Romania Clasa a VIII-a Chemistry
अध्याय: 3
1. Chemical changes of substances
Chemical reactions and equations · Combination reactions · Decomposition reactions · Substitution reactions · Exchange reactions
- रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण संतुलन – रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं, न नष्ट होते हैं; वे सिर्फ़ अपने साथी बदलते हैं। इसलिए समीकरण के दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर होने चाहिए। हम सूत्र के आगे की संख्या बदलकर संतुलन करते हैं, सूत्र को कभी नहीं बदलते।
- रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार – ज़्यादातर अभिक्रियाएँ कुछ ढाँचों में आती हैं। संयोजन: A + B → AB। वियोजन: AB → A + B। विस्थापन: A + BC → AC + B, जहाँ ज़्यादा क्रियाशील A, B को बाहर कर देता है। द्विविस्थापन: AB + CD → AD + CB, साथी बदल जाते हैं; अघुलनशील ठोस बने तो अवक्षेपण अभिक्रिया। ऊष्मा दे तो ऊष्माक्षेपी, ऊष्मा ले तो ऊष्माशोषी।
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- धातुओं की प्राप्ति और निष्कर्षण – धातुएँ ज़्यादातर भू-पर्पटी में यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं; जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। निष्कर्षण के तीन चरण: सांद्रण (गैंग हटाना), कच्ची धातु पाना (भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन या विद्युत अपघटन, जो सक्रियता श्रेणी से तय होता है), और परिष्करण (आम तौर पर विद्युत अपघटनी)।
- आयनिक यौगिक: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं – धातु का परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन अधातु के परमाणु को दे देता है ताकि दोनों का बाहरी कोश पूरा (अष्टक) हो जाए। धातु धनायन बनती है, अधातु ऋणायन, और दोनों के बीच का प्रबल आकर्षण आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध है। आयनिक यौगिक कठोर क्रिस्टलीय ठोस होते हैं, उच्च गलनांक वाले, पानी में घुलनशील, और केवल पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालक।
- धातु और अधातु: गुण और सक्रियता श्रेणी – धातुएँ आम तौर पर चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ मंद, भंगुर और कुचालक। धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं, जल और तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, और अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। सक्रियता के क्रम में लिखी सूची सक्रियता श्रेणी कहलाती है।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
2. Stoichiometric calculations
Stoichiometry
- रससमीकरणमिति, सीमांत अभिकर्मक और सांद्रता के पद – रससमीकरणमिति का मतलब है अभिक्रिया में पदार्थों की मात्रा मापना। संतुलित समीकरण एक नुस्खे जैसा है: उसकी संख्याएँ अभिकारकों और उत्पादों का मोल अनुपात बताती हैं। इससे किसी भी द्रव्यमान को मोल में बदलकर, अनुपात लगाकर, किसी दूसरे पदार्थ का द्रव्यमान निकाल सकते हैं। जो अभिकारक पहले खत्म हो वह सीमांत अभिकर्मक है; वही तय करता है कितना उत्पाद बनेगा। विलयन की सांद्रता द्रव्यमान %, मोल अंश, मोलरता या मोललता से बताते हैं।
3. Chemistry in our lives
Fuels and combustion · Building materials · Everyday applications
- दहन (जलना) – दहन यानी जलना: एक रासायनिक बदलाव जिसमें ईंधन ऑक्सीजन से तेज़ी से क्रिया करता है और गर्मी व रोशनी देता है। इसके लिए तीन चीज़ें चाहिए: ईंधन, ऑक्सीजन और गर्मी (ज्वलन ताप तक)। कोई एक हटाओ, आग बुझ जाती है। पूरी हवा में कार्बन-हाइड्रोजन वाले ईंधन पूरी तरह जलकर CO₂ और पानी बनाते हैं (नीली लौ)। कम हवा में अपूर्ण दहन होता है: कालिख और ज़हरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (पीली, धुएँ वाली लौ)। CO₂ चूने के पानी को दूधिया करती है। 1 ग्राम ईंधन जलने पर निकली ऊर्जा उसका ऊष्मीय मान है।
- एन्थैल्पी, कैलोरीमिति और हेस का नियम – एन्थैल्पी H = U + pV। स्थिर दाब पर ली या दी गई ऊष्मा ΔH के बराबर होती है; स्थिर आयतन पर ΔU के बराबर। ΔU को बंद बम कैलोरीमीटर में और ΔH को खुले कप कैलोरीमीटर में मापते हैं: q = CΔT या q = mcΔT। गैसों के लिए ΔH = ΔU + Δn_g RT। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔrH ऋणात्मक, ऊष्माशोषी में धनात्मक; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। हेस का नियम: अभिक्रिया एक चरण में हो या कई में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन एक ही रहता है, इसलिए ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणित की तरह जोड़ सकते हैं।
- दैनिक जीवन में रसायन: दवाएँ, भोजन, सफ़ाई और मिट्टी – रसायन हर दिन आपके घर में काम करता है। प्रतिअम्ल (एंटासिड) दुर्बल क्षार हैं जो पेट का ज़्यादा अम्ल शांत करते हैं। दवाओं को उनके काम से बाँटते हैं: पीड़ाहारी, प्रतिजैविक, रोगाणुरोधक, प्रतिहिस्टैमिन, प्रशांतक। खाद्य रसायन भोजन को सुरक्षित और स्वादिष्ट रखते हैं: परिरक्षक, प्रतिऑक्सीकारक और मधुरक। साबुन इसलिए साफ़ करता है क्योंकि उसके अणु का एक सिरा पानी-प्रेमी और दूसरा तेल-प्रेमी है। किसान अम्लीय मिट्टी में चूना और फ़सल के पोषण के लिए उर्वरक डालते हैं। कुछ धातु आयन शरीर को चाहिए, कुछ विषैले हैं, इसलिए भी हम पुनर्चक्रण करते हैं।