द्रवों के गुण और यांत्रिकी
द्रव (fluid) यानी तरल या गैस। इसके कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं, इसलिए यह बह सकता है। मशीनों के लिए तीन बातें ज़रूरी हैं:
- घनत्व (ρ): आकार के हिसाब से कितना भारी है। पानी लगभग 1000 kg प्रति m³ है। हवा लगभग 1.2 kg प्रति m³।
- दाब (p): हर वर्ग मीटर पर लगने वाला धक्का। p = F / A। मात्रक पास्कल (Pa), 1 Pa = 1 N प्रति m²।
- बहाव दर (Q): हर सेकंड कितना द्रव निकलता है। Q = A × v, जहाँ A पाइप का क्षेत्रफल और v चाल है। मात्रक: m³ प्रति सेकंड।
तरल को दबाना लगभग असंभव है। गैस आसानी से दब जाती है। इसी फ़र्क से तय होता है कि कौन-सी मशीन चुनें।
पास्कल का नियम: बंद बर्तन में द्रव पर लगाया गया दाब हर दिशा में बराबर पहुँचता है।
जल टरबाइन और पंप
पंप तरल को ऊर्जा देता है। आम पंप अपकेंद्री पंप (centrifugal pump) है। मोटर इम्पेलर को घुमाती है। पंखुड़ियों के बीच का पानी बाहर की ओर फिंकता है, तेज़ गति से निकलता है और पाइप में ऊपर चढ़ जाता है। बीच से नया पानी अंदर आता रहता है।
जल टरबाइन इसका उलटा करता है। बहता या गिरता पानी पंखुड़ियों से टकराकर चक्र को घुमाता है। चक्र जनित्र को घुमाता है। पानी की ऊर्जा बिजली बन जाती है।
- आवेग टरबाइन (ऊँचे बाँध, ज़्यादा ऊँचाई): पानी की तेज़ धार किनारे के प्यालों पर लगती है।
- प्रतिक्रिया टरबाइन (कम ऊँचाई, ज़्यादा बहाव): पूरा चक्र पानी में डूबा रहता है और गुज़रता पानी पंखुड़ियों को धकेलता है।
पंप की शक्ति: P = ρ g Q H (H = उठाई गई ऊँचाई)। टरबाइन की निर्गत शक्ति η ρ g Q H है, जहाँ η दक्षता (1 से कम) है।
पंखे और कंप्रेसर
ये मशीनें गैस (हवा) के लिए हैं।
- पंखा: पंखुड़ियाँ घुमाकर बहुत हवा चलाता है, दाब बहुत थोड़ा बढ़ता है। ठंडक और हवा-बदली के काम आता है।
- ब्लोअर: ज़्यादा ज़ोर का पंखा, दाब मध्यम बढ़ता है।
- कंप्रेसर: हवा को बहुत ऊँचे दाब तक दबाता है। यह पिस्टन वाला (पारस्परिक) या घूमती पंखुड़ियों वाला (अपकेंद्री या अक्षीय) हो सकता है।
हवा दबाने पर उसका आयतन घटता है और दाब बढ़ता है। साथ ही वह गर्म भी होती है, इसलिए बड़े कंप्रेसर में ठंडक का इंतज़ाम होता है। साइकिल के पंप और एसी की बाहरी यूनिट में छोटा कंप्रेसर होता है।
हाइड्रोलिक और वायवीय उपकरण
हाइड्रोलिक उपकरण तरल (तेल) से चलते हैं। वायवीय (pneumatic) उपकरण दबी हुई हवा से चलते हैं।
तेल भरी नली से जुड़े दो पिस्टन लीजिए। छोटे पिस्टन (क्षेत्रफल A₁) पर छोटा बल F₁ लगाने से दाब p = F₁ / A₁ बनता है। यही दाब बड़े पिस्टन (क्षेत्रफल A₂) को धकेलता है, इसलिए
F₂ = F₁ × (A₂ / A₁)
