Italy Secondaria di secondo grado – classe 5ª (esame di Stato) Natural sciences (liceo scientifico)
अध्याय: 2
1. Chemistry and biology
Organic chemistry and biochemistry · Biotechnology
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- जैव प्रौद्योगिकी: सिद्धांत व प्रक्रम (पुनर्योगज DNA तकनीक) – आनुवंशिक इंजीनियरिंग यानी किसी जीव के जीन जान-बूझकर बदलना। चाहा गया जीन प्रतिबंधन एंज़ाइम (आणविक कैंची) से काटते हैं, DNA लाइगेज़ (आणविक गोंद) से वाहक DNA में जोड़ते हैं, परपोषी कोशिका में डालते हैं, सही कोशिकाएँ चुनते हैं और बड़े टैंक (बायोरिएक्टर) में उगाकर उत्पाद निकालते हैं। PCR जीन की लाखों प्रतियाँ बनाता है और जेल वैद्युतकणसंचलन DNA टुकड़ों को आकार के हिसाब से अलग करता है।
2. Earth science
Weather and plate tectonics · Optional topics
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- पारिस्थितिकी: पारितंत्र, पदार्थ के चक्र, ऊर्जा स्रोत और नए पदार्थ – पारिस्थितिकी (Ecology) यह अध्ययन है कि जीव आपस में और अपने परिवेश के साथ कैसे जुड़े हैं। पारितंत्र में उत्पादक (धूप से भोजन बनाने वाले पौधे), उपभोक्ता (जंतु) और अपघटक (कवक और जीवाणु) होते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है और खाद्य शृंखला में एक ही दिशा में चलती है: अगले स्तर तक केवल लगभग 10% पहुँचती है, बाक़ी काम में आती है या ऊष्मा बनकर खो जाती है। पदार्थ इसके उलट जैव-भू-रासायनिक चक्रों में दोबारा इस्तेमाल होता है, जैसे कार्बन, जल, नाइट्रोजन और फ़ॉस्फ़ोरस चक्र। मनुष्य को ऊर्जा चाहिए, और मुख्य चुनाव जीवाश्म ईंधन (सीमित, कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ाते हैं) और सूर्य, पवन, बहते जल जैसे नवीकरणीय स्रोतों के बीच है। संयोजन, स्मार्ट पदार्थ, नैनो-पदार्थ और पौध-आधारित प्लास्टिक जैसे नए पदार्थ किसी काम के लिए बनाए जाते हैं और ऊर्जा व कचरा घटा सकते हैं।