आवाज़ और चित्र बनते हैं संकेत
माइक्रोफ़ोन आवाज़ को छोटे बिजली-संकेत में बदलता है। टीवी कैमरा प्रकाश के लिए यही करता है, इसलिए चित्र भी बिजली-संकेत बन जाता है। यह संकेत आवाज़ या चित्र की बिजली की भाषा में नकल है।
यह संकेत कमज़ोर होता है, दूर नहीं जा सकता। इसलिए एक मददगार चाहिए।
वाहक तरंग और टावर
वाहक तरंग एक तेज़ रेडियो तरंग है जिसकी आवृत्ति तय होती है। संकेत को इस पर चढ़ाया जाता है। इसे मॉडुलन (modulation) कहते हैं।
- AM (आयाम मॉडुलन): संकेत वाहक तरंग की ऊँचाई (आयाम) बदलता है।
- FM (आवृत्ति मॉडुलन): संकेत वाहक की आवृत्ति थोड़ी बदलता है।
टावर का ऐंटीना तरंग को बाहर भेजता है। रेडियो तरंगें प्रकाश की चाल c = 3 × 108 m/s से चलती हैं। तरंगदैर्ध्य का सूत्र है c = f × λ।
रिसीवर और ट्यूनिंग
कई स्टेशन एक साथ भेजते हैं। हर एक की वाहक आवृत्ति अलग होती है। रेडियो या टीवी में ट्यूनर होता है। डायल घुमाने से एक आवृत्ति चुनी जाती है, बाक़ी छोड़ दी जाती हैं। फिर रिसीवर वाहक को हटाकर संकेत रख लेता है। स्पीकर उसे आवाज़ बनाता है और स्क्रीन प्रकाश।
मोबाइल नेटवर्क और सेल
फ़ोन की बातचीत दोतरफ़ा होती है, इसलिए फ़ोन में छोटा ट्रांसमीटर और छोटा रिसीवर दोनों होते हैं। नेटवर्क इलाक़े को सेल में बाँटता है। हर सेल में एक बेस स्टेशन (सेल टावर) होता है। फ़ोन सबसे पास के टावर से बात करता है।
छोटे सेल क्यों? एक टावर सीमित कॉल ही सँभाल सकता है। दूर-दूर के टावर वही आवृत्तियाँ दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए ज़्यादा लोग बात कर पाते हैं। चलते समय नेटवर्क आपकी कॉल अगले टावर को सौंप देता है। इसे हैंडओवर कहते हैं। टावर आपस में तारों से जुड़े होते हैं, इसलिए कॉल किसी भी फ़ोन तक पहुँच सकती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- c = f × λ (c = 3 × 10^8 m/s)
- λ = c / f, f = c / λ
- 1 kHz = 10^3 Hz, 1 MHz = 10^6 Hz, 1 GHz = 10^9 Hz
- मॉडुलन: AM में आयाम बदलता है, FM में आवृत्ति
हल किए गए उदाहरण
1. एक FM स्टेशन 100 MHz पर प्रसारण करता है। उसकी वाहक तरंग की तरंगदैर्ध्य निकालिए।
λ = c / f = (3 × 10^8) / (100 × 10^6) = 3 m।
2. एक AM स्टेशन की तरंगदैर्ध्य 300 m है। उसकी आवृत्ति निकालिए।
f = c / λ = (3 × 10^8) / 300 = 10^6 Hz = 1 MHz (1000 kHz)।
3. एक मोबाइल नेटवर्क 900 MHz पर चलता है। उसकी तरंग कितनी लंबी है?
λ = (3 × 10^8) / (900 × 10^6) = 0.33 m, यानी लगभग 33 cm।
4. दो दूर के सेल टावर एक ही आवृत्ति क्यों इस्तेमाल कर सकते हैं?
एक-दूसरे तक पहुँचते-पहुँचते उनकी तरंगें कमज़ोर हो जाती हैं, इसलिए वे एक-दूसरे में बाधा नहीं डालतीं। इसे आवृत्ति का पुनः उपयोग कहते हैं।
आम गलतियाँ
- सोचना कि आवाज़ खुद रेडियो तरंग बनकर हवा में चलती है। रेडियो तरंग पर केवल बिजली-संकेत सवार होता है।
- AM और FM में गड़बड़ करना। AM ऊँचाई (आयाम) बदलता है; FM आवृत्ति बदलता है।
- c = f × λ में MHz को Hz में बदलना भूल जाना। 100 MHz = 100 × 10^6 Hz।
- सोचना कि फ़ोन सीधे दूसरे फ़ोन से बात करता है। वह पहले टावर से बात करता है।