परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या
परमाणु की कोई पक्की किनारी नहीं होती, इसलिए आकार नाभिकों के बीच की दूरी से लेते हैं।
- सहसंयोजी त्रिज्या: एक ही तत्व के दो बंधित नाभिकों की दूरी का आधा (Cl₂: 198 ÷ 2 = 99 pm)।
- धात्विक त्रिज्या: धातु क्रिस्टल में पास के दो नाभिकों की दूरी का आधा।
प्रवृत्ति
- आवर्त में: घटती है। इलेक्ट्रॉन उसी कोश में जाते हैं पर नाभिकीय आवेश हर बार +1 बढ़ता है। प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) — भीतरी इलेक्ट्रॉनों के परिरक्षण के बाद बाहरी इलेक्ट्रॉन को महसूस होने वाला खिंचाव — बढ़ता है।
- वर्ग में नीचे: बढ़ती है। हर बार नया कोश जुड़ता है।
आयनिक त्रिज्या
- धनायन अपने परमाणु से छोटा: कम इलेक्ट्रॉन, वही नाभिक। Na 186 → Na⁺ 102 pm।
- ऋणायन अपने परमाणु से बड़ा: अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन आपस में प्रतिकर्षण करते हैं। Cl 99 → Cl⁻ 181 pm।
- समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ में इलेक्ट्रॉन बराबर होते हैं (O²⁻, F⁻, Na⁺, Mg²⁺ सबमें 10)। जिसमें प्रोटॉन ज़्यादा, वह छोटा: O²⁻ > F⁻ > Na⁺ > Mg²⁺।
आयनन एन्थैल्पी
आयनन एन्थैल्पी (ΔiH): गैसीय अवस्था के अलग परमाणु से सबसे ढीले बंधे इलेक्ट्रॉन को निकालने में लगी ऊर्जा: X(g) → X⁺(g) + e⁻। इकाई kJ mol⁻¹। यह हमेशा धनात्मक है।
दूसरी आयनन एन्थैल्पी हमेशा पहली से ज़्यादा होती है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन धनायन से निकालना पड़ता है।
प्रवृत्ति
- आवर्त में: सामान्यतः बढ़ती है। क्षार धातुओं की सबसे कम, उत्कृष्ट गैसों की सबसे ज़्यादा।
- वर्ग में नीचे: घटती है।
दो प्रसिद्ध अपवाद
- Be (899) > B (801): बोरॉन का इलेक्ट्रॉन 2p से निकलता है, जो 2s से ऊँची ऊर्जा का और ज़्यादा परिरक्षित है।
- N (1402) > O (1314): नाइट्रोजन का 2p³ आधा भरा, स्थायी है। ऑक्सीजन (2p⁴) में एक कक्षक में दो इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण करते हैं, इसलिए एक आसानी से निकलता है।
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (ΔegH): गैसीय अलग परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन जुड़ने पर एन्थैल्पी परिवर्तन: X(g) + e⁻ → X⁻(g)। ऊर्जा निकले तो मान ऋणात्मक।
- आवर्त में: अधिक ऋणात्मक होती है।
- वर्ग में नीचे: कम ऋणात्मक होती है।
- हैलोजन सबसे ऋणात्मक: एक इलेक्ट्रॉन से अष्टक पूरा।
- उत्कृष्ट गैसें बड़ा धनात्मक: नया इलेक्ट्रॉन नए, ऊँचे कोश में जाएगा।
- अपवाद: Cl (−349), F (−328) से ज़्यादा ऋणात्मक; S, O से ज़्यादा। F और O बहुत छोटे हैं, छोटे 2p कोश में आने वाले इलेक्ट्रॉन को भीड़ का प्रतिकर्षण झेलना पड़ता है।
विद्युतऋणात्मकता
विद्युतऋणात्मकता: रासायनिक बंध में किसी परमाणु की साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म को अपनी ओर खींचने की क्षमता। यह मापी गई ऊर्जा नहीं है; इसकी कोई इकाई नहीं। पॉलिंग पैमाने पर F = 4.0 (सबसे ज़्यादा), O = 3.5, N = 3.0, Cl = 3.0, C = 2.5, H = 2.1, Na = 0.9, Cs = 0.7।
- आवर्त में: बढ़ती है।
- वर्ग में नीचे: घटती है।
- ज़्यादा विद्युतऋणात्मकता = अधात्विक गुण; कम = धात्विक गुण।
संयोजकता
संयोजकता किसी तत्व की संयोजन क्षमता है। मुख्य वर्ग के तत्वों में यह प्रायः बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या (वर्ग 1, 2, 13, 14) या 8 − बाहरी इलेक्ट्रॉन (वर्ग 15, 16, 17) होती है।
| वर्ग | 1 | 2 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बाहरी e⁻ | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
| संयोजकता | 1 | 2 | 3 | 4 | 3, 5 | 2, 6 | 1, 7 | 0, 8 |
