तस्वीर यानी अंक
पिक्सेल तस्वीर का एक छोटा वर्ग है। बहुत से पिक्सेल साथ रखने से पूरी तस्वीर बनती है। कंप्यूटर रंग नहीं भेज सकता, इसलिए हर रंग को एक अंक देता है। सफ़ेद-काले पिक्सेल के लिए 1 बिट काफ़ी है। फ़ोन की रंगीन तस्वीर में आम तौर पर 24 बिट (3 बाइट) लगते हैं: लाल, हरे और नीले के लिए एक-एक बाइट।
स्थिर चित्र वह तस्वीर है जो हिलती नहीं: फ़ोटो, स्कैन किया पन्ना, फ़ैक्स। इसे भेजने के लिए इसके अंक तार या रेडियो से भेजते हैं और पाने वाला वर्ग फिर से बना लेता है।
तस्वीर का आकार = चौड़ाई × ऊँचाई × प्रति पिक्सेल बिट। 1920 × 1080 की 24 बिट वाली फ़ोटो में 20,73,600 पिक्सेल होते हैं, यानी 62,20,800 बाइट, लगभग 6.2 MB।
टेलीविज़न चलती तस्वीर कैसे दिखाता है
चलती तस्वीर बहुत सारी स्थिर तस्वीरों का तेज़ी से दिखना है। हर तस्वीर एक फ़्रेम है। एक सेकंड में 25 से 30 फ़्रेम दिखें तो आँखों को चलती हुई तस्वीर लगती है।
टीवी पूरा फ़्रेम एक साथ नहीं भेजता। वह तस्वीर एक-एक पंक्ति करके ऊपर से नीचे भेजता है। इसे स्कैनिंग कहते हैं। कैमरा दृश्य को पंक्तियों में पढ़ता है, संकेत जाता है और स्क्रीन उसी क्रम में पंक्तियाँ फिर बनाती है। रंगीन टीवी यही काम लाल, हरे और नीले रंग के लिए करता है और स्क्रीन पर मिला देता है।
पुराने टीवी तरंग वाला (एनालॉग) संकेत भेजते थे। आज ज़्यादातर टीवी डिजिटल है: पंक्तियाँ अंक हैं और जगह बचाने के लिए अंक सिकोड़े जाते हैं।
कम्प्रेशन: सूची छोटी करो
कम्प्रेशन (संपीड़न) का मतलब वही तस्वीर कम अंकों में रखना है, ताकि भेजना जल्दी हो और जगह कम लगे।
लॉसलेस में कुछ नहीं खोता। खोलने पर बिल्कुल वही तस्वीर मिलती है। उदाहरण रन-लेंथ कोडिंग: लगातार 20 सफ़ेद पिक्सेल को "सफ़ेद, 20" लिख दो। ZIP और PNG लॉसलेस हैं।
लॉसी में छोटी बारीकियाँ फेंक दी जाती हैं जो आँख को कम दिखती हैं। फ़ाइल बहुत छोटी हो जाती है, पर खोई बारीकी वापस नहीं आती। JPEG लॉसी है। ज़्यादा लॉसी कम्प्रेशन से तस्वीर चौकोर-चौकोर दिखने लगती है।
एन्क्रिप्शन: चाबी से बंद करो
तार या रेडियो तरंग को कोई भी सुन सकता है। एन्क्रिप्शन (कूटलेखन) गुप्त चाबी से अंक बदल देता है, ताकि अजनबी को सिर्फ़ शोर दिखे। डिक्रिप्शन चाबी से उन्हें वापस बदलता है।
3D में चाबी हर पिक्सेल के अंक में एक संख्या जोड़ती है। गलत चाबी से रंग गलत निकलते हैं। असली सिस्टम में गणित कहीं कठिन होता है, पर विचार यही है: वही चाबी ताला खोलती है (इसे सममित चाबी कहते हैं), गलत चाबी से कचरा मिलता है।
क्रम ज़रूरी है: पहले कम्प्रेस, फिर एन्क्रिप्ट। एन्क्रिप्ट किया डेटा बेतरतीब दिखता है और बेतरतीब डेटा सिकुड़ता नहीं।
खुद करके देखो
3D में आख़िरी चरण पर जाइए। भेजने की चाबी 2 और पाने की चाबी 3 करके "फिर भेजो" दबाइए। पहले सोचिए, फिर देखिए: तस्वीर साफ़ है? अब दोनों चाबियाँ बराबर करके फिर भेजिए। घर पर काग़ज़ पर 6 × 6 का जाल बनाइए, स्माइली रंगिए और पंक्ति दर पंक्ति अंक लिखिए। यह सूची दोस्त को दीजिए और देखिए वह आपकी तस्वीर बना पाता है या नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तस्वीर का आकार (बिट) = चौड़ाई × ऊँचाई × प्रति पिक्सेल बिट
- तस्वीर का आकार (बाइट) = बिट ÷ 8
- कम्प्रेशन अनुपात = मूल आकार ÷ छोटा आकार
- रन-लेंथ कोडिंग: AAAABB → (A,4)(B,2)
- भेजते समय: कम्प्रेस → एन्क्रिप्ट; पाते समय: डिक्रिप्ट → डीकम्प्रेस
हल किए गए उदाहरण
1. 8 पिक्सेल चौड़ी और 8 पिक्सेल ऊँची तस्वीर में कितने पिक्सेल हैं?
8 × 8 = 64 पिक्सेल।
2. सफ़ेद-काली तस्वीर 100 × 50 पिक्सेल की है, 1 बिट प्रति पिक्सेल। कितने बाइट?
बिट = 100 × 50 × 1 = 5000। बाइट = 5000 ÷ 8 = 625 बाइट।
3. एक फ़ोटो 1000 × 800 पिक्सेल की है, 24 बिट प्रति पिक्सेल। आकार MB में निकालो (1 MB = 10,00,000 बाइट)।
पिक्सेल = 8,00,000। बाइट = 8,00,000 × 3 = 24,00,000। आकार = 2.4 MB।
4. WWWWBBWWW का रन-लेंथ कोड लिखो।
चार W, दो B, तीन W: (W,4)(B,2)(W,3)।
5. 2.4 MB की फ़ोटो सिकुड़कर 0.3 MB की हो गई। कम्प्रेशन अनुपात निकालो।
अनुपात = 2.4 ÷ 0.3 = 8। फ़ाइल 8 गुना छोटी हुई।
6. टीवी 1 सेकंड में 25 फ़्रेम दिखाता है। 2 मिनट में कितने फ़्रेम?
2 मिनट = 120 सेकंड। फ़्रेम = 25 × 120 = 3000।
आम गलतियाँ
- पिक्सेल को मेगापिक्सेल समझ लेना। पिक्सेल एक वर्ग है; मेगापिक्सेल यानी दस लाख पिक्सेल।
- बिट और बाइट मिला देना। 8 बिट = 1 बाइट। बिट से बाइट के लिए 8 से भाग दो।
- यह मान लेना कि हर कम्प्रेशन में तस्वीर पूरी रहती है। लॉसी में बारीकी हमेशा के लिए चली जाती है।
- पहले एन्क्रिप्ट और बाद में कम्प्रेस करना। एन्क्रिप्ट डेटा बेतरतीब दिखता है, इसलिए सिकुड़ेगा नहीं।