हम किसकी जाँच कर रहे हैं?
कॉपर(II) सल्फेट जैसा लवण दो हिस्सों से बना है: धनायन (धातु आयन, Cu²⁺) और ऋणायन (SO₄²⁻)। अनजान लवण का नाम बताने के लिए दोनों की अलग जाँच करते हैं।
कई जाँचों में अवक्षेप बनता है: दो घोल मिलाने पर अचानक दिखने वाला अघुलनशील ठोस। उसका रंग ही सुराग है।
थोड़ी मात्रा, साफ़ उपकरण और चश्मा ज़रूरी। सिल्वर नाइट्रेट, बेरियम क्लोराइड और सोडियम हाइड्रॉक्साइड हानिकारक या संक्षारक हैं।
धातु आयनों का ज्वाला परीक्षण
निक्रोम या प्लैटिनम तार के साफ़ छल्ले को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में, फिर ठोस नमूने में डुबोओ। बुन्सन की गर्म नीली ज्वाला में रखकर रंग देखो।
| आयन | ज्वाला का रंग |
|---|---|
| लिथियम, Li⁺ | गहरा लाल (क्रिमसन) |
| सोडियम, Na⁺ | पीला |
| पोटैशियम, K⁺ | हल्का बैंगनी (लाइलक) |
| कैल्शियम, Ca²⁺ | नारंगी-लाल |
| कॉपर, Cu²⁺ | हरा (नीला-हरा) |
रंग क्यों? गर्मी से इलेक्ट्रॉन ऊँचे ऊर्जा स्तर पर चढ़ते हैं। वापस गिरते समय वे उस तत्व के तय रंग की रोशनी छोड़ते हैं।
सीमाएँ: मिश्रण में एक रंग दूसरे को छिपा देता है (सोडियम का तेज़ पीला पोटैशियम के बैंगनी को ढक लेता है), और गंदा छल्ला ग़लत नतीजा देता है।
सोडियम हाइड्रॉक्साइड से धातु हाइड्रॉक्साइड अवक्षेप
लवण के घोल में सोडियम हाइड्रॉक्साइड की कुछ बूँदें डालो। कई धातु आयन अघुलनशील हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं:
- Cu²⁺ → नीला: Cu²⁺ + 2OH⁻ → Cu(OH)₂
- Fe²⁺ → हरा, Fe(OH)₂
- Fe³⁺ → भूरा (नारंगी-भूरा), Fe(OH)₃
- Al³⁺, Ca²⁺, Mg²⁺ → सफ़ेद
सफ़ेद वालों में फ़र्क: और ज़्यादा (अधिक मात्रा) NaOH डालो। एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड घुल जाता है; कैल्शियम और मैग्नीशियम वाले बने रहते हैं। फिर ज्वाला परीक्षण: कैल्शियम नारंगी-लाल, मैग्नीशियम कोई रंग नहीं।
कुछ पाठ्यक्रमों में अमोनियम (NH₄⁺) भी: NaOH के साथ गर्म करो, निकली अमोनिया गीले लाल लिटमस को नीला करती है। ज़िंक (Zn²⁺) सफ़ेद देता है जो अधिक NaOH में घुलता है।
कार्बोनेट, हैलाइड और सल्फेट की जाँच
कार्बोनेट, CO₃²⁻
तनु अम्ल डालो। CO₂ के बुलबुले (बुदबुदाहट) निकलते हैं। गैस चूने के पानी में भेजो: दूधिया। CO₃²⁻ + 2H⁺ → CO₂ + H₂O।
हैलाइड: क्लोराइड, ब्रोमाइड, आयोडाइड
तनु नाइट्रिक अम्ल, फिर सिल्वर नाइट्रेट। क्लोराइड सफ़ेद (AgCl), ब्रोमाइड क्रीम (AgBr), आयोडाइड पीला (AgI)। Ag⁺ + Cl⁻ → AgCl।
सल्फेट, SO₄²⁻
तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, फिर बेरियम क्लोराइड। बेरियम सल्फेट का सफ़ेद अवक्षेप। Ba²⁺ + SO₄²⁻ → BaSO₄।
पहले अम्ल क्यों?
