पारिस्थितिकी क्या है? पारितंत्र और खाद्य शृंखला
पारिस्थितिकी (Ecology) जीवों और उनके रहने की जगहों का अध्ययन है। जीवों का समूह और उनका परिवेश मिलकर पारितंत्र (ecosystem) बनाते हैं: तालाब, जंगल, खेत या एक डबरा भी।
- उत्पादक: पौधे और शैवाल। ये धूप से भोजन बनाते हैं (प्रकाश-संश्लेषण)।
- उपभोक्ता: दूसरों को खाने वाले जंतु। शाकाहारी पौधे खाते हैं; माँसाहारी जंतु खाते हैं; सर्वाहारी दोनों।
- अपघटक: जीवाणु और कवक, जो मरी चीज़ों को तोड़कर पोषक तत्व मिट्टी को लौटाते हैं।
- खाद्य शृंखला: पौधा → खरगोश → लोमड़ी। कई शृंखलाएँ जुड़कर खाद्य जाल बनाती हैं।
- निर्जीव भाग: प्रकाश, जल, तापमान और मिट्टी भी तय करते हैं कि वहाँ क्या रह सकता है।
ऊर्जा प्रवाह: 10% नियम
ऊर्जा सूर्य से आती है और खाद्य शृंखला में केवल एक दिशा में चलती है।
- पोषण स्तर (trophic level): शृंखला की एक सीढ़ी (उत्पादक, शाकाहारी, माँसाहारी...)।
- 10% नियम: एक स्तर की ऊर्जा का केवल लगभग 10% अगले स्तर तक पहुँचता है। बाक़ी चलने, बढ़ने और गर्म रहने में लगता है, या ऊष्मा बनकर खो जाता है।
- उदाहरण: पौधों में 1000 J → शाकाहारी में 100 J → माँसाहारी में 10 J।
- क्यों ज़रूरी: खाद्य शृंखलाओं में शायद ही 4 या 5 से ज़्यादा सीढ़ियाँ होती हैं, और शीर्ष शिकारी बहुत कम होते हैं।
जैव-भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical cycles)
ऊर्जा के विपरीत, पदार्थ दोबारा इस्तेमाल होता है। कार्बन, नाइट्रोजन, जल और फ़ॉस्फ़ोरस के परमाणु अलग-अलग रसायनों के रूप में जीवों (जैव), हवा, पानी और चट्टानों (भू) के बीच घूमते हैं।
- कार्बन चक्र: पौधे प्रकाश-संश्लेषण में CO₂ लेते हैं; जंतु और पौधे श्वसन में छोड़ते हैं; अपघटन और जलाने से भी निकलती है।
- जल चक्र: वाष्पन, बादल, वर्षा, नदियाँ और वापस समुद्र।
- नाइट्रोजन चक्र: जीवाणु हवा की नाइट्रोजन को पौधों के काम के रूप में बदलते हैं; दूसरे जीवाणु उसे हवा में लौटाते हैं।
- फ़ॉस्फ़ोरस चक्र: चट्टान से मिट्टी, पौधे, जंतु और वापस धीरे-धीरे घूमता है; इसमें गैस की अवस्था लगभग नहीं होती।
- मानव का असर: ईंधन जलाने से अतिरिक्त CO₂ और उर्वरकों से अतिरिक्त नाइट्रोजन-फ़ॉस्फ़ोरस जुड़ता है, जो चक्रों को बिगाड़ सकता है।
ऊर्जा संसाधन और नवीकरणीय ऊर्जा
ऊर्जा संसाधन वह है जिससे हम उपयोगी ऊर्जा पाते हैं।
- अनवीकरणीय: कोयला, तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम। इन्हें बनने में लाखों साल लगे और ये चुक जाएँगे। जीवाश्म ईंधन जलाने से CO₂ बढ़ती है और धरती गर्म होती है।
- नवीकरणीय: सूर्य का प्रकाश, पवन, बहता जल, पादप पदार्थ (जैव-पदार्थ) और धरती की गर्मी। प्रकृति इन्हें जल्दी भर देती है।
