द्वि-आबंध की संरचना
ऐल्कीन में एक C=C द्वि-आबंध होता है। सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ (एथीन C₂H₄, प्रोपीन C₃H₆)। ऐल्कीन असंतृप्त हैं: ये और परमाणु ले सकते हैं। पुराना नाम: ओलिफ़िन ("तेल बनाने वाले"), क्योंकि एथीन + क्लोरीन से तैलीय द्रव बनता है।
- द्वि-आबंध के दोनों C sp² हैं। तीन σ आबंध एक चपटे तल में 120° पर।
- दोनों कार्बनों के बचे p कक्षक बगल से अतिव्यापन करते हैं। इससे π आबंध बनता है: तल के ऊपर और नीचे बादल।
- C=C आबंध लंबाई 134 pm (C–C 154 pm से छोटी)। आबंध ऊर्जा 681 kJ/mol (C–C 348 से ज़्यादा, पर दो C–C से कम)।
- π इलेक्ट्रॉन ढीले बँधे हैं, इसलिए ऐल्कीन इलेक्ट्रॉनस्नेही को आकर्षित करते हैं और योगज अभिक्रिया करते हैं।
नामकरण
C=C वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो। द्वि-आबंध के पास वाले सिरे से गिनो। -ऐन को -ईन करो और स्थान लिखो: CH₃–CH=CH–CH₃ = ब्यूट-2-ईन। CH₂=C(CH₃)–CH₃ = 2-मेथिलप्रोप-1-ईन।
ऐल्कीन में समावयवता
संरचनात्मक समावयवता
C₄H₈ से ऐल्कीन में शृंखला और स्थिति समावयवी मिलते हैं: ब्यूट-1-ईन (CH₂=CH–CH₂–CH₃), ब्यूट-2-ईन (CH₃–CH=CH–CH₃) और 2-मेथिलप्रोपीन ((CH₃)₂C=CH₂)।
ज्यामितीय (समपक्ष–विपक्ष) समावयवता
π आबंध C=C के चारों ओर घूमना रोकता है। अगर द्वि-आबंध के हर कार्बन पर दो अलग समूह हों, तो समूह एक ही ओर या उल्टी ओर स्थिर हो सकते हैं।
- समपक्ष (cis): समान समूह एक ही ओर।
- विपक्ष (trans): समान समूह उल्टी ओर।
- अगर किसी कार्बन पर दो एक जैसे समूह हैं (जैसे CH₂=CH–CH₃), तो समपक्ष–विपक्ष समावयवी नहीं होते।
समपक्ष और विपक्ष में अंतर
- ध्रुवता: विपक्ष में आबंध द्विध्रुव उल्टी दिशा में होकर कट जाते हैं। समपक्ष-1,2-डाइक्लोरोएथीन का द्विध्रुव आघूर्ण 1.9 D, विपक्ष का 0 D।
- क्वथनांक: प्रायः समपक्ष का ज़्यादा (ध्रुवीय)।
- गलनांक: प्रायः विपक्ष का ज़्यादा (सममित, ठोस में अच्छी तरह जमता है)।
ऐल्कीन बनाने की विधियाँ
- ऐल्काइन से (आंशिक अपचयन): लिंडलार उत्प्रेरक (BaSO₄/CaCO₃ पर Pd, क्विनोलीन या सल्फ़र से विषाक्त) के साथ H₂ ऐल्कीन पर रुक जाता है और समपक्ष ऐल्कीन देता है। द्रव अमोनिया में सोडियम विपक्ष ऐल्कीन देता है।
- ऐल्किल हैलाइड से (विहाइड्रोहैलोजनीकरण): ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करो। β-कार्बन से H और α-कार्बन से X निकलते हैं: CH₃CH₂Br + KOH(ऐल्को.) → CH₂=CH₂ + KBr + H₂O। यह β-विलोपन है। आसानी: I > Br > Cl; 3° > 2° > 1°।
- निकटस्थ डाइहैलाइड से (विहैलोजनीकरण): पड़ोसी कार्बनों के दो X ज़िंक चूर्ण हटाता है: BrCH₂–CH₂Br + Zn → CH₂=CH₂ + ZnBr₂।
- ऐल्कोहॉल से (अम्लीय निर्जलीकरण): 443 K पर सांद्र H₂SO₄ के साथ गर्म करो: CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O। यह भी β-विलोपन है।
भौतिक गुण
C2–C4 गैस, C5–C17 द्रव, बड़े ठोस। एथीन रंगहीन, हल्की मीठी गंध वाली गैस है। ऐल्कीन पानी में नहीं घुलते, अध्रुवीय विलायकों में घुलते हैं। आकार बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है और शाखन से घटता है, ऐल्केन की तरह।
ऐल्कीन की योगज अभिक्रियाएँ
1. हाइड्रोजन
CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃ (Ni, Pt या Pd)।
2. हैलोजन
CH₂=CH₂ + Br₂ → BrCH₂–CH₂Br (1,2-डाइब्रोमोएथेन)। लाल-भूरा ब्रोमीन जल (या CCl₄ में Br₂) रंगहीन हो जाता है। यह C=C का प्रयोगशाला परीक्षण है। क्रियाशीलता: Cl₂ > Br₂ > I₂।
3. हाइड्रोजन हैलाइड और मारकोनीकॉफ़ नियम
क्रियाशीलता: HI > HBr > HCl। सममित ऐल्कीन से एक ही उत्पाद बनता है। प्रोपीन जैसे असममित ऐल्कीन से दो उत्पाद संभव हैं।
मारकोनीकॉफ़ नियम: अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग (Br) द्वि-आबंध के उस कार्बन पर जाता है जिस पर कम हाइड्रोजन हैं। CH₃–CH=CH₂ + HBr → CH₃–CHBr–CH₃ (2-ब्रोमोप्रोपेन, मुख्य उत्पाद)।
क्यों: पहले H⁺ जुड़ता है और कार्बोधनायन बनता है। H⁺ CH₂ सिरे से जुड़े तो + आवेश बीच के कार्बन पर (2° कार्बोधनायन)। बीच से जुड़े तो + सिरे पर (1°)। 2° कार्बोधनायन ज़्यादा स्थायी है (ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं), इसलिए वही रास्ता जीतता है। फिर Br⁻ + वाले कार्बन से जुड़ता है।
4. परॉक्साइड प्रभाव (प्रति-मारकोनीकॉफ़, खराश प्रभाव)
कार्बनिक परॉक्साइड (जैसे बेन्ज़ॉयल परॉक्साइड) हो तो HBr उल्टी तरह जुड़ता है: CH₃–CH=CH₂ + HBr → CH₃–CH₂–CH₂Br (1-ब्रोमोप्रोपेन)। यह मुक्त-मूलक रास्ता है: परॉक्साइड Br• बनाता है, जो CH₂ सिरे से जुड़कर ज़्यादा स्थायी 2° मूलक छोड़ता है। HCl और HI यह प्रभाव नहीं दिखाते (H–Cl आबंध बहुत मज़बूत है; I• वापस I₂ बना लेता है)।
5. पानी (अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन)
सांद्र H₂SO₄ की कुछ बूँदों के साथ पानी मारकोनीकॉफ़ नियम से जुड़ता है: (CH₃)₂C=CH₂ + H₂O → (CH₃)₃C–OH। ठंडा सांद्र H₂SO₄ स्वयं जुड़कर ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फ़ेट बनाता है।
6. ऑक्सीकरण
- बेयर अभिकर्मक (ठंडा, तनु, क्षारीय KMnO₄): बैंगनी रंग फीका पड़ता है और ग्लाइकॉल बनता है। CH₂=CH₂ + H₂O + [O] → HOCH₂–CH₂OH। C=C का दूसरा परीक्षण।
- अम्लीय KMnO₄ या K₂Cr₂O₇ (प्रबल): C=C तोड़कर कीटोन और/या अम्ल देते हैं। CH₃CH=CHCH₃ → 2CH₃COOH।
7. ओज़ोनी-अपघटन
ओज़ोन C=C पर जुड़कर ओज़ोनाइड बनाती है। Zn + पानी इसे दो कार्बोनिल यौगिकों में काटते हैं। आसान नियम: C=C काटो और हर सिरे पर =O लगा दो। CH₃–CH=CH₂ → CH₃CHO + HCHO। टुकड़ों को देखकर पता चलता है कि द्वि-आबंध कहाँ था।
8. बहुलकीकरण
उच्च दाब, ताप और उत्प्रेरक से बहुत-से एथीन अणु जुड़कर एक लंबी शृंखला बनाते हैं: n CH₂=CH₂ → –(CH₂–CH₂)ₙ– (पॉलिथीन)। प्रोपीन से पॉलिप्रोपीन बनती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्कीन: CₙH₂ₙ
- CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, 443 K)
- R–CH₂CH₂X + KOH(ऐल्को.) → R–CH=CH₂ + KX + H₂O
- X–CH₂–CH₂–X + Zn → CH₂=CH₂ + ZnX₂
- ऐल्काइन + H₂ (लिंडलार) → समपक्ष-ऐल्कीन
- CH₃CH=CH₂ + HBr → CH₃CHBrCH₃ (मारकोनीकॉफ़)
- CH₃CH=CH₂ + HBr (परॉक्साइड) → CH₃CH₂CH₂Br
- ओज़ोनी-अपघटन: R₂C=CR'₂ → R₂C=O + O=CR'₂
हल किए गए उदाहरण
1. इनमें से किसमें समपक्ष–विपक्ष समावयवता है: (a) प्रोपीन, (b) ब्यूट-2-ईन, (c) 2-मेथिलप्रोपीन?
