प्रतिअम्ल: पेट का ज़्यादा अम्ल शांत करना
आपका पेट भोजन पचाने और कीटाणु मारने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) बनाता है। इसका pH लगभग 1–2 है। ज़्यादा अम्ल से एसिडिटी होती है: जलन और समय के साथ घाव (अल्सर)।
प्रतिअम्ल (एंटासिड) एक दुर्बल क्षार है जो कुछ अम्ल उदासीन करता है: अम्ल + क्षार → लवण + पानी।
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ़ मैग्नेशिया): Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O
- ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड: Al(OH)₃ + 3HCl → AlCl₃ + 3H₂O
- सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (खाने का सोडा): NaHCO₃ + HCl → NaCl + H₂O + CO₂ (गैस, इसलिए डकार आ सकती है)
सोडियम हाइड्रॉक्साइड जैसा प्रबल क्षार कभी नहीं देते; वह पेट जला देगा। प्रतिअम्ल सिर्फ़ लक्षण ठीक करते हैं। कुछ आधुनिक दवाएँ (जैसे ओमेप्राज़ोल) बनने वाला अम्ल घटाती हैं; कौन-सी लेनी है यह डॉक्टर तय करते हैं।
दवाएँ और उनका वर्गीकरण
औषध (ड्रग) कोई भी रसायन है जो शरीर का काम बदलता है; दवा वह औषध है जो सही मात्रा में रोग से बचाने, इलाज या ठीक करने में लगे। किसी भी दवा की ज़्यादा मात्रा हानिकारक है।
- पीड़ाहारी (एनाल्जेसिक): पैरासिटामॉल, आइबुप्रोफ़ेन, ऐस्पिरिन। कई बुखार भी घटाती हैं (ज्वरनाशी)। मॉर्फ़ीन जैसी तेज़ (स्वापक) सिर्फ़ अस्पताल में, क्योंकि लत लग सकती है।
- प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक): जीवाणुओं को मारते या रोकते हैं, जैसे पेनिसिलिन, एमॉक्सिसिलिन। ज़ुकाम जैसे वायरस पर काम नहीं करते। कोर्स हमेशा पूरा करें, वरना मज़बूत जीवाणु बचते हैं (प्रतिजैविक प्रतिरोध)।
- रोगाणुरोधक (एंटीसेप्टिक): जीवित ऊतक पर कीटाणु मारते हैं: तनु आयोडीन, डेटॉल (क्लोरोज़ाइलेनॉल), बोरिक अम्ल, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड।
- विसंक्रामी (डिसइन्फ़ेक्टेंट): निर्जीव चीज़ों पर कीटाणु मारते हैं: ब्लीच, 1% फ़ीनॉल। एक ही रसायन बहुत पतला होने पर रोगाणुरोधक (0.2% फ़ीनॉल) और तेज़ होने पर विसंक्रामी हो सकता है।
- प्रतिहिस्टैमिन: हिस्टैमिन रोकते हैं, जो एलर्जी के लक्षण लाने वाला शरीर का रसायन है: सेटिरिज़ीन।
- प्रशांतक (ट्रैंक्विलाइज़र): चिंता और तनाव घटाते, नींद में मदद; सिर्फ़ डॉक्टर के पर्चे पर।
भोजन में रसायन
- परिरक्षक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि धीमी करते हैं: नमक, चीनी, सिरका और तेल (पारंपरिक, अचार और जैम में), और बोतलबंद भोजन में सोडियम बेंज़ोएट, पोटैशियम सॉर्बेट, सल्फ़ाइट।
- प्रतिऑक्सीकारक वसा और तेल को बासी (ऑक्सीकृत) होने से रोकते हैं: विटामिन C, विटामिन E, BHA, BHT।