- नवीकरणीय के लाभ: चलते समय लगभग कोई CO₂ नहीं, स्थानीय, और हर साल सस्ते।
- चुनौतियाँ: सूर्य और हवा स्थिर नहीं, इसलिए भंडारण और स्मार्ट ग्रिड चाहिए; पैनल और बाँधों को ज़मीन और प्रकृति की देखभाल चाहिए।
- समझदारी से उपयोग: ऊर्जा बचाना (LED बल्ब, अच्छा इन्सुलेशन) सबसे सस्ता "नया" स्रोत है।
नए पदार्थ (New materials)
नए पदार्थ ठीक वही गुण पाने के लिए बनाए जाते हैं जो किसी काम को चाहिए।
- संयोजन (composites): दो पदार्थ जोड़ना (जैसे प्लास्टिक में कार्बन-फ़ाइबर)। मज़बूत और हल्के, विमान, साइकिल और पवन-टरबाइन के पंखों में उपयोगी।
- स्मार्ट पदार्थ: गर्मी, प्रकाश या बिजली बदलने पर बदलते हैं (धूप में गहरा होने वाला चश्मा)।
- नैनो-पदार्थ: बहुत छोटे कणों से बने, मीटर के कुछ अरबवें हिस्से जितने, विशेष गुणों वाले।
- जैव-आधारित और जैव-अपघटनीय पदार्थ: पौधों से बने, इस्तेमाल के बाद सड़ सकते हैं।
- समझदारी से चुनाव: मज़बूती, वज़न, लागत, सुरक्षा और जीवन के अंत में क्या होता है (दोबारा उपयोग, पुनर्चक्रण या सड़ना) पूछें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उत्पादक → शाकाहारी → माँसाहारी = खाद्य शृंखला
- 10% नियम: अगले स्तर की ऊर्जा ≈ 0.10 × इस स्तर की ऊर्जा
- जैव-भू-रासायनिक चक्र = जीवों, हवा, जल और चट्टानों के बीच पदार्थ का घूमना
- नवीकरणीय = प्रकृति जल्दी भर देती है; अनवीकरणीय = बनने से बहुत तेज़ चुकते हैं
- संयोजन (composite) = बेहतर गुणों के लिए दो या अधिक पदार्थ जोड़ना
- ऊर्जा बहती है (एक दिशा); पदार्थ घूमता है (चक्र में)
हल किए गए उदाहरण
1. खेत के पौधे 5000 J ऊर्जा पकड़ते हैं। तीसरे स्तर के माँसाहारी तक कितनी पहुँचेगी?
शाकाहारी: 5000 का 10% = 500 J। माँसाहारी: 500 का 10% = 50 J।
2. जंगल में बहुत खरगोश क्यों रह सकते हैं पर लोमड़ियाँ कम?
हर सीढ़ी पर केवल लगभग 10% ऊर्जा आगे जाती है। पौधों में सबसे ज़्यादा है, खरगोशों को उसका दसवाँ हिस्सा मिलता है, और लोमड़ियों को खरगोशों के हिस्से का दसवाँ, इसलिए कम लोमड़ियाँ ही पल सकती हैं।
3. सौर ऊर्जा का एक लाभ और एक चुनौती बताइए।
लाभ: चलते समय लगभग कार्बन डाइऑक्साइड नहीं बनती और धूप मुफ़्त है। चुनौती: यह दिन में ही चलती है, इसलिए रात के लिए बैटरी या दूसरी बिजली चाहिए।
आम गलतियाँ
- ऊर्जा को पदार्थ की तरह दोबारा इस्तेमाल होने वाली मानना। ऊर्जा एक दिशा में बहती है और ऊष्मा बन जाती है; पदार्थ दोबारा इस्तेमाल होता है।
- अपघटकों को ग़ैर-ज़रूरी मानना। उनके बिना पोषक तत्व मरी देहों में बंद रह जाएँगे।
- नवीकरणीय का मतलब प्रकृति पर कोई असर नहीं समझना। बाँध, पैनल और जैव-ईंधन की खेती को भी ज़मीन और देखभाल चाहिए।
- यह मानना कि 10% ऊर्जा खो जाती है। 10% आगे जाती है; लगभग 90% काम में आती है या खो जाती है।