ध्वनि संकेत बनती है: माइक्रोफ़ोन
ध्वनि हवा के दाब में होने वाले बदलावों का रूप है। माइक्रोफ़ोन में एक पतली पर्त होती है, जिसे डायाफ़्राम कहते हैं। ध्वनि टकराने पर वह हिलती है। माइक्रोफ़ोन इस हिलने को उसी रूप की बहुत छोटी विद्युत वोल्टता में बदल देता है। यही श्रव्य संकेत (audio signal) है।
- डायनेमिक माइक्रोफ़ोन: डायाफ़्राम चुंबक के पास एक छोटी कुंडली हिलाता है, जिससे वोल्टता बनती है। यह मज़बूत होता है और मंच के लिए अच्छा है।
- कंडेंसर माइक्रोफ़ोन: डायाफ़्राम संधारित्र की एक पट्टिका होता है; हिलने पर धारिता बदलती है। यह बहुत संवेदनशील है और इसे छोटी बिजली आपूर्ति चाहिए। फ़ोन में ऐसे ही छोटे माइक लगते हैं।
संकेत को बड़ा करना: प्रवर्धक और मिक्सर
माइक का संकेत केवल कुछ मिलिवोल्ट का होता है। प्रवर्धक उसे इतना बड़ा करता है कि स्पीकर चल सके। मिक्सर कई संकेत (आवाज़, गिटार, संगीत) जोड़ता है और हर एक की तेज़ी अलग-अलग तय करने देता है। इक्वलाइज़र से बेस (धीमी) या ट्रेबल (तेज़) आवाज़ें बढ़ाई या घटाई जा सकती हैं।
आवाज़ की तेज़ी डेसिबल (dB) में नापी जाती है। 10 dB तेज़ आवाज़ में ध्वनि शक्ति दस गुनी होती है।
संकेत ध्वनि बनता है: लाउडस्पीकर
लाउडस्पीकर माइक का काम उलटा करता है। संकेत एक कुंडली से बहता है, जो कागज़ या प्लास्टिक के कोन से जुड़ी होती है। कुंडली चुंबक के क्षेत्र में होती है, इसलिए संकेत के रूप में आगे-पीछे धकेली जाती है। कोन हवा को हिलाता है और हमें ध्वनि सुनाई देती है। बड़ा संकेत कोन को ज़्यादा हिलाता है, इसलिए आवाज़ तेज़ होती है। वूफ़र धीमी आवाज़ों वाला बड़ा स्पीकर है; ट्वीटर तेज़ (ऊँची) आवाज़ों वाला छोटा स्पीकर है।
ध्वनि रिकॉर्ड करना: एनालॉग और डिजिटल
पुराने टेप और रिकॉर्ड तरंग को ही सँभालते थे (एनालॉग)। आज के उपकरण तरंग को संख्याओं में बदल देते हैं। वे हर सेकंड में कई बार वोल्टता नापते हैं; हर नाप एक सैंपल है। प्रति सेकंड सैंपलों की संख्या सैंपलिंग दर है। संगीत की CD में प्रति सेकंड 44,100 सैंपल (44.1 kHz) होते हैं। सैंपल जितने ज़्यादा और हर नाप जितनी बारीक (बिट गहराई), नक़ल असली ध्वनि के उतनी करीब। MP3 जैसी फ़ाइलें संख्याओं को दबाकर कम जगह लेती हैं।
प्रकाश संकेत बनता है: कैमरा और इमेज सेंसर
कैमरे में एक लेंस होता है जो प्रकाश को मोड़कर इमेज सेंसर पर छोटा, साफ़ चित्र बनाता है। सेंसर प्रकाश नापने वाले छोटे-छोटे खानों का जाल है, जिन्हें पिक्सेल (चित्र के कण) कहते हैं। हर पिक्सेल नापता है कि उस पर कितना लाल, हरा और नीला प्रकाश पड़ा, और विद्युत संकेत देता है। फिर चिप इन संकेतों को संख्याओं में बदल देती है।
विभेदन (resolution) पिक्सेलों की संख्या है, जैसे 1920 × 1080। ज़्यादा पिक्सेल से बारीक ब्योरा दिखता है।
वीडियो और स्क्रीन
वीडियो स्थिर चित्रों की तेज़ श्रृंखला है, जिन चित्रों को फ़्रेम कहते हैं। फ़्रेम दर प्रति सेकंड फ़्रेम (fps) है: फ़िल्मों में 24 fps, कई फ़ोन में 30 या 60। हमारी आँख उन्हें जोड़ देती है और गति सहज दिखती है।
