Japan 高校(専門学科)1〜3年 Science and Mathematics (specialist)
अध्याय: 7
1. Advanced Mathematics I
Numbers and expressions · Figures and measurement · Quadratic functions · Exponential and logarithmic functions · Data analysis · Counting and probability
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
- त्रिकोणमितीय अनुपात (sin, cos, tan) – समकोण त्रिभुज में एक न्यून कोण θ चुनो। θ के सामने वाली भुजा लंब (सम्मुख), θ को छूने वाली छोटी भुजा आधार (आसन्न), और सबसे लंबी भुजा कर्ण। sin θ = लंब/कर्ण, cos θ = आधार/कर्ण, tan θ = लंब/आधार। cosec, sec, cot इनके उल्टे हैं। ये अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर हैं, त्रिभुज के आकार पर नहीं। 0°, 30°, 45°, 60°, 90° की टेबल याद करो।
- द्विघात फलन और उनके ग्राफ़ – द्विघात फलन (quadratic function) y = ax² + bx + c है, जहाँ a ≠ 0। इसका ग्राफ़ U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं। a > 0 हो तो वक्र ऊपर खुलता है और उसका एक सबसे निचला बिंदु होता है; a < 0 हो तो नीचे खुलता है और सबसे ऊँचा बिंदु होता है। यह मोड़ बिंदु शीर्ष (vertex) है, x = −b/2a पर। शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k में शीर्ष (h, k) है।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
- डेटा विश्लेषण – डेटा विश्लेषण यानी कच्चे आँकड़ों को जवाब में बदलना। इसका एक चक्र है: सवाल पूछो, डेटा इकट्ठा करो, साफ़ करो (ग़लती, दोहराव और खाली जवाब हटाओ), व्यवस्थित करो, माध्य, माध्यिका, परास और पैटर्न से विश्लेषण करो, सही चार्ट बनाओ और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। बाहरी मान, छोटे नमूने और पक्षपात पर नज़र रखो, और याद रखो कि दो चीज़ों का साथ बढ़ना (सहसंबंध) यह साबित नहीं करता कि एक दूसरे का कारण है। डेटा को सुरक्षित रखना और अनुमति से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।
2. Advanced Mathematics II
Various expressions · Sequences · Trigonometric functions and the complex plane · Figures and equations · Limits · Differentiation · Integration · Statistical inference
- बहुपद के मूल और बहुपद सर्वसमिकाएँ – बहुपद के मूल पता हों तो उसके गुणांक तय हो जाते हैं, और उलटा भी। ax³ + bx² + cx + d = 0 के मूल α, β, γ हों तो: α + β + γ = −b/a, αβ + βγ + γα = c/a और αβγ = −d/a (विएता के सूत्र)। इनसे बिना हल किए मूलों वाले व्यंजक निकलते हैं, और प्रतिस्थापन से ऐसे नए समीकरण बनते हैं जिनके मूल बदले हुए (रूपांतरित) हों। बहुपद सर्वसमिका वह समीकरण है जो चर के हर मान के लिए सच हो; इसे एक पक्ष को फैलाकर या गुणनखंड करके दूसरे पक्ष तक पहुँचाकर सिद्ध करते हैं।
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
- सरल रेखाएँ (कक्षा 11): ढाल, समीकरण के रूप और दूरी – रेखा की ढाल = ऊपर चढ़ना ÷ दाएँ चलना = (y₂ − y₁)/(x₂ − x₁) = tan θ। समांतर रेखाओं की ढाल बराबर, लंब रेखाओं में m₁m₂ = −1। दो रेखाओं के बीच कोण: tan θ = |(m₂ − m₁)/(1 + m₁m₂)|। रेखा के रूप: y = b या x = a (अक्ष के समांतर), y − y₁ = m(x − x₁) (बिंदु-ढाल), y = mx + c (ढाल-अंतःखंड), दो-बिंदु रूप, x/a + y/b = 1 (अंतःखंड)। बिंदु (x₁, y₁) की रेखा Ax + By + C = 0 से दूरी |Ax₁ + By₁ + C|/√(A² + B²)।
