China 高一 Chemistry
अध्याय: 8
1. Ch.1 Substances and their changes
Classification and transformation; colloids · Ionic reactions; electrolytes · Redox reactions
- कोलॉइड और परिक्षिप्त तंत्र – परिक्षिप्त तंत्र (dispersed system) में एक पदार्थ छोटे-छोटे कणों के रूप में (परिक्षिप्त प्रावस्था) दूसरे पदार्थ (परिक्षेपण माध्यम) में फैला होता है। कणों के आकार से यह वास्तविक विलयन (लगभग 1 nm से छोटे), कोलॉइड (लगभग 1–100 nm) या निलंबन (100 nm से बड़े) होता है। कोलॉइड के कण दिखते नहीं और बैठते नहीं, पर रोशनी बिखेरने लायक बड़े होते हैं, इसलिए उनमें से गुज़रती किरण का रास्ता दिखता है – टिंडल प्रभाव। दोनों प्रावस्थाओं की अवस्था से कोलॉइड के प्रकार बनते हैं (कोहरा, धुआँ, दूध, झाग, जेल)। कोलॉइड कणों पर अक्सर एक जैसा आवेश होता है; विद्युत अपघट्य (नमक) डालने से आवेश ख़त्म होता है और कण जुड़कर बैठ जाते हैं – स्कंदन (coagulation)।
- आयनिक समीकरण और आयन-विनिमय अभिक्रियाएँ – लवण, प्रबल अम्ल और क्षार पानी में आयनों में टूट जाते हैं: ये विद्युत अपघट्य हैं। दो ऐसे विलयन मिलाने पर अभिक्रिया तभी होती है जब कुछ आयन अवक्षेप, गैस या जल बनकर विलयन से निकल जाएँ। पूर्ण आयनिक समीकरण हर आयन दिखाता है; न बदलने वाले (दर्शक) आयन काटने पर नेट आयनिक समीकरण मिलता है, जैसे Ag⁺ + Cl⁻ → AgCl↓। दोनों ओर परमाणु और आवेश बराबर होने चाहिए।
- अपचयोपचय अभिक्रियाएँ: ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉन तक – पहले ऑक्सीकरण का मतलब था ऑक्सीजन जुड़ना या हाइड्रोजन हटना। अपचयन इसका उल्टा था। आज हम बड़ा विचार लेते हैं: इलेक्ट्रॉन खोना ऑक्सीकरण है और इलेक्ट्रॉन पाना अपचयन। दोनों हमेशा साथ होते हैं, इसलिए इन्हें अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रिया कहते हैं। ज़्यादा सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु के आयन को इलेक्ट्रॉन देती है।
2. Ch.2 Sodium and chlorine
Sodium and compounds · Chlorine and compounds · Amount of substance; molar concentration · Lab 1: prepare a solution of given molarity
- क्षार धातुएँ और सोडियम के यौगिक – क्षार धातुएँ (लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, रूबिडियम, सीज़ियम) आवर्त सारणी का समूह 1 हैं। हर परमाणु के बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है, जिसे वह आसानी से खोकर M⁺ आयन बनाता है। ये नरम, हल्की और बहुत क्रियाशील हैं: पानी से हाइड्रोजन और क्षार बनाती हैं और हवा में जलती हैं। नीचे जाने पर क्रियाशीलता बढ़ती है। सोडियम से Na₂O, Na₂O₂, Na₂CO₃ (धावन सोडा) और NaHCO₃ (बेकिंग सोडा) बनते हैं, और हर धातु लौ को अपना रंग देती है।
