Spain 1º Bachillerato Physics and Chemistry
अध्याय: 6
1. Chemical bonding and structure of matter
Development of the periodic table · Electron structure and periodic position · Stability of atoms and chemical bonds · Inorganic nomenclature
- तत्वों का आवर्त वर्गीकरण – वैज्ञानिकों ने मिलते-जुलते तत्वों को एक साथ रखने की कोशिश की। डॉबेराइनर ने त्रिक बनाए, न्यूलैंड्स ने देखा कि हर 8वाँ तत्व पहले जैसा है (अष्टक), मेंडेलीफ़ ने परमाणु द्रव्यमान के क्रम में तत्व रखे और अनजान तत्वों के लिए खाली जगह छोड़ी। मोसले ने बताया कि असली आधार परमाणु संख्या है। आधुनिक आवर्त नियम: तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन हैं। आधुनिक सारणी में 7 आवर्त और 18 वर्ग हैं। Z > 100 वाले तत्वों के अस्थायी IUPAC नाम अंकों के मूल (nil, un, bi, tri, quad, pent, hex, sept, oct, enn) + ium से बनते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और s, p, d, f ब्लॉक – आवर्त सारणी असल में इलेक्ट्रॉन-भरने का नक्शा है। आवर्त संख्या = विन्यास में सबसे बड़ा n। ब्लॉक = वह उपकोश जिसमें आख़िरी इलेक्ट्रॉन गया: s-ब्लॉक (वर्ग 1–2, ns¹⁻²), p-ब्लॉक (वर्ग 13–18, ns² np¹⁻⁶), d-ब्लॉक (वर्ग 3–12, (n−1)d¹⁻¹⁰ ns⁰⁻²), f-ब्लॉक (लैन्थेनॉयड, ऐक्टिनॉयड, (n−2)f¹⁻¹⁴ (n−1)d⁰⁻¹ ns²)। वर्ग: s-ब्लॉक = ns इलेक्ट्रॉन; p-ब्लॉक = 10 + ns + np; d-ब्लॉक = ns + (n−1)d।
- कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध – परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।
2. Chemical reactions
Fundamental laws of chemistry · Classifying chemical reactions · Amounts of substance in gases and solutions · Stoichiometry in industry
- रससमीकरणमिति, सीमांत अभिकर्मक और सांद्रता के पद – रससमीकरणमिति का मतलब है अभिक्रिया में पदार्थों की मात्रा मापना। संतुलित समीकरण एक नुस्खे जैसा है: उसकी संख्याएँ अभिकारकों और उत्पादों का मोल अनुपात बताती हैं। इससे किसी भी द्रव्यमान को मोल में बदलकर, अनुपात लगाकर, किसी दूसरे पदार्थ का द्रव्यमान निकाल सकते हैं। जो अभिकारक पहले खत्म हो वह सीमांत अभिकर्मक है; वही तय करता है कितना उत्पाद बनेगा। विलयन की सांद्रता द्रव्यमान %, मोल अंश, मोलरता या मोललता से बताते हैं।
- रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण संतुलन – रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं, न नष्ट होते हैं; वे सिर्फ़ अपने साथी बदलते हैं। इसलिए समीकरण के दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर होने चाहिए। हम सूत्र के आगे की संख्या बदलकर संतुलन करते हैं, सूत्र को कभी नहीं बदलते।
- मोल संकल्पना, मोलर द्रव्यमान और रासायनिक सूत्र – परमाणु इतने छोटे हैं कि एक-एक गिनना नामुमकिन है, इसलिए रसायनज्ञ उन्हें तौलकर गिनते हैं। परमाणु द्रव्यमान u में होता है; 1 u = कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12। एक मोल = 6.022 × 10²³ कण, और उसका ग्राम में द्रव्यमान u वाले सूत्र द्रव्यमान के बराबर। मोल से हम यौगिक में हर तत्व का प्रतिशत निकालते हैं, और प्रतिशत से उल्टा चलकर मूलानुपाती और आण्विक सूत्र।
3. Organic chemistry
Properties of organic compounds · IUPAC naming of organic compounds
- कार्बनिक यौगिक: संरचना, सूत्र और वर्गीकरण – कार्बनिक रसायन कार्बन के यौगिकों का रसायन है। कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह हमेशा 4 आबंध बनाता है। इसे चतुःसंयोजकता कहते हैं। चार एकल आबंध हों तो कार्बन sp³ होता है और आकृति चतुष्फलकीय (109.5°) होती है। एक द्विआबंध हो तो sp², समतल (120°)। त्रिआबंध हो तो sp, सीधी रेखा (180°)। एक ही अणु को पूर्ण, संघनित, आबंध-रेखा और 3D वेज-डैश सूत्र से लिख सकते हैं। फिर हम यौगिकों को खुली शृंखला और वलय वाले यौगिकों में, और क्रियात्मक समूह के आधार पर परिवारों में बाँटते हैं। एक परिवार के सदस्य सजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर अगला सदस्य एक CH₂ से अलग होता है।
- कार्बनिक यौगिकों की IUPAC नामपद्धति और समावयवता – कार्बनिक यौगिक लाखों हैं, इसलिए हर एक का साफ़ और अलग नाम चाहिए। IUPAC पद्धति में नाम के तीन भाग हैं: मूल शब्द (मुख्य शृंखला में कार्बनों की संख्या), अनुलग्न (आबंध का प्रकार और मुख्य क्रियात्मक समूह) और पूर्वलग्न (शाखाएँ)। मुख्य समूह वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो, ऐसे अंक दो कि मुख्य समूह और शाखाओं को सबसे छोटे अंक मिलें, और शाखाओं को वर्णक्रम में लिखो। समावयवी वे यौगिक हैं जिनका अणुसूत्र एक है पर बनावट अलग। संरचनात्मक समावयवियों में परमाणु अलग ढंग से जुड़े होते हैं (शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक समूह, मध्यावयवता)। त्रिविम समावयवियों में जुड़ाव एक जैसा पर 3D व्यवस्था अलग होती है (ज्यामितीय सिस/ट्रांस और प्रकाशिक)।
4. Kinematics
Kinematic variables over time · Linear and circular motion · Compound motion and trajectories
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
5. Statics and dynamics
Forces, couples and rigid bodies · Vector mechanics and equilibrium · Momentum and impulse
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
6. Energy
Work and power · Kinetic and potential energy · Thermodynamic variables and heat transfer
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.