माइक्रोवेव परिपथ और उनके प्रकार
बहुत ऊँची आवृत्ति पर साधारण तार और कुंडली ऊर्जा खो देते हैं और खुद एंटीना जैसे बन जाते हैं। इसलिए माइक्रोवेव इंजीनियर आकार दिए हुए धातु के भाग लगाते हैं, जिनका माप तरंगदैर्घ्य से मेल खाता है।
- वेवगाइड: खोखला आयताकार धातु का पाइप। तरंगें अंदर चलती हैं। हानि बहुत कम। इसकी एक कट-ऑफ होती है: चौड़ी भुजा के दुगुने (λc = 2a) से लंबी तरंगें नहीं निकल सकतीं।
- स्ट्रिपलाइन और माइक्रोस्ट्रिप: सर्किट बोर्ड पर पतली तांबे की पट्टी। सस्ती, छोटी; फ़ोन, रडार और वाई-फ़ाई में।
- अनुनादी गुहा (Cavity resonator): बंद धातु का डिब्बा जो एक आवृत्ति की तरंग को घंटी की तरह जमा रखता है। फ़िल्टर और मैग्नेट्रॉन में।
- दिशिक कप्लर: शक्ति का छोटा तय हिस्सा निकालता है ताकि उसे नापा जा सके।
- सर्कुलेटर और आइसोलेटर: शक्ति को एक ही दिशा में जाने देते हैं। सर्कुलेटर ट्रांसमीटर की शक्ति एंटीना को और लौटी प्रतिध्वनि रिसीवर को देता है, इसलिए एक ही एंटीना भेजने और लेने दोनों का काम करता है (रडार)।
- माइक्रोवेव स्रोत: मैग्नेट्रॉन (रडार, ओवन), क्लाइस्ट्रॉन, यात्री-तरंग नलिका और ठोस-अवस्था डायोड व ट्रांज़िस्टर।
एंटीना के प्रकार और विशेषताएँ
भेजते समय एंटीना बिजली के संकेत को रेडियो तरंग बनाता है, और लेते समय तरंग को वापस संकेत। एक ही एंटीना दोनों करता है। इसका आकार तरंगदैर्घ्य पर निर्भर है: अर्ध-तरंग द्विध्रुव की लंबाई λ/2 और चतुर्थांश-तरंग व्हिप की लंबाई λ/4 होती है (धातु की सतह के साथ)।
- द्विध्रुव / व्हिप: डोनट आकार में भेजते हैं (क्षैतिज में सर्वदिशिक)। कम लाभ।
- याग़ी-उदा: एक चालित छड़, पीछे लंबी परावर्तक और आगे छोटी निर्देशक छड़ें। दिशिक, मध्यम लाभ। टीवी और VHF लिंक।
- परवलयिक डिश: परवलयिक दर्पण के फ़ोकस पर फ़ीड। बहुत अधिक लाभ और पतली किरण। उपग्रह और माइक्रोवेव लिंक।
- हॉर्न, लूप, ऐरे: हॉर्न डिश को फ़ीड करता है या मापन में काम आता है; लूप छोटा होकर भी अच्छा ग्रहण करता है; ऐरे में कई तत्व किरण को घुमा सकते हैं (रडार, फ़ोन टावर)।
मुख्य विशेषताएँ: विकिरण पैटर्न (संकेत की आकृति), लाभ (gain) dB में (पसंदीदा दिशा में संदर्भ से कितना बेहतर), किरण-चौड़ाई (मुख्य किरण का कोण), ध्रुवण (विद्युत क्षेत्र की दिशा: ऊर्ध्वाधर या क्षैतिज) और बैंडविड्थ। 3 dB लाभ का अर्थ उस दिशा में दुगुनी शक्ति; 10 dB यानी दस गुना।
फ़ीडर लाइन के प्रकार और विशेषताएँ