- हैलोजन: समूह 17 के तत्व – फ़्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन और एस्टेटीन आवर्त सारणी के समूह 17 में हैं, इन्हें हैलोजन कहते हैं। हर परमाणु के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह 1 इलेक्ट्रॉन लेकर हैलाइड आयन (X⁻) बनाता है। समूह में नीचे जाने पर परमाणु बड़े होते हैं, रंग गहरा होता है, गलनांक-क्वथनांक बढ़ते हैं और अभिक्रियाशीलता घटती है। अधिक अभिक्रियाशील हैलोजन कम अभिक्रियाशील हैलोजन को उसके लवण से हटा देता है।
- मोल संकल्पना, मोलर द्रव्यमान और रासायनिक सूत्र – परमाणु इतने छोटे हैं कि एक-एक गिनना नामुमकिन है, इसलिए रसायनज्ञ उन्हें तौलकर गिनते हैं। परमाणु द्रव्यमान u में होता है; 1 u = कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12। एक मोल = 6.022 × 10²³ कण, और उसका ग्राम में द्रव्यमान u वाले सूत्र द्रव्यमान के बराबर। मोल से हम यौगिक में हर तत्व का प्रतिशत निकालते हैं, और प्रतिशत से उल्टा चलकर मूलानुपाती और आण्विक सूत्र।
- प्रयोग: दी गई मोलरता का विलयन बनाना – ज्ञात मोलरता (mol/L) का विलयन बनाने के लिए पहले विलेय का द्रव्यमान निकालते हैं: द्रव्यमान = मोलरता × आयतन (लीटर में) × मोलर द्रव्यमान। उसे तोलते हैं, बीकर में थोड़े पानी में घोलते हैं, कीप से आयतनमितीय फ़्लास्क में डालते हैं, बीकर को तीन बार धोकर फ़्लास्क में डालते हैं, फिर पानी तब तक डालते हैं जब तक मेनिस्कस का निचला भाग वलय चिह्न को छू न ले, आँख चिह्न की ऊँचाई पर रखकर। ढक्कन लगाकर 10 बार उलटने-पलटने से घोल मिल जाता है। त्रुटियाँ चिह्न ग़लत पढ़ने, चिह्न से आगे निकलने, स्थानांतरण में विलेय खोने, गरम घोल इस्तेमाल करने या गंदे फ़्लास्क से आती हैं।
3. Ch.3 Iron; metal materials
Iron and compounds · Metal materials · Lab 2: properties of iron compounds
- लोहा और उसके यौगिक – लोहा (Fe, परमाणु क्रमांक 26) एक धूसर, चुंबकीय संक्रमण धातु है। इसका परमाणु 2 या 3 इलेक्ट्रॉन खो सकता है, इसलिए इसके यौगिकों के दो परिवार हैं: आयरन(II) जिसमें Fe²⁺ होता है और आयरन(III) जिसमें Fe³⁺ होता है। लोहा तनु अम्ल से Fe²⁺ और हाइड्रोजन देता है, क्लोरीन से FeCl₃, भाप से Fe₃O₄ और नम हवा में जंग बनाता है। तीन ऑक्साइड हैं: FeO (काला, Fe²⁺), Fe₂O₃ (लाल-भूरा, Fe³⁺) और Fe₃O₄ (काला, चुंबकीय, दोनों आयन)। दो हाइड्रॉक्साइड, Fe(OH)₂ (सफ़ेद-हरा) और Fe(OH)₃ (लाल-भूरा), पानी में नहीं घुलते; हवा में Fe(OH)₂ बदलकर Fe(OH)₃ बन जाता है। ऑक्सीकारक Fe²⁺ को Fe³⁺ में और अपचायक Fe³⁺ को वापस Fe²⁺ में बदलता है।
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- प्रयोग: लोहे के यौगिकों के गुण (Fe²⁺ और Fe³⁺ की जाँच) – इस प्रयोग में तुम घोल में Fe²⁺ और Fe³⁺ की पहचान करते हो। सोडियम हाइड्रॉक्साइड Fe²⁺ से सफ़ेद-हरा ठोस (जो हवा में भूरा हो जाता है) और Fe³⁺ से लाल-भूरा ठोस देता है। पोटैशियम थायोसायनेट (KSCN) Fe³⁺ को खून जैसा लाल कर देता है, पर Fe²⁺ पर कोई असर नहीं होता। हाइड्रोजन पेरॉक्साइड Fe²⁺ को Fe³⁺ में ऑक्सीकृत करता है (फिर KSCN से लाल रंग आता है), और लोहे का चूर्ण Fe³⁺ को Fe²⁺ में अपचयित करता है (फिर KSCN से लाल रंग नहीं आता)। प्रयोग दिखाता है कि आयरन(II) अपचायक है, आयरन(III) ऑक्सीकारक है, और दोनों एक-दूसरे में बदल सकते हैं।