- कृत्रिम मधुरक लगभग बिना ऊर्जा के बहुत मीठे लगते हैं, मधुमेह वालों के लिए उपयोगी: सैकरीन, ऐस्पार्टेम (पकाने में नहीं, गर्मी में टूटता है), सुक्रालोज़ (गर्मी में स्थिर)।
- रंग, स्वाद और पायसीकारक भोजन को सुंदर, स्वादिष्ट और अच्छी तरह मिला हुआ बनाते हैं।
हर खाद्य योज्य की खाद्य-सुरक्षा संस्थाओं द्वारा तय सुरक्षित दैनिक सीमा होती है; पैकेट पर ये प्रायः E-नंबर या INS नंबर में लिखे होते हैं।
साबुन और अपमार्जक: सफ़ाई कैसे होती है
साबुन लंबी शृंखला वाले वसीय अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है। यह तेल या वसा को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करके बनता है (साबुनीकरण)। हर साबुन अणु का सिर पानी-प्रेमी और लंबी पूँछ तेल-प्रेमी होती है।
पानी में पूँछें चिकनाई की बूँद में घुसती हैं और सिर बाहर पानी में रहते हैं। चिकनाई एक छोटी गेंद में फँस जाती है जिसे मिसेल कहते हैं, जो धुल जाती है।
कठोर जल (Ca²⁺ और Mg²⁺ आयन वाला) में साबुन चिपचिपा मैल (स्कम) बनाता है और झाग कम देता है। संश्लेषित अपमार्जक कठोर जल में भी काम करते हैं। जैव-निम्नीकरणीय चुनें; शाखित शृंखला वाले अपमार्जक धीरे टूटते हैं और नदियों में झाग बनाते हैं।
मिट्टी और उर्वरकों का रसायन
ज़्यादातर फ़सलें मिट्टी के pH 6–7.5 पर सबसे अच्छी उगती हैं।
- अम्लीय मिट्टी (pH 6 से कम): उदासीन करने के लिए चूना डालें — बिना बुझा चूना CaO, बुझा चूना Ca(OH)₂ या चूना पत्थर का चूर्ण CaCO₃।
- क्षारीय या लवणीय मिट्टी: जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) या जैविक पदार्थ डालें और पानी से लवण धो दें।
- जैविक पदार्थ (कंपोस्ट, गोबर खाद) मिट्टी की बनावट सुधारते और पानी रोकते हैं।
पौधों को बहुत N, P और K चाहिए। रासायनिक उर्वरक: यूरिया CO(NH₂)₂ और अमोनियम नाइट्रेट (नाइट्रोजन → हरी पत्तियाँ), सुपरफ़ॉस्फ़ेट (फ़ॉस्फ़ोरस → जड़ें), पोटाश KCl (पोटैशियम → फूल और फल), और NPK मिश्रण। ज़्यादा डालने पर ये बहकर झीलों में शैवाल बढ़ाते हैं (सुपोषण) और मिट्टी अम्लीय करते हैं, इसलिए किसान मिट्टी जाँचकर सही मात्रा डालते हैं।
शरीर में धातु आयन, विषैली धातुएँ और पुनर्चक्रण
ज़रूरी धातु आयन: हीमोग्लोबिन में Fe²⁺ ऑक्सीजन ले जाता है (कमी → रक्ताल्पता); Ca²⁺ हड्डियाँ और दाँत बनाता और मांसपेशियों में मदद करता है; Na⁺ और K⁺ तंत्रिका संकेत ले जाते और जल संतुलन रखते हैं; Mg²⁺ पर्णहरित और कई एंज़ाइमों में है; Zn²⁺ घाव भरने और प्रतिरक्षा में मदद करता है। ज़रूरी आयन की भी ज़्यादा मात्रा हानिकारक हो सकती है।
विषैली भारी धातुएँ बहुत कम मात्रा में भी हानि करती हैं और शरीर में जमा होती हैं: सीसा (पुराना पेंट, बैटरियाँ; मस्तिष्क को हानि, ख़ासकर बच्चों में), पारा (पुराने थर्मामीटर, CFL बल्ब; तंत्रिकाओं को हानि, मछलियों में जमा), कैडमियम (Ni–Cd बैटरियाँ; गुर्दे और हड्डियों को हानि), आर्सेनिक (कुछ भूजल में)।