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
- सांख्यिकीय अनुमिति – सांख्यिकीय अनुमिति (statistical inference) का मतलब है: एक छोटे नमूने को देखकर पूरी समष्टि (population) के बारे में बात कहना। समष्टि के बारे में संख्या (जैसे असली अनुपात p या माध्य μ) प्राचल (parameter) कहलाती है। नमूने से निकली संख्या (जैसे p̂ या x̄) प्रतिदर्शज (statistic) है, और यही हमारा बिंदु आकलन है। अलग-अलग नमूने अलग उत्तर देते हैं: यह नमूना परिवर्तनशीलता है। बहुत सारे नमूनों के उत्तर मिलकर नमूना वितरण बनाते हैं, जिसका बीच असली मान पर होता है और फैलाव मानक त्रुटि (SE) कहलाता है: अनुपात के लिए √(p(1−p)/n), माध्य के लिए σ/√n। बड़ा नमूना = कम फैलाव। 95% विश्वास्यता अंतराल = आकलन ± 1.96 × SE; ऐसे 100 में से लगभग 95 अंतराल असली मान को पकड़ते हैं। सिमुलेशन से जाँचते हैं कि कोई दावा आँकड़ों से मेल खाता है या नहीं। अच्छी अनुमिति के लिए यादृच्छिक नमूना ज़रूरी है, और साथ-साथ बदलना कारण साबित नहीं करता।
3. Special Topics in Advanced Mathematics
Vectors · Matrices and applications · Discrete graphs · Mathematics in daily life and society
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
- आव्यूह (Matrices): कोटि, प्रकार, परिवर्त, संक्रियाएँ और व्युत्क्रम – आव्यूह संख्याओं का एक डिब्बा है जिसमें संख्याएँ पंक्तियों और स्तंभों में रखी होती हैं। इसकी कोटि = पंक्तियाँ × स्तंभ। शून्य, तत्समक, विकर्ण, अदिश, पंक्ति, स्तंभ और वर्ग आव्यूह इसके खास प्रकार हैं। परिवर्त में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। Aᵀ = A हो तो सममित, Aᵀ = −A हो तो विषम-सममित। योग जगह-जगह करते हैं, गुणन पंक्ति × स्तंभ से। आव्यूह गुणन क्रमविनिमेय नहीं है (AB प्रायः BA नहीं)। यदि AB = BA = I हो तो B, A का व्युत्क्रम है और वह एक ही (अद्वितीय) होता है।
- ग्राफ़ सिद्धांत: बिंदु, रेखाएँ और नेटवर्क – ग्राफ़ शीर्षों (बिंदुओं) का समूह है जिन्हें किनारे (रेखाएँ) जोड़ते हैं। किसी शीर्ष की घात उसे छूने वाले किनारों की संख्या है, और सभी घातों का योग किनारों का दुगुना होता है। ऑयलर पथ हर किनारे का एक बार उपयोग करता है और तभी संभव है जब 0 या 2 शीर्ष विषम घात के हों। वृक्ष ऐसा जुड़ा ग्राफ़ है जिसमें चक्र नहीं और n − 1 किनारे हैं। भारित ग्राफ़ सड़कें और नेटवर्क दिखाते हैं; क्रुस्कल और प्रिम विधियाँ न्यूनतम विस्तृत वृक्ष ढूँढती हैं।
- गणितीय निदर्शन: गणित से असली दुनिया को समझना – गणितीय मॉडल (mathematical model) एक समीकरण, ग्राफ़ या तालिका है जो किसी असली स्थिति को सरल तरीके से बताती है। मॉडलिंग चक्र: असली समस्या समझो → चर चुनो और मान्यताएँ बनाओ → मॉडल बनाओ (जैसे रैखिक, द्विघात या चरघातांकी) → हल करो और अनुमान लगाओ → असली आँकड़ों से जाँचो → मॉडल सुधारो या उसकी सीमा बताओ। कोई मॉडल पूरी तरह सही नहीं होता; अच्छा मॉडल सरल होता है और काम लायक सही होता है।
