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विद्युत चुंबकीय तरंगें

बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र धारा जैसा काम करता है। इसे विस्थापन धारा कहते हैं और यह चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। बदलता चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र बनाता है। दोनों मिलकर विद्युत चुंबकीय तरंग बनकर c = 3 × 10⁸ m/s से चलते हैं, खाली जगह में भी। E और B एक-दूसरे से और चलने की दिशा से 90° पर होते हैं, इसलिए ये तरंगें अनुप्रस्थ हैं। तरंगदैर्घ्य के क्रम में: रेडियो, सूक्ष्म तरंग, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, एक्स-किरणें, गामा किरणें।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक संधारित्र चार्ज हो रहा है। तारों में धारा बह रही है, पर प्लेटों के बीच कोई आवेश नहीं कूदता। फिर भी बीच में विद्युत क्षेत्र बढ़ता है। यह बदलता क्षेत्र धारा जैसा काम करता है। इसे विस्थापन धारा कहते हैं।
  2. बदलता E क्षेत्र B बनाता है। बदलता B क्षेत्र E बनाता है। दोनों एक-दूसरे को बनाते रहते हैं, इसलिए यह जोड़ी तार छोड़कर खुद चल पड़ती है।
  3. यही चलती जोड़ी विद्युत चुंबकीय तरंग है। लाल तीर E हैं, नीले तीर B। दोनों साथ उठते-गिरते हैं और 3 × 10⁸ m/s से चलते हैं। इन्हें हवा या पानी नहीं चाहिए।
  4. दिशाएँ देखिए। E ऊपर-नीचे, B दाएँ-बाएँ, और तरंग आगे। तीनों एक-दूसरे से 90° पर हैं। इसलिए तरंग अनुप्रस्थ है।
  5. सभी विद्युत चुंबकीय तरंगें एक ही तरह की हैं। बस तरंगदैर्घ्य बदलता है। लंबी तरंगें रेडियो हैं। छोटी होती जाएँ तो सूक्ष्म तरंग, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, एक्स और गामा।
  6. अब आपकी बारी। तरंगदैर्घ्य का स्लाइडर खिसकाइए। पहले बैंड का नाम सोचिए, फिर उसका उपयोग और स्रोत देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

खाली जगह में आवेश नहीं जाता, फिर वहाँ धारा कैसे?

आवेश नहीं बहता। पर वहाँ विद्युत क्षेत्र बदल रहा है, और बदलता E असली धारा की तरह चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। असर के कारण इसे "धारा" कहते हैं।

क्या विस्थापन धारा हमेशा रहती है?

सिर्फ़ तब तक जब तक E बदल रहा है। संधारित्र पूरा चार्ज हो जाए तो E रुक जाता है और I_d शून्य हो जाती है।

तार के बिना क्षेत्र आगे कैसे चलते हैं?

बदलता E बदलता B बनाता है, और बदलता B बदलता E। दोनों एक-दूसरे को बनाते हुए आगे बढ़ते हैं।

क्या प्रकाश को चलने के लिए हवा चाहिए?

नहीं। सूर्य का प्रकाश लगभग खाली 15 करोड़ km अंतरिक्ष पार करके आता है।

E और B दोनों हैं, तो तरंग किधर चलती है?

दोनों के लंबवत, E × B की दिशा में। E ऊपर-नीचे, B दाएँ-बाएँ और तरंग आगे।

क्या एक्स-किरण और रेडियो तरंग सच में एक ही चीज़ हैं?

हाँ। दोनों विद्युत चुंबकीय तरंगें हैं, निर्वात में चाल एक। सिर्फ़ तरंगदैर्घ्य और ऊर्जा अलग।

किस बैंड में ज़्यादा ऊर्जा है?

तरंगदैर्घ्य जितना छोटा, ऊर्जा उतनी ज़्यादा। स्लाइडर रेडियो से गामा की ओर ले जाकर देखिए।

विस्थापन धारा: जो धारा गायब लग रही थी

एम्पियर का नियम कहता है कि धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। अब चार्ज होते संधारित्र को सोचिए। तारों में धारा है, पर प्लेटों के बीच हवा या खाली जगह है। वहाँ से कोई आवेश पार नहीं होता।

फिर भी उस खाली जगह के चारों ओर भी चुंबकीय क्षेत्र मिलता है। तो वहाँ कुछ न कुछ धारा जैसा काम कर रहा है। मैक्सवेल ने बताया: प्लेटों के बीच बदलता विद्युत क्षेत्र।

