रडार
रडार (radio detection and ranging) घूमते एंटीना से माइक्रोवेव के बहुत छोटे स्पंद भेजता है और प्रतिध्वनि सुनता है। प्रतिध्वनि देने वाला लक्ष्य स्क्रीन पर चमकीले बिंदु जैसा दिखता है।
- परास: R = c × t / 2, जहाँ t स्पंद और प्रतिध्वनि के बीच का समय है और c = 3 × 10⁸ m/s। हर 1 µs के विलंब पर लक्ष्य 150 m दूर होता है।
- दिशा (बेयरिंग): प्रतिध्वनि लौटते समय एंटीना जिस ओर होता है।
- न्यूनतम परास: स्पंद भेजते समय रिसीवर बंद रहता है, इसलिए c × τ / 2 (τ = स्पंद की लंबाई) से पास के लक्ष्य छूट जाते हैं। 1 µs के स्पंद पर 150 m।
- अधिकतम परास: रेडियो क्षितिज, स्पंद पुनरावृत्ति आवृत्ति (प्रतिध्वनि अगले स्पंद से पहले लौटे) और शक्ति से सीमित।
- भाग: ट्रांसमीटर (मैग्नेट्रॉन), सर्कुलेटर (एक एंटीना भेजने और लेने के लिए), घूमता एंटीना, रिसीवर, डिस्प्ले।
- बारिश और समुद्री लहरों की गड़बड़ (क्लटर) रडार को भ्रमित कर सकती है; ऑपरेटर गेन और क्लटर नियंत्रण ठीक करता है।
उपग्रह नौवहन उपकरण
GPS जैसे GNSS (वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली) में लगभग 24 या अधिक उपग्रह करीब 20,000 km ऊँचाई पर होते हैं। हर एक अपनी स्थिति और सटीक समय भेजता है। रिसीवर नापता है कि संकेत को कितना समय लगा, c से गुणा करके उस उपग्रह से अपनी दूरी निकालता है। रिसीवर हर उपग्रह के चारों ओर एक गोले पर होता है। तीन गोले दो बिंदुओं पर मिलते हैं, और एक साफ़ गलत होता है, इसलिए तीन उपग्रह स्थिति दे देते हैं। पर रिसीवर की घड़ी सस्ती और थोड़ी गलत होती है। चौथा उपग्रह रिसीवर को अपनी घड़ी की गलती ठीक करने देता है। इस तरह चार उपग्रह अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई और समय देते हैं।
स्थिति में कुछ मीटर की गलती हो सकती है। डिफ़रेंशियल GPS (DGPS) ज्ञात स्थिति वाले स्थिर स्टेशन से सुधार भेजकर गलती 1 मीटर या कम कर देता है। भारत की प्रणाली NavIC है, यूरोप की गैलीलियो, रूस की ग्लोनास और चीन की बाइदू। रिसीवर ज़मीन के सापेक्ष चाल और दिशा भी दिखाता है और दिन का समय भी दे सकता है।
सोनार
सोनार (sound navigation and ranging) ध्वनि उपयोग करता है, क्योंकि रेडियो तरंगें समुद्री जल में कुछ मीटर में सोख ली जाती हैं, पर ध्वनि दूर जाती है। जहाज़ के तल पर लगा ट्रांसड्यूसर बिजली के स्पंद को ध्वनि की पिंग (अक्सर 20 से 200 kHz, दाब-विद्युत प्रभाव से) बनाता है और बाद में प्रतिध्वनि को वापस बिजली का संकेत बनाता है।
- इको साउंडर: सीधा नीचे की ओर। गहराई = v × t / 2, समुद्री जल में v ≈ 1500 m/s।
- फ़िश फ़ाइंडर: वही, पर तल के ऊपर मछलियाँ निशान के रूप में दिखती हैं।
- अग्र-दर्शी और साइड-स्कैन सोनार: चट्टानें, मलबे और उथली जगहें आगे या बगल में देखते हैं।