फ़ीडर लाइन ट्रांसमीटर से एंटीना तक शक्ति और लौटते समय प्राप्त संकेत ले जाती है। इसमें हानि कम और एंटीना से प्रतिबाधा का मेल होना चाहिए, वरना शक्ति वापस लौटकर लाइन पर खड़ी तरंग बना देती है। इसे खड़ी तरंग अनुपात (SWR) से नापते हैं; 1:1 सबसे अच्छा है।
- कोएक्सियल केबल: बीच का तार और उसके चारों ओर धातु की परत। परिरक्षित, लगाने में आसान, प्रतिबाधा 50 Ω या 75 Ω। आवृत्ति बढ़ने पर हानि बढ़ती है, इसलिए कुछ GHz तक।
- ट्विन-लीड (समांतर तार): दो तार साथ-साथ, 300 Ω। कम आवृत्ति पर कम हानि, पर शोर पकड़ता है और धातु से दूर रखना पड़ता है।
- वेवगाइड: खोखला पाइप, माइक्रोवेव पर सबसे कम हानि; रडार और डिश में, पर कड़ा और महँगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तरंगदैर्घ्य: λ = c / f, c = 3 × 10⁸ m/s
- अर्ध-तरंग द्विध्रुव की लंबाई ≈ λ / 2; चतुर्थांश व्हिप ≈ λ / 4
- डेसिबल में लाभ: G(dB) = 10 log₁₀(P₂ / P₁)
- +3 dB लगभग 2 गुना शक्ति; +10 dB यानी 10 गुना
- वेवगाइड कट-ऑफ तरंगदैर्घ्य: λc = 2a (a = चौड़ी भुजा, सबसे निचला मोड)
- फ़ीडर हानि L dB के बाद शक्ति: P_out = P_in / 10^(L/10)
हल किए गए उदाहरण
1. 150 MHz के लिए अर्ध-तरंग द्विध्रुव की लंबाई निकालिए।
λ = c / f = 3 × 10⁸ / 150 × 10⁶ = 2 m। अर्ध-तरंग लंबाई = 2 / 2 = 1 m।
2. 100 MHz के VHF सेट पर चतुर्थांश-तरंग व्हिप लगाया गया है। उसकी लंबाई कितनी है?
λ = 3 m, इसलिए λ/4 = 0.75 m।
3. एक एंटीना 20 dB लाभ देता है। उसकी सबसे अच्छी दिशा में शक्ति कितने गुना बढ़ी?
G = 10 log₁₀(अनुपात) = 20, तो log₁₀(अनुपात) = 2 और अनुपात = 100 गुना।
4. एक आयताकार वेवगाइड की चौड़ी भुजा 2.3 cm है। उसकी कट-ऑफ आवृत्ति निकालिए।
λc = 2a = 4.6 cm = 0.046 m। fc = c / λc = 3 × 10⁸ / 0.046 ≈ 6.52 × 10⁹ Hz = 6.5 GHz। इससे कम आवृत्ति की तरंगें इसमें नहीं चल सकतीं।
5. 20 W का ट्रांसमीटर 3 dB हानि वाले केबल में जाता है। एंटीना तक कितनी शक्ति पहुँचती है?
3 dB हानि यानी लगभग आधी शक्ति, इसलिए 20 / 2 = 10 W पहुँचती है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि लाभ का मतलब एंटीना ज़्यादा शक्ति बनाता है। वह केवल उतनी ही शक्ति को एक दिशा में सिकोड़ता है।
- हर आवृत्ति के लिए एक ही एंटीना लंबाई लेना। लंबाई तरंगदैर्घ्य के साथ चलती है, इसलिए ऊँची आवृत्ति पर छड़ छोटी होती है।
- वेवगाइड को कट-ऑफ आवृत्ति से नीचे चलाना। लंबी तरंगें पार नहीं होतीं।
- भूलना कि डिश को निशाने पर लगाना पड़ता है। थोड़ी भी हटी तो पतली किरण लक्ष्य से चूक जाती है।