बड़े पिस्टन पर बल बड़ा मिलता है, पर वह थोड़ी दूरी ही चलता है। ऊर्जा मुफ़्त नहीं मिलती: बल × दूरी वही रहता है (हानि छोड़कर)।
- हाइड्रोलिक: बहुत बड़े बल, चिकना और धीमा। उदाहरण: कार-लिफ़्ट, प्रेस, खुदाई मशीन की भुजा, ब्रेक।
- वायवीय: साफ़, तेज़, हल्का। हवा दब जाती है, इसलिए कमानी जैसा लगता है। उदाहरण: बस के एयर-ब्रेक, दाँत के डॉक्टर की ड्रिल, फ़ैक्टरी के क्लैंप।
मुख्य हिस्से: पंप या कंप्रेसर (आपूर्ति), वाल्व (दिशा तय करते हैं), नलियाँ और एक्चुएटर (सिलिंडर या मोटर जो काम करता है)।
करके देखिए: घर पर दाब महसूस करें
दो अलग आकार की प्लास्टिक सिरिंज (बिना सुई) और एक छोटी नली लीजिए। दोनों और नली में पानी भर दीजिए। छोटी सिरिंज को एक उँगली से दबाइए और बड़ी को दूसरे हाथ से पकड़िए। महसूस कीजिए कि बड़ी सिरिंज ज़्यादा ज़ोर से पीछे धकेलती है, पर कम चलती है। 3D के स्लाइडर से जाँचिए: बड़े पिस्टन पर बल 10 गुना है, पर वह दसवाँ हिस्सा ही ऊपर उठता है। पहले अनुमान लगाइए, फिर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Q = A × v (बहाव दर)
- p = F / A (दाब)
- F₂ / F₁ = A₂ / A₁ (हाइड्रोलिक लिफ़्ट)
- P = ρ g Q H (पंप की शक्ति); टरबाइन: P = η ρ g Q H
हल किए गए उदाहरण
1. पानी 3 m/s की चाल से 0.02 m² क्षेत्रफल वाले पाइप में बह रहा है। बहाव दर निकालिए।
Q = A × v = 0.02 × 3 = 0.06 m³/s। यानी हर सेकंड 60 लीटर।
2. 40 N का बल 2 cm² के छोटे पिस्टन पर लगता है। बड़े पिस्टन का क्षेत्रफल 50 cm² है। बड़े पिस्टन पर बल निकालिए।
क्षेत्रफलों का अनुपात = 50 / 2 = 25। F₂ = 40 × 25 = 1000 N। बड़ा पिस्टन 1000 N देता है पर 25 गुना कम दूरी चलता है।
3. एक पंप हर सेकंड 0.01 m³ पानी 10 m ऊँचाई तक चढ़ाता है। पानी को मिलने वाली शक्ति निकालिए। (ρ = 1000 kg/m³, g = 9.8 m/s²)
P = ρ g Q H = 1000 × 9.8 × 0.01 × 10 = 980 W, लगभग 1 kW। हानि के कारण मोटर को इससे ज़्यादा चाहिए।
4. एक टरबाइन को हर सेकंड 2 m³ पानी 50 m ऊँचाई से मिलता है। दक्षता 80% है। बिजली की शक्ति निकालिए। (g = 9.8)
P = η ρ g Q H = 0.8 × 1000 × 9.8 × 2 × 50 = 784 000 W = 784 kW।
आम गलतियाँ
- ऐसा सोचना कि पंप पानी बनाता है। पंप केवल पानी को चलाता है और ऊर्जा देता है।
- हाइड्रोलिक अनुपात में व्यास को क्षेत्रफल समझ लेना। क्षेत्रफल व्यास के वर्ग पर चलता है: व्यास दोगुना तो क्षेत्रफल 4 गुना।
- हाइड्रोलिक जैक से मुफ़्त ऊर्जा मिलने की सोच। बड़ा पिस्टन कम चलता है, इसलिए किया गया कार्य बराबर रहता है (हानि छोड़कर)।
- पंखे और कंप्रेसर को एक समझना। पंखा हवा आसानी से चलाता है, कंप्रेसर हवा को ऊँचे दाब तक दबाता है।