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ऐल्कीन

ऐल्कीन वे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें एक C=C द्वि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ। द्वि-आबंध = एक σ + एक π आबंध, इसलिए उसके आसपास अणु चपटा है और घूम नहीं सकता। इसी से समपक्ष (cis) और विपक्ष (trans) समावयवी बनते हैं। ऐल्कीन छोटे अणु (H₂O, HX, X₂) हटाकर या ऐल्काइन में आंशिक H₂ जोड़कर बनते हैं। ये मुख्य रूप से योगज अभिक्रियाएँ करते हैं: H₂, X₂, HX (मारकोनीकॉफ़ नियम, या परॉक्साइड के साथ उल्टा), पानी, ओज़ोन, KMnO₄ और बहुलकीकरण।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एथीन में द्वि-आबंध है: एक σ आबंध सीधी रेखा में, और एक π बादल ऊपर-नीचे। C=C के आसपास सब कुछ चपटा है, 120° पर।
  2. यहाँ दोनों CH₃ एक ही ओर हैं (समपक्ष)। एक सिरा घुमाओ: π बादल मुड़कर टूट जाता है। इसलिए समपक्ष और विपक्ष आसानी से नहीं बदलते। ये दो अलग यौगिक हैं।
  3. ऐल्कीन बनाने के लिए दो कार्बनों से दो पड़ोसी हटाओ। यहाँ एथेनॉल से OH और H पानी बनकर निकलते हैं। द्वि-आबंध बन जाता है।
  4. ब्रोमीन जल लाल-भूरा है। एथीन डालो: हर कार्बन से एक Br जुड़ता है, द्वि-आबंध खुलता है और रंग गायब हो जाता है।
  5. प्रोपीन + HBr: H उस कार्बन पर जाता है जिस पर पहले से ज़्यादा H हैं। बीच वाले कार्बन को Br मिलता है। यही मारकोनीकॉफ़ नियम है।
  6. अब तुम्हारी बारी: परॉक्साइड डालकर फिर चलाओ। अब Br सिरे वाले कार्बन से जुड़ता है। सूची से दूसरी अभिक्रियाएँ भी चुनो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

एथीन चपटी क्यों है?

π आबंध का बगल वाला p–p अतिव्यापन तभी होता है जब दोनों p कक्षक समांतर हों। इससे छहों परमाणु एक तल में बँध जाते हैं।

C=C एकल आबंध की तरह क्यों नहीं घूमता?

एक सिरा घुमाने से p कक्षक एक-दूसरे से मुड़ जाते हैं और π आबंध टूटता है। इसके लिए लगभग 250 kJ/mol चाहिए, जो कमरे के ताप पर नहीं मिलता।

जलीय KOH नहीं, ऐल्कोहॉली KOH क्यों?

पानी में OH⁻ मुख्य रूप से X की जगह लेकर ऐल्कोहॉल बनाता है। ऐल्कोहॉल में यह क्षारक की तरह β-H खींचता है, इसलिए ऐल्कीन बनता है।

ब्रोमीन जल ऐल्कीन और ऐल्केन में अंतर कैसे बताता है?

ऐल्कीन जल्दी Br₂ जोड़ लेता है और लाल-भूरा रंग फीका पड़ता है। ऐल्केन अँधेरे में अभिक्रिया नहीं करता, रंग बना रहता है।

कौन तय करता है कि H किस कार्बन पर जाए?

H⁺ वहाँ जाता है जहाँ ज़्यादा स्थायी कार्बोधनायन बचे। प्रोपीन में यह CH₂ सिरा है, + बीच के 2° कार्बन पर रहता है।

परॉक्साइड से उत्पाद क्यों बदलता है?

परॉक्साइड Br• मूलक बनाता है। Br• पहले सिरे वाले कार्बन से जुड़ता है ताकि ज़्यादा स्थायी 2° मूलक बने। फिर H जुड़ता है। क्रम उल्टा हो गया, इसलिए Br सिरे पर आता है।

द्वि-आबंध की संरचना

ऐल्कीन में एक C=C द्वि-आबंध होता है। सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ (एथीन C₂H₄, प्रोपीन C₃H₆)। ऐल्कीन असंतृप्त हैं: ये और परमाणु ले सकते हैं। पुराना नाम: ओलिफ़िन ("तेल बनाने वाले"), क्योंकि एथीन + क्लोरीन से तैलीय द्रव बनता है।

नामकरण

C=C वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो। द्वि-आबंध के पास वाले सिरे से गिनो। -ऐन को -ईन करो और स्थान लिखो: CH₃–CH=CH–CH₃ = ब्यूट-2-ईन। CH₂=C(CH₃)–CH₃ = 2-मेथिलप्रोप-1-ईन।

