Japan 高校(専門学科)1〜3年 Fisheries and Marine
अध्याय: 22
1. Basic Fisheries and Marine Science
Outline of the sea · Outline of fisheries and marine industries · Basic practice
- महासागर: समुद्र तल, चलता पानी और जीवन – महासागर पृथ्वी का लगभग 71% भाग ढकते हैं। उनके तल पर उथला महाद्वीपीय शेल्फ़, खड़ी ढलान, गहरा मैदान, पानी के नीचे कटक और बहुत गहरी खाइयाँ हैं। पानी तीन तरह चलता है: लहरें (हवा से), ज्वार-भाटा (चंद्रमा के खिंचाव से) और धाराएँ (समुद्र की नदियाँ, गरम और ठंडी)। महासागर मछली, नमक, तेल-गैस और व्यापार मार्ग देते हैं और करोड़ों लोगों की रोज़ी हैं। चक्रवात और सुनामी समुद्री आपदाएँ हैं; पहले की चेतावनी जान बचाती है। अंतरराष्ट्रीय नियम (UNCLOS) तय करते हैं कि देश के समुद्री अधिकार कहाँ तक हैं: 12 समुद्री मील प्रादेशिक सागर और 200 मील का अनन्य आर्थिक क्षेत्र।
- मत्स्य पालन और जल-कृषि: समुद्र से थाली तक – मत्स्यन (fisheries) का अर्थ है जंगली मछली और जलीय जीवों को पकड़ना (पकड़ मत्स्यन), जबकि जल-कृषि (aquaculture) का अर्थ है मछली, झींगा, सीप या शैवाल को पालना। ज़्यादातर जंगली मछली उथले महाद्वीपीय मग्नतट और उत्प्रवाह (upwelling) वाले क्षेत्रों में पकड़ी जाती है, जहाँ पोषक तत्व प्लवक को भोजन देते हैं। फिर मछली एक शृंखला से गुज़रती है: बंदरगाह और बर्फ़, प्रसंस्करण (साफ़ करना, जमाना, सुखाना, डिब्बाबंदी), शीत भंडार और बाज़ार या निर्यात। जब पकड़ प्राकृतिक बढ़त से ज़्यादा हो, तो स्टॉक गिर जाता है: अति-मत्स्यन। अच्छे प्रबंधन में पकड़ की सीमा, बंद मौसम, जाल के छेद के नियम, संरक्षित क्षेत्र और ज़िम्मेदार जल-कृषि आते हैं।
- मत्स्य अभ्यास की बुनियाद: जमा करना, पालना, प्रसंस्करण और समुद्र में काम – मत्स्य अभ्यास के चार काम हैं। जमा करना: जाल अपने छेद से बड़े जीव रोकता है। पालना: मछली को प्रति लीटर कम से कम 5 mg ऑक्सीजन चाहिए; 3 mg से कम हो तो ख़तरा है। प्रसंस्करण: ठंडी मछली बहुत देर ताज़ी रहती है, इसलिए तुरंत ठंडा करो। समुद्री काम: मौसम देखो, लाइफ़ जैकेट पहनो और बड़ी लहरों में छोटी नाव बंदरगाह में रखो।
2. Research Project
Investigation, research and experiments · Making works · Practice at industrial sites · Obtaining vocational qualifications
- चीज़ें बनाना: विचार से प्रोटोटाइप तक – कोई चीज़ बनाने के लिए हम योजना बनाते हैं, सामान चुनते हैं, नापकर निशान लगाते हैं, काटते हैं, जोड़ते हैं, सजाते-चमकाते हैं, जाँचते हैं और फिर सुधारते हैं। पहला चलने वाला नमूना प्रोटोटाइप कहलाता है। हर क़दम में सही औज़ार सुरक्षित तरीक़े से चलता है। जाँच बताती है क्या बदलना है, और अच्छा बनाने वाला यह चक्र तब तक दोहराता है जब तक चीज़ बढ़िया न चले।
3. Comprehensive Practice
Ocean fishing practice · Ocean engineering practice · Telecommunications practice · Resource enhancement practice · Seafood processing practice · Other fisheries and marine practice
