ऐल्केन क्या है?
हाइड्रोकार्बन वे यौगिक हैं जिनमें केवल कार्बन और हाइड्रोजन होते हैं। ऐल्केन में केवल एकल आबंध होते हैं। इन्हें संतृप्त हाइड्रोकार्बन भी कहते हैं, क्योंकि हर कार्बन पर जितने H आ सकते हैं, उतने पहले से हैं।
- सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₊₂। मेथेन CH₄, एथेन C₂H₆, प्रोपेन C₃H₈, ब्यूटेन C₄H₁₀।
- हर कार्बन sp³ संकरित है। चारों आबंध चतुष्फलक के कोनों की ओर, 109.5° पर।
- C–C आबंध लंबाई 154 pm, C–H 112 pm।
- पुराना नाम: पैराफ़िन (कम क्रियाशील)।
ब्यूटेन से आगे एक ही सूत्र की अलग शृंखलाएँ बन सकती हैं। C₄H₁₀ के दो शृंखला समावयवी हैं: ब्यूटेन और 2-मेथिलप्रोपेन।
ऐल्केन बनाने की विधियाँ
1. ऐल्कीन और ऐल्काइन से (हाइड्रोजनीकरण)
H₂ गैस को ऐल्कीन या ऐल्काइन के साथ बारीक Pt या Pd (कमरे का ताप) या Ni (लगभग 523–573 K) पर गुज़ारो। बहु-आबंध पर हाइड्रोजन जुड़ जाती है।
CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃ CH≡CH + 2H₂ → CH₃–CH₃
2. ऐल्किल हैलाइड से
- अपचयन: Zn और तनु HCl, R–X को R–H बना देते हैं। CH₃Cl + H₂ → CH₄ + HCl। मेथेन इस तरह बन सकती है।
- वुर्ट्ज़ अभिक्रिया: ऐल्किल हैलाइड को शुष्क ईथर में सोडियम के साथ गर्म करो। दो ऐल्किल समूह जुड़ जाते हैं: 2R–X + 2Na → R–R + 2NaX। कार्बन दोगुने हो जाते हैं, इसलिए यह सम कार्बन वाले सममित ऐल्केन के लिए ठीक है। मेथेन इससे नहीं बनती। दो अलग हैलाइड लेने पर तीन ऐल्केन का मिश्रण बनता है।
3. कार्बोक्सिलिक अम्ल से
- विकार्बोक्सिलन: सोडियम लवण को सोडा लाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करो। –COONa हट जाता है: RCOONa + NaOH → R–H + Na₂CO₃। ऐल्केन में अम्ल से एक कार्बन कम होता है।
- कोल्बे विद्युत-अपघटन: सोडियम या पोटैशियम लवण के जलीय विलयन का विद्युत-अपघटन करो। ऐनोड पर दो ऐल्किल टुकड़े जुड़ते हैं: 2CH₃COONa + 2H₂O → CH₃–CH₃ + 2CO₂ + H₂ + 2NaOH। मेथेन इससे नहीं बनती।
भौतिक गुण
- अवस्था: C1–C4 गैस, C5–C17 द्रव, C18 से आगे मोम जैसे ठोस।
- अध्रुवीय: C और H की विद्युत-ऋणात्मकता लगभग बराबर है। ऐल्केन पानी में नहीं घुलते, अध्रुवीय विलायकों में घुलते हैं। "समान समान को घोलता है।"
- शृंखला लंबी → क्वथनांक ऊँचा। बड़े अणुओं में वान्डरवाल्स बल ज़्यादा होते हैं।
- शाखन से क्वथनांक घटता है। शाखित अणु गेंद जैसा होता है और पड़ोसियों को कम जगह छूता है। पेन्टेन 309 K, 2-मेथिलब्यूटेन 301 K, 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन 282.5 K।
रासायनिक गुण
कमरे के ताप पर ऐल्केन कम क्रियाशील हैं। सही परिस्थिति में ये अभिक्रियाएँ करते हैं:
प्रतिस्थापन: हैलोजनीकरण
UV प्रकाश में या 520–670 K पर एक H की जगह हैलोजन आता है: CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl। आगे CH₂Cl₂, CHCl₃ और CCl₄ भी बनते हैं। गति: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂। H के लिए: 3° > 2° > 1°।