द्वि-आबंध के हर C पर दो अलग समूह देखो। (a) CH₂=CH–CH₃: पहले C पर H और H → नहीं। (b) CH₃–CH=CH–CH₃: हर C पर H और CH₃ → हाँ। (c) (CH₃)₂C=CH₂: दोनों सिरों पर एक जैसे जोड़े → नहीं। केवल ब्यूट-2-ईन।
2. 2-ब्रोमोब्यूटेन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करने पर मुख्य उत्पाद लिखो।
β-H, C1 या C3 से हट सकता है। C3 से हटे तो ब्यूट-2-ईन (अधिक प्रतिस्थापित), C1 से हटे तो ब्यूट-1-ईन। अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद (सेत्ज़ेफ़ नियम): ब्यूट-2-ईन।
3. प्रोपीन और HBr का उत्पाद लिखो (a) बिना और (b) बेन्ज़ॉयल परॉक्साइड के साथ।
(a) मारकोनीकॉफ़: H CH₂ पर, Br बीच के C पर → CH₃CHBrCH₃ (2-ब्रोमोप्रोपेन)। (b) परॉक्साइड प्रभाव: Br सिरे पर → CH₃CH₂CH₂Br (1-ब्रोमोप्रोपेन)।
4. ओज़ोनी-अपघटन पर एक ऐल्कीन एथेनैल (CH₃CHO) और प्रोपेनोन (CH₃COCH₃) देता है। ऐल्कीन पहचानो।
दोनों =O हटाकर कार्बनों को द्वि-आबंध से जोड़ो: CH₃CH= और =C(CH₃)₂ → CH₃–CH=C(CH₃)–CH₃। यह 2-मेथिलब्यूट-2-ईन है।
5. C₄H₈ ऐल्कीन ओज़ोनी-अपघटन पर केवल एथेनैल देता है। नाम लिखो।
एक ही उत्पाद = दोनों आधे एक जैसे: CH₃CH= + =CHCH₃ → CH₃CH=CHCH₃। ब्यूट-2-ईन।
6. 5.6 g एथीन से कितने मोल H₂ जुड़ेंगे? कितनी एथेन बनेगी?
C₂H₄ = 28 g/mol, तो 5.6 g = 0.2 मोल। एक C=C एक H₂ लेता है → 0.2 मोल H₂। एथेन C₂H₆ = 30 g/mol → 0.2 × 30 = 6.0 g।
आम गलतियाँ
- कहना कि हर ऐल्कीन के समपक्ष-विपक्ष रूप होते हैं। द्वि-आबंध के हर कार्बन पर दो अलग समूह चाहिए।
- HCl या HI पर परॉक्साइड प्रभाव लगाना। यह केवल HBr पर काम करता है।
- R–X से ऐल्कीन बनाने के लिए जलीय KOH लेना। जलीय KOH से ऐल्कोहॉल बनता है; ऐल्कोहॉली KOH चाहिए।
- ओज़ोनी-अपघटन में भूलना कि पुराने C=C के हर कार्बन पर =O लगता है और उसके बाकी समूह वैसे ही रहते हैं।