4. Ch.4 Structure and periodic law
Atomic structure and periodic table; nuclides · Periodic law · Chemical bonds · Lab 3: trends in periods and groups
- तत्वों का आवर्त वर्गीकरण – वैज्ञानिकों ने मिलते-जुलते तत्वों को एक साथ रखने की कोशिश की। डॉबेराइनर ने त्रिक बनाए, न्यूलैंड्स ने देखा कि हर 8वाँ तत्व पहले जैसा है (अष्टक), मेंडेलीफ़ ने परमाणु द्रव्यमान के क्रम में तत्व रखे और अनजान तत्वों के लिए खाली जगह छोड़ी। मोसले ने बताया कि असली आधार परमाणु संख्या है। आधुनिक आवर्त नियम: तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन हैं। आधुनिक सारणी में 7 आवर्त और 18 वर्ग हैं। Z > 100 वाले तत्वों के अस्थायी IUPAC नाम अंकों के मूल (nil, un, bi, tri, quad, pent, hex, sept, oct, enn) + ium से बनते हैं।
- गुणधर्मों में आवर्ती प्रवृत्तियाँ – लगभग हर प्रवृत्ति दो बातों से तय होती है: नाभिक का खिंचाव (प्रभावी नाभिकीय आवेश) और बाहरी कोश की दूरी। आवर्त में बाएँ से दाएँ खिंचाव बढ़ता है पर कोश वही रहता है, इसलिए परमाणु छोटे होते हैं, आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है और विद्युतऋणात्मकता बढ़ती है। वर्ग में नीचे नया कोश जुड़ता है, इसलिए परमाणु बड़े और ये मान कम होते हैं। धनायन छोटा, ऋणायन बड़ा। संयोजकता बाहरी इलेक्ट्रॉनों से आती है; धातु-क्रियाशीलता नीचे-बाएँ और अधातु-क्रियाशीलता ऊपर-दाएँ सबसे ज़्यादा।
- कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध – परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।
- प्रयोग: आवर्त और वर्ग में तत्वों के गुणों का रुझान – प्रयोगशाला में हम आवर्ती रुझान अपनी आँखों से देख सकते हैं। आवर्त 3 में सोडियम से क्लोरीन की ओर धातु सक्रियता घटती है (सोडियम पानी में तेज़ बुलबुले देता है, मैग्नीशियम बहुत कम, एल्युमिनियम बिल्कुल नहीं), अधातु सक्रियता बढ़ती है (क्लोरीन सबसे प्रबल है) और ऑक्साइड प्रबल क्षार से प्रबल अम्ल बन जाते हैं। वर्ग 1 में नीचे जाने पर धातुएँ ज़्यादा सक्रिय होती हैं (Li, Na, K)। वर्ग 17 में नीचे जाने पर हैलोजन कम सक्रिय होते हैं, इसलिए क्लोरीन ब्रोमीन और आयोडीन को उनके लवण से निकाल देता है और ब्रोमीन आयोडीन को।
5. Ch.5 Important non-metals
Sulfur and compounds · Nitrogen and compounds; acid rain · Inorganic non-metallic materials · Lab 4–5: removing ions from crude salt; sulfur conversions
