बॉयलर
बॉयलर बंद इस्पात का बर्तन है जो पानी को भाप बनाता है। भट्ठी (फ़र्नेस) में ईंधन (कोयला, तेल, गैस या लकड़ी) जलता है और गर्म गैसें पानी के पास से गुज़रती हैं। भाप पाइप से इंजन, टरबाइन, गर्म करने, सफ़ाई या खाना पकाने में जाती है।
- फ़ायर-ट्यूब बॉयलर: गर्म गैस नलियों के अंदर, पानी बाहर। सादा, कम दाब।
- वाटर-ट्यूब बॉयलर: पानी नलियों के अंदर, गर्म गैस बाहर। ऊँचे दाब की भाप जल्दी बनती है; बिजलीघरों और बड़े जहाज़ों में।
सुरक्षा के पुर्ज़े: दाब मापी (दाब बताती है), सेफ़्टी वाल्व (दाब ज़्यादा होने पर खुलता है), जल-स्तर मापी (पानी बहुत कम न हो, वरना धातु ज़्यादा गर्म हो जाती है), फ़ीड पंप (पानी भरता है), स्टॉप वाल्व (भाप खोलता या बंद करता है)।
हिमीकरण और प्रशीतन (रेफ्रिजरेशन) उपकरण
प्रशीतन का मतलब है गर्मी को ठंडी जगह से गर्म जगह पहुँचाना। इसके लिए काम करना पड़ता है, जो कंप्रेसर करता है। एक खास द्रव-गैस, प्रशीतक (रेफ्रिजरेंट), बंद चक्र में चार मुख्य पुर्ज़ों से गुज़रता है:
- कंप्रेसर: गैस को दबाता है, वह गर्म और ऊँचे दाब की हो जाती है।
- कंडेंसर: गर्म गैस बाहर की हवा या पानी को गर्मी देती है और द्रव बन जाती है।
- विस्तार वाल्व: संकरा छेद; दाब गिरता है और द्रव बहुत ठंडा हो जाता है।
- वाष्पक (इवैपोरेटर): ठंडा द्रव खाने की जगह से गर्मी लेकर उबलता है और गैस बन जाता है। गैस फिर कंप्रेसर में जाती है।
फ्रिज, फ्रीज़र, कोल्ड स्टोर और मछली के भंडार को ठंडा रखने में यही काम आता है। फ्रीज़र फ्रिज (लगभग 4 °C) से ज़्यादा ठंडा (लगभग −18 °C) चलता है। थर्मोस्टैट कंप्रेसर को चालू-बंद करता है।
एयर कंडीशनिंग उपकरण
एयर कंडीशनर में वही चार पुर्ज़ों का चक्र है, पर उसका काम कमरे की हवा सँभालना है: तापमान, नमी, सफ़ाई और हवा का बहाव। कमरे की हवा ठंडे वाष्पक पर फेंकी जाती है; वह गर्मी और भाप (जो पानी बनकर टपकती है) छोड़ देती है, और ठंडी सूखी हवा कमरे में लौटती है। कंडेंसर वाली इकाई बाहर लगती है और गर्मी उड़ा देती है।
अन्य पुर्ज़े: पंखा या ब्लोअर, एयर फ़िल्टर, थर्मोस्टैट और डक्ट। हीट पंप ऐसा एसी है जो उलटा चलकर कमरा गर्म भी कर सकता है। जहाज़ों और मछली प्रसंस्करण संयंत्रों में भी बड़े एसी और ठंडक संयंत्र लगते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वाष्पक में ली गर्मी + कंप्रेसर का काम = कंडेंसर में छोड़ी गर्मी
- निष्पादन गुणांक COP = निकाली गई गर्मी / किया गया काम
- बॉयलर दक्षता = भाप को मिली गर्मी / ईंधन की गर्मी × 100%
- दाब: 1 bar ≈ वायुमंडलीय दाब (100 kPa)
हल किए गए उदाहरण
1. फ्रिज खाने से 600 J गर्मी निकालता है और कंप्रेसर 200 J काम करता है। COP और पीछे से निकली गर्मी बताओ।
COP = 600 / 200 = 3। निकली गर्मी = 600 + 200 = 800 J।
2. बॉयलर में ईंधन से 5000 kJ गर्मी मिली। भाप को 4000 kJ मिली। दक्षता निकालो।
दक्षता = 4000 / 5000 × 100 = 80%।
3. एक एसी कमरे से 3.0 kW गर्मी निकालता है और 1.0 kW बिजली लेता है। कंडेंसर से हर सेकंड कितनी गर्मी निकलती है?
निकली गर्मी = 3.0 + 1.0 = 4.0 kW, यानी हर सेकंड 4000 J।
4. सेफ़्टी वाल्व को बॉयलर की दीवार सहने वाले दाब से कम पर क्यों लगाते हैं?
ताकि दीवार पर सीमा तक ज़ोर पड़ने से पहले ही वाल्व खुलकर भाप निकाल दे और विस्फोट न हो।
आम गलतियाँ
- सोचना कि फ्रिज ठंडक बनाता है। वह सिर्फ़ गर्मी बाहर निकालता है; रसोई थोड़ी गर्म हो जाती है।
- पुर्ज़े उलट देना: कंडेंसर गर्म है और गर्मी छोड़ता है; वाष्पक ठंडा है और गर्मी सोखता है।
- मानना कि बॉयलर कम पानी में भी चल सकता है। इससे धातु ज़्यादा गर्म होकर कमज़ोर हो जाती है।
- सेफ़्टी वाल्व को ज़रूरी न समझना। वही मुख्य सुरक्षा पुर्ज़ा है।