विस्थापन धारा: जो धारा गायब लग रही थी
एम्पियर का नियम कहता है कि धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। अब चार्ज होते संधारित्र को सोचिए। तारों में धारा है, पर प्लेटों के बीच हवा या खाली जगह है। वहाँ से कोई आवेश पार नहीं होता।
फिर भी उस खाली जगह के चारों ओर भी चुंबकीय क्षेत्र मिलता है। तो वहाँ कुछ न कुछ धारा जैसा काम कर रहा है। मैक्सवेल ने बताया: प्लेटों के बीच बदलता विद्युत क्षेत्र।
इसे विस्थापन धारा Id कहते हैं:
Id = ε₀ × (dΦE/dt)
ΦE विद्युत फ्लक्स है (क्षेत्र × क्षेत्रफल), ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² C²/N m²। चार्ज होते समय खाली जगह की Id तार की धारा I के बराबर होती है। यानी धारा पूरे रास्ते "लगातार" रहती है।
एम्पियर–मैक्सवेल नियम
चुंबकीय क्षेत्र बनाने वाली कुल धारा = I + Id। मतलब: चुंबकीय क्षेत्र चलते आवेशों से भी बनता है और बदलते विद्युत क्षेत्र से भी।
यह क्यों ज़रूरी है
बदलता B, E बनाता है (फैराडे)। बदलता E, B बनाता है (मैक्सवेल)। यही दोतरफ़ा रिश्ता क्षेत्रों को आगे चलाता रहता है। इसी से प्रकाश और रेडियो तरंगें बनती हैं।
विद्युत चुंबकीय तरंग कैसे बनती है
रुका हुआ आवेश सिर्फ़ E बनाता है। एकसमान चाल से चलता आवेश B भी बनाता है, पर तरंग नहीं। त्वरित आवेश (जिसकी चाल बदल रही हो या जो आगे-पीछे हिल रहा हो) तरंगें भेजता है।
उदाहरण: रेडियो एंटीना में इलेक्ट्रॉन एक सेकंड में लाखों बार ऊपर-नीचे होते हैं और उसी आवृत्ति की रेडियो तरंगें भेजते हैं।
विद्युत चुंबकीय तरंगों के गुण
- इन्हें माध्यम नहीं चाहिए। ये निर्वात पार कर लेती हैं (सूर्य का प्रकाश अंतरिक्ष से आता है)।
- निर्वात में सबकी चाल एक: c = 1/√(μ₀ε₀) = 3 × 10⁸ m/s।
- चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य: c = fλ।
- E और B एक ही कला में: दोनों एक साथ अधिकतम होते हैं।
- आकार का संबंध: E₀ = c B₀।
- काँच जैसे माध्यम में चाल घटती है: v = c/n (n = अपवर्तनांक)।
- ये ऊर्जा और संवेग ले जाती हैं, इसलिए प्रकाश सतह पर हल्का दबाव डालता है (विकिरण दाब)।
- इन पर आवेश नहीं होता, इसलिए विद्युत या चुंबकीय क्षेत्र इन्हें मोड़ते नहीं।
विद्युत चुंबकीय तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति
अनुप्रस्थ तरंग में कंपन चलने की दिशा से 90° पर होता है। x दिशा में चलती तरंग में:
- E, y दिशा में (ऊपर-नीचे) कंपन करता है।
- B, z दिशा में (दाएँ-बाएँ) कंपन करता है।
- तरंग x दिशा में चलती है।
तीनों एक-दूसरे से 90° पर हैं। चलने की दिशा E × B की दिशा है।
रोज़ का सबूत
पोलरॉइड चश्मा चमक कम करता है। यह सिर्फ़ उस प्रकाश को जाने देता है जिसका E एक दिशा में कंपन करे। ऐसा "छानना" सिर्फ़ अनुप्रस्थ तरंग के साथ होता है। ध्वनि (अनुदैर्ध्य तरंग) के साथ नहीं।
विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम: रेडियो से गामा तक
स्पेक्ट्रम सभी विद्युत चुंबकीय तरंगों का परिवार है, तरंगदैर्घ्य के क्रम में। सबसे लंबे तरंगदैर्घ्य (सबसे कम आवृत्ति और ऊर्जा) से सबसे छोटे तक:
| बैंड | तरंगदैर्घ्य (लगभग) | कैसे बनती है | उपयोग |
|---|---|---|---|
| रेडियो | > 0.1 m | एंटीना में इलेक्ट्रॉन | रेडियो, टीवी, मोबाइल |
| सूक्ष्म तरंग | 0.1 m से 1 mm | मैग्नेट्रॉन / क्लाइस्ट्रॉन | रडार, माइक्रोवेव ओवन, वाई-फाई, उपग्रह |
| अवरक्त | 1 mm से 700 nm | गर्म वस्तुएँ, कंपित अणु | टीवी रिमोट, नाइट विज़न, फिज़ियोथेरेपी, ग्रीनहाउस प्रभाव |
| दृश्य | 700 nm से 400 nm | परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन की छलांग | देखना, फोटोग्राफी, ऑप्टिकल फाइबर |