4. Advanced Physics
Force and motion · Waves · Electricity and magnetism · Atoms
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- प्रगामी तरंगें: प्रकार, चाल और समीकरण – तरंग ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, पदार्थ को नहीं। अनुप्रस्थ तरंग में कण तरंग की दिशा के लंबवत हिलते हैं; अनुदैर्ध्य में उसी दिशा में। चाल v = fλ। डोरी पर v = √(T/μ); गैस में ध्वनि के लिए v = √(γP/ρ)। +x की ओर जाती तरंग y = A sin(kx − ωt), जहाँ k = 2π/λ और ω = 2πf।
- विद्युत और चुंबकत्व – विद्युत आवेश और चुंबक एक ही बात के दो रूप हैं। रगड़ी वस्तु पर स्थिर आवेश रहता है; चुंबक के ध्रुव और क्षेत्र होता है; धारा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है; और बदलता चुंबकीय क्षेत्र धारा बनाता है (विद्युत चुंबकीय प्रेरण)। मोटर, जनित्र और ट्रांसफ़ॉर्मर इन्हीं चार बातों पर चलते हैं।
- बोर मॉडल की ओर: प्रकाश, फोटॉन, स्पेक्ट्रम और बोर का परमाणु – प्रकाश एक विद्युत-चुंबकीय तरंग है: c = νλ और तरंग संख्या ν̄ = 1/λ। पर कुछ बातों के लिए कण चाहिए: प्लांक ने कहा ऊर्जा पैकेट (क्वांटम) में आती है, E = hν। आइंस्टीन ने फोटॉन से प्रकाश-विद्युत प्रभाव समझाया: इलेक्ट्रॉन तभी निकलता है जब hν, कार्य फलन W₀ = hν₀ से ज़्यादा हो; उसकी गतिज ऊर्जा hν − hν₀। परमाणु रेखा स्पेक्ट्रम देते हैं, यानी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाएँ तय हैं। बोर ने इलेक्ट्रॉन को तय कक्षाओं में रखा जहाँ कोणीय संवेग nh/2π; ऊर्जा Eₙ = −2.18 × 10⁻¹⁸ Z²/n² J, त्रिज्या rₙ = 52.9 n²/Z pm। कक्षा बदलने पर फोटॉन निकलता है, 1/λ = R_H(1/n₁² − 1/n₂²) से लाइमन, बामर, पाशन, ब्रैकेट, फुंड श्रेणियाँ मिलती हैं। बोर मॉडल सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन वाले कणों पर चलता है।
5. Advanced Chemistry
Chemistry and daily life · Composition of substances · Chemical change and its uses · States of matter and chemical equilibrium · Properties of inorganic substances · Properties of organic compounds · Role of chemistry
- दैनिक जीवन में रसायन: दवाएँ, भोजन, सफ़ाई और मिट्टी – रसायन हर दिन आपके घर में काम करता है। प्रतिअम्ल (एंटासिड) दुर्बल क्षार हैं जो पेट का ज़्यादा अम्ल शांत करते हैं। दवाओं को उनके काम से बाँटते हैं: पीड़ाहारी, प्रतिजैविक, रोगाणुरोधक, प्रतिहिस्टैमिन, प्रशांतक। खाद्य रसायन भोजन को सुरक्षित और स्वादिष्ट रखते हैं: परिरक्षक, प्रतिऑक्सीकारक और मधुरक। साबुन इसलिए साफ़ करता है क्योंकि उसके अणु का एक सिरा पानी-प्रेमी और दूसरा तेल-प्रेमी है। किसान अम्लीय मिट्टी में चूना और फ़सल के पोषण के लिए उर्वरक डालते हैं। कुछ धातु आयन शरीर को चाहिए, कुछ विषैले हैं, इसलिए भी हम पुनर्चक्रण करते हैं।