इसे विस्थापन धारा Id कहते हैं:

Id = ε₀ × (dΦE/dt)

ΦE विद्युत फ्लक्स है (क्षेत्र × क्षेत्रफल), ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² C²/N m²। चार्ज होते समय खाली जगह की Id तार की धारा I के बराबर होती है। यानी धारा पूरे रास्ते "लगातार" रहती है।

एम्पियर–मैक्सवेल नियम

चुंबकीय क्षेत्र बनाने वाली कुल धारा = I + Id। मतलब: चुंबकीय क्षेत्र चलते आवेशों से भी बनता है और बदलते विद्युत क्षेत्र से भी।

यह क्यों ज़रूरी है

बदलता B, E बनाता है (फैराडे)। बदलता E, B बनाता है (मैक्सवेल)। यही दोतरफ़ा रिश्ता क्षेत्रों को आगे चलाता रहता है। इसी से प्रकाश और रेडियो तरंगें बनती हैं।

विद्युत चुंबकीय तरंग कैसे बनती है

रुका हुआ आवेश सिर्फ़ E बनाता है। एकसमान चाल से चलता आवेश B भी बनाता है, पर तरंग नहीं। त्वरित आवेश (जिसकी चाल बदल रही हो या जो आगे-पीछे हिल रहा हो) तरंगें भेजता है।

उदाहरण: रेडियो एंटीना में इलेक्ट्रॉन एक सेकंड में लाखों बार ऊपर-नीचे होते हैं और उसी आवृत्ति की रेडियो तरंगें भेजते हैं।

विद्युत चुंबकीय तरंगों के गुण

विद्युत चुंबकीय तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति

अनुप्रस्थ तरंग में कंपन चलने की दिशा से 90° पर होता है। x दिशा में चलती तरंग में:

तीनों एक-दूसरे से 90° पर हैं। चलने की दिशा E × B की दिशा है।

रोज़ का सबूत

पोलरॉइड चश्मा चमक कम करता है। यह सिर्फ़ उस प्रकाश को जाने देता है जिसका E एक दिशा में कंपन करे। ऐसा "छानना" सिर्फ़ अनुप्रस्थ तरंग के साथ होता है। ध्वनि (अनुदैर्ध्य तरंग) के साथ नहीं।

विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम: रेडियो से गामा तक

स्पेक्ट्रम सभी विद्युत चुंबकीय तरंगों का परिवार है, तरंगदैर्घ्य के क्रम में। सबसे लंबे तरंगदैर्घ्य (सबसे कम आवृत्ति और ऊर्जा) से सबसे छोटे तक:

बैंडतरंगदैर्घ्य (लगभग)कैसे बनती हैउपयोग
रेडियो> 0.1 mएंटीना में इलेक्ट्रॉनरेडियो, टीवी, मोबाइल
सूक्ष्म तरंग0.1 m से 1 mmमैग्नेट्रॉन / क्लाइस्ट्रॉनरडार, माइक्रोवेव ओवन, वाई-फाई, उपग्रह
अवरक्त1 mm से 700 nmगर्म वस्तुएँ, कंपित अणुटीवी रिमोट, नाइट विज़न, फिज़ियोथेरेपी, ग्रीनहाउस प्रभाव
दृश्य700 nm से 400 nmपरमाणुओं में इलेक्ट्रॉन की छलांगदेखना, फोटोग्राफी, ऑप्टिकल फाइबर
पराबैंगनी400 nm से 1 nmसूर्य, बहुत गर्म वस्तुएँ, आर्क लैंपपानी के कीटाणु मारना, नकली नोट जाँच, LASIK
एक्स-किरणें1 nm से 10⁻³ nmतेज़ इलेक्ट्रॉन धातु से टकराकरहड्डी-दाँत की जाँच, हवाई अड्डे पर सामान जाँच
गामा किरणें< 10⁻³ nmरेडियोधर्मी नाभिककैंसर कोशिकाएँ नष्ट करना, औज़ार कीटाणुरहित करना

सुरक्षा, सरल शब्दों में

तरंगदैर्घ्य जितना छोटा, ऊर्जा उतनी ज़्यादा। पराबैंगनी से धूप में जलन होती है; ओज़ोन परत इसका ज़्यादातर भाग रोकती है। एक्स और गामा किरणें कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं, इसलिए इनकी मात्रा कम रखी जाती है।