| पराबैंगनी | 400 nm से 1 nm | सूर्य, बहुत गर्म वस्तुएँ, आर्क लैंप | पानी के कीटाणु मारना, नकली नोट जाँच, LASIK |
| एक्स-किरणें | 1 nm से 10⁻³ nm | तेज़ इलेक्ट्रॉन धातु से टकराकर | हड्डी-दाँत की जाँच, हवाई अड्डे पर सामान जाँच |
| गामा किरणें | < 10⁻³ nm | रेडियोधर्मी नाभिक | कैंसर कोशिकाएँ नष्ट करना, औज़ार कीटाणुरहित करना |
सुरक्षा, सरल शब्दों में
तरंगदैर्घ्य जितना छोटा, ऊर्जा उतनी ज़्यादा। पराबैंगनी से धूप में जलन होती है; ओज़ोन परत इसका ज़्यादातर भाग रोकती है। एक्स और गामा किरणें कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं, इसलिए इनकी मात्रा कम रखी जाती है।
घर पर करके देखिए
टीवी रिमोट को फ़ोन के सामने वाले कैमरे की ओर करके बटन दबाइए। कैमरे में छोटी रोशनी चमकती दिखेगी। आँखें यह अवरक्त प्रकाश नहीं देखतीं, कैमरा देख लेता है। बीच में पानी का गिलास रखिए: फिर भी काम करता है। हाथ रखिए: रुक जाता है। फिर 3D में λ स्लाइडर से पता कीजिए कि रिमोट कौन-सा बैंड है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I_d = ε₀ dΦ_E/dt
- c = 1/√(μ₀ε₀) = 3 × 10⁸ m/s
- c = f λ
- E₀ = c B₀
- v = c/n (in a material)
हल किए गए उदाहरण
1. एक FM स्टेशन 100 MHz पर प्रसारण करता है। तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
चरण 1: c = fλ, इसलिए λ = c/f। चरण 2: λ = (3 × 10⁸) / (100 × 10⁶) = 3 m। उत्तर: 3 m (रेडियो बैंड)।
2. पीले प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 600 nm है। आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
चरण 1: f = c/λ। चरण 2: λ = 6 × 10⁻⁷ m। चरण 3: f = 3 × 10⁸ / 6 × 10⁻⁷ = 5 × 10¹⁴ Hz।
3. एक तरंग में B₀ = 2 × 10⁻⁸ T है। E₀ ज्ञात कीजिए।
चरण 1: E₀ = c B₀। चरण 2: E₀ = 3 × 10⁸ × 2 × 10⁻⁸ = 6 V/m।
4. λ = 1 nm वाली तरंग का बैंड और आवृत्ति बताइए।
चरण 1: 1 nm पराबैंगनी और एक्स-किरणों की सीमा पर है; इसे मृदु एक्स-किरण मानते हैं। चरण 2: f = 3 × 10⁸ / 10⁻⁹ = 3 × 10¹⁷ Hz।
5. 2 μF संधारित्र पर वोल्टता 5 × 10⁴ V/s की दर से बढ़ रही है। प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।
चरण 1: Q = CV, तो प्लेट में आने वाली धारा I = C dV/dt। चरण 2: खाली जगह में I_d इसी के बराबर है। चरण 3: I_d = 2 × 10⁻⁶ × 5 × 10⁴ = 0.1 A।
6. प्लेट का क्षेत्रफल 0.02 m² है और प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र 5 × 10¹² V/(m s) की दर से बदल रहा है। I_d ज्ञात कीजिए।
चरण 1: Φ_E = E × A, तो dΦ_E/dt = 0.02 × 5 × 10¹² = 10¹¹। चरण 2: I_d = ε₀ dΦ_E/dt = 8.85 × 10⁻¹² × 10¹¹ ≈ 0.885 A।
7. 5 × 10¹⁴ Hz का प्रकाश n = 1.5 वाले काँच में जाता है। काँच में चाल और तरंगदैर्घ्य बताइए।
चरण 1: v = c/n = 2 × 10⁸ m/s। चरण 2: नए माध्यम में आवृत्ति नहीं बदलती। चरण 3: λ = v/f = 2 × 10⁸ / 5 × 10¹⁴ = 400 nm।
8. दिखाइए कि 1/√(μ₀ε₀) प्रकाश की चाल देता है। (μ₀ = 4π × 10⁻⁷, ε₀ = 8.85 × 10⁻¹²)
चरण 1: μ₀ε₀ ≈ 1.112 × 10⁻¹⁷। चरण 2: इसका वर्गमूल ≈ 3.33 × 10⁻⁹। चरण 3: 1 / 3.33 × 10⁻⁹ ≈ 3 × 10⁸ m/s। यह प्रकाश की चाल है, इसलिए प्रकाश विद्युत चुंबकीय तरंग है।
आम गलतियाँ
- विस्थापन धारा को आवेशों का बहाव समझना। खाली जगह में कोई आवेश नहीं चलता; यह बदलता विद्युत क्षेत्र है।
- यह कहना कि ध्वनि की तरह इन्हें भी माध्यम चाहिए। ये निर्वात में भी चलती हैं।
- स्पेक्ट्रम का क्रम उलट देना। रेडियो से गामा तक तरंगदैर्घ्य घटता है और आवृत्ति बढ़ती है।
- यह मानना कि काँच में जाने पर आवृत्ति बदलती है। चाल और तरंगदैर्घ्य बदलते हैं, आवृत्ति नहीं।