- रासायनिक परिवर्तन और ऊर्जा – रासायनिक परिवर्तन में परमाणु साथी बदलते हैं और नए पदार्थ बनते हैं। पाँच विचार लगभग सब समझा देते हैं: अम्ल और क्षार (H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं), उपचयन और अपचयन (इलेक्ट्रॉन चलते हैं), ऊष्मा (ऊष्माक्षेपी में गर्मी बाहर, ऊष्माशोषी में अंदर), दर और साम्य (कितनी तेज़ी से, और कहाँ टिकती है), और नाभिकीय ऊर्जा (नाभिक बदलता है और बहुत ज़्यादा ऊर्जा निकलती है)।
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- s और p ब्लॉक तत्व: विन्यास और प्रवृत्तियाँ – s-ब्लॉक = समूह 1 और 2 (बाहरी विन्यास ns¹ या ns²); p-ब्लॉक = समूह 13 से 18 (ns² np¹⁻⁶)। समूह में नीचे परमाणु बड़े होते हैं और आयनन एन्थैल्पी घटती है; आवर्त में आगे परमाणु छोटे और आयनन एन्थैल्पी (कुल मिलाकर) बढ़ती है। छोटे आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी बड़ी होती है। हर समूह का पहला तत्व अलग व्यवहार करता है (छोटा आकार, ऊँचा आवेश घनत्व, d कक्षक नहीं) और अक्सर अपने तिरछे नीचे वाले तत्व जैसा होता है।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
- रसायन और समाज – रसायन विज्ञान यह पढ़ता है कि परमाणु कैसे जुड़ते और बदलते हैं। कौन से परमाणु कैसे जोड़ें, यह चुनकर रसायनज्ञ नए पदार्थ, दवाएँ, खाद और ईंधन बनाते हैं। अभिक्रिया में परमाणु नष्ट नहीं होते, इसलिए हर उत्पाद का एक मूल्य और कचरा भी होता है।
6. Advanced Biology
Features and evolution of organisms · Life phenomena and substances · Gene expression and development · Responses of organisms to environment · Ecology and environment
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
- जैव-रसायन: जीवन का रसायन – पौधे प्रकाश संश्लेषण से ग्लूकोज़ बनाते हैं: 6 CO2 + 6 H2O + प्रकाश से C6H12O6 + 6 O2। बड़े अणुओं के चार परिवार (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, न्यूक्लिक अम्ल) छोटी इकाइयों से बनते हैं। कोशिकाएँ पोषक तत्वों को तोड़कर ऊर्जा लेती हैं और हर चरण में एंज़ाइम मदद करते हैं। प्रोटीन DNA पढ़कर, mRNA बनाकर और राइबोसोम पर अमीनो अम्ल जोड़कर बनता है।
- जीन नियमन: कोशिका जीन को चालू और बंद कैसे करती है – हर कोशिका में एक जैसा DNA है, पर वह कुछ ही जीन इस्तेमाल करती है। नियंत्रण ज़्यादातर अनुलेखन (transcription) की शुरुआत पर होता है। बैक्टीरिया में लैक ऑपेरॉन कई जीनों का एक समूह है जिसका एक प्रमोटर और एक ऑपरेटर है: लैक्टोज़ न हो तो रिप्रेसर उसे बंद रखता है; लैक्टोज़ रिप्रेसर को हटा देता है और जीन पढ़े जाते हैं (प्रेरणीय ऑपेरॉन)। यूकैरियोट में ट्रांसक्रिप्शन फ़ैक्टर, एन्हांसर और साइलेंसर हर जीन को नियंत्रित करते हैं, और एपिजेनेटिक निशान (DNA मिथाइलेशन, हिस्टोन पैकिंग) DNA का क्रम बदले बिना जीन बंद रख सकते हैं। अलग-अलग चालू/बंद पैटर्न से अलग कोशिकाएँ बनती हैं (विभेदन)।
- उद्दीपन और अनुक्रिया – उद्दीपन (stimulus) आसपास या शरीर के अंदर का कोई बदलाव है। जो जीव इसे पहचानकर प्रतिक्रिया देते हैं, वे ज़्यादा बचते हैं। रास्ता हमेशा एक ही: उद्दीपन → ग्राही → समन्वयक → प्रभावक → अनुक्रिया। छोटे जीव अनुचलन (दिशा में चलना) या गतिकी (चाल बदलना) से चलते हैं। पौधे IAA की मदद से अनुवर्तन द्वारा मुड़ते हैं। जंतुओं में पैकिनी कणिका और आँख के शलाका-शंकु जैसे ग्राही होते हैं, तेज़ बचाव के लिए प्रतिवर्ती चाप, और मस्तिष्क का मेड्यूला हृदय गति बदलता है।
