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श्रव्य-दृश्य उपकरण (Audio-Visual Equipment)

श्रव्य उपकरण ध्वनि को विद्युत संकेत में बदलते हैं (माइक्रोफ़ोन), उसे बड़ा करते हैं (प्रवर्धक) और फिर ध्वनि में लौटाते हैं (लाउडस्पीकर)। दृश्य उपकरण प्रकाश को विद्युत संकेत में बदलते हैं (पिक्सेलों वाला कैमरा सेंसर) और फिर प्रकाश में लौटाते हैं (स्क्रीन)। डिजिटल उपकरण संकेत को संख्याओं में रखते हैं: ध्वनि के लिए प्रति सेकंड सैंपल, चित्र के लिए पिक्सेल और प्रति सेकंड फ़्रेम।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ध्वनि हवा का हिलना है। ढोल या आवाज़ हवा को धकेलती है और लहरें पानी की तरंगों जैसी फैलती हैं। यहाँ ध्वनि माइक्रोफ़ोन तक पहुँचती है।
  2. माइक्रोफ़ोन के अंदर एक पतली पर्त हवा के साथ हिलती है। माइक्रोफ़ोन इस हिलने को छोटी लहरदार विद्युत तरंग में बदल देता है। तरंग का रूप ध्वनि जैसा ही होता है।
  3. प्रवर्धक छोटी तरंग को बहुत बड़ा कर देता है। छोटी नीली और बड़ी लाल तरंग की तुलना करो। रूप वही है।
  4. बड़ी तरंग लाउडस्पीकर के कोन को आगे-पीछे हिलाती है। कोन हवा को हिलाता है और हमें फिर ध्वनि सुनाई देती है। आवाज़ बढ़ाओ: तरंग और कोन ज़्यादा हिलते हैं।
  5. अब कैमरा। दृश्य का प्रकाश लेंस से गुज़रता है। लेंस उसे मोड़कर सेंसर पर छोटा चित्र बनाता है। यहाँ सेंसर में सिर्फ़ 4 × 4 पिक्सेल हैं, इसलिए चित्र चौकोर टुकड़ों वाला है।
  6. ज़्यादा पिक्सेल से चित्र साफ़ होता है। स्क्रीन वही पिक्सेल दिखाती है, हर एक रंग का छोटा चौकोर। बटनों से ऑडियो और वीडियो बदलो और पिक्सेल बदलकर देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

ध्वनि असल में क्या है?

ध्वनि हवा का लहरों में धक्का और खिंचाव है। 3D में स्रोत से फैलते नीले चाप वही लहरें हैं जो माइक्रोफ़ोन तक पहुँच रही हैं।

क्या विद्युत संकेत ध्वनि को ही ले जाता है?

वह ध्वनि का रूप (पैटर्न) ले जाता है, ध्वनि नहीं। तार पर नीली लहरदार तरंग में वही चढ़ाव-उतार हैं जो हवा के हिलने में थे।

स्पीकर से पहले प्रवर्धक क्यों चाहिए?

माइक का संकेत बहुत छोटा होता है। कोन को हिलाने के लिए स्पीकर को बहुत ज़्यादा शक्ति चाहिए। छोटी नीली और बड़ी लाल तरंग की तुलना करो।

आवाज़ बढ़ाने पर ध्वनि तेज़ क्यों होती है?

बड़ा संकेत स्पीकर के कोन को ज़्यादा दूर तक हिलाता है, इसलिए वह हवा को ज़ोर से धकेलता है। आवाज़ का स्लाइडर बढ़ाकर कोन का ज़्यादा झूलना देखो।

कम पिक्सेल वाला चित्र चौकोर टुकड़ों वाला क्यों दिखता है?

हर पिक्सेल सिर्फ़ एक रंग दिखा सकता है, इसलिए सिर्फ़ 16 पिक्सेल हों तो एक टुकड़े को दृश्य का बड़ा हिस्सा दिखाना पड़ता है। 4 × 4 वाला चित्र देखो।

क्या स्क्रीन वैसे ही प्रकाश बनाती है जैसे कैमरा उसे इकट्ठा करता है?