- डॉप्लर लॉग: समुद्र-तल से लौटी ध्वनि की आवृत्ति-शिफ़्ट से जहाज़ की चाल नापता है।
ध्वनि की चाल तापमान, लवणता और गहराई से थोड़ी बदलती है, इसलिए यंत्र को सामान्य मान पर सेट किया जाता है।
अन्य इलेक्ट्रॉनिक नौवहन उपकरण
- जायरोकम्पास: घूमता पहिया जो सही उत्तर पर टिकता है। यह चुंबकों पर निर्भर नहीं और जहाज़ के लोहे से भ्रमित नहीं होता।
- ऑटोपायलट: अधिकारी द्वारा तय दिशा पर जहाज़ को चलाए रखता है।
- चाल और दूरी लॉग: पानी के सापेक्ष या ज़मीन के सापेक्ष चाल नापता है।
- AIS (स्वचालित पहचान प्रणाली): हर जहाज़ VHF से अपना नाम, स्थिति, दिशा और चाल भेजता है, जिसे दूसरे जहाज़ स्क्रीन पर देखते हैं।
- ECDIS: इलेक्ट्रॉनिक चार्ट प्रणाली जो नक्शा, जहाज़ की GPS स्थिति और उथले पानी की चेतावनी दिखाती है।
- VDR (यात्रा डेटा रिकॉर्डर): जहाज़ का ब्लैक बॉक्स।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रडार परास: R = c × t / 2, c = 3 × 10⁸ m/s
- रडार प्रतिध्वनि का 1 µs विलंब = 150 m परास
- न्यूनतम रडार परास = c × τ / 2 (τ = स्पंद की लंबाई)
- सोनार गहराई: d = v × t / 2, समुद्री जल में v ≈ 1500 m/s
- उपग्रह से GNSS दूरी: d = c × t (t = संकेत का यात्रा-समय)
- 4 उपग्रह चाहिए: स्थिति के लिए 3 और घड़ी की गलती के लिए 1
हल किए गए उदाहरण
1. रडार की प्रतिध्वनि 80 µs बाद लौटती है। लक्ष्य कितनी दूर है?
R = c × t / 2 = 3 × 10⁸ × 80 × 10⁻⁶ / 2 = 12,000 m = 12 km।
2. एक रडार 0.5 µs का स्पंद उपयोग करता है। उसका न्यूनतम परास कितना है?
R_min = c × τ / 2 = 3 × 10⁸ × 0.5 × 10⁻⁶ / 2 = 75 m। 75 m से पास के लक्ष्य नहीं दिखते।
3. इको साउंडर को 0.08 s बाद प्रतिध्वनि मिलती है। पानी की गहराई कितनी है? (v = 1500 m/s)
d = v × t / 2 = 1500 × 0.08 / 2 = 60 m।
4. GPS संकेत रिसीवर तक पहुँचने में 0.07 s लेता है। उपग्रह कितनी दूर है?
d = c × t = 3 × 10⁸ × 0.07 = 2.1 × 10⁷ m = 21,000 km।
5. एक रडार में अगला स्पंद पहले के 1 ms बाद निकलता है। बिना भ्रम के दिखने वाला सबसे बड़ा परास कितना है?
प्रतिध्वनि अगले स्पंद से पहले लौटनी चाहिए: R_max = c × T / 2 = 3 × 10⁸ × 10⁻³ / 2 = 150,000 m = 150 km।
आम गलतियाँ
- 2 से भाग देना भूल जाना। स्पंद लक्ष्य तक जाता और लौटता है, इसलिए एक तरफ़ की दूरी चाल × समय की आधी है।
- सोनार के लिए प्रकाश की चाल लेना। सोनार ध्वनि उपयोग करता है, समुद्री जल में लगभग 1500 m/s।
- मानना कि व्यवहार में तीन उपग्रह काफ़ी हैं। चौथा घड़ी की गलती ठीक करता है।
- सोचना कि रडार क्षितिज के पार देख लेता है। रडार तरंगें सीधी चलती हैं, इसलिए परास रेडियो क्षितिज से सीमित है।