दहन
कार्बन और उसके यौगिक ऑक्सीजन में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, पानी, ऊष्मा और प्रकाश देते हैं: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा + प्रकाश।
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन सामान्यतः साफ़ नीली लौ देते हैं।
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पीली, कालिख वाली लौ देते हैं।
- हवा कम हो तो संतृप्त ईंधन भी कालिख देता है, इसीलिए चूल्हे के छेद बंद हों तो बर्तन काले होते हैं।
कोयले और पेट्रोलियम में नाइट्रोजन और सल्फ़र होते हैं, इसलिए उनके जलने से सल्फ़र और नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनते हैं, जो अम्ल वर्षा करते हैं।
ऑक्सीकरण
दहन भी ऑक्सीकरण है, पर ऐल्कोहॉल का नियंत्रित ऑक्सीकरण भी होता है। क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) या अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇) ऑक्सीकारक हैं: ये दूसरों को ऑक्सीजन देते हैं।
CH₃CH₂OH + 2[O] → CH₃COOH + H₂O (क्षारीय KMnO₄ के साथ गरम करने पर)।
जब तक एथेनॉल बचा है, परमैंगनेट का गुलाबी रंग मिटता जाता है; फिर अतिरिक्त KMnO₄ गुलाबी ही रहता है।
संकलन अभिक्रिया
असंतृप्त यौगिक अपने द्वि या त्रि आबंध पर परमाणु जोड़ते हैं। हाइड्रोजन और उत्प्रेरक (निकेल या पैलेडियम) से एथीन, एथेन बनता है: CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃।
उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो अभिक्रिया की गति बदलता है पर खुद खर्च नहीं होता।
तेलों का हाइड्रोजनीकरण
वनस्पति तेलों में लंबी असंतृप्त श्रृंखलाएँ होती हैं। निकेल के साथ हाइड्रोजन जोड़ने पर ये ठोस संतृप्त वसा (वनस्पति घी) बन जाते हैं। असंतृप्त तेल स्वास्थ्य के लिए बेहतर माने जाते हैं; संतृप्त वसा ज़्यादा खाने से हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।
प्रतिस्थापन अभिक्रिया
संतृप्त हाइड्रोकार्बन कम क्रियाशील हैं, पर सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन उनके हाइड्रोजन को एक-एक करके हटाती है: CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl। ज़्यादा क्लोरीन से CH₂Cl₂, CHCl₃ और CCl₄ बन सकते हैं।
संकलन बनाम प्रतिस्थापन: संकलन में द्वि/त्रि आबंध चाहिए और एक उत्पाद बनता है; प्रतिस्थापन में परमाणु बदलता है और दो उत्पाद बनते हैं।
एथेनॉल (एथिल ऐल्कोहॉल)
एथेनॉल C₂H₅OH कमरे के ताप पर रंगहीन द्रव है, पानी में हर अनुपात में घुलता है और अच्छा विलायक है (टिंचर, कफ़ सिरप)। यह शराब का सक्रिय भाग है; थोड़ी मात्रा भी शरीर और दिमाग पर असर डालती है, और मिलावटी मेथेनॉल अंधापन और मृत्यु तक कर सकता है। औद्योगिक ऐल्कोहॉल में मेथेनॉल और नीला रंग मिलाकर उसे विकृत (denatured) किया जाता है।
एथेनॉल की अभिक्रियाएँ
- सोडियम से: 2CH₃CH₂OH + 2Na → 2CH₃CH₂ONa + H₂↑ (सोडियम एथॉक्साइड + हाइड्रोजन)।
- निर्जलीकरण: 443 K पर अधिक सांद्र H₂SO₄ के साथ गरम करने पर पानी निकलता है: CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O।
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर (गन्ने से बना) साफ़ ईंधन बनाया जाता है।
एथेनॉइक अम्ल (ऐसीटिक अम्ल)
