संयोजन अभिक्रिया
दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं: A + B → AB।
- CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा: बिना बुझा चूना बुझा चूना बनता है, जिससे सफ़ेदी होती है। दीवार पर Ca(OH)₂ धीरे-धीरे हवा की CO₂ से क्रिया कर चमकदार CaCO₃ बनाता है।
- 2Mg + O₂ → 2MgO: मैग्नीशियम रिबन चमकदार सफ़ेद लौ से जलता है।
- C + O₂ → CO₂ (कोयला जलना), 2H₂ + O₂ → 2H₂O।
वियोजन अभिक्रिया
एक यौगिक टूटकर दो या अधिक सरल पदार्थ बनाता है: AB → A + B। इसमें ऊर्जा लगती है, इसलिए यह प्रायः ऊष्माशोषी होती है। ऊर्जा के प्रकार से:
ऊष्मीय वियोजन (गर्मी से)
CaCO₃ → CaO + CO₂ (चूना बनाना); 2FeSO₄ → Fe₂O₃ + SO₂ + SO₃ (हरे क्रिस्टल भूरे हो जाते हैं और जलते गंधक की गंध आती है); 2Pb(NO₃)₂ → 2PbO + 4NO₂ + O₂ (भूरा धुआँ)।
विद्युत अपघटन (बिजली से)
अम्लीय पानी में धारा प्रवाहित करने पर 2H₂O → 2H₂ + O₂। हाइड्रोजन का आयतन ऑक्सीजन से दोगुना होता है।
प्रकाश वियोजन (प्रकाश से)
धूप में 2AgCl → 2Ag + Cl₂ और 2AgBr → 2Ag + Br₂: सफ़ेद लवण धूसर हो जाता है। श्वेत-श्याम फ़ोटोग्राफ़ी में इसका उपयोग होता है।
विस्थापन अभिक्रिया
ज़्यादा क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से बाहर कर देता है: A + BC → AC + B।
- Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu: नीला घोल हल्का हरा हो जाता है और कील पर भूरे ताँबे की परत चढ़ती है।
- Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu; Pb + CuCl₂ → PbCl₂ + Cu।
अगर धातु कम क्रियाशील हो (आयरन सल्फ़ेट में ताँबा), तो कुछ नहीं होता। याद रखो: Zn > Fe > Pb > Cu।
द्विविस्थापन और अवक्षेपण अभिक्रिया
दो यौगिक अपने आयन आपस में बदलते हैं: AB + CD → AD + CB। अगर कोई उत्पाद अघुलनशील ठोस हो तो वह अवक्षेप बनकर बैठता है; इसे अवक्षेपण अभिक्रिया भी कहते हैं।
- Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s) + 2NaCl(aq): बेरियम सल्फ़ेट का सफ़ेद अवक्षेप।
- AgNO₃ + NaCl → AgCl↓ + NaNO₃: सफ़ेद दही जैसा अवक्षेप।
- Pb(NO₃)₂ + 2KI → PbI₂↓ + 2KNO₃: चमकीला पीला अवक्षेप।
अम्ल + क्षारक (उदासीनीकरण) भी द्विविस्थापन है: NaOH + HCl → NaCl + H₂O।
ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ
ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ ऊष्मा देती हैं: ईंधन जलना, CaO + पानी, श्वसन (C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा), और सब्ज़ियों के कचरे का कम्पोस्ट बनना।
ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ ऊष्मा, प्रकाश या बिजली लेती हैं: ज़्यादातर वियोजन (CaCO₃ गर्म करना), प्रकाश-संश्लेषण, पानी का विद्युत अपघटन।
परीक्षा पैटर्न: प्रकार पहचानो (1 अंक), ‘श्वसन ऊष्माक्षेपी क्यों है?’ (2 अंक), FeSO₄ गर्म करने या Pb(NO₃)₂ + KI के प्रेक्षण (3 अंक) अक्सर आते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संयोजन: A + B → AB
- वियोजन: AB → A + B (ऊष्मा, बिजली या प्रकाश से)
- विस्थापन: A + BC → AC + B (A, B से ज़्यादा क्रियाशील)
- द्विविस्थापन: AB + CD → AD + CB
- अवक्षेप: बना हुआ अघुलनशील ठोस, (s) या ↓ से दिखाते हैं
- ऊष्माक्षेपी: ऊष्मा निकलती है; ऊष्माशोषी: ऊष्मा ली जाती है
हल किए गए उदाहरण
1. प्रकार बताओ: CaO + H₂O → Ca(OH)₂ + ऊष्मा
दो अभिकारक से एक उत्पाद, इसलिए संयोजन। ऊष्मा निकलती है, इसलिए ऊष्माक्षेपी भी।
2. प्रकार बताओ: 2H₂O → 2H₂ + O₂ (विद्युत धारा)
एक यौगिक बिजली से दो तत्वों में टूटा: विद्युत अपघटनी वियोजन। ऊर्जा लेता है, इसलिए ऊष्माशोषी।
3. कॉपर सल्फ़ेट के घोल में लोहे की कील डालने पर नीला रंग क्यों फीका पड़ता है?
लोहा ताँबे से ज़्यादा क्रियाशील है: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu। नीले CuSO₄ की जगह हल्का हरा FeSO₄ बनता है और कील पर भूरा ताँबा जमता है।
4. लेड नाइट्रेट के घोल में पोटैशियम आयोडाइड का घोल मिलाने पर क्या दिखेगा? समीकरण लिखो।
लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप। Pb(NO₃)₂(aq) + 2KI(aq) → PbI₂(s) + 2KNO₃(aq)। यह द्विविस्थापन (अवक्षेपण) अभिक्रिया है।
5. सूखी परखनली में फ़ेरस सल्फ़ेट के क्रिस्टल गर्म किए। दो प्रेक्षण और अभिक्रिया का प्रकार बताओ।
हरे क्रिस्टल भूरे (Fe₂O₃) हो जाते हैं और जलते गंधक की गंध (SO₂, SO₃) आती है। 2FeSO₄ → Fe₂O₃ + SO₂ + SO₃ ऊष्मीय वियोजन है।
6. क्या ताँबा ज़िंक सल्फ़ेट से ज़िंक को विस्थापित करेगा? समझाओ।
नहीं। ताँबा ज़िंक से कम क्रियाशील है, इसलिए कोई अभिक्रिया नहीं होगी।
आम गलतियाँ
- दो उत्पाद वाली हर अभिक्रिया को वियोजन कहना। वियोजन में अभिकारक सिर्फ़ एक होता है।
- विस्थापन (एक तत्व अंदर आता है) और द्विविस्थापन (दो यौगिक आयन बदलते हैं) में गड़बड़।
- अवक्षेप को गैस समझना। यह अघुलनशील ठोस है जो नीचे बैठता है।
- सभी वियोजन को ऊष्माक्षेपी कहना। इनमें ऊर्जा लगती है, इसलिए प्रायः ऊष्माशोषी होते हैं।