यह मुक्त-मूलक शृंखला है:
- आरंभन: प्रकाश Cl–Cl तोड़ता है → 2Cl•।
- संचरण: Cl• + CH₄ → HCl + CH₃•; फिर CH₃• + Cl₂ → CH₃Cl + Cl•। नया Cl• शृंखला आगे बढ़ाता है।
- समापन: दो मूलक मिलते हैं: Cl• + Cl• → Cl₂; CH₃• + CH₃• → C₂H₆ (इसीलिए थोड़ी एथेन भी मिलती है)।
दहन
भरपूर हवा में ऐल्केन जलकर CO₂ और पानी बनाते हैं और बहुत ऊष्मा देते हैं: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O, ΔH = −890 kJ/mol। सामान्य: CₙH₂ₙ₊₂ + (3n+1)/2 O₂ → nCO₂ + (n+1)H₂O। कम हवा में कालिख और ज़हरीली CO बनती है।
नियंत्रित ऑक्सीकरण
- 2CH₄ + O₂ → 2CH₃OH (Cu, 523 K, 100 atm)
- CH₄ + O₂ → HCHO + H₂O (Mo₂O₃)
- (CH₃)₃CH → (CH₃)₃COH, KMnO₄ से (3° H का ऑक्सीकरण)
समावयवीकरण, ऐरोमैटीकरण, ताप-अपघटन
- समावयवीकरण: निर्जल AlCl₃ + HCl, n-हेक्सेन को शाखित समावयवियों में बदलता है।
- ऐरोमैटीकरण: 773 K, 10–20 atm पर Cr₂O₃/V₂O₅/Mo₂O₃ से n-हेक्सेन बेंज़ीन बनती है।
- भाप से अभिक्रिया: CH₄ + H₂O → CO + 3H₂ (Ni, 1273 K)। हाइड्रोजन बनाने में उपयोग।
- ताप-अपघटन (भंजन): तेज़ गर्म करने पर बड़े ऐल्केन छोटे ऐल्केन और ऐल्कीन में टूटते हैं। भारी तेल से पेट्रोल ऐसे ही मिलता है।
एथेन के संरूपण
एकल C–C आबंध एक धुरी जैसा है। एक CH₃ घूम सकता है जबकि दूसरा रुका रहे। घूमने से बने अलग-अलग आकारों को संरूपण कहते हैं।
- ग्रहणित (eclipsed): पीछे वाले कार्बन के H आगे वाले H के ठीक पीछे। इलेक्ट्रॉन बादल सबसे ज़्यादा धकेलते हैं। सबसे अधिक ऊर्जा।
- सांतरित (staggered): पीछे के H आगे वाले H के बीच की खाली जगह में, 60° दूर। सबसे कम ऊर्जा, सबसे स्थायी।
- विषमतलीय (skew): बीच का कोई भी कोण।
ग्रहणित आकार में आबंधों के इस धक्के को मरोड़ी विकृति (torsional strain) कहते हैं। एथेन में ऊर्जा का अंतर केवल लगभग 12.5 kJ/mol है। कमरे के ताप पर टकराने से अणुओं को इतनी ऊर्जा आसानी से मिल जाती है, इसलिए संरूपण बदलते रहते हैं और अलग नहीं किए जा सकते।
इन्हें कैसे बनाते हैं
- सॉहॉर्स प्रक्षेप: C–C आबंध एक तिरछी रेखा, हर सिरे पर तीन H।
- न्यूमैन प्रक्षेप: C–C आबंध की सीध में देखो। आगे का कार्बन एक बिंदु (केंद्र से तीन आबंध), पीछे का कार्बन एक वृत्त (किनारे से तीन आबंध)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्केन: CₙH₂ₙ₊₂
- हाइड्रोजनीकरण: CₙH₂ₙ + H₂ → CₙH₂ₙ₊₂ (Ni/Pt/Pd)
- वुर्ट्ज़: 2R–X + 2Na → R–R + 2NaX (शुष्क ईथर)
- विकार्बोक्सिलन: RCOONa + NaOH → R–H + Na₂CO₃ (CaO, ताप)
- कोल्बे: 2RCOO⁻K⁺ + 2H₂O → R–R + 2CO₂ + H₂ + 2KOH
- दहन: CₙH₂ₙ₊₂ + (3n+1)/2 O₂ → nCO₂ + (n+1)H₂O
- एथेन: ग्रहणित − सांतरित ≈ 12.5 kJ/mol
हल किए गए उदाहरण
1. 7 कार्बन वाले ऐल्केन का सूत्र लिखो।
CₙH₂ₙ₊₂ में n = 7। H = 2 × 7 + 2 = 16। हेप्टेन = C₇H₁₆।
2. सोडियम प्रोपेनोएट (CH₃CH₂COONa) को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर कौन-सा ऐल्केन बनेगा?
