प्रत्यक्ष तापन उपकरण की संरचना
"प्रत्यक्ष तापन" का मतलब है कि गर्मी सीधे गर्म वस्तु (रेडिएटर या हीटर) से कमरे में जाती है। गर्म पानी की प्रणाली के भाग:
- बॉयलर: गैस, तेल या लकड़ी जलाकर, या बिजली अथवा हीट पंप से पानी गर्म करता है (सामान्यतः 55 से 80 °C)।
- परिसंचरण पंप: पानी को लूप में घुमाता है।
- आपूर्ति पाइप (गर्म) और वापसी पाइप (ठंडा)।
- रेडिएटर: बड़ी सतह वाले धातु के पैनल जो गर्म सतह और हवा की गति (संवहन) से गर्मी देते हैं।
- विस्तार टंकी: ठंडे से 80 °C तक पानी लगभग 3 प्रतिशत बढ़ जाता है। इस टंकी में हवा का गद्दा या रबर की थैली होती है जो बढ़ा हुआ आयतन सोख लेती है। इसके बिना दाब बढ़ता है और सुरक्षा वाल्व खुल जाता है।
- एयर वेंट: फँसी हवा निकालता है ताकि रेडिएटर में ठंडे धब्बे न बनें।
- वाल्व: थर्मोस्टैटिक रेडिएटर वाल्व (TRV) कमरे के तापमान के हिसाब से खुलता-बंद होता है।
प्रणाली बंद है: वही पानी बार-बार घूमता है। केवल गर्मी बाहर जाती है।
प्रत्यक्ष तापन और पाइपिंग का डिज़ाइन
चरण 1: हर कमरा कितनी गर्मी खोता है?
दीवार, खिड़की या छत से ऊष्मा-हानि Q = U × A × ΔT है। यहाँ U बताता है कि गर्मी कितनी आसानी से गुज़रती है (W/m²K), A क्षेत्रफल है और ΔT अंदर-बाहर का तापांतर। सभी दीवारें, खिड़कियाँ और हवा का रिसाव जोड़िए। रेडिएटर को कम से कम इतनी गर्मी देनी है।
चरण 2: कितना पानी बहेगा?
पानी से ले जाई गई गर्मी Q = m × c × ΔT है, c = 4.186 kJ/kg·K। ΔT चुनिए (जैसे आपूर्ति और वापसी में 20 K)। तब प्रवाह निकल आता है। लीटर प्रति घंटा में: Q (kW) = प्रवाह × 4.186 × ΔT ÷ 3600।
चरण 3: पाइप का आकार
पाइप का क्षेत्रफल A = प्रवाह ÷ गति। पानी की गति लगभग 0.3 से 1 m/s रखिए। तेज़ पानी शोर करता है और पाइप घिसता है; धीमे पानी के लिए चौड़े, महँगे पाइप चाहिए।
चरण 4: व्यवस्था
- द्वि-पाइप प्रणाली: हर रेडिएटर गर्म आपूर्ति और वापसी से जुड़ता है। सबको लगभग समान तापमान मिलता है। सबसे आम।
- एक-पाइप प्रणाली: एक ही लूप सभी रेडिएटरों से क्रम में गुज़रता है; आख़िरी रेडिएटर ठंडा रहता है।
- संतुलन वाल्व प्रवाह बाँटते हैं ताकि दूर के कमरों को भी पर्याप्त मिले।
- पाइप हल्का सा एयर वेंट की ओर ढलान में रखते हैं और फैलाव के लिए मोड़ या लूप देते हैं।
- ठंडी जगह से गुज़रते पाइप पर इन्सुलेशन लगाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Q = m × c × ΔT (पानी से ले जाई गई गर्मी, c = 4.186 kJ/kg·K)
- Q (kW) = प्रवाह (L/h) × 4.186 × ΔT ÷ 3600
- ऊष्मा-हानि: Q = U × A × ΔT
- पाइप का क्षेत्रफल A = प्रवाह ÷ गति; d = √(4A ÷ π)
- 10 °C से 80 °C तक पानी लगभग 3 प्रतिशत फैलता है
हल किए गए उदाहरण
1. एक कमरा 2 kW खोता है। आपूर्ति और वापसी में 20 K का अंतर है। पानी का प्रवाह L/h में निकालिए।
Q = प्रवाह × 4.186 × ΔT ÷ 3600, इसलिए प्रवाह = 2 × 3600 ÷ (4.186 × 20) = 7200 ÷ 83.7 = 86 L/h।
2. एक लूप 500 L/h ले जाता है और ΔT = 15 K है। वह कितनी गर्मी पहुँचाता है?
Q = 500 × 4.186 × 15 ÷ 3600 = 8.72 kW।
3. एक कमरे की दीवारों, खिड़कियों और छत का कुल क्षेत्रफल 30 m² है, औसत U = 0.6 W/m²K। अंदर 20 °C, बाहर 0 °C। ऊष्मा-हानि निकालिए।
Q = U × A × ΔT = 0.6 × 30 × 20 = 360 W।
4. एक पाइप को 0.8 m/s पर 0.3 L/s ले जाना है। पाइप का व्यास निकालिए।
प्रवाह = 0.3 L/s = 0.0003 m³/s। A = 0.0003 ÷ 0.8 = 0.000375 m²। d = √(4 × 0.000375 ÷ 3.14) = 0.0219 m, लगभग 22 mm। अगला मानक आकार 22 mm लीजिए।
5. एक प्रणाली में 1000 L पानी है। उसे 10 °C से 80 °C तक गर्म करने पर वह 3 प्रतिशत बढ़ता है। विस्तार टंकी को कितना आयतन सोखना होगा?
1000 L का 3 प्रतिशत = 30 L। टंकी को कम से कम 30 L सोखना होगा (और थोड़ा सुरक्षा-अंतर)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पानी में गर्मी ख़र्च हो जाती है। पानी केवल गर्मी ले जाता है; रेडिएटर उसे कमरे को देता है।
- विस्तार टंकी भूल जाना। गर्म पानी ज़्यादा जगह लेता है और दाब पाइप फाड़ सकता है।
- kW और W, या L/h और L/s की गड़बड़। 1 kW = 1000 W; 1 L/s = 3600 L/h।
- पैसे बचाने के लिए पाइप बहुत पतला रखना। पानी की गति बढ़ती है, पाइप सीटी बजाता है और जल्दी घिसता है।