धातु-जलीय आयन और उनकी अम्लता
जब CuSO₄ या FeCl₃ जैसा लवण घुलता है, तो हर धातु आयन को छह पानी के अणु घेर लेते हैं। हर पानी O से एक एकाकी युग्म धातु को देता है: यह उपसहसंयोजी (दाता) बंध है। इससे अष्टफलकीय धातु-जलीय आयन [M(H₂O)₆]ⁿ⁺ बनता है।
धनावेशित धातु आयन पानी के O–H बंधों से इलेक्ट्रॉन खींचता है। इससे वे कमज़ोर होते हैं और H⁺ निकल सकता है (जल-अपघटन):
[Fe(H₂O)₆]³⁺ + H₂O ⇌ [Fe(H₂O)₅(OH)]²⁺ + H₃O⁺
3+ आयन का आवेश घनत्व (अधिक आवेश, छोटा आकार) 2+ से अधिक है, इसलिए ज़्यादा H⁺ निकलता है। 3+ विलयनों का pH लगभग 2–3, 2+ विलयनों का लगभग 5–6 होता है।
हाइड्रॉक्साइड अवक्षेप और उभयधर्मी व्यवहार
क्षार पानी के लिगैंडों से एक-एक कर H⁺ हटाता है। जब संकुल उदासीन हो जाता है, तो वह धातु हाइड्रॉक्साइड के रूप में अवक्षेपित होता है:
- [Cu(H₂O)₆]²⁺ + 2OH⁻ → [Cu(H₂O)₄(OH)₂] + 2H₂O (हल्का नीला अवक्षेप)
- [Fe(H₂O)₆]²⁺ + 2OH⁻ → [Fe(H₂O)₄(OH)₂] + 2H₂O (हरा; हवा में भूरा हो जाता है)
- [Fe(H₂O)₆]³⁺ + 3OH⁻ → [Fe(H₂O)₃(OH)₃] + 3H₂O (नारंगी-भूरा)
- [Al(H₂O)₆]³⁺ + 3OH⁻ → [Al(H₂O)₃(OH)₃] + 3H₂O (सफ़ेद)
उभयधर्मी: एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड अम्ल और अधिक क्षार दोनों से अभिक्रिया करता है:
- [Al(H₂O)₃(OH)₃] + OH⁻ → [Al(H₂O)₂(OH)₄]⁻ + H₂O (रंगहीन विलयन)
- [Al(H₂O)₃(OH)₃] + 3H⁺ → [Al(H₂O)₆]³⁺
अमोनिया और कार्बोनेट से अभिक्रिया
अमोनिया दुर्बल क्षार भी है और लिगैंड भी। थोड़ा NH₃ क्षार की तरह वही हाइड्रॉक्साइड अवक्षेप देता है। अधिक NH₃ पानी के लिगैंड की जगह ले सकता है (लिगैंड प्रतिस्थापन):
- [Cu(H₂O)₄(OH)₂] + 4NH₃ → [Cu(NH₃)₄(H₂O)₂]²⁺ + 2H₂O + 2OH⁻ (गहरा नीला विलयन)
- Fe²⁺, Fe³⁺ और Al³⁺ के अवक्षेप अधिक NH₃ में भी बने रहते हैं।
कार्बोनेट आयन:
- 2+ आयन ज़्यादा अम्लीय नहीं, इसलिए धातु कार्बोनेट अवक्षेप बनता है: CuCO₃ (नीला-हरा), FeCO₃ (हरा)।
- 3+ आयन कार्बोनेट से CO₂ निकालते हैं: 2[Fe(H₂O)₆]³⁺ + 3CO₃²⁻ → 2[Fe(H₂O)₃(OH)₃] + 3CO₂ + 3H₂O। भूरा (Al के लिए सफ़ेद) अवक्षेप और बुलबुले दिखते हैं।
सारांश तालिका और करके देखो
- Fe²⁺: हल्का हरा → हरा अवक्षेप (OH⁻, NH₃) → हरा FeCO₃
- Cu²⁺: नीला → हल्का नीला अवक्षेप → अधिक NH₃ में गहरा नीला → नीला-हरा CuCO₃
- Fe³⁺: पीला-भूरा → नारंगी-भूरा अवक्षेप → कार्बोनेट से भूरा अवक्षेप + CO₂
- Al³⁺: रंगहीन → सफ़ेद अवक्षेप → अधिक NaOH में घुलता → कार्बोनेट से सफ़ेद अवक्षेप + CO₂
करके देखो: खुले खेल में हर आयन के साथ "अधिक NH₃" और फिर "Na₂CO₃" चुनो। पहले ज़ोर से अनुमान बोलो। फिर कॉपी में 4 × 4 तालिका याद से भरो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- [M(H₂O)₆]³⁺ + H₂O ⇌ [M(H₂O)₅(OH)]²⁺ + H₃O⁺
- [M(H₂O)₆]²⁺ + 2OH⁻ → [M(H₂O)₄(OH)₂] + 2H₂O
- [Al(H₂O)₃(OH)₃] + OH⁻ → [Al(H₂O)₂(OH)₄]⁻ + H₂O
- [Cu(H₂O)₄(OH)₂] + 4NH₃ → [Cu(NH₃)₄(H₂O)₂]²⁺ + 2H₂O + 2OH⁻
- 2[M(H₂O)₆]³⁺ + 3CO₃²⁻ → 2[M(H₂O)₃(OH)₃] + 3CO₂ + 3H₂O | M²⁺ + CO₃²⁻ → MCO₃
हल किए गए उदाहरण
1. [Fe(H₂O)₆]³⁺ का विलयन [Fe(H₂O)₆]²⁺ से अधिक अम्लीय क्यों है?
