धारा, वोल्टता और प्रतिरोध
धारा (I) यानी प्रति सेकंड किसी बिंदु से गुज़रने वाला आवेश। I = Q ÷ t। इकाई: ऐम्पियर (A); 1 A = 1 कूलॉम प्रति सेकंड।
वोल्टता (V), जिसे विभवांतर भी कहते हैं, आवेशों पर लगा धक्का है। यह हर कूलॉम को मिली ऊर्जा है। V = W ÷ Q। इकाई: वोल्ट (V); 1 V = 1 जूल प्रति कूलॉम।
प्रतिरोध (R) बताता है कि कोई भाग धारा का कितना विरोध करता है। R = V ÷ I। इकाई: ओम (Ω)। यही ओम का नियम है, V = I × R। प्रयोग और ग्राफ़ के लिए ओम के नियम वाला पूरा पाठ देखो।
परिपथ एक बंद रास्ता है। स्रोत (बैटरी) धक्का देता है, तार आवेश ले जाते हैं और भाग (प्रतिरोधक, संधारित्र, कुंडली) ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं। रास्ता टूटे तो धारा रुक जाती है।
विद्युत प्रतिरोध
तार का प्रतिरोध चार बातों पर निर्भर है: R = ρ × L ÷ A। L लंबाई है (लंबा तार, ज़्यादा R)। A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है (मोटा तार, कम R)। ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता है: ताँबे की ρ छोटी है, इसलिए तार ताँबे के बनते हैं; नाइक्रोम की ρ बड़ी है, इसलिए हीटर में वही लगता है। तापमान भी मायने रखता है: धातुओं में गर्म होने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
श्रेणी (एक के बाद एक): R = R1 + R2 + ... समांतर (साथ-साथ): 1/R = 1/R1 + 1/R2 + ...
प्रतिरोधक विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में बदलता है: शक्ति P = V × I = I² × R। हीटर, प्रेस और बल्ब का तंतु इसी से काम करते हैं।
धारिता और स्थिर वैद्युतिकी
स्थिर वैद्युतिकी (electrostatics) रुके हुए आवेशों की बात करती है। आवेश दो तरह के होते हैं: धन और ऋण। समान आवेश एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं; विपरीत आवेश पास खींचते हैं। कूलॉम का नियम: F = k × q1 × q2 ÷ r², जहाँ k = 9 × 10⁹ N·m²/C²। आवेश दूर हों तो बल कम होता है।
संधारित्र (capacitor) दो धातु की प्लेटें हैं जिनके बीच कुचालक (खाली जगह) होता है। बैटरी जोड़ने पर एक प्लेट पर धन आवेश और दूसरी पर ऋण आवेश जमा होता है। संधारित्र आवेश और विद्युत ऊर्जा जमा करता है। धारिता C = Q ÷ V। इकाई: फैराड (F)। आम माप µF (10⁻⁶ F), nF और pF हैं।
प्लेट का क्षेत्रफल बड़ा और दूरी छोटी हो तो धारिता बड़ी होती है। जमा ऊर्जा: E = ½ C V²। DC परिपथ में संधारित्र तभी तक धारा देता है जब तक भर न जाए; फिर DC को रोक देता है। इसलिए वह बिजली-आपूर्ति का उतार-चढ़ाव सपाट करने और कैमरा फ़्लैश के लिए आवेश जमा करने में काम आता है।
समांतर संधारित्र सीधे जुड़ते हैं: C = C1 + C2। श्रेणी में: 1/C = 1/C1 + 1/C2।
प्रेरकत्व और चुंबकीय घटनाएँ
धारा तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। तार को कुंडली में लपेटो तो क्षेत्र मज़बूत हो जाता है, छड़ चुंबक जैसा। यही विद्युत चुंबक है।