- पारिस्थितिकी: पारितंत्र, पदार्थ के चक्र, ऊर्जा स्रोत और नए पदार्थ – पारिस्थितिकी (Ecology) यह अध्ययन है कि जीव आपस में और अपने परिवेश के साथ कैसे जुड़े हैं। पारितंत्र में उत्पादक (धूप से भोजन बनाने वाले पौधे), उपभोक्ता (जंतु) और अपघटक (कवक और जीवाणु) होते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है और खाद्य शृंखला में एक ही दिशा में चलती है: अगले स्तर तक केवल लगभग 10% पहुँचती है, बाक़ी काम में आती है या ऊष्मा बनकर खो जाती है। पदार्थ इसके उलट जैव-भू-रासायनिक चक्रों में दोबारा इस्तेमाल होता है, जैसे कार्बन, जल, नाइट्रोजन और फ़ॉस्फ़ोरस चक्र। मनुष्य को ऊर्जा चाहिए, और मुख्य चुनाव जीवाश्म ईंधन (सीमित, कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ाते हैं) और सूर्य, पवन, बहते जल जैसे नवीकरणीय स्रोतों के बीच है। संयोजन, स्मार्ट पदार्थ, नैनो-पदार्थ और पौध-आधारित प्लास्टिक जैसे नए पदार्थ किसी काम के लिए बनाए जाते हैं और ऊर्जा व कचरा घटा सकते हैं।
7. Advanced Earth Science
Overview and structure of the Earth · Earth's activity · History of the Earth · Structure and motion of atmosphere and ocean · Structure and evolution of the universe · Natural environment and human life
- पृथ्वी की आंतरिक संरचना: भूकंपीय तरंगें, परतें और ज्वालामुखी – कोई पृथ्वी के केंद्र तक खोद नहीं सकता, इसलिए हम अंदर की जानकारी प्रत्यक्ष स्रोतों (खानों की चट्टान, गहरी खुदाई, लावा) और अप्रत्यक्ष स्रोतों (गहराई के साथ ताप और दबाव, उल्कापिंड, गुरुत्व, चुंबकत्व और सबसे बढ़कर भूकंपीय तरंगें) से लेते हैं। P-तरंगें ठोस और तरल दोनों से गुज़रती हैं; S-तरंगें सिर्फ़ ठोस से। जहाँ तरंगें नहीं पहुँचतीं, वहाँ छाया क्षेत्र बनता है, जो बताता है कि बाहरी क्रोड तरल है। भूकंप परिमाण (रिक्टर) और तीव्रता (मरकैली) से मापा जाता है। पृथ्वी में पतली भूपर्पटी, नरम दुर्बलतामंडल वाला मोटा मैंटल, तरल बाहरी क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड है। सतह तक पहुँचा मैग्मा ज्वालामुखी बनाता है; अंदर ठंडा हुआ मैग्मा बैथोलिथ, सिल, डाइक जैसी अंतर्वेधी आकृतियाँ बनाता है।
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- पृथ्वी का इतिहास – ब्रह्मांड लगभग 13.8 अरब साल पुराना है। सूरज और पृथ्वी लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के एक घूमते बादल से बने। पृथ्वी पहले गर्म थी, फिर ठंडी हुई और महासागर बने। जीवन 3.5 अरब साल से भी पहले समुद्र में शुरू हुआ और हवा में ऑक्सीजन भर दी। चट्टानों की परतें और जीवाश्म, जिनमें सबसे पुरानी परत नीचे होती है, बताते हैं कि किस समय कौन-सा जीवन और मौसम था। पृथ्वी का इतिहास चार बड़े युगों में बँटा है: प्री-कैम्ब्रियन, पुराजीवी, मध्यजीवी और नूतनजीवी। 24 घंटे की घड़ी पर मनुष्य बस आख़िरी कुछ सेकंड में आता है।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।