चरण 1: Fe³⁺ पर अधिक आवेश और छोटा आकार: अधिक आवेश घनत्व। चरण 2: यह पानी के O–H बंधों से अधिक इलेक्ट्रॉन खींचता है, बंध कमज़ोर होते हैं। चरण 3: H⁺ आसानी से निकलता है: [Fe(H₂O)₆]³⁺ + H₂O ⇌ [Fe(H₂O)₅(OH)]²⁺ + H₃O⁺। उत्तर: अधिक H₃O⁺, कम pH।
2. [Cu(H₂O)₆]²⁺ और थोड़े NaOH का समीकरण और प्रेक्षण लिखो।
चरण 1: दो OH⁻ दो H⁺ हटाकर उदासीन संकुल बनाते हैं। चरण 2: [Cu(H₂O)₆]²⁺ + 2OH⁻ → [Cu(H₂O)₄(OH)₂] + 2H₂O। उत्तर: नीले विलयन से हल्का नीला अवक्षेप।
3. एक रंगहीन विलयन NaOH से सफ़ेद अवक्षेप देता है जो अधिकता में घुल जाता है। आयन पहचानो और घुलने का समीकरण लिखो।
चरण 1: रंगहीन + सफ़ेद अवक्षेप = Al³⁺ की संभावना। चरण 2: अधिक OH⁻ में घुलना उभयधर्मी Al(OH)₃ दिखाता है। चरण 3: [Al(H₂O)₃(OH)₃] + OH⁻ → [Al(H₂O)₂(OH)₄]⁻ + H₂O। उत्तर: Al³⁺।
4. [Cu(H₂O)₆]²⁺ में अधिक अमोनिया डालने पर क्या दिखता है? समीकरण लिखो।
चरण 1: पहले हल्का नीला [Cu(H₂O)₄(OH)₂] अवक्षेप बनता है। चरण 2: अधिकता में NH₃ पानी की जगह लेता है: [Cu(H₂O)₄(OH)₂] + 4NH₃ → [Cu(NH₃)₄(H₂O)₂]²⁺ + 2H₂O + 2OH⁻। उत्तर: अवक्षेप घुलकर गहरा नीला विलयन।
5. Fe²⁺ और Fe³⁺ विलयनों में अलग-अलग सोडियम कार्बोनेट डाला गया। परिणाम अलग क्यों हैं?
चरण 1: Fe²⁺ कम अम्लीय है, इसलिए हरा FeCO₃ अवक्षेप बनता है, गैस नहीं। चरण 2: Fe³⁺ इतना अम्लीय है कि CO₃²⁻ को H⁺ देकर CO₂ बनाता है। चरण 3: 2[Fe(H₂O)₆]³⁺ + 3CO₃²⁻ → 2[Fe(H₂O)₃(OH)₃] + 3CO₂ + 3H₂O। उत्तर: Fe²⁺: हरा FeCO₃; Fe³⁺: भूरा अवक्षेप और बुलबुले।
6. 0.020 mol [Al(H₂O)₆]³⁺ कार्बोनेट से पूरी अभिक्रिया करे तो कितने मोल CO₂ बनेगी?
चरण 1: 2[Al(H₂O)₆]³⁺ + 3CO₃²⁻ → 2[Al(H₂O)₃(OH)₃] + 3CO₂ + 3H₂O। चरण 2: Al : CO₂ = 2 : 3। चरण 3: 0.020 × 3/2 = 0.030 mol। उत्तर: 0.030 mol CO₂।
आम गलतियाँ
- हाइड्रॉक्साइड अवक्षेप पर आवेश लिखना। अवक्षेप उदासीन होता है, जैसे [Fe(H₂O)₃(OH)₃]।
- कहना कि Fe²⁺ कार्बोनेट से CO₂ देता है। केवल 3+ आयन देते हैं; 2+ आयन MCO₃ बनाते हैं।
- सोचना कि अधिक NaOH हर हाइड्रॉक्साइड घोल देता है। इनमें केवल Al(OH)₃ (उभयधर्मी) घुलता है।
- भूल जाना कि अमोनिया पहले क्षार (अवक्षेप) और फिर अधिकता में लिगैंड का काम करता है।