पुनर्चक्रण इन धातुओं को मिट्टी और पानी से दूर रखता है और अयस्क व ऊर्जा बचाता है। कचरा अलग करें: सूखा (कागज़, प्लास्टिक, धातु, काँच), गीला (कंपोस्ट) और ख़तरनाक (बैटरियाँ, ई-कचरा, दवाएँ)। ऐलुमिनियम, स्टील और ताँबा बिना गुणवत्ता खोए बार-बार पुनर्चक्रित हो सकते हैं।
घर पर करके देखें
लाल पत्तागोभी pH परीक्षण: लाल पत्तागोभी की कुछ पत्तियाँ पानी में उबालकर बैंगनी द्रव ठंडा करें। इसका एक चम्मच डालें: नींबू रस, सिरका, पानी, सोडा वाला पानी, और पानी में पिसी प्रतिअम्ल गोली में। अम्ल इसे गुलाबी-लाल करता है; क्षार नीला-हरा। 3D के चरण 1 में प्रतिअम्ल के काम करते समय यही रंग बदलाव दिखता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिअम्ल: Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O
- खाने का सोडा: NaHCO₃ + HCl → NaCl + H₂O + CO₂
- साबुनीकरण: वसा + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल
- अम्लीय मिट्टी में चूना: CaCO₃ + 2H⁺ → Ca²⁺ + H₂O + CO₂
- मुख्य शब्द: पीड़ाहारी, ज्वरनाशी, प्रतिजैविक, रोगाणुरोधक, विसंक्रामी, प्रतिहिस्टैमिन, प्रशांतक, परिरक्षक, प्रतिऑक्सीकारक, मधुरक, मिसेल
हल किए गए उदाहरण
1. एसिडिटी में डॉक्टर सोडियम हाइड्रॉक्साइड क्यों नहीं देते?
NaOH प्रबल, संक्षारक क्षार है। यह मुँह और पेट जला देगा। Mg(OH)₂ जैसा दुर्बल, अघुलनशील क्षार सिर्फ़ ज़्यादा अम्ल को सुरक्षित रूप से उदासीन करता है।
2. एक गोली में 0.29 g Mg(OH)₂ (मोलर द्रव्यमान 58 g/mol) है। यह कितने मोल HCl उदासीन कर सकती है?
Mg(OH)₂ के मोल = 0.29 ÷ 58 = 0.005 mol। हर एक को 2 mol HCl चाहिए, इसलिए 0.010 mol HCl।
3. 0.2% फ़ीनॉल और 1% फ़ीनॉल: कौन रोगाणुरोधक और कौन विसंक्रामी?
0.2% त्वचा के लिए हल्का है, इसलिए रोगाणुरोधक। 1% तेज़ है और फ़र्श व नालियों में लगता है, इसलिए विसंक्रामी।
4. खेत की मिट्टी का pH 5.0 है। किसान क्या डाले, और ज़्यादा यूरिया क्यों नहीं?
pH को 6.5 की ओर बढ़ाने के लिए चूना (CaCO₃ या Ca(OH)₂) डालें। यूरिया नाइट्रोजन देता है पर समय के साथ मिट्टी को और अम्लीय करता है, इसलिए समस्या हल नहीं होगी।
आम गलतियाँ
- ज़ुकाम या फ़्लू में प्रतिजैविक लेना। ज़ुकाम वायरस से होता है; प्रतिजैविक सिर्फ़ जीवाणुओं पर काम करते हैं।
- रोगाणुरोधक और विसंक्रामी को एक ही मानना। रोगाणुरोधक जीवित ऊतक के लिए; विसंक्रामी चीज़ों और फ़र्श के लिए।
- सोचना कि प्रबल क्षार बेहतर प्रतिअम्ल है। प्रतिअम्ल दुर्बल क्षार होने चाहिए; प्रबल क्षार जलाते हैं।
- पुरानी बैटरियाँ या थर्मामीटर कूड़ेदान में फेंकना। इनसे सीसा, कैडमियम या पारा निकलता है; ये ख़तरनाक या ई-कचरा संग्रह में जाते हैं।