खाद्य निर्माण की मशीनें: पूरी तस्वीर
छोटी रसोई एक परिवार के लिए पकाती है। फैक्ट्री एक दिन में हज़ारों पैक बनाती है, इसलिए वह मशीनें इस्तेमाल करती है। ये कुछ समूहों में बँटी हैं:
- ले जाना और धोना: बेल्ट, पंप, वॉशर।
- काटना और आकार देना: कटर, फ़िलेट मशीन, मिक्सर, साँचे।
- गरम करना: कुकर, ओवन, ड्रायर, स्टरलाइज़र (रिटॉर्ट)। इन्हें गर्मी चाहिए, जो अक्सर बॉयलर की भाप से मिलती है।
- ठंडा करना: चिलर, फ्रीज़र, कोल्ड स्टोर। इन्हें रेफ्रिजरेशन मशीन चाहिए।
- पैक और जाँच: भरना, सील करना, मेटल डिटेक्टर, तौलना।
अच्छी मशीनें स्टेनलेस स्टील की होती हैं, क्योंकि उसमें जंग नहीं लगता और धोना आसान है। मशीन साफ़ करने में आसान, मज़दूरों के लिए सुरक्षित हो और खाने में कुछ गिराए नहीं।
बॉयलर: भाप बनाना
बॉयलर स्टील की बंद टंकी है। उसके नीचे या अंदर भट्ठी में ईंधन (गैस, तेल, कोयला या लकड़ी का कचरा) जलता है। गर्मी से पानी उबलता है और भाप बनती है। भाप में बहुत गर्मी होती है, और ठंडी चीज़ को छूकर वह फिर पानी बनती है और अपनी गर्मी दे देती है। इसीलिए भाप पकाने, सुखाने और कीटाणु मारने में बहुत अच्छी है।
भाप कहाँ काम आती है: मछली और केकड़ा पकाना, रिटॉर्ट के डिब्बे गरम करना, मशीनें साफ़ करना, धोने का पानी गरम करना।
हर बॉयलर के सुरक्षा पुर्ज़े:
- प्रेशर गेज बताता है भाप कितनी तेज़ है।
- सेफ़्टी वाल्व दबाव बहुत बढ़ने पर खुद खुलकर भाप बाहर निकाल देता है।
- वॉटर-लेवल गेज पानी की ऊँचाई दिखाता है। टंकी सूख गई तो वह ज़्यादा गरम होकर फट सकती है।
- फ़ीड-वॉटर पंप ताज़ा पानी डालता है।
बॉयलर की जाँच प्रशिक्षित लोग तय समय पर करें, और बड़े बॉयलर केवल लाइसेंस वाले चलाएँ। कठोर पानी सफ़ेद परत (स्केल) छोड़ता है, इसलिए पानी का उपचार होता है।
फ्रीज़िंग और रेफ्रिजरेशन मशीनें
ठंडक अपने आप नहीं आती। रेफ्रिजरेशन मशीन ठंडे कमरे के अंदर की गर्मी को बाहर की हवा में पहुँचाती है। एक ख़ास गैस (रेफ्रिजरेंट, बड़े प्लांट में जैसे अमोनिया) चार हिस्सों वाले बंद लूप में घूमती है:
- इवैपोरेटर (वाष्पक): फ्रीज़र के अंदर। ठंडा द्रव उबलकर गैस बनता है और मछली व हवा से गर्मी खींचता है।
- कंप्रेसर: गैस को दबाता है। वह गरम और ऊँचे दबाव की हो जाती है। यह लूप की मोटर है।
- कंडेंसर (संघनित्र): बाहर। गरम गैस अपनी गर्मी हवा या पानी को देकर द्रव बन जाती है।
- एक्सपेंशन वाल्व: तंग छेद। दबाव अचानक गिरता है और द्रव बहुत ठंडा हो जाता है। फिर वह दोबारा इवैपोरेटर में जाता है।
मछली के लिए फ्रीज़र के प्रकार:
- एयर-ब्लास्ट फ्रीज़र: बहुत ठंडी हवा मछली पर फेंकी जाती है।
- कॉन्टैक्ट (प्लेट) फ्रीज़र: मछली के ब्लॉक ठंडी धातु की प्लेटों के बीच दबाए जाते हैं। चपटे ब्लॉक के लिए तेज़।
