स्थिर वैद्युत
हर पदार्थ में छोटे आवेश होते हैं: धनात्मक प्रोटॉन और ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन। आमतौर पर ये बराबर होते हैं, इसलिए वस्तु उदासीन रहती है। दो अलग पदार्थों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरे में चले जाते हैं। जिसे इलेक्ट्रॉन मिले वह ऋणात्मक हो जाता है और जिसके गए वह धनात्मक। प्लास्टिक और काँच आवेश को बहने नहीं देते, इसलिए आवेश वहीं टिका रहता है (यह स्थिर है)।
दो नियम: समान आवेश एक-दूसरे को हटाते हैं, विपरीत आवेश खींचते हैं। आवेशित छड़ उदासीन कागज़ को भी खींचती है, क्योंकि वह कागज़ के विपरीत आवेश को थोड़ा पास खींच लेती है।
कूलॉम का नियम दो छोटे आवेशों के बीच बल देता है: F = k q₁ q₂ / r², जहाँ k = 9 × 10⁹ N m²/C²। दूरी दोगुनी करो तो बल चार गुना घट जाता है। आवेश का मात्रक कूलॉम (C) है; एक इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.6 × 10⁻¹⁹ C है।
चालक (धातुएँ) आवेश को बहने देते हैं; विद्युतरोधी (प्लास्टिक, काँच, सूखी हवा) नहीं। उपयोग और खतरे: फोटोकॉपी मशीन, पेंट स्प्रे और धूल छन्नी स्थिर आवेश इस्तेमाल करते हैं; आकाशीय बिजली एक विशाल विसर्जन है, और ऊँची इमारत पर तड़ित चालक उसे सुरक्षित धरती तक पहुँचाता है।
चुंबकत्व
चुंबक लोहे, निकल और कोबाल्ट को खींचता है। उसका खिंचाव दोनों सिरों, यानी ध्रुवों पर सबसे ज़्यादा होता है: उत्तरी (N) और दक्षिणी (S)। समान ध्रुव हटाते हैं, विपरीत ध्रुव खींचते हैं। अकेला ध्रुव नहीं मिल सकता: चुंबक को बीच से तोड़ो तो हर टुकड़े में दोनों ध्रुव होते हैं।
चुंबक के चारों ओर की वह जगह जहाँ उसका बल महसूस होता है चुंबकीय क्षेत्र है। हम उसे क्षेत्र रेखाओं से दिखाते हैं: ये उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं, घूमती हैं और दक्षिणी ध्रुव में घुसती हैं। रेखाएँ पास-पास हों तो क्षेत्र प्रबल है। कंपास एक छोटा चुंबक है जो क्षेत्र की दिशा में टिकता है; वह उत्तर दिखाता है क्योंकि पृथ्वी खुद एक बड़ा चुंबक है।
पदार्थ: चुंबकीय (लोहा, इस्पात, निकल, कोबाल्ट) खिंचते हैं; ताँबा, लकड़ी, प्लास्टिक नहीं। नरम लोहा जल्दी चुंबक बनता है और जल्दी छोड़ देता है (विद्युत चुंबक के लिए अच्छा); इस्पात चुंबकत्व रोके रखता है (स्थायी चुंबक के लिए अच्छा)।
धारा और चुंबकत्व
1820 में हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने देखा कि धारा वाले तार के पास कंपास की सुई घूम गई। यानी गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र बनाता है।
- सीधा तार: क्षेत्र तार के चारों ओर गोल घेरों में होता है। दिशा दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम से: दाएँ हाथ से तार पकड़ो, अंगूठा धारा की दिशा में रखो; उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा में मुड़ेंगी। धारा बड़ी या तार के पास हो तो क्षेत्र प्रबल: B = μ₀ I / (2π r)।
- कुंडली (परिनालिका): कई फेरे छड़ चुंबक जैसा क्षेत्र बनाते हैं। अंदर लोहे की क्रोड रख दो तो विद्युत चुंबक बनता है, जिसे चालू-बंद कर सकते हैं और ज़्यादा फेरों या ज़्यादा धारा से प्रबल बना सकते हैं।
- क्षेत्र में तार पर बल: चुंबकीय क्षेत्र में रखा धारा वाला तार बग़ल की ओर धकेला जाता है, बल F = B I L (जब तार क्षेत्र के लंबवत हो)। दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से मिलती है। यही धक्का बिजली की मोटर को घुमाता है।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
