोल हल्का हरा रहता है (या अगर थोड़ा Fe³⁺ पहले से हो तो हल्का गुलाबी)।
Fe³⁺ की यह सबसे संवेदनशील जाँच है: ज़रा-सा Fe³⁺ भी साफ़ लाल रंग देता है। Fe³⁺ है या नहीं, यह पक्का करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है।
जाँच 3: Fe²⁺ को Fe³⁺ में बदलना (ऑक्सीकरण)
ताज़ा Fe²⁺ घोल 2 cm लो। KSCN डालो: लाल नहीं। अब हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की कुछ बूँदें डालो (शिक्षक कहें तो एक बूँद तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल से अम्लीय कर लो)। घोल पीला-भूरा हो जाता है। फिर KSCN डालो: खून जैसा लाल।
मतलब: H₂O₂ ऑक्सीकारक है। उसने हर Fe²⁺ से एक इलेक्ट्रॉन ले लिया: 2Fe²⁺ + H₂O₂ + 2H⁺ → 2Fe³⁺ + 2H₂O। इसलिए आयरन(II) अपचायक है, क्योंकि वह आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ देता है।
जाँच 4: Fe³⁺ को Fe²⁺ में बदलना (अपचयन)
Fe³⁺ घोल 2 cm लो। KSCN डालो: लाल। Fe³⁺ की नई नली में चुटकी भर लोहे का चूर्ण डालकर एक मिनट हिलाओ, फिर बचा हुआ लोहा छान लो। पीला-भूरा रंग हल्का हरा हो जाता है। छने हुए घोल में KSCN डालो: लाल नहीं।
मतलब: लोहे का चूर्ण अपचायक है। उसने Fe³⁺ को इलेक्ट्रॉन दिए: 2Fe³⁺ + Fe → 3Fe²⁺। इसलिए आयरन(III) ऑक्सीकारक है, क्योंकि वह आसानी से इलेक्ट्रॉन ले लेता है।
सारणी और निष्कर्ष
| जाँच | Fe²⁺ | Fe³⁺ |
|---|---|---|
| घोल का रंग | हल्का हरा | पीला-भूरा |
| NaOH | सफ़ेद-हरा ठोस, भूरा हो जाता है | लाल-भूरा ठोस |
| KSCN | कोई बदलाव नहीं | खून जैसा लाल |
| ऑक्सीकारक (H₂O₂) का असर | Fe³⁺ बन जाता है | कोई बदलाव नहीं |
| अपचायक (Fe) का असर | कोई बदलाव नहीं | Fe²⁺ बन जाता है |
त्रुटियाँ और अच्छी आदतें
- पुराने Fe²⁺ घोल में पहले से Fe³⁺ हो सकता है, जिससे KSCN से हल्का लाल रंग आता है। ताज़ा घोल लो।
- ज़्यादा NaOH या हवा से सफ़ेद-हरा रंग छिप सकता है। कुछ बूँदें डालो और जल्दी देखो।
- गंदी नली से ग़लत रंग आ सकते हैं। आसुत जल से धो लो।
- KSCN सिर्फ़ कुछ बूँदें डालो; ज़्यादा डालने से रंग बहुत गहरा होकर तुलना कठिन हो जाती है।
करके देखो: पहले सोचो, फिर जाँचो
फ़्री-प्ले चरण में नमूना और जाँच चुनो, और दबाने से पहले अपना अनुमान लिखो। क्या तुम समझा सकते हो कि ऑक्सीकृत नमूना (Fe²⁺ + H₂O₂) Fe³⁺ की तरह क्यों व्यवहार करता है? घर पर, बड़े की देखरेख में: जंग लगी कील का एक टुकड़ा रात भर सिरके में डुबोओ और शिक्षक से पूछो कि KSCN की जाँच से उस तरल में Fe³⁺ कैसे दिखाया जा सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Fe²⁺ + 2OH⁻ → Fe(OH)₂ (सफ़ेद-हरा); Fe³⁺ + 3OH⁻ → Fe(OH)₃ (लाल-भूरा)
- 4Fe(OH)₂ + O₂ + 2H₂O → 4Fe(OH)₃
- Fe³⁺ + SCN⁻ → [Fe(SCN)]²⁺ (खून जैसा लाल)
- 2Fe²⁺ + H₂O₂ + 2H⁺ → 2Fe³⁺ + 2H₂O (ऑक्सीकरण)
- 2Fe³⁺ + Fe → 3Fe²⁺ (अपचयन)
हल किए गए उदाहरण
1. किसी घोल से NaOH डालने पर लाल-भूरा ठोस मिलता है और KSCN से खून जैसा लाल रंग आता है। कौन-सा आयन है?
Fe³⁺। लाल-भूरा Fe(OH)₃ और खून जैसा लाल थायोसायनेट संकुल, दोनों आयरन(III) की ओर इशारा करते हैं।
2. हल्के हरे घोल से NaOH पर सफ़ेद-हरा ठोस मिलता है और KSCN से रंग नहीं आता। H₂O₂ डालने के बाद KSCN से लाल रंग आता है। क्या निष्कर्ष निकलता है?
शुरू के घोल में Fe²⁺ है (सफ़ेद-हरा ठोस, KSCN से लाल नहीं)। H₂O₂ ने उसे ऑक्सीकृत करके Fe³⁺ बना दिया, जिसने KSCN के साथ लाल रंग दिया।
3. जाँच 4 में KSCN डालने से पहले घोल को छानते क्यों हैं?
बचा हुआ लोहे का चूर्ण Fe³⁺ को अपचयित करता रहेगा और घोल को धुंधला भी कर सकता है। छानने से घोल साफ़ हो जाता है, इसलिए रंग का नतीजा आसानी से पढ़ा जाता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि KSCN Fe²⁺ को लाल करता है। सिर्फ़ Fe³⁺ खून जैसा लाल होता है।
- ताज़ा Fe²⁺ घोल न लेना। पुराने घोल में Fe³⁺ होता है और हल्का लाल रंग आ जाता है।
- भूल जाना कि सफ़ेद-हरा Fe(OH)₂ हवा में भूरा हो जाता है, और शुरू में ही उसे Fe(OH)₃ कह देना।
- कारकों में उलझना: H₂O₂ Fe²⁺ को ऑक्सीकृत करता है (ऊपर), लोहे का चूर्ण Fe³⁺ को अपचयित करता है (नीचे)।