कुंडली से गुज़रता क्षेत्र बदले तो उसमें वोल्टता बनती है। यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण है। कुंडली में धारा बदले तो उसका अपना क्षेत्र बदलता है और कुंडली ऐसी वोल्टता बनाती है जो बदलाव का विरोध करती है (लेंज़ का नियम)। इसलिए कुंडली में धारा एकदम ऊपर-नीचे नहीं हो सकती; वह धीरे-धीरे बनती है।
प्रेरकत्व (inductance) L इसे नापता है। V = L × (I में बदलाव ÷ समय में बदलाव)। इकाई: हेनरी (H)। ज़्यादा फेरे और लोहे की क्रोड वाली कुंडली का L बड़ा होता है। चुंबकीय क्षेत्र में जमा ऊर्जा: E = ½ L I²।
उपयोग: ट्रांसफ़ॉर्मर, मोटर, रिले, लाउडस्पीकर और फ़िल्टर। DC में थोड़ी देर बाद धारा स्थिर हो जाती है और कुंडली सादे तार जैसी चलती है।
करके देखो
घर पर (सुरक्षित, बिना बिजली के सॉकेट के): एक कील पर तार के लगभग 20 फेरे लपेटो और उसे 1.5 V के सेल से बस कुछ सेकंड जोड़ो। कील कुछ पिनें उठा लेगी। तुमने विद्युत चुंबक बना लिया।
3D में: संधारित्र चुनो और "स्विच ऑन" दबाओ। अंदाज़ा लगाओ: धारा बनी रहेगी या खत्म हो जाएगी? फिर कुंडली चुनकर दबाओ। धारा तुरंत बनी या धीरे? दोनों की तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I = Q ÷ t V = W ÷ Q R = V ÷ I
- R = ρ L ÷ A; श्रेणी R = R1 + R2; समांतर 1/R = 1/R1 + 1/R2
- P = V I = I² R
- कूलॉम: F = k q1 q2 ÷ r² (k = 9 × 10⁹ N·m²/C²)
- C = Q ÷ V; E = ½ C V²; समांतर C = C1 + C2; श्रेणी 1/C = 1/C1 + 1/C2
- कुंडली: V = L ΔI ÷ Δt; E = ½ L I²
हल किए गए उदाहरण
1. एक बिंदु से 60 s में 120 C आवेश गुज़रता है। धारा निकालो।
I = Q ÷ t = 120 ÷ 60 = 2 A।
2. एक ताँबे का तार 100 m लंबा है और उसका क्षेत्रफल 1 mm² (1 × 10⁻⁶ m²) है। ताँबे की प्रतिरोधकता 1.7 × 10⁻⁸ Ω·m है। उसका प्रतिरोध निकालो।
R = ρ L ÷ A = 1.7 × 10⁻⁸ × 100 ÷ 1 × 10⁻⁶ = 1.7 Ω।
3. 100 µF का संधारित्र 12 V तक आवेशित है। आवेश और जमा ऊर्जा निकालो।
Q = C V = 100 × 10⁻⁶ × 12 = 1.2 × 10⁻³ C = 1.2 mC। E = ½ C V² = 0.5 × 100 × 10⁻⁶ × 144 = 7.2 × 10⁻³ J = 7.2 mJ।
4. 6 µF और 3 µF के संधारित्र (a) श्रेणी में, (b) समांतर में जोड़े गए। कुल धारिता निकालो।
(a) 1/C = 1/6 + 1/3 = 1/2, इसलिए C = 2 µF। (b) C = 6 + 3 = 9 µF।
5. हवा में दो आवेश, प्रत्येक 1 µC, 0.1 m दूर हैं। उनके बीच बल निकालो।
F = k q1 q2 ÷ r² = 9 × 10⁹ × 10⁻⁶ × 10⁻⁶ ÷ 0.01 = 0.9 N। समान आवेश हैं, इसलिए यह दूर धकेलने वाला बल है।
6. 2 H की कुंडली में धारा 0.5 s में 0 से 3 A हो जाती है। कुंडली पर औसत वोल्टता और 3 A पर जमा ऊर्जा निकालो।
V = L ΔI ÷ Δt = 2 × 3 ÷ 0.5 = 12 V। E = ½ L I² = 0.5 × 2 × 9 = 9 J।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि संधारित्र DC को हमेशा बहने देता है। DC में वह केवल आवेशित होते समय धारा देता है; फिर धारा शून्य हो जाती है।
- भूल जाना कि श्रेणी में संधारित्र समांतर प्रतिरोधों की तरह जुड़ते हैं (1/C = 1/C1 + 1/C2) और समांतर में सीधे जुड़ते हैं।
- माइक्रो (µ) और मिली (m) में गड़बड़: 1 µF = 10⁻⁶ F, 10⁻³ F नहीं।
- यह सोचना कि कुंडली धारा रोक देती है। कुंडली केवल धारा के बदलाव को धीमा करती है; स्थिर DC उसमें से आसानी से गुज़रती है।