1831 में माइकल फैराडे ने उल्टा पाया: बदलता चुंबकीय क्षेत्र वोल्टता बनाता है। कुंडली में चुंबक को अंदर डालो तो छोटी वोल्टता (विद्युत वाहक बल, emf) पैदा होती है और बंद परिपथ में धारा बहती है। चुंबक को स्थिर रखो तो कुछ नहीं होता।
फैराडे का नियम: प्रेरित emf = फेरे × (चुंबकीय फ्लक्स में बदलाव ÷ समय), यानी ε = N ΔΦ/Δt। emf बढ़ाने के लिए: चुंबक तेज़ चलाओ, प्रबल चुंबक लो, या ज़्यादा फेरे रखो।
लेंज़ का नियम: प्रेरित धारा उस दिशा में बहती है जो उसे बनाने वाले बदलाव का विरोध करे। (इसी से बंद कुंडली में चुंबक को अंदर धकेलना कठिन लगता है: ऊर्जा बिजली में बदल रही है।)
उपयोग: जनित्र क्षेत्र में कुंडली घुमाकर प्रत्यावर्ती धारा बनाता है; ट्रांसफ़ॉर्मर एक कुंडली के बदलते क्षेत्र से दूसरी कुंडली में वोल्टता प्रेरित करता है: Vs/Vp = Ns/Np; डाइनमो साइकिल की बत्ती जलाता है; इंडक्शन चूल्हा प्रेरित धाराओं से बर्तन गर्म करता है।
करके देखो: दो छोटे प्रयोग
1. स्थिर वैद्युत: प्लास्टिक का पेन सूखे बालों या ऊन पर 20 सेकंड रगड़ो और कागज़ के छोटे टुकड़ों के पास लाओ। पहले अंदाज़ा लगाओ: अगर हाथ में पकड़ा धातु का चम्मच रगड़ो तो क्या यही होगा? (नहीं होगा, क्योंकि आवेश तुम्हारे शरीर से बह जाएगा।)
2. चुंबक और कंपास: छड़ चुंबक को कंपास के पास लाओ। चुंबक को घुमाओ और सुई को घूमते देखो। फिर कील पर तार लपेटकर सेल से जोड़ो: क्या वह पिनें उठा लेगी? फेरे दोगुने करके गिनो कि कितनी ज़्यादा पिनें उठीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कूलॉम का नियम: F = k q₁ q₂ / r², k = 9 × 10⁹ N m²/C²
- एक इलेक्ट्रॉन का आवेश: e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C; Q = n × e
- लंबे सीधे तार के पास क्षेत्र: B = μ₀ I / (2π r)
- क्षेत्र में तार पर बल (लंबवत): F = B I L
- फैराडे का नियम: ε = N × ΔΦ / Δt
- ट्रांसफ़ॉर्मर: Vs / Vp = Ns / Np
हल किए गए उदाहरण
1. 2 μC और 3 μC के दो छोटे आवेश हवा में 0.3 m दूर हैं। उनके बीच बल निकालो।
F = k q₁ q₂ / r² = 9 × 10⁹ × (2 × 10⁻⁶) × (3 × 10⁻⁶) ÷ (0.3)² = 9 × 10⁹ × 6 × 10⁻¹² ÷ 0.09 = 0.054 ÷ 0.09 = 0.6 N। दोनों धनात्मक (या दोनों ऋणात्मक) हों तो वे एक-दूसरे को हटाते हैं।
2. 0.3 m लंबे तार में 4 A धारा है और वह 0.5 T के क्षेत्र के लंबवत है। तार पर बल निकालो।
F = B I L = 0.5 × 4 × 0.3 = 0.6 N। धारा उलटो तो बल की दिशा उलट जाती है।
3. 200 फेरों वाली कुंडली का चुंबकीय फ्लक्स 0.5 s में 0.02 Wb बदलता है। प्रेरित emf निकालो।
ε = N ΔΦ/Δt = 200 × 0.02 ÷ 0.5 = 8 V।
4. एक ट्रांसफ़ॉर्मर की प्राथमिक कुंडली में 1000 फेरे और द्वितीयक में 50 फेरे हैं। प्राथमिक पर 230 V है। द्वितीयक वोल्टता कितनी है?
Vs = Vp × Ns/Np = 230 × 50/1000 = 11.5 V। यह अपचायी (step-down) ट्रांसफ़ॉर्मर है, जैसा फोन चार्जर में होता है।
5. ऊर्ध्वाधर तार में धारा ऊपर की ओर है। ऊपर से देखने पर तार के चारों ओर क्षेत्र किस दिशा में घूमता है?
दाएँ अंगूठे को ऊपर (धारा की दिशा) रखो। ऊपर से देखने पर उँगलियाँ वामावर्त मुड़ती हैं, इसलिए क्षेत्र वामावर्त है। यह 3D की उन सुइयों से मेल खाता है जब धारा धनात्मक हो।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि रगड़ने से आवेश "बन" गया। रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से दूसरी में जाते हैं; कुल आवेश वही रहता है।
- यह कहना कि विपरीत ध्रुव हटाते हैं। समान ध्रुव हटाते हैं; विपरीत ध्रुव खींचते हैं।
- कुंडली के अंदर स्थिर चुंबक से धारा की आशा करना। प्रेरण के लिए क्षेत्र में बदलाव (गति) चाहिए।
- तार पर बल की दिशा के लिए दाएँ हाथ का नियम लगाना। बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से मिलती है।