एथेनॉइक अम्ल CH₃COOH एक दुर्बल अम्ल है (थोड़ा ही आयनित होता है)। शुद्ध एथेनॉइक अम्ल लगभग 290 K (17 °C) पर जम जाता है, ठंड में बर्फ़ जैसा दिखता है, इसलिए इसे ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल कहते हैं। सिरका पानी में इसका 5–8% विलयन है।
- एस्टरीकरण: CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O (सांद्र H₂SO₄)। एस्टर एथिल एथेनोएट की गंध मीठी, फल जैसी होती है।
- साबुनीकरण: एस्टर + NaOH → ऐल्कोहॉल + अम्ल का सोडियम लवण। साबुन ऐसे ही बनता है।
- क्षारक से: CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O।
- कार्बोनेट/हाइड्रोजनकार्बोनेट से: CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂O + CO₂ (चूने का पानी दूधिया)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दहन: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा + प्रकाश
- ऑक्सीकरण: CH₃CH₂OH → CH₃COOH (क्षारीय KMnO₄ या अम्लीय K₂Cr₂O₇, ऊष्मा)
- संकलन: CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃CH₃ (Ni उत्प्रेरक)
- प्रतिस्थापन: CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (धूप)
- 2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂
- C₂H₅OH → C₂H₄ + H₂O (गरम सांद्र H₂SO₄, 443 K)
- CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O
- CH₃COOC₂H₅ + NaOH → C₂H₅OH + CH₃COONa (साबुनीकरण)
- CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂O + CO₂
हल किए गए उदाहरण
1. एथेन के पूर्ण दहन का संतुलित समीकरण लिखिए।
2C₂H₆ + 7O₂ → 4CO₂ + 6H₂O + ऊष्मा + प्रकाश। (पहले C: 4, फिर H: 12 → 6H₂O, फिर O: 8 + 6 = 14 परमाणु = 7O₂)
2. संतृप्त हाइड्रोकार्बन साफ़ लौ देता है पर नैफ़्थलीन कालिख वाली, क्यों?
नैफ़्थलीन असंतृप्त है और उसमें कार्बन अधिक है। सारा कार्बन जलाने लायक ऑक्सीजन नहीं मिलती, इसलिए बिना जले कार्बन कण पीली कालिख वाली लौ देते हैं।
3. एथीन + H₂ और मेथेन + Cl₂ में संकलन कौन-सी है? क्यों?
एथीन + H₂ संकलन है: C=C पर दो H जुड़ते हैं और एक उत्पाद (एथेन) बनता है। मेथेन + Cl₂ प्रतिस्थापन है: दो उत्पाद (CH₃Cl + HCl) बनते हैं।
4. यौगिक X (C₂H₆O) सोडियम से एक गैस देता है जो 'पॉप' ध्वनि से जलती है। क्षारीय KMnO₄ से ऑक्सीकरण पर Y (C₂H₄O₂) बनता है। X, Y और गैस पहचानिए।
X = एथेनॉल, गैस = हाइड्रोजन, Y = एथेनॉइक अम्ल।
5. खाने के सोडे से एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल में अंतर कैसे करेंगे?
NaHCO₃ डालें। एथेनॉइक अम्ल में बुदबुदाहट होगी और CO₂ निकलेगी (चूने का पानी दूधिया); एथेनॉल में कुछ नहीं होगा।
6. Y (C₂H₄O₂) को X (C₂H₆O) और सांद्र H₂SO₄ की कुछ बूँदों के साथ गरम करने पर मीठी गंध आती है। अभिक्रिया और उत्पाद बताइए, और उत्पाद से X वापस कैसे मिलेगा?
एस्टरीकरण: CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O; उत्पाद एथिल एथेनोएट। इसे NaOH के साथ गरम करें (साबुनीकरण), एथेनॉल और सोडियम एथेनोएट मिलेंगे।
आम गलतियाँ
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन में संकलन लिखना। केवल असंतृप्त (C=C या C≡C वाले) यौगिक संकलन देते हैं।
- शर्तें भूलना: संकलन में Ni/Pd, प्रतिस्थापन में धूप, एस्टरीकरण में अम्ल उत्प्रेरक चाहिए।
- एथेनॉल + Na में ऑक्सीजन गैस लिखना। गैस हाइड्रोजन है, जो पॉप के साथ जलती है।
- एथेनॉइक अम्ल को प्रबल अम्ल कहना। यह दुर्बल अम्ल है।