स्क्रीन कैमरे का काम उलटा करती है। वह भी पिक्सेलों का जाल है। LCD में हर पिक्सेल बैकलाइट के आगे एक छोटा प्रकाश-द्वार है; LED या OLED स्क्रीन में हर पिक्सेल अपना प्रकाश खुद बनाता है। हर पिक्सेल में लाल, हरा और नीला मिलाकर स्क्रीन हर रंग बनाती है। चित्र संकेत फ़्रेम-दर-फ़्रेम, पिक्सेल-दर-पिक्सेल भेजा जाता है।
खुद करके देखो
3D दृश्य में वीडियो दबाओ और पहले 4 × 4, फिर 16 × 16 चुनो। किस चित्र में घर बेहतर दिखता है? अब घर पर: फ़ोन की स्क्रीन पर पानी की एक बूँद रखो (यह आवर्धक काँच जैसा काम करती है) और लाल, हरे, नीले बिंदु देखो। साथ ही फ़ोन के वॉइस रिकॉर्डर में बोलो, उसे धीमे और फिर तेज़ चलाओ, और सोचो कि श्रृंखला का कौन सा भाग तुमने बदला।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विभेदन = चौड़ाई में पिक्सेल × ऊँचाई में पिक्सेल (1920 × 1080 = 20,73,600 पिक्सेल)
- फ़्रेम दर = प्रति सेकंड फ़्रेम (fps)
- सैंपलिंग दर = प्रति सेकंड सैंपल (Hz); CD ऑडियो = 44,100 Hz
- प्रति सेकंड डेटा (बिना दबाया ऑडियो) = सैंपलिंग दर × बिट गहराई × चैनल
- ध्वनि स्तर: +10 dB = शक्ति 10 गुनी; +20 dB = 100 गुनी
हल किए गए उदाहरण
1. एक कैमरा सेंसर में चौड़ाई में 4000 और ऊँचाई में 3000 पिक्सेल हैं। कुल पिक्सेल (मेगापिक्सेल में) कितने हैं?
4000 × 3000 = 1,20,00,000 पिक्सेल = 12 मेगापिक्सेल।
2. फ़ुल HD स्क्रीन 1920 × 1080 की होती है। कितने पिक्सेल हुए?
1920 × 1080 = 20,73,600 पिक्सेल, यानी लगभग 21 लाख।
3. एक वीडियो 10 सेकंड का है और 30 फ़्रेम प्रति सेकंड पर है। कितने फ़्रेम हैं?
10 × 30 = 300 फ़्रेम।
4. CD ऑडियो में हर सेकंड 44,100 सैंपल होते हैं। 3 मिनट के गाने में एक चैनल के कितने सैंपल होंगे?
3 मिनट = 180 s। 180 × 44,100 = 79,38,000 सैंपल।
5. बिना दबाए CD ऑडियो में 16 बिट, 44,100 सैंपल/s और 2 चैनल होते हैं। प्रति सेकंड कितने बिट हुए?
16 × 44,100 × 2 = 14,11,200 बिट प्रति सेकंड (लगभग 1.41 Mbit/s)।
6. स्पीकर की आवाज़ 20 dB बढ़ाई गई। ध्वनि शक्ति कितने गुना बढ़ी?
हर 10 dB पर 10 गुना, इसलिए 20 dB पर 10 × 10 = 100 गुना।
7. 24 fps की फ़िल्म हर फ़्रेम दो बार दिखाकर 48 fps पर चलाई जाती है। 2 घंटे की फ़िल्म अब कितनी देर चलेगी?
फ़्रेम दोगुनी तेज़ी से दिखते हैं, पर दिखाए जाने वाले फ़्रेम भी दोगुने हैं, इसलिए समय वही रहता है: 2 घंटे।
आम गलतियाँ
- माइक और स्पीकर को अलग तरह की मशीनें समझना। ये लगभग एक ही पुर्ज़ा हैं, जो उलटी दिशाओं में काम करते हैं।
- विभेदन और स्क्रीन के आकार को एक समझना। छोटे फ़ोन में किसी बड़े पुराने टीवी से ज़्यादा पिक्सेल हो सकते हैं।
- पिक्सेल (चित्र के बिंदु) और फ़्रेम (वीडियो के प्रति सेकंड चित्र) को मिला देना।
- यह मानना कि ऊँची सैंपलिंग दर का मतलब तेज़ आवाज़ है। इसका मतलब ज़्यादा सटीक नक़ल है, ज़्यादा आवाज़ नहीं।