हैलोजन कौन हैं?
हैलोजन आवर्त सारणी के समूह 17 (पुराना नाम समूह 7) में हैं: फ़्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I) और एस्टेटीन (At)। हैलोजन का अर्थ है लवण बनाने वाला, क्योंकि ये धातुओं से मिलकर सोडियम क्लोराइड जैसे लवण बनाते हैं।
हर परमाणु के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं। कोश पूरा करने के लिए बस 1 और चाहिए। इसलिए हैलोजन परमाणु आसानी से एक इलेक्ट्रॉन लेता है और −1 आवेश वाला हैलाइड आयन बनता है (F⁻, Cl⁻, Br⁻, I⁻)।
ये परमाणु अकेले नहीं रहते। दो परमाणु एक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करके द्विपरमाणुक अणु बनाते हैं: F₂, Cl₂, Br₂, I₂।
भौतिक गुण और प्रवृत्तियाँ
कमरे के ताप (लगभग 25 °C) पर:
- F₂: हल्की पीली गैस
- Cl₂: पीली-हरी गैस
- Br₂: लाल-भूरा द्रव (नारंगी वाष्प)
- I₂: स्लेटी-काला चमकीला ठोस (गरम करने पर बैंगनी वाष्प)
समूह में नीचे जाने पर:
- परमाणु बड़े होते हैं (कोश बढ़ते हैं)।
- अणु बड़े होते हैं, उनके बीच बल मज़बूत होता है, इसलिए गलनांक और क्वथनांक बढ़ते हैं।
- रंग गहरा होता है।
- विद्युत-ऋणात्मकता (साझा इलेक्ट्रॉनों को खींचने की ताक़त) घटती है। फ़्लोरीन सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व है।
रासायनिक गुण और अभिक्रियाशीलता
समूह में नीचे अभिक्रियाशीलता घटती है। क्यों? हैलोजन एक इलेक्ट्रॉन खींचकर अभिक्रिया करता है। छोटे परमाणु (F) में बाहरी कोश धनावेशित नाभिक के पास होता है, खिंचाव तेज़ होता है। बड़े परमाणु (I) में बाहरी कोश दूर होता है और भीतरी कोश बीच में आते हैं (परिरक्षण), खिंचाव कमज़ोर होता है।
धातुओं से: आयनिक लवण बनते हैं। 2Na + Cl₂ → 2NaCl।
हाइड्रोजन से: हाइड्रोजन हैलाइड बनते हैं। H₂ + Cl₂ → 2HCl। HCl गैस पानी में घुलकर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाती है।
विस्थापन: अधिक अभिक्रियाशील हैलोजन लवण में कम अभिक्रियाशील की जगह ले लेता है। Cl₂ + 2KBr → 2KCl + Br₂। यहाँ क्लोरीन इलेक्ट्रॉन लेती है, यानी यह ऑक्सीकारक है। ऑक्सीकरण क्षमता नीचे घटती है।
हैलाइड आयन की जाँच और उपयोग
परीक्षण: घोल में तनु नाइट्रिक अम्ल डालिए, फिर सिल्वर नाइट्रेट की कुछ बूँदें। अवक्षेप (ठोस) बनता है:
- क्लोराइड: सफ़ेद (AgCl)
- ब्रोमाइड: क्रीम (AgBr)
- आयोडाइड: पीला (AgI)
उपयोग: क्लोरीन पीने के पानी और पूल के कीटाणु मारती है, ब्लीच और PVC प्लास्टिक बनाने में काम आती है। फ़्लोराइड दाँतों को मज़बूत करता है। आयोडीन एंटीसेप्टिक है, और आयोडीन युक्त नमक घेंघा रोकता है।
सावधानी: हैलोजन गैसें ज़हरीली हैं। प्रथम विश्व युद्ध में क्लोरीन ज़हरीली गैस के रूप में इस्तेमाल हुई थी। हमेशा धूम-कक्ष (fume cupboard) में काम करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हैलोजन परमाणु + 1 e⁻ → हैलाइड आयन: Cl + e⁻ → Cl⁻
- धातु + हैलोजन → लवण: 2Na + Cl₂ → 2NaCl
- हाइड्रोजन + हैलोजन → हाइड्रोजन हैलाइड: H₂ + Cl₂ → 2HCl
- विस्थापन: Cl₂ + 2KBr → 2KCl + Br₂
- परीक्षण: Ag⁺ + Cl⁻ → AgCl (सफ़ेद)
- अभिक्रियाशीलता: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂
हल किए गए उदाहरण
1. पोटैशियम आयोडाइड के घोल में क्लोरीन जल डाला गया। क्या दिखेगा? समीकरण लिखिए।
रंगहीन घोल भूरा हो जाएगा क्योंकि आयोडीन बनती है। क्लोरीन आयोडीन से अधिक अभिक्रियाशील है। Cl₂ + 2KI → 2KCl + I₂।
2. एस्टेटीन आयोडीन के नीचे है। कमरे के ताप पर उसकी अवस्था और आयोडीन की तुलना में अभिक्रियाशीलता बताइए।
प्रवृत्ति के अनुसार एस्टेटीन गहरे रंग का ठोस होगा, गलनांक आयोडीन से अधिक, और आयोडीन से कम अभिक्रियाशील।
3. एक घोल अम्लीय सिल्वर नाइट्रेट के साथ क्रीम रंग का अवक्षेप देता है। कौन-सा आयन है?
ब्रोमाइड आयन (Br⁻)। क्रीम ठोस सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) है।
आम गलतियाँ
- समीकरण में क्लोरीन को Cl लिखना। तत्व के रूप में यह अणु Cl₂ है।
- यह मानना कि समूह 1 की धातुओं की तरह नीचे अभिक्रियाशीलता बढ़ती है। हैलोजन में यह घटती है।
- क्लोरीन (ज़हरीली गैस) और क्लोराइड (नमक का आयन, खाने में सुरक्षित) को एक समझना।
- सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण से पहले नाइट्रिक अम्ल डालना भूल जाना। यह कार्बोनेट जैसे आयन हटाता है जो भी अवक्षेप देते हैं।