- सल्फर (गंधक) और उसके यौगिक – सल्फर (S, परमाणु संख्या 16, इलेक्ट्रॉन 2, 8, 6) एक पीली अधातु है जो ऑक्सीजन के साथ समूह 16 में है। ठोस सल्फर S₈ छल्लों से बना है और इसके विषमलंबाक्ष तथा एकनताक्ष अपररूप हैं। यह जलकर सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) बनाता है, जो विरंजन करती है और अम्ल वर्षा का कारण है। संपर्क विधि में SO₂ को V₂O₅ उत्प्रेरक पर SO₃ बनाया जाता है और फिर सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)। यह प्रबल अम्ल है, निर्जलीकारक और ऑक्सीकारक भी। H₂S की गंध सड़े अंडे जैसी होती है। सल्फेट आयन की पहचान: BaCl₂ डालने पर सफ़ेद BaSO₄ अवक्षेप, जो तनु HCl में नहीं घुलता।
- नाइट्रोजन और उसके यौगिक – हवा का 78% नाइट्रोजन गैस (N₂) है। इसका त्रिबंध इसे बहुत निष्क्रिय बनाता है, इसलिए पौधे इसे सीधे इस्तेमाल नहीं कर पाते। स्थिरीकरण N₂ को यौगिकों में बदलता है: बिजली और जीवाणु प्राकृतिक रूप से, और हैबर प्रक्रम उद्योग में अमोनिया (NH₃) बनाता है। अमोनिया क्षारीय गैस है जो अमोनियम लवण बनाती है। ऊँचे ताप पर N₂ और O₂ से NO बनता है, जो भूरी NO₂ बन जाती है; बारिश में NO₂ नाइट्रिक अम्ल और अम्ल वर्षा बनाती है।
- प्रयोग: कच्चे नमक की शुद्धि और सल्फ़र यौगिकों का रूपांतरण – कच्चे नमक में Ca²⁺, Mg²⁺ और SO₄²⁻ अशुद्धियाँ होती हैं। हम इन्हें अवक्षेपण से हटाते हैं: BaCl₂ सल्फ़ेट को BaSO₄ बनाकर, NaOH मैग्नीशियम को Mg(OH)₂ बनाकर, और Na₂CO₃ कैल्शियम (और बचे बेरियम) को कार्बोनेट बनाकर निकाल देता है। फिर छानते हैं, बचे OH⁻ और CO₃²⁻ को तनु HCl से उदासीन करते हैं और वाष्पीकरण से शुद्ध NaCl के रवे पाते हैं। दूसरे भाग में हम सल्फ़र को −2 (H₂S), 0 (S), +4 (SO₂) और +6 (H₂SO₄) ऑक्सीकरण संख्याओं के बीच बदलते देखते हैं: ऊपर जाना उपचयन है, नीचे जाना अपचयन।
6. Ch.6 Reactions and energy
Heat and electric energy from reactions; cells · Rate and limit of reactions · Lab 6–7: chemical to electrical energy; rate factors
- रासायनिक ऊर्जा: गर्मी, बंध ऊर्जा और सेल – रासायनिक अभिक्रिया में पुराने बंध टूटते हैं (ऊर्जा अंदर) और नए बंध बनते हैं (ऊर्जा बाहर)। अगर बाहर ज़्यादा जाए तो अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है और गर्मी निकलती है (ΔH ऋणात्मक)। अगर अंदर ज़्यादा जाए तो ऊष्माशोषी है (ΔH धनात्मक)। बंध ऊर्जाओं से: ΔH = बंध तोड़ने की ऊर्जा − बंध बनने पर निकली ऊर्जा। अगर रेडॉक्स अभिक्रिया के इलेक्ट्रॉन सीधे कूदने की जगह तार से गुज़रें, तो ऊर्जा बिजली बनकर निकलती है: यही गैल्वेनिक सेल है, जैसे Zn–Cu का 1.1 V। सेलों को श्रेणी में जोड़ने से बैटरी बनती है। प्राथमिक सेल एक बार चलते हैं, द्वितीयक सेल रीचार्ज होते हैं और ईंधन सेल में बाहर से ईंधन दिया जाता है।
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
