IUPAC नाम क्यों?
पुराने सामान्य (रूढ़) नाम स्रोत से आए: फॉर्मिक अम्ल चींटियों से (लैटिन formica), ऐसीटिक अम्ल सिरके से (acetum)। इनसे संरचना का पता नहीं चलता। IUPAC पद्धति हर यौगिक को एक व्यवस्थित नाम देती है जिससे संरचना बनाई जा सके।
IUPAC नाम के भाग
पूर्वलग्न + मूल शब्द + प्राथमिक अनुलग्न + द्वितीयक अनुलग्न
- मूल शब्द: मुख्य शृंखला के कार्बन। 1 मेथ, 2 एथ, 3 प्रोप, 4 ब्यूट, 5 पेंट, 6 हेक्स, 7 हेप्ट, 8 ऑक्ट, 9 नॉन, 10 डेक।
- प्राथमिक अनुलग्न: संतृप्ति। सब एकल = -ेन (ane), एक C=C = -ईन (ene), एक C≡C = -आइन (yne)।
- द्वितीयक अनुलग्न: मुख्य क्रियात्मक समूह: -ऑल (–OH), -ऐल (–CHO), -ओन (C=O), -ओइक अम्ल (–COOH), -ऐमीन (–NH₂), -नाइट्राइल (–CN)।
- पूर्वलग्न: शाखाएँ और कुछ समूह: मेथिल, एथिल, क्लोरो, ब्रोमो, नाइट्रो, ऐल्कॉक्सी; वलय = साइक्लो।
उदाहरण: प्रोपेन-1-ऑल = प्रोप (3 C) + एन (एकल आबंध) + 1-ऑल।
IUPAC नियम एक-एक करके
- सबसे लंबी शृंखला चुनो। क्रियात्मक समूह या बहु-आबंध हो तो शृंखला में वह ज़रूर हो।
- अंक देना: उस सिरे से जिससे क्रम से सबसे छोटा अंक मिले: मुख्य क्रियात्मक समूह → द्वि/त्रि आबंध → शाखाएँ।
- न्यूनतम अंक-समूह: कई शाखाएँ हों तो अंकों की एक-एक करके तुलना करो; पहला अंतर तय करता है (2,2,4 बेहतर है 2,4,4 से)।
- एक जैसे समूह: डाइ, ट्राइ, टेट्रा (2,3-डाइमेथिल)। अंकों के बीच अल्पविराम, अंक और शब्द के बीच हाइफ़न।
- वर्णक्रम: अलग पूर्वलग्न अंग्रेज़ी वर्णक्रम में (ethyl पहले, methyl बाद में)। डाइ/ट्राइ को गिनती में नहीं लेते।
- दो द्विआबंध: -डाईन (ब्यूटा-1,3-डाईन)।
क्रियात्मक समूहों की प्राथमिकता
एक से ज़्यादा समूह हों तो सबसे ऊँचा समूह अनुलग्न बनता है, बाकी पूर्वलग्न।
–COOH > –SO₃H > –COOR > –COCl > –CONH₂ > –CN > –CHO > >C=O > –OH > –NH₂ > C=C > C≡C। –X, –NO₂, –OR हमेशा पूर्वलग्न होते हैं।
उदाहरण: HO–CH₂–CH₂–COOH = 3-हाइड्रॉक्सीप्रोपेनोइक अम्ल।
समूह का कार्बन शृंखला में गिना जाता है
–CHO, –COOH, –CN में समूह का कार्बन C1 होता है: CH₃CH₂CHO = प्रोपेनैल, CH₃CN = एथेननाइट्राइल।
वलय और बेंज़ीन यौगिकों के नाम
वलय के आगे साइक्लो: साइक्लोपेंटेन, 3-मेथिलसाइक्लोहेक्सीन। बेंज़ीन पर दो समूह हों तो: 1,2 = ऑर्थो (o-), 1,3 = मेटा (m-), 1,4 = पैरा (p-)। उदाहरण: 1,4-डाइमेथिलबेंज़ीन = p-ज़ाइलीन। कुछ नाम मान्य हैं: फ़ीनॉल, टॉलूईन (मेथिलबेंज़ीन), ऐनिलीन (बेंज़ीनेमीन)।
समावयवता: सूत्र एक, संरचना अलग
समावयवी का अणुसूत्र एक पर संरचना अलग होती है, इसलिए गुण भी अलग।
संरचनात्मक समावयवता
- शृंखला समावयवता: कार्बन ढाँचा अलग। पेंटेन, 2-मेथिलब्यूटेन, 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन (C₅H₁₂)।
- स्थिति समावयवता: ढाँचा वही, समूह की जगह अलग। प्रोपेन-1-ऑल और प्रोपेन-2-ऑल।
- क्रियात्मक समूह समावयवता: समूह अलग। एथेनॉल और मेथॉक्सीमेथेन; प्रोपेनैल और प्रोपेनोन।
- मध्यावयवता: एक ही समूह (–O–, –S–, –CO–) के दोनों ओर अलग ऐल्किल समूह। मेथॉक्सीप्रोपेन और एथॉक्सीएथेन।
- चलावयवता (अतिरिक्त): H खिसकने से दो रूप आपस में बदलते हैं, जैसे कीटो और ईनॉल।
त्रिविम समावयवता
- ज्यामितीय (सिस-ट्रांस): घूर्णन रुका हो (C=C या वलय) और द्विआबंध के हर कार्बन पर दो अलग समूह हों। सिस = एक जैसे समूह एक तरफ; ट्रांस = उलटी तरफ।