विकार्बोक्सिलन में –COONa हटकर H आता है। CH₃CH₂–COONa → CH₃CH₂–H = एथेन (C₂H₆)। अम्ल में 3 कार्बन, ऐल्केन में 2 (एक कम)।
3. ब्रोमोएथेन की वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से कौन-सा ऐल्केन बनेगा? 1-ब्रोमोप्रोपेन + ब्रोमोएथेन लेना ठीक क्यों नहीं?
2CH₃CH₂Br + 2Na → CH₃CH₂–CH₂CH₃ + 2NaBr। ब्यूटेन बनती है (2 + 2 = 4 कार्बन)। दो अलग हैलाइड हों तो टुकड़े तीन तरह जुड़ते हैं: एथिल–एथिल (ब्यूटेन), प्रोपिल–प्रोपिल (हेक्सेन), एथिल–प्रोपिल (पेन्टेन)। मिश्रण को अलग करना कठिन है।
4. 1 मोल प्रोपेन जलाने के लिए कितने मोल O₂ चाहिए? कितने मोल CO₂ और H₂O बनेंगे?
प्रोपेन में n = 3। O₂ = (3n + 1)/2 = 10/2 = 5 मोल। CO₂ = n = 3 मोल। H₂O = n + 1 = 4 मोल। C₃H₈ + 5O₂ → 3CO₂ + 4H₂O।
5. 11 g प्रोपेन पूरी तरह जलने पर STP पर कितनी CO₂ बनेगी?
C₃H₈ का मोलर द्रव्यमान = 36 + 8 = 44 g/mol। मोल = 11 ÷ 44 = 0.25। हर मोल से 3 मोल CO₂ → 0.75 मोल। आयतन = 0.75 × 22.4 = 16.8 L।
6. बढ़ते क्वथनांक के क्रम में लिखो: n-पेन्टेन, 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन, n-ब्यूटेन, 2-मेथिलब्यूटेन।
पहले: कम कार्बन → कम क्वथनांक, तो n-ब्यूटेन (C₄) सबसे नीचे। फिर C₅ समावयवियों में ज़्यादा शाखन → कम। क्रम: n-ब्यूटेन < 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन < 2-मेथिलब्यूटेन < n-पेन्टेन।
7. प्रोपेन के मोनोक्लोरीनीकरण से दो उत्पाद बनते हैं। नाम लिखो।
CH₃–CH₂–CH₃ में 6 सिरे वाले (1°) H और 2 बीच वाले (2°) H हैं। 1° H हटे तो 1-क्लोरोप्रोपेन, 2° H हटे तो 2-क्लोरोप्रोपेन। 2° H आसानी से हटता है, इसलिए 2-क्लोरोप्रोपेन गिनती (6 : 2) से ज़्यादा मात्रा में बनती है।
आम गलतियाँ
- वुर्ट्ज़ से मेथेन बनाना। वुर्ट्ज़ दो ऐल्किल समूह जोड़ता है, इसलिए कम-से-कम 2 कार्बन होंगे।
- भूलना कि विकार्बोक्सिलन में एक कार्बन घटता है: सोडियम एथेनोएट (2 C) से मेथेन (1 C) बनती है, एथेन नहीं।
- सोचना कि शाखित समावयवी "बड़ा दिखता है" तो ज़्यादा ताप पर उबलेगा। शाखन से संपर्क कम होता है, क्वथनांक घटता है।
- संरूपणों को अलग किए जा सकने वाले समावयवी मानना। कम ऊर्जा अंतर के कारण ये लगातार बदलते रहते हैं।