यह उलटा है। कैमरे का पिक्सेल प्रकाश नापकर संकेत देता है; स्क्रीन का पिक्सेल संकेत लेकर प्रकाश बनाता है। पिक्सेल गिनती बदलो और दोनों जाल साथ बदलते देखो।

ध्वनि संकेत बनती है: माइक्रोफ़ोन

ध्वनि हवा के दाब में होने वाले बदलावों का रूप है। माइक्रोफ़ोन में एक पतली पर्त होती है, जिसे डायाफ़्राम कहते हैं। ध्वनि टकराने पर वह हिलती है। माइक्रोफ़ोन इस हिलने को उसी रूप की बहुत छोटी विद्युत वोल्टता में बदल देता है। यही श्रव्य संकेत (audio signal) है।

संकेत को बड़ा करना: प्रवर्धक और मिक्सर

माइक का संकेत केवल कुछ मिलिवोल्ट का होता है। प्रवर्धक उसे इतना बड़ा करता है कि स्पीकर चल सके। मिक्सर कई संकेत (आवाज़, गिटार, संगीत) जोड़ता है और हर एक की तेज़ी अलग-अलग तय करने देता है। इक्वलाइज़र से बेस (धीमी) या ट्रेबल (तेज़) आवाज़ें बढ़ाई या घटाई जा सकती हैं।

आवाज़ की तेज़ी डेसिबल (dB) में नापी जाती है। 10 dB तेज़ आवाज़ में ध्वनि शक्ति दस गुनी होती है।

संकेत ध्वनि बनता है: लाउडस्पीकर

लाउडस्पीकर माइक का काम उलटा करता है। संकेत एक कुंडली से बहता है, जो कागज़ या प्लास्टिक के कोन से जुड़ी होती है। कुंडली चुंबक के क्षेत्र में होती है, इसलिए संकेत के रूप में आगे-पीछे धकेली जाती है। कोन हवा को हिलाता है और हमें ध्वनि सुनाई देती है। बड़ा संकेत कोन को ज़्यादा हिलाता है, इसलिए आवाज़ तेज़ होती है। वूफ़र धीमी आवाज़ों वाला बड़ा स्पीकर है; ट्वीटर तेज़ (ऊँची) आवाज़ों वाला छोटा स्पीकर है।

ध्वनि रिकॉर्ड करना: एनालॉग और डिजिटल

पुराने टेप और रिकॉर्ड तरंग को ही सँभालते थे (एनालॉग)। आज के उपकरण तरंग को संख्याओं में बदल देते हैं। वे हर सेकंड में कई बार वोल्टता नापते हैं; हर नाप एक सैंपल है। प्रति सेकंड सैंपलों की संख्या सैंपलिंग दर है। संगीत की CD में प्रति सेकंड 44,100 सैंपल (44.1 kHz) होते हैं। सैंपल जितने ज़्यादा और हर नाप जितनी बारीक (बिट गहराई), नक़ल असली ध्वनि के उतनी करीब। MP3 जैसी फ़ाइलें संख्याओं को दबाकर कम जगह लेती हैं।

प्रकाश संकेत बनता है: कैमरा और इमेज सेंसर

कैमरे में एक लेंस होता है जो प्रकाश को मोड़कर इमेज सेंसर पर छोटा, साफ़ चित्र बनाता है। सेंसर प्रकाश नापने वाले छोटे-छोटे खानों का जाल है, जिन्हें पिक्सेल (चित्र के कण) कहते हैं। हर पिक्सेल नापता है कि उस पर कितना लाल, हरा और नीला प्रकाश पड़ा, और विद्युत संकेत देता है। फिर चिप इन संकेतों को संख्याओं में बदल देती है।

विभेदन (resolution) पिक्सेलों की संख्या है, जैसे 1920 × 1080। ज़्यादा पिक्सेल से बारीक ब्योरा दिखता है।

वीडियो और स्क्रीन

वीडियो स्थिर चित्रों की तेज़ श्रृंखला है, जिन चित्रों को फ़्रेम कहते हैं। फ़्रेम दर प्रति सेकंड फ़्रेम (fps) है: फ़िल्मों में 24 fps, कई फ़ोन में 30 या 60। हमारी आँख उन्हें जोड़ देती है और गति सहज दिखती है।

