तत्वों को वर्गीकृत करने की ज़रूरत क्यों?
1800 के आसपास लगभग 30 तत्व ज्ञात थे, आज 118 हैं। हर तत्व को अलग से पढ़ना बहुत मुश्किल है।
वर्गीकरण यानी मिलती-जुलती चीज़ों को एक समूह में रखना। अच्छे वर्गीकरण से:
- पूरे परिवार को एक साथ पढ़ सकते हैं (जैसे सभी क्षार धातुएँ पानी से क्रिया करती हैं);
- पड़ोसी तत्वों से किसी तत्व के गुणों का अनुमान लगा सकते हैं;
- जहाँ कोई तत्व छूट गया हो, वह खाली जगह दिख जाती है।
आवर्त सारणी का इतिहास
डॉबेराइनर के त्रिक (1817–1829)
तीन मिलते-जुलते तत्वों को द्रव्यमान के क्रम में रखो तो बीच वाले का द्रव्यमान बाकी दो के औसत के क़रीब होता है। जैसे Li, Na, K और Cl, Br, I। कमी: बहुत कम त्रिक मिले।
शैनकोर्टोइस (1862)
उन्होंने तत्वों को एक बेलन पर घुमावदार रेखा में लिखा; मिलते-जुलते तत्व एक ही सीधी रेखा में आ गए।
न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (1865)
बढ़ते द्रव्यमान के क्रम में हर आठवाँ तत्व पहले जैसा होता है, जैसे संगीत का आठवाँ सुर। कमी: केवल कैल्शियम तक सही।
लोथर मेयर (1869)
परमाणु आयतन जैसे भौतिक गुणों को द्रव्यमान के साथ आलेखित किया तो बार-बार दोहराने वाला (आवर्ती) वक्र मिला।
मेंडेलीफ़ का आवर्त नियम (1869)
तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन हैं। उनकी ख़ूबियाँ:
- गुणों को द्रव्यमान-क्रम से ज़्यादा महत्व दिया: आयोडीन (127) को टेल्यूरियम (128) के बाद रखा ताकि वह F, Cl, Br के साथ रहे।
- खाली जगहें छोड़ीं और अनजान तत्वों की भविष्यवाणी की: एका-ऐलुमिनियम (बाद में गैलियम, 1875) और एका-सिलिकॉन (बाद में जर्मेनियम, 1886)।
- कुछ तत्वों के ग़लत परमाणु द्रव्यमान ठीक किए।
कमियाँ: हाइड्रोजन का निश्चित स्थान नहीं; समस्थानिकों के लिए अलग जगह चाहिए; कुछ जोड़े (Ar–K, Co–Ni, Te–I) द्रव्यमान-क्रम तोड़ते हैं।
आधुनिक आवर्त नियम और दीर्घ आवर्त सारणी
1913 में हेनरी मोसले ने तत्वों की X-किरणों का अध्ययन किया। उनकी आवृत्ति परमाणु संख्या (Z) के साथ नियमित रूप से बढ़ी, द्रव्यमान के साथ नहीं।
आधुनिक आवर्त नियम: तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्ती फलन होते हैं।
Z के क्रम से मेंडेलीफ़ की समस्याएँ हट गईं: समस्थानिकों का Z एक है, इसलिए एक ही जगह; Ar (18) अपने-आप K (19) से पहले।
दीर्घ रूप सारणी
- आवर्त = क्षैतिज पंक्तियाँ, कुल 7। आवर्त संख्या = सबसे बाहरी कोश की संख्या (n)।
- वर्ग = ऊर्ध्वाधर स्तंभ, कुल 18 (IUPAC क्रमांक 1 से 18)। एक वर्ग के तत्वों का बाहरी इलेक्ट्रॉन-विन्यास एक जैसा, इसलिए गुण भी मिलते-जुलते।
- हर आवर्त में तत्व: 2, 8, 8, 18, 18, 32, 32।
- लैन्थेनॉयड (Z = 58–71) और ऐक्टिनॉयड (Z = 90–103) नीचे दो पंक्तियों में रखे जाते हैं।
गुण दोहराते क्यों हैं? क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन-विन्यास तय अंतराल (2, 8, 8, 18, 18, 32) के बाद दोहराता है।
100 से अधिक परमाणु संख्या वाले तत्वों का नामकरण