- ब्राइन या इमर्शन फ्रीज़र: मछली बहुत ठंडे नमकीन पानी में डाली जाती है। मछली पकड़ने वाली नावों पर काम आता है।
- IQF (अलग-अलग तेज़ जमाना): हर झींगा या फ़िलेट अलग-अलग जमता है, इसलिए चिपकते नहीं।
जमी मछली कोल्ड स्टोर में -18 °C या उससे ठंडी रखी जाती है (कच्चा खाने वाली चर्बीदार ट्यूना अक्सर बहुत ठंडी, लगभग -50 °C पर रखी जाती है)। तापमान स्थिर रहना चाहिए: बार-बार गरम-ठंडा होने से बर्फ़ के बड़े कण बनते हैं जो बनावट बिगाड़ते हैं। अमोनिया का रिसाव ख़तरनाक है, इसलिए प्लांट में गैस अलार्म लगे होते हैं।
खुद करके देखो
3D में: पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो। आँच का स्लाइडर 0 पर करो। क्या भाप बहेगी? (नहीं।) अब उसे 100 करो। क्या मछली जल्दी पकती है? फिर फ्रीज़र को -30 करो। क्या मछली -18 से भी ज़्यादा ठंडी होती है?
घर पर: चलते फ्रिज के पीछे हाथ रखकर देखो (बहुत गरम हों तो नलियाँ मत छूना)। वह गरम हवा तुम्हारे खाने के डिब्बे से निकली गर्मी है। प्रेशर कुकर भी देखो: अंदर पानी उबलता है तो वेंट से भाप निकलती है। किसी बड़े की मदद लो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बॉयलर: ईंधन की गर्मी → पानी → भाप → पकाना, कीटाणु मारना, सफ़ाई
- रेफ्रिजरेशन लूप: इवैपोरेटर → कंप्रेसर → कंडेंसर → एक्सपेंशन वाल्व → इवैपोरेटर
- गर्मी ठंडे कमरे से बाहर निकाली जाती है, इसलिए कंडेंसर वाला हिस्सा गरम रहता है
- जमे खाने का सुरक्षित भंडारण: -18 °C या उससे ठंडा
- तापमान में गिरावट = शुरू का तापमान − अंत का तापमान
- समय = मछली की मात्रा ÷ जमने की दर
हल किए गए उदाहरण
1. मछली 8 °C पर फ्रीज़र में आती है और उसे -18 °C तक पहुँचना है। कितने डिग्री ठंडी होनी चाहिए?
गिरावट = 8 − (−18) = 8 + 18 = 26 °C।
2. एक प्लेट फ्रीज़र हर घंटे 150 kg मछली के ब्लॉक जमाता है। 600 kg जमाने में कितना समय लगेगा?
समय = 600 ÷ 150 = 4 घंटे।
3. बॉयलर एक घंटे में 250 kg भाप बनाता है। कुकर एक बैच में 40 kg भाप लेता है। एक घंटे में कितने बैच चल सकते हैं?
बैच = 250 ÷ 40 = 6.25, यानी 6 पूरे बैच (बची भाप सातवें के लिए काफ़ी नहीं)।
4. रेफ्रिजरेशन लूप में गैस गर्मी कहाँ लेती है और कहाँ देती है?
वह इवैपोरेटर (फ्रीज़र के अंदर) में गर्मी लेती है और कंडेंसर (बाहर) में गर्मी देती है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि फ्रीज़र "ठंडक बनाता" है। वह सिर्फ़ गर्मी को अंदर से बाहर ले जाता है।
- सेफ़्टी वाल्व और वॉटर-लेवल गेज को भूल जाना। इनके बिना बॉयलर फट सकता है।
- इवैपोरेटर (ठंडा, अंदर) और कंडेंसर (गरम, बाहर) को उलझा देना।
- जमी मछली को -5 °C पर रखना। सुरक्षित भंडारण -18 °C या उससे ठंडा है।