स्क्रीन कैमरे का काम उलटा करती है। वह भी पिक्सेलों का जाल है। LCD में हर पिक्सेल बैकलाइट के आगे एक छोटा प्रकाश-द्वार है; LED या OLED स्क्रीन में हर पिक्सेल अपना प्रकाश खुद बनाता है। हर पिक्सेल में लाल, हरा और नीला मिलाकर स्क्रीन हर रंग बनाती है। चित्र संकेत फ़्रेम-दर-फ़्रेम, पिक्सेल-दर-पिक्सेल भेजा जाता है।

खुद करके देखो

3D दृश्य में वीडियो दबाओ और पहले 4 × 4, फिर 16 × 16 चुनो। किस चित्र में घर बेहतर दिखता है? अब घर पर: फ़ोन की स्क्रीन पर पानी की एक बूँद रखो (यह आवर्धक काँच जैसा काम करती है) और लाल, हरे, नीले बिंदु देखो। साथ ही फ़ोन के वॉइस रिकॉर्डर में बोलो, उसे धीमे और फिर तेज़ चलाओ, और सोचो कि श्रृंखला का कौन सा भाग तुमने बदला।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक कैमरा सेंसर में चौड़ाई में 4000 और ऊँचाई में 3000 पिक्सेल हैं। कुल पिक्सेल (मेगापिक्सेल में) कितने हैं?

4000 × 3000 = 1,20,00,000 पिक्सेल = 12 मेगापिक्सेल।

2. फ़ुल HD स्क्रीन 1920 × 1080 की होती है। कितने पिक्सेल हुए?

1920 × 1080 = 20,73,600 पिक्सेल, यानी लगभग 21 लाख।

3. एक वीडियो 10 सेकंड का है और 30 फ़्रेम प्रति सेकंड पर है। कितने फ़्रेम हैं?

10 × 30 = 300 फ़्रेम।

4. CD ऑडियो में हर सेकंड 44,100 सैंपल होते हैं। 3 मिनट के गाने में एक चैनल के कितने सैंपल होंगे?

3 मिनट = 180 s। 180 × 44,100 = 79,38,000 सैंपल।

5. बिना दबाए CD ऑडियो में 16 बिट, 44,100 सैंपल/s और 2 चैनल होते हैं। प्रति सेकंड कितने बिट हुए?

16 × 44,100 × 2 = 14,11,200 बिट प्रति सेकंड (लगभग 1.41 Mbit/s)।

6. स्पीकर की आवाज़ 20 dB बढ़ाई गई। ध्वनि शक्ति कितने गुना बढ़ी?

हर 10 dB पर 10 गुना, इसलिए 20 dB पर 10 × 10 = 100 गुना।

7. 24 fps की फ़िल्म हर फ़्रेम दो बार दिखाकर 48 fps पर चलाई जाती है। 2 घंटे की फ़िल्म अब कितनी देर चलेगी?

फ़्रेम दोगुनी तेज़ी से दिखते हैं, पर दिखाए जाने वाले फ़्रेम भी दोगुने हैं, इसलिए समय वही रहता है: 2 घंटे।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कौन सा भाग ध्वनि को विद्युत संकेत में बदलता है?
2. फ़्रेम दर 30 fps का मतलब है:
3. एक सेंसर में 2000 × 1500 पिक्सेल हैं। कितने मेगापिक्सेल?
4. ऑडियो श्रृंखला में प्रवर्धक क्या करता है?
5. स्पीकर इसलिए काम करता है क्योंकि चुंबकीय क्षेत्र में रखी कुंडली:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइक्रोफ़ोन सरल शब्दों में कैसे काम करता है?

ध्वनि उसके अंदर की पतली पर्त को हिलाती है। माइक्रोफ़ोन उस हिलने को उसी रूप की छोटी विद्युत तरंग में बदल देता है।

पिक्सेल क्या है?

पिक्सेल चित्र का एक छोटा बिंदु है। कैमरे का पिक्सेल प्रकाश नापता है; स्क्रीन का पिक्सेल प्रकाश देता है। बहुत से पिक्सेल मिलकर पूरा चित्र बनाते हैं।

विभेदन और फ़्रेम दर में क्या अंतर है?

विभेदन बताता है कि हर चित्र में कितने पिक्सेल हैं। फ़्रेम दर बताती है कि वीडियो में हर सेकंड कितने चित्र दिखते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

जापान高校(専門学科)1〜3年Electronic Technology

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