ऐल्कीन में समावयवता

संरचनात्मक समावयवता

C₄H₈ से ऐल्कीन में शृंखला और स्थिति समावयवी मिलते हैं: ब्यूट-1-ईन (CH₂=CH–CH₂–CH₃), ब्यूट-2-ईन (CH₃–CH=CH–CH₃) और 2-मेथिलप्रोपीन ((CH₃)₂C=CH₂)।

ज्यामितीय (समपक्ष–विपक्ष) समावयवता

π आबंध C=C के चारों ओर घूमना रोकता है। अगर द्वि-आबंध के हर कार्बन पर दो अलग समूह हों, तो समूह एक ही ओर या उल्टी ओर स्थिर हो सकते हैं।

समपक्ष और विपक्ष में अंतर

ऐल्कीन बनाने की विधियाँ

  1. ऐल्काइन से (आंशिक अपचयन): लिंडलार उत्प्रेरक (BaSO₄/CaCO₃ पर Pd, क्विनोलीन या सल्फ़र से विषाक्त) के साथ H₂ ऐल्कीन पर रुक जाता है और समपक्ष ऐल्कीन देता है। द्रव अमोनिया में सोडियम विपक्ष ऐल्कीन देता है।
  2. ऐल्किल हैलाइड से (विहाइड्रोहैलोजनीकरण): ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करो। β-कार्बन से H और α-कार्बन से X निकलते हैं: CH₃CH₂Br + KOH(ऐल्को.) → CH₂=CH₂ + KBr + H₂O। यह β-विलोपन है। आसानी: I > Br > Cl; 3° > 2° > 1°।
  3. निकटस्थ डाइहैलाइड से (विहैलोजनीकरण): पड़ोसी कार्बनों के दो X ज़िंक चूर्ण हटाता है: BrCH₂–CH₂Br + Zn → CH₂=CH₂ + ZnBr₂।
  4. ऐल्कोहॉल से (अम्लीय निर्जलीकरण): 443 K पर सांद्र H₂SO₄ के साथ गर्म करो: CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O। यह भी β-विलोपन है।

भौतिक गुण

C2–C4 गैस, C5–C17 द्रव, बड़े ठोस। एथीन रंगहीन, हल्की मीठी गंध वाली गैस है। ऐल्कीन पानी में नहीं घुलते, अध्रुवीय विलायकों में घुलते हैं। आकार बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है और शाखन से घटता है, ऐल्केन की तरह।

ऐल्कीन की योगज अभिक्रियाएँ

1. हाइड्रोजन

CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃ (Ni, Pt या Pd)।

2. हैलोजन

CH₂=CH₂ + Br₂ → BrCH₂–CH₂Br (1,2-डाइब्रोमोएथेन)। लाल-भूरा ब्रोमीन जल (या CCl₄ में Br₂) रंगहीन हो जाता है। यह C=C का प्रयोगशाला परीक्षण है। क्रियाशीलता: Cl₂ > Br₂ > I₂।

3. हाइड्रोजन हैलाइड और मारकोनीकॉफ़ नियम

क्रियाशीलता: HI > HBr > HCl। सममित ऐल्कीन से एक ही उत्पाद बनता है। प्रोपीन जैसे असममित ऐल्कीन से दो उत्पाद संभव हैं।

मारकोनीकॉफ़ नियम: अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग (Br) द्वि-आबंध के उस कार्बन पर जाता है जिस पर कम हाइड्रोजन हैं। CH₃–CH=CH₂ + HBr → CH₃–CHBr–CH₃ (2-ब्रोमोप्रोपेन, मुख्य उत्पाद)।

क्यों: पहले H⁺ जुड़ता है और कार्बोधनायन बनता है। H⁺ CH₂ सिरे से जुड़े तो + आवेश बीच के कार्बन पर (2° कार्बोधनायन)। बीच से जुड़े तो + सिरे पर (1°)। 2° कार्बोधनायन ज़्यादा स्थायी है (ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं), इसलिए वही रास्ता जीतता है। फिर Br⁻ + वाले कार्बन से जुड़ता है।

4. परॉक्साइड प्रभाव (प्रति-मारकोनीकॉफ़, खराश प्रभाव)

कार्बनिक परॉक्साइड (जैसे बेन्ज़ॉयल परॉक्साइड) हो तो HBr उल्टी तरह जुड़ता है: CH₃–CH=CH₂ + HBr → CH₃–CH₂–CH₂Br (1-ब्रोमोप्रोपेन)। यह मुक्त-मूलक रास्ता है: परॉक्साइड Br• बनाता है, जो CH₂ सिरे से जुड़कर ज़्यादा स्थायी 2° मूलक छोड़ता है। HCl और HI यह प्रभाव नहीं दिखाते (H–Cl आबंध बहुत मज़बूत है; I• वापस I₂ बना लेता है)।

5. पानी (अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन)

सांद्र H₂SO₄ की कुछ बूँदों के साथ पानी मारकोनीकॉफ़ नियम से जुड़ता है: (CH₃)₂C=CH₂ + H₂O → (CH₃)₃C–OH। ठंडा सांद्र H₂SO₄ स्वयं जुड़कर ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फ़ेट बनाता है।