अम्ल कार्बोनेट आयन हटा देता है। वरना कार्बोनेट भी सिल्वर या बेरियम से अवक्षेप देकर धोखा देता। हैलाइड के लिए नाइट्रिक अम्ल लो, हाइड्रोक्लोरिक नहीं, क्योंकि उसमें ख़ुद क्लोराइड है।
मशीनी विधियाँ और ज्वाला उत्सर्जन स्पेक्ट्रोस्कोपी
मशीनी (इंस्ट्रुमेंटल) विधियाँ परखनली की जगह मशीनें इस्तेमाल करती हैं। ये सटीक, संवेदनशील (बहुत कम मात्रा भी पकड़ें) और तेज़ हैं।
ज्वाला उत्सर्जन स्पेक्ट्रोस्कोपी में नमूना ज्वाला में डालते हैं और निकली रोशनी स्पेक्ट्रोस्कोप से गुज़रती है। रोशनी रेखा स्पेक्ट्रम में बँटती है: तय तरंगदैर्ध्य पर चमकीली रेखाएँ। हर धातु आयन का अपना पैटर्न है, बारकोड जैसा।
- संदर्भ स्पेक्ट्रम से मिलाकर धातु पहचानो, मिश्रण में भी।
- रेखाओं की चमक से सांद्रता पता चलती है, ज्ञात घोलों से बने कैलिब्रेशन ग्राफ़ की मदद से।
करके देखो: 3D के आख़िरी स्टेप में Na⁺ फिर K⁺ चुनो। ज्वाला का रंग और रेखाओं की जगह दोनों बदलते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ज्वाला: Li⁺ गहरा लाल, Na⁺ पीला, K⁺ हल्का बैंगनी, Ca²⁺ नारंगी-लाल, Cu²⁺ हरा
- NaOH: Cu²⁺ नीला, Fe²⁺ हरा, Fe³⁺ भूरा, Al³⁺/Ca²⁺/Mg²⁺ सफ़ेद (Al(OH)₃ अधिक NaOH में घुलता है)
- कार्बोनेट: अम्ल → CO₂ बुलबुले → चूने का पानी दूधिया
- हैलाइड: HNO₃ + AgNO₃ → Cl⁻ सफ़ेद, Br⁻ क्रीम, I⁻ पीला
- सल्फेट: HCl + BaCl₂ → सफ़ेद BaSO₄
- Ag⁺ + Cl⁻ → AgCl; Ba²⁺ + SO₄²⁻ → BaSO₄; Cu²⁺ + 2OH⁻ → Cu(OH)₂
हल किए गए उदाहरण
1. एक सफ़ेद ठोस हल्की बैंगनी ज्वाला देता है। उसका घोल नाइट्रिक अम्ल और सिल्वर नाइट्रेट से क्रीम अवक्षेप देता है। ठोस का नाम?
बैंगनी ज्वाला → K⁺। क्रीम अवक्षेप → Br⁻। ठोस पोटैशियम ब्रोमाइड, KBr है।
2. एक हरा घोल NaOH से हरा अवक्षेप देता है। कुछ देर हवा में रहने पर अवक्षेप भूरा हो जाता है। समझाओ।
हरा Fe(OH)₂ यानी Fe²⁺। हवा आयरन(II) को आयरन(III) में ऑक्सीकृत करती है, इसलिए भूरा Fe(OH)₃ बनता है।
3. दो सफ़ेद लवण थोड़े NaOH से सफ़ेद अवक्षेप देते हैं। अधिक NaOH में A का अवक्षेप घुल जाता है, B का नहीं। B नारंगी-लाल ज्वाला देता है। धातु आयन बताओ।
A घुलता है: Al³⁺। B रहता है और नारंगी-लाल ज्वाला: Ca²⁺।
4. एक घोल तनु HCl से बुलबुले देता है। बुलबुले रुकने के बाद बेरियम क्लोराइड सफ़ेद अवक्षेप देता है। कौन से आयन हैं?
बुलबुले (CO₂) → कार्बोनेट। अम्ल के बाद सफ़ेद अवक्षेप → सल्फेट। दोनों मौजूद हैं।
5. मिश्रण में सोडियम और पोटैशियम दोनों ज्वाला परीक्षण से क्यों नहीं दिखते, पर स्पेक्ट्रोस्कोपी से दिखते हैं?
सोडियम का तेज़ पीला आँख के लिए पोटैशियम का हल्का बैंगनी छिपा देता है। स्पेक्ट्रोस्कोप रोशनी बाँटता है, तो हर धातु की अलग रेखाएँ दिख जाती हैं।
आम गलतियाँ
- हैलाइड जाँच में सिल्वर नाइट्रेट से पहले हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालना। उसमें क्लोराइड है, तो हमेशा सफ़ेद अवक्षेप आएगा। नाइट्रिक अम्ल लो।
- बेरियम क्लोराइड से पहले अम्ल भूल जाना। कार्बोनेट भी सफ़ेद अवक्षेप देकर सल्फेट जैसा लगेगा।
- सारे सफ़ेद हाइड्रॉक्साइड एक जैसे मानना। सिर्फ़ एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड अधिक NaOH में घुलता है; कैल्शियम के लिए ज्वाला परीक्षण करो।
- आयरन आयन उलझाना: आयरन(II) हरा, आयरन(III) भूरा।