घर पर करके देखिए

टीवी रिमोट को फ़ोन के सामने वाले कैमरे की ओर करके बटन दबाइए। कैमरे में छोटी रोशनी चमकती दिखेगी। आँखें यह अवरक्त प्रकाश नहीं देखतीं, कैमरा देख लेता है। बीच में पानी का गिलास रखिए: फिर भी काम करता है। हाथ रखिए: रुक जाता है। फिर 3D में λ स्लाइडर से पता कीजिए कि रिमोट कौन-सा बैंड है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक FM स्टेशन 100 MHz पर प्रसारण करता है। तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।

चरण 1: c = fλ, इसलिए λ = c/f। चरण 2: λ = (3 × 10⁸) / (100 × 10⁶) = 3 m। उत्तर: 3 m (रेडियो बैंड)।

2. पीले प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 600 nm है। आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

चरण 1: f = c/λ। चरण 2: λ = 6 × 10⁻⁷ m। चरण 3: f = 3 × 10⁸ / 6 × 10⁻⁷ = 5 × 10¹⁴ Hz।

3. एक तरंग में B₀ = 2 × 10⁻⁸ T है। E₀ ज्ञात कीजिए।

चरण 1: E₀ = c B₀। चरण 2: E₀ = 3 × 10⁸ × 2 × 10⁻⁸ = 6 V/m।

4. λ = 1 nm वाली तरंग का बैंड और आवृत्ति बताइए।

चरण 1: 1 nm पराबैंगनी और एक्स-किरणों की सीमा पर है; इसे मृदु एक्स-किरण मानते हैं। चरण 2: f = 3 × 10⁸ / 10⁻⁹ = 3 × 10¹⁷ Hz।

5. 2 μF संधारित्र पर वोल्टता 5 × 10⁴ V/s की दर से बढ़ रही है। प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।

चरण 1: Q = CV, तो प्लेट में आने वाली धारा I = C dV/dt। चरण 2: खाली जगह में I_d इसी के बराबर है। चरण 3: I_d = 2 × 10⁻⁶ × 5 × 10⁴ = 0.1 A।

6. प्लेट का क्षेत्रफल 0.02 m² है और प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र 5 × 10¹² V/(m s) की दर से बदल रहा है। I_d ज्ञात कीजिए।

चरण 1: Φ_E = E × A, तो dΦ_E/dt = 0.02 × 5 × 10¹² = 10¹¹। चरण 2: I_d = ε₀ dΦ_E/dt = 8.85 × 10⁻¹² × 10¹¹ ≈ 0.885 A।

7. 5 × 10¹⁴ Hz का प्रकाश n = 1.5 वाले काँच में जाता है। काँच में चाल और तरंगदैर्घ्य बताइए।

चरण 1: v = c/n = 2 × 10⁸ m/s। चरण 2: नए माध्यम में आवृत्ति नहीं बदलती। चरण 3: λ = v/f = 2 × 10⁸ / 5 × 10¹⁴ = 400 nm।

8. दिखाइए कि 1/√(μ₀ε₀) प्रकाश की चाल देता है। (μ₀ = 4π × 10⁻⁷, ε₀ = 8.85 × 10⁻¹²)

चरण 1: μ₀ε₀ ≈ 1.112 × 10⁻¹⁷। चरण 2: इसका वर्गमूल ≈ 3.33 × 10⁻⁹। चरण 3: 1 / 3.33 × 10⁻⁹ ≈ 3 × 10⁸ m/s। यह प्रकाश की चाल है, इसलिए प्रकाश विद्युत चुंबकीय तरंग है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. विस्थापन धारा किससे बनती है?
2. सबसे छोटा तरंगदैर्घ्य किसका है?
3. तरंग में E और B के बीच कोण:
4. टीवी रिमोट में कौन-सी तरंग?
5. निर्वात में विद्युत चुंबकीय तरंगों की चाल:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विस्थापन धारा सरल शब्दों में क्या है?

बदलते विद्युत क्षेत्र से बनी "धारा", जैसे चार्ज होते संधारित्र की प्लेटों के बीच। यह सामान्य धारा की तरह चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। I_d = ε₀ dΦ_E/dt।

विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का क्रम क्या है?

रेडियो, सूक्ष्म तरंग, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, एक्स-किरणें, गामा किरणें: सबसे लंबे से सबसे छोटे तरंगदैर्घ्य तक।

विद्युत चुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ क्यों हैं?

क्योंकि विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र तरंग के चलने की दिशा से 90° पर कंपन करते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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