रेडियो तरंगों के संचरण की विशेषताएँ
रेडियो तरंगें आवृत्ति बैंड से बाँटी जाती हैं, और हर बैंड का अपना पसंदीदा रास्ता है।
- भू-तरंग (LF और MF, लगभग 2 MHz से नीचे): ज़मीन की वक्रता के साथ चलती है। ज़मीन ऊर्जा सोखती है, ऊँची आवृत्ति पर ज़्यादा, इसलिए परास लगभग 100 से 1000 km (सूखी ज़मीन से समुद्र का पानी बेहतर)। AM प्रसारण और समुद्री MF में।
- आकाश तरंग (HF, लगभग 2 से 30 MHz): आयनमंडल 60 से 400 km ऊपर का क्षेत्र है जहाँ सूर्य की रोशनी हवा को आवेशित कणों में तोड़ती है। इसमें D (सिर्फ़ दिन में सोखती है), E और F (लौटाती हैं) परतें हैं। ऊपर की ओर तिरछी भेजी तरंग नीचे मुड़ जाती है। उतरने की जगह हज़ारों km दूर हो सकती है और दूसरी छलाँग भी लग सकती है।
- अंतरिक्ष तरंग (VHF, UHF, माइक्रोवेव, लगभग 30 MHz से ऊपर): सीधी रेखा में चलती है, कुछ सीधी और कुछ ज़मीन से परावर्तित। परास रेडियो क्षितिज है: d ≈ 4.12 (√h1 + √h2) km, h मीटर में। ऊँचे टावर दूर तक देखते हैं। FM, टीवी, मोबाइल और माइक्रोवेव लिंक में।
बहुत ऊँची आवृत्तियाँ आयनमंडल से निकल जाती हैं, इसलिए उपग्रह इन्हें लेते हैं। क्रांतिक आवृत्ति fc वह सबसे ऊँची आवृत्ति है जो सीधे ऊपर भेजने पर लौटती है; fc ≈ 9 √N (N = प्रति m³ इलेक्ट्रॉन, fc हर्ट्ज़ में)। तिरछी किरण के लिए जो सबसे ऊँची आवृत्ति अब भी लौटती है उसे अधिकतम प्रयोज्य आवृत्ति कहते हैं, MUF = fc / cos θ, जहाँ θ आपतन कोण है। स्किप दूरी वह सबसे कम दूरी है जहाँ आकाश तरंग उतरती है; भू-तरंग परास और स्किप दूरी के बीच स्किप ज़ोन है जहाँ संकेत नहीं मिलता।
संचरण की घटनाएँ
अपनी यात्रा में तरंग कई काम कर सकती है:
- परावर्तन: आयनमंडल, समुद्र या इमारत से टकराकर लौटना। रिसीवर तक दूसरा रास्ता बन जाता है।
- अपवर्तन: चाल बदलने पर मुड़ना, जैसे आयनमंडल में। पृथ्वी की ओर मुड़कर आकाश तरंग इसी से लौटती है।
- विवर्तन: तीखे किनारे या पहाड़ी के पीछे मुड़ना। लंबी तरंगें छोटी से ज़्यादा मुड़ती हैं, इसलिए AM पहाड़ के पीछे जाता है पर UHF नहीं।
- अवशोषण: ऊर्जा ज़मीन, बारिश या D परत में खो जाती है। भारी बारिश माइक्रोवेव को कमज़ोर करती है।
- प्रकीर्णन: खुरदरी जगहें और बारिश ऊर्जा को कई दिशाओं में बिखेरती हैं, जिससे संकेत क्षितिज के थोड़ा पार जा सकता है।
- बहुपथ और फ़ेडिंग: एक ही संकेत दो रास्तों से आता है। जुड़ें तो संकेत तेज़, कटें तो फ़ेड। आयनमंडल हिलता है, इसलिए HF फ़ेडिंग धीमी और गहरी होती है; मोबाइल लेकर चलने पर तेज़ फ़ेडिंग होती है।
- डक्टिंग: गर्म शांत दिनों में हवा की परत VHF तरंगों को फँसाकर क्षितिज के बहुत पार ले जा सकती है।
- आयनमंडलीय तूफ़ान सूर्य से आकर HF रेडियो को घंटों बंद कर सकते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तरंगदैर्घ्य: λ = c / f, c = 3 × 10⁸ m/s
- रेडियो क्षितिज: d ≈ 4.12 (√h1 + √h2) km, h मीटर में
- क्रांतिक आवृत्ति: fc ≈ 9 √N (N प्रति m³ इलेक्ट्रॉन, fc हर्ट्ज़ में)
- अधिकतम प्रयोज्य आवृत्ति: MUF = fc / cos θ (θ = आपतन कोण)
- बैंड: भू-तरंग < 2 MHz; आकाश तरंग 2–30 MHz; अंतरिक्ष तरंग > 30 MHz
हल किए गए उदाहरण
1. टीवी टावर 100 m ऊँचा है और ग्राही एंटीना 4 m ऊँचा। रेडियो क्षितिज की दूरी कितनी है?
d = 4.12 × (√100 + √4) = 4.12 × (10 + 2) = 4.12 × 12 ≈ 49.4 km।
2. F परत में N = 10¹² इलेक्ट्रॉन प्रति m³ हैं। क्रांतिक आवृत्ति निकालिए।
fc = 9 √N = 9 × √(10¹²) = 9 × 10⁶ Hz = 9 MHz। सीधे ऊपर भेजी 9 MHz से ऊपर की तरंगें निकल जाती हैं।
3. क्रांतिक आवृत्ति 8 MHz है। तरंग परत से 60° आपतन कोण पर टकराती है। MUF निकालिए।
cos 60° = 0.5। MUF = 8 / 0.5 = 16 MHz। इस कोण पर 20 MHz की तरंग नहीं लौटेगी।
4. एक तरंग दो रास्तों से आती है। एक रास्ता दूसरे से 300 m लंबा है। समय-अंतर कितना है?
Δt = 300 / (3 × 10⁸) = 10⁻⁶ s = 1 µs। इसी विलंब से दोनों रास्ते जुड़ते या कटते हैं, और बहुपथ फ़ेडिंग होती है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि हर रेडियो तरंग पृथ्वी का चक्कर लगाती है। केवल कम आवृत्तियाँ ज़मीन से चिपकती हैं; VHF और ऊपर सीधी जाती हैं।
- सोचना कि आयनमंडल हर आवृत्ति लौटाता है। MUF से ऊपर तरंग निकल जाती है, इसीलिए उपग्रह काम करते हैं।
- स्किप दूरी और स्किप ज़ोन में गड़बड़ी। स्किप दूरी पहला उतरने का बिंदु है; स्किप ज़ोन उससे पहले का चुप क्षेत्र।
- भूलना कि रेडियो क्षितिज में एंटीना की ऊँचाई मीटर में लेते हैं और उत्तर km में आता है, गुणक 4.12 के साथ (साधारण दृश्य क्षितिज के 3.57 के साथ नहीं)।