- प्रकाशिक समावयवता: जिस कार्बन पर 4 अलग समूह हों वह किरेल (असममित) है। उसके दो रूप एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हैं जो एक-दूसरे पर नहीं बैठते; इन्हें प्रतिबिंबी रूप (enantiomers) कहते हैं। ये समतल ध्रुवित प्रकाश को उलटी दिशाओं में घुमाते हैं (d/+ और l/−)। उदाहरण: ब्यूटेन-2-ऑल, लैक्टिक अम्ल।
करके देखो
माचिस से C₄H₁₀ (2 समावयवी) और C₅H₁₂ (3 समावयवी) बनाओ। दोनों हथेलियाँ नीचे करके एक के ऊपर एक रखो: वे कभी मेल नहीं खातीं। यही किरेलता है। 3D के खेल चरण में हर जोड़ी का नाम पहले खुद बोलो, फिर पढ़ो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नाम = पूर्वलग्न + मूल शब्द + प्राथमिक अनुलग्न + द्वितीयक अनुलग्न
- मूल: 1 मेथ, 2 एथ, 3 प्रोप, 4 ब्यूट, 5 पेंट, 6 हेक्स, 7 हेप्ट, 8 ऑक्ट, 9 नॉन, 10 डेक
- -ेन (एकल), -ईन (C=C), -आइन (C≡C)
- प्राथमिकता: –COOH > –SO₃H > –COOR > –COCl > –CONH₂ > –CN > –CHO > C=O > –OH > –NH₂ > C=C > C≡C
- संरचनात्मक: शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक, मध्यावयवता; त्रिविम: ज्यामितीय, प्रकाशिक
- किरेल कार्बन = 4 अलग समूह
हल किए गए उदाहरण
1. CH₃–CH(CH₃)–CH₂–CH₃ का नाम बताओ।
पंक्ति 1: सबसे लंबी शृंखला 4 C → ब्यूटेन। पंक्ति 2: बाएँ से अंक: CH₃ शाखा C2 पर (दाएँ से C3)। पंक्ति 3: नाम: 2-मेथिलब्यूटेन।
2. CH₃–CH(CH₃)–CH(CH₃)–CH₂–CH₃ का नाम बताओ।
पंक्ति 1: शृंखला 5 C → पेंटेन। पंक्ति 2: बाएँ से 2,3; दाएँ से 3,4। 2,3 चुनो। पंक्ति 3: दो मेथिल → डाइमेथिल: 2,3-डाइमेथिलपेंटेन।
3. CH₂=CH–CH₂–CH₃ और CH₃–CH=CH–CH₃ के नाम।
पंक्ति 1: 4 C और एक C=C → ब्यूटीन। पंक्ति 2: पहला: C=C C1 से → ब्यूट-1-ईन। पंक्ति 3: दूसरा: C=C C2 से → ब्यूट-2-ईन। ये स्थिति समावयवी हैं।
4. CH₃–CH(OH)–CH₂–CH(CH₃)–CH₃ का नाम बताओ।
पंक्ति 1: 5 C की शृंखला और –OH → पेंटेनॉल। पंक्ति 2: –OH को सबसे छोटा अंक: बाएँ से OH C2 पर, मेथिल C4 पर। पंक्ति 3: नाम: 4-मेथिलपेंटेन-2-ऑल।
5. Cl–CH₂–CH₂–CH(C₂H₅)–CH₂–CH₃ का नाम बताओ।
पंक्ति 1: सबसे लंबी शृंखला 5 C → पेंटेन; Cl और एथिल पूर्वलग्न हैं। पंक्ति 2: Cl वाले सिरे से 1 और 3; दूसरे सिरे से 3 और 5। 1,3 चुनो। पंक्ति 3: वर्णक्रम: chloro पहले, ethyl बाद → 1-क्लोरो-3-एथिलपेंटेन।
6. C₅H₁₂ के कितने संरचनात्मक समावयवी हैं? नाम लिखो।
पंक्ति 1: 5 की सीधी शृंखला: पेंटेन। पंक्ति 2: 4 की शृंखला + C2 पर मेथिल: 2-मेथिलब्यूटेन। पंक्ति 3: 3 की शृंखला + C2 पर दो मेथिल: 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन। उत्तर: 3।
7. क्या ब्यूट-1-ईन ज्यामितीय समावयवता दिखाता है? ब्यूट-2-ईन?
पंक्ति 1: ब्यूट-1-ईन: C1 पर दो एक जैसे H → सिस/ट्रांस नहीं। पंक्ति 2: ब्यूट-2-ईन: हर द्विआबंध कार्बन पर H और CH₃ (दो अलग समूह)। पंक्ति 3: इसलिए केवल ब्यूट-2-ईन के सिस और ट्रांस रूप हैं।
आम गलतियाँ
- सबसे लंबी शृंखला लेते समय क्रियात्मक समूह छोड़ देना। मुख्य शृंखला में मुख्य समूह या बहु-आबंध होना ज़रूरी है।
- क्रियात्मक समूह होते हुए भी शाखाओं को छोटा अंक देना। पहले मुख्य समूह को छोटा अंक मिलता है।
- डाइ/ट्राइ से वर्णक्रम तय करना: 'dimethyl' m में गिना जाता है, इसलिए 'ethyl' पहले आता है।
- हर ऐल्कीन को सिस-ट्रांस मानना। द्विआबंध के हर कार्बन पर दो अलग समूह चाहिए।