6. ऑक्सीकरण

7. ओज़ोनी-अपघटन

ओज़ोन C=C पर जुड़कर ओज़ोनाइड बनाती है। Zn + पानी इसे दो कार्बोनिल यौगिकों में काटते हैं। आसान नियम: C=C काटो और हर सिरे पर =O लगा दो। CH₃–CH=CH₂ → CH₃CHO + HCHO। टुकड़ों को देखकर पता चलता है कि द्वि-आबंध कहाँ था।

8. बहुलकीकरण

उच्च दाब, ताप और उत्प्रेरक से बहुत-से एथीन अणु जुड़कर एक लंबी शृंखला बनाते हैं: n CH₂=CH₂ → –(CH₂–CH₂)ₙ– (पॉलिथीन)। प्रोपीन से पॉलिप्रोपीन बनती है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. इनमें से किसमें समपक्ष–विपक्ष समावयवता है: (a) प्रोपीन, (b) ब्यूट-2-ईन, (c) 2-मेथिलप्रोपीन?

द्वि-आबंध के हर C पर दो अलग समूह देखो। (a) CH₂=CH–CH₃: पहले C पर H और H → नहीं। (b) CH₃–CH=CH–CH₃: हर C पर H और CH₃ → हाँ। (c) (CH₃)₂C=CH₂: दोनों सिरों पर एक जैसे जोड़े → नहीं। केवल ब्यूट-2-ईन।

2. 2-ब्रोमोब्यूटेन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करने पर मुख्य उत्पाद लिखो।

β-H, C1 या C3 से हट सकता है। C3 से हटे तो ब्यूट-2-ईन (अधिक प्रतिस्थापित), C1 से हटे तो ब्यूट-1-ईन। अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद (सेत्ज़ेफ़ नियम): ब्यूट-2-ईन।

3. प्रोपीन और HBr का उत्पाद लिखो (a) बिना और (b) बेन्ज़ॉयल परॉक्साइड के साथ।

(a) मारकोनीकॉफ़: H CH₂ पर, Br बीच के C पर → CH₃CHBrCH₃ (2-ब्रोमोप्रोपेन)। (b) परॉक्साइड प्रभाव: Br सिरे पर → CH₃CH₂CH₂Br (1-ब्रोमोप्रोपेन)।

4. ओज़ोनी-अपघटन पर एक ऐल्कीन एथेनैल (CH₃CHO) और प्रोपेनोन (CH₃COCH₃) देता है। ऐल्कीन पहचानो।

दोनों =O हटाकर कार्बनों को द्वि-आबंध से जोड़ो: CH₃CH= और =C(CH₃)₂ → CH₃–CH=C(CH₃)–CH₃। यह 2-मेथिलब्यूट-2-ईन है।

5. C₄H₈ ऐल्कीन ओज़ोनी-अपघटन पर केवल एथेनैल देता है। नाम लिखो।

एक ही उत्पाद = दोनों आधे एक जैसे: CH₃CH= + =CHCH₃ → CH₃CH=CHCH₃। ब्यूट-2-ईन।

6. 5.6 g एथीन से कितने मोल H₂ जुड़ेंगे? कितनी एथेन बनेगी?

C₂H₄ = 28 g/mol, तो 5.6 g = 0.2 मोल। एक C=C एक H₂ लेता है → 0.2 मोल H₂। एथेन C₂H₆ = 30 g/mol → 0.2 × 30 = 6.0 g।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. C=C द्वि-आबंध बना होता है:
2. किसमें ज्यामितीय समावयवता है?
3. प्रोपीन + HBr (बिना परॉक्साइड) मुख्य रूप से देता है:
4. कौन-सा अभिकर्मक ऐल्काइन को समपक्ष-ऐल्कीन बनाता है?
5. लाल-भूरा ब्रोमीन जल किसके साथ रंगहीन होता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मारकोनीकॉफ़ नियम क्या है?

असममित ऐल्कीन पर HX जुड़ने पर H द्वि-आबंध के उस कार्बन पर जाता है जिस पर ज़्यादा H हैं और X कम H वाले पर, क्योंकि इस रास्ते में ज़्यादा स्थायी कार्बोधनायन बनता है।

परॉक्साइड प्रभाव क्या है?

कार्बनिक परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr असममित ऐल्कीन पर मारकोनीकॉफ़ नियम के उल्टे, मुक्त-मूलक रास्ते से जुड़ता है। इसे खराश प्रभाव भी कहते हैं; यह केवल HBr में होता है।

ऐल्कीन ज्यामितीय समावयवता क्यों दिखाते हैं?

π आबंध C=C के चारों ओर घूमना रोकता है। अगर द्वि-आबंध के हर कार्बन पर दो अलग समूह हों, तो वे एक ओर (समपक्ष) या उल्टी ओर (विपक्ष) स्थिर हो जाते हैं।

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