- प्रयोग: सरल सेल बनाना और दर को प्रभावित करने वाले कारक – भाग क: तनु अम्ल में ज़िंक और ताँबे की पट्टी डालो, वोल्टमीटर से जोड़ो और लगभग 1.0 V पढ़ो। ज़िंक इलेक्ट्रॉन देता है (ऐनोड) और ताँबे पर हाइड्रोजन बनती है (कैथोड)। अलग धातु-जोड़ी अलग वोल्टेज देती है और दो एक जैसी पट्टियाँ 0 V। भाग ख: गैस बनाम समय का ग्राफ़ बनाओ। रेखा की ढलान ही दर है। ज़्यादा सांद्रता, ऊँचा ताप (लगभग हर 10 °C पर दुगुनी), छोटे टुकड़े और उत्प्रेरक, चारों दर बढ़ाते हैं, और निष्पक्ष परीक्षण में एक बार में एक ही कारक बदला जाता है। उत्पाद की कुल मात्रा नहीं बदलती, सिर्फ़ यह बदलता है कि कितनी तेज़ी से बनता है।
7. Ch.7 Organic compounds
Introduction to organic compounds · Ethylene and polymers · Ethanol and acetic acid · Basic nutrients · Lab 8–9: ball-and-stick models; ethanol and acetic acid
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
- कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण, एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल – कार्बन यौगिक ऑक्सीजन में जलकर CO₂, पानी, ऊष्मा और प्रकाश देते हैं (दहन); ऑक्सीकारक ऐल्कोहॉल को अम्ल बना देते हैं (ऑक्सीकरण); असंतृप्त यौगिक निकेल की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़ते हैं (संकलन); संतृप्त यौगिक धूप में H की जगह Cl लेते हैं (प्रतिस्थापन)। एथेनॉल सोडियम से हाइड्रोजन देता है; एथेनॉइक अम्ल दुर्बल अम्ल है जो ऐल्कोहॉल से एस्टर और कार्बोनेट से CO₂ देता है।
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
8. Ch.8 Chemistry and sustainability
Use of natural resources · Rational use of chemicals · Environmental protection; green chemistry
- दैनिक जीवन में रसायन: दवाएँ, भोजन, सफ़ाई और मिट्टी – रसायन हर दिन आपके घर में काम करता है। प्रतिअम्ल (एंटासिड) दुर्बल क्षार हैं जो पेट का ज़्यादा अम्ल शांत करते हैं। दवाओं को उनके काम से बाँटते हैं: पीड़ाहारी, प्रतिजैविक, रोगाणुरोधक, प्रतिहिस्टैमिन, प्रशांतक। खाद्य रसायन भोजन को सुरक्षित और स्वादिष्ट रखते हैं: परिरक्षक, प्रतिऑक्सीकारक और मधुरक। साबुन इसलिए साफ़ करता है क्योंकि उसके अणु का एक सिरा पानी-प्रेमी और दूसरा तेल-प्रेमी है। किसान अम्लीय मिट्टी में चूना और फ़सल के पोषण के लिए उर्वरक डालते हैं। कुछ धातु आयन शरीर को चाहिए, कुछ विषैले हैं, इसलिए भी हम पुनर्चक्रण करते हैं।
- हरित रसायन (Green Chemistry) – हरित रसायन का अर्थ है ऐसे रासायनिक उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो कम अपशिष्ट दें, सुरक्षित पदार्थ लें, ऊर्जा बचाएँ और नवीकरणीय कच्चा माल इस्तेमाल करें। मुख्य उपाय: ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था, उत्प्रेरक, पानी जैसे सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल, और सुरक्षित रूप से टूटने वाले उत्पाद। जीवन-चक्र मूल्यांकन कच्चे माल से निपटान तक उत्पाद का असर जाँचता है।