नया भारी तत्व बनने पर यह तय होने में सालों लगते हैं कि पहले किसने बनाया। तब तक IUPAC परमाणु संख्या से ही एक अस्थायी नाम देता है।
| अंक | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मूल | nil | un | bi | tri | quad | pent | hex | sept | oct | enn |
| अक्षर | n | u | b | t | q | p | h | s | o | e |
तरीका: अंकों के मूल क्रम से लिखें, अंत में -ium जोड़ें। प्रतीक = मूलों के पहले अक्षर (पहला बड़ा)।
- वर्तनी के दो नियम: "bi-ium", "tri-ium" में एक i हटता है (bium, trium); "enn-nil" में एक n हटता है (ennil)।
- Z = 101 → Unnilunium, Unu (आधिकारिक: मेंडेलीवियम, Md)।
- Z = 104 → Unnilquadium, Unq (आधिकारिक: रदरफ़ोर्डियम, Rf)।
- Z = 118 → Ununoctium, Uuo (आधिकारिक: ओगानेसॉन, Og)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- त्रिक नियम: बीच वाले का द्रव्यमान ≈ (पहले + तीसरे) ÷ 2
- आधुनिक आवर्त नियम: गुण = परमाणु संख्या Z का आवर्ती फलन
- हर आवर्त में तत्व: 2, 8, 8, 18, 18, 32, 32
- Z > 100 का IUPAC नाम = अंकों के मूल + "ium"; प्रतीक = मूलों के पहले अक्षर
- मूल: 0 nil, 1 un, 2 bi, 3 tri, 4 quad, 5 pent, 6 hex, 7 sept, 8 oct, 9 enn
हल किए गए उदाहरण
1. क्या Li (7), Na (23), K (39) डॉबेराइनर त्रिक हैं?
पहले और तीसरे का औसत = (7 + 39) ÷ 2 = 23 = Na का द्रव्यमान। तीनों नरम, क्रियाशील धातुएँ हैं। हाँ, यह त्रिक है।
2. Cl = 35.5, I = 127। त्रिक नियम से Br का द्रव्यमान निकालें।
(35.5 + 127) ÷ 2 = 162.5 ÷ 2 = 81.25। असली मान 80 के क़रीब है।
3. न्यूलैंड्स के क्रम (Li, Be, B, C, N, O, F, Na …) में Li जैसा तत्व कौन-सा है?
Li = 1, Be 2, B 3, C 4, N 5, O 6, F 7, Na 8। आठवाँ तत्व Na, Li जैसा है।
4. Z = 107 का IUPAC नाम और प्रतीक लिखें।
अंक 1, 0, 7 → un + nil + sept + ium = Unnilseptium, प्रतीक Uns। (आधिकारिक: बोरियम, Bh)
5. Z = 119 और Z = 120 के IUPAC नाम लिखें।
119: un + un + enn + ium = Ununennium, Uue। 120: un + bi + nil + ium = Unbinilium, Ubn।
6. Ununhexium का Z, आवर्त और वर्ग बताएँ।
un = 1, un = 1, hex = 6 → Z = 116। आवर्त 7 में Z = 87 से 118। 118 वर्ग 18 में है, तो 117 वर्ग 17 और 116 वर्ग 16। उत्तर: आवर्त 7, वर्ग 16 (लिवरमोरियम, Lv)।
7. Te = 127.6, I = 126.9। मेंडेलीफ़ ने Te को I से पहले क्यों रखा और आधुनिक सारणी इसे कैसे सही ठहराती है?
द्रव्यमान से I पहले आता, पर I के गुण F, Cl, Br जैसे हैं, इसलिए उसे उनके वर्ग में रखा। आधुनिक सारणी में Te का Z = 52 और I का Z = 53 है, तो Te पहले आता ही है।
आम गलतियाँ
- कहना कि मेंडेलीफ़ ने परमाणु संख्या से क्रम बनाया। उन्होंने द्रव्यमान लिया; परमाणु संख्या मोसले और आधुनिक नियम की देन है।
- Z = 102 के लिए "Unnilbiium" लिखना। सही है Unnilbium (Unb)।
- आवर्त और वर्ग में उलझना। आवर्त = पंक्ति (7), वर्ग = स्तंभ (18)।
- सोचना कि न्यूलैंड्स का नियम सभी तत्वों पर चला। वह कैल्शियम के बाद विफल हुआ।