इससे सूत्र बनते हैं: Na (1) + Cl (1) → NaCl; Al (3) + O (2) → Al₂O₃। संक्रमण तत्वों में परिवर्ती संयोजकता होती है।
दूसरे आवर्त का असामान्य व्यवहार और विकर्ण संबंध
Li से F तक के तत्व अपने वर्ग के बाकी तत्वों से अलग हैं: बहुत छोटे, बहुत विद्युतऋणी, और केवल चार संयोजी कक्षक (2s, 2p), इसलिए अधिकतम सहसंयोजकता 4। कुछ तत्व अपने तिरछे नीचे-दाएँ वाले तत्व जैसे हैं: Li–Mg, Be–Al, B–Si। इसे विकर्ण संबंध कहते हैं।
रासायनिक क्रियाशीलता और ऑक्साइड की प्रकृति
आवर्त के दोनों सिरों पर क्रियाशीलता सबसे ज़्यादा और बीच में सबसे कम होती है।
- बाईं ओर (धातुएँ): कम आयनन एन्थैल्पी → आसानी से इलेक्ट्रॉन देती हैं → प्रबल अपचायक। वर्ग में नीचे क्रियाशीलता बढ़ती है (Cs > Rb > K > Na > Li)।
- दाईं ओर (अधातुएँ): बहुत ऋणात्मक ΔegH → आसानी से इलेक्ट्रॉन लेती हैं → प्रबल ऑक्सीकारक। वर्ग में नीचे क्रियाशीलता घटती है (F > Cl > Br > I)।
- ऑक्साइड: बाईं ओर के क्षारीय (Na₂O + H₂O → 2NaOH), दाईं ओर के अम्लीय (Cl₂O₇ + H₂O → 2HClO₄), बीच वाले जैसे Al₂O₃ उभयधर्मी। CO, NO, N₂O उदासीन।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- X(g) → X⁺(g) + e⁻ ; Δ_iH (हमेशा धनात्मक)
- X(g) + e⁻ → X⁻(g) ; Δ_egH (प्रायः ऋणात्मक)
- सहसंयोजी त्रिज्या = ½ × X₂ में नाभिकों की दूरी
- समइलेक्ट्रॉनिक आयन: ज़्यादा प्रोटॉन → छोटा आकार
- आवर्त में: त्रिज्या ↓, IE ↑, EGE अधिक ऋणात्मक, EN ↑
- वर्ग में नीचे: त्रिज्या ↑, IE ↓, EGE कम ऋणात्मक, EN ↓
- संयोजकता = बाहरी इलेक्ट्रॉन, या 8 − बाहरी इलेक्ट्रॉन
हल किए गए उदाहरण
1. Cl–Cl बंध लंबाई 198 pm है। क्लोरीन की सहसंयोजी त्रिज्या निकालें।
198 ÷ 2 = 99 pm।
2. Mg, Al, Si, Na को बढ़ती परमाणु त्रिज्या के क्रम में लगाएँ।
सब आवर्त 3 में; बाएँ से दाएँ त्रिज्या घटती है। बढ़ता क्रम: Si < Al < Mg < Na।
3. N³⁻, O²⁻, F⁻, Na⁺, Mg²⁺ को घटते आकार में लगाएँ।
सबमें 10 इलेक्ट्रॉन। प्रोटॉन: N 7, O 8, F 9, Na 11, Mg 12। ज़्यादा प्रोटॉन = ज़्यादा खिंचाव = छोटा। N³⁻ > O²⁻ > F⁻ > Na⁺ > Mg²⁺।
4. प्रथम आयनन एन्थैल्पी: Na 496, Mg 737, Al 577 kJ/mol। Al का मान Mg से कम क्यों?
Mg: [Ne] 3s²; Al: [Ne] 3s² 3p¹। Al का 3p इलेक्ट्रॉन ऊँची ऊर्जा का और 3s युग्म से परिरक्षित है, इसलिए आसानी से निकलता है।
5. 0.5 mol गैसीय सोडियम परमाणुओं को आयनित करने में कितनी ऊर्जा लगेगी? (Δ_iH = 496 kJ/mol)
ऊर्जा = 0.5 × 496 = 248 kJ।
6. 2 mol Cl(g) परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन लें तो कितनी ऊर्जा निकलेगी? (Δ_egH = −349 kJ/mol)
2 × (−349) = −698 kJ, यानी 698 kJ ऊर्जा निकलेगी।
7. किसी तत्व की पहली चार आयनन एन्थैल्पी 738, 1451, 7733, 10 540 kJ/mol हैं। वर्ग और संयोजकता बताएँ।
दूसरी (1451) और तीसरी (7733) के बीच बड़ी छलाँग: 2 इलेक्ट्रॉन के बाद भरे भीतरी कोश से निकालना पड़ता है। इसलिए 2 बाहरी इलेक्ट्रॉन → वर्ग 2, संयोजकता 2 (मैग्नीशियम)।
8. Al और S के यौगिक का सूत्र लिखें और बताएँ Al₂O₃ अम्लीय है या क्षारीय।
Al संयोजकता 3; S संयोजकता 8 − 6 = 2। अदला-बदली: Al₂S₃। Al₂O₃ आवर्त के बीच में है, इसलिए उभयधर्मी (HCl और NaOH दोनों से क्रिया)।
आम गलतियाँ
- कहना कि आवर्त में Z बढ़ने से परमाणु बड़े होते हैं। ज़्यादा प्रोटॉन ज़्यादा खींचते हैं, इसलिए छोटे होते हैं।
- इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और विद्युतऋणात्मकता को एक समझना। पहली अलग परमाणु की ऊर्जा है; दूसरी बंध में खिंचाव, बिना इकाई।
- लिखना कि F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी सबसे ऋणात्मक है। Cl की है; F बहुत छोटा और भीड़ वाला है।
- आयनन एन्थैल्पी के अपवाद भूलना: Be > B और N > O।