- समुद्री मत्स्यन अभ्यास: बंदरगाह से आइस बॉक्स तक समुद्र में एक दिन – मछली पकड़ने की यात्रा के छह चरण हैं: नाव, दल और मौसम जाँचो; कंपास और GPS से दिशा लो; इको साउंडर से झुंड खोजो (गहराई = 1500 × समय ÷ 2); जाल झुंड की गहराई तक डालो; उसे खींचो; और पकड़ को तुरंत बर्फ़ पर रखो। स्थिति, गहराई और पकड़ दर्ज करो। हर चरण में सुरक्षा पहले।
- समुद्री इंजीनियरिंग अभ्यास: तैरना, पानी का दाब, लंगर और जंग – समुद्र के लिए चीज़ें बनाने में चार विचार काम आते हैं। ब्लॉक तब तैरता है जब उसका घनत्व समुद्री पानी (लगभग 1025 kg/m³) से कम हो। दाब गहराई के साथ बढ़ता है: P = P0 + ρgh, हर 10 m पर लगभग +100 kPa। लंगर डली नाव को गहराई से कम से कम 3 गुना रस्सी चाहिए। ज़िंक का टुकड़ा पहले गलता है, इसलिए स्टील बच जाता है।
- जहाज़ रेडियो अभ्यास: दूरी, मोर्स कोड, संकट कॉल और तरंगदैर्ध्य – नावें किनारे से VHF रेडियो पर बात करती हैं, लगभग 156 MHz के पास। VHF सीधी रेखा में चलता है, इसलिए दूरी ≈ 4.12 × (√h1 + √h2) km, एंटीना की ऊँचाई मीटर में। मोर्स में अक्षर बिंदु (1 इकाई) और डैश (3 इकाई) से भेजे जाते हैं; SOS = तीन बिंदु, तीन डैश, तीन बिंदु। मे-डे कॉल के पाँच हिस्से क्रम से होते हैं। तरंगदैर्ध्य = 300 ÷ MHz में आवृत्ति, मीटर में।
- संसाधन वृद्धि अभ्यास: हैचरी से समुद्र तक – संसाधन वृद्धि का मतलब है जंगली मछलियों की संख्या फिर बढ़ाने में मदद करना। हैचरी में जनक मछलियाँ रखते हैं, अंडे लेते हैं, लार्वा और बाल मछलियाँ साफ़ टैंक में पालते हैं, कुछ पर टैग लगाते हैं और सही आकार पर छोड़ देते हैं। हर चरण में कुछ मछलियाँ कम होती हैं, इसलिए गिनती, सही खाना और साफ़ पानी ज़रूरी है।
- समुद्री भोजन प्रसंस्करण अभ्यास – मछली जल्दी ख़राब होती है, क्योंकि उसके नरम, गीले और प्रोटीन वाले गूदे में कीटाणु तेज़ी से बढ़ते हैं। प्रसंस्करण से मछली सुरक्षित रहती है: तुरंत ठंडा करना, साफ़ पानी और साफ़ औज़ारों से सफ़ाई, फ़िलेट काटना, फिर सुखाकर, नमक लगाकर, पकाकर या डिब्बे में बंद करके रखना। ठंड और सफ़ाई दो बड़े नियम हैं।
- अन्य मत्स्य और समुद्री अभ्यास: पानी की जाँच – मछलियाँ अपने पानी में रहती हैं, इसलिए पानी की जाँच बार-बार करते हैं। चार आसान जाँचें हैं: तापमान, घुली ऑक्सीजन, खारापन और साफ़पन (सेकी डिस्क से)। गरम पानी में ऑक्सीजन कम घुलती है, समुद्री मछली को सही खारापन चाहिए और हरा पानी यानी बहुत सारे छोटे पौधे। इन संख्याओं के रिकॉर्ड से मछलियाँ स्वस्थ रहती हैं।
4. Marine Information Technology
Information technology in fisheries and marine fields · Information communication and design in fisheries and marine fields · Computers and programming · Networks and use of data · Applying IT in fisheries and marine fields
- मत्स्य और समुद्री काम में सूचना प्रौद्योगिकी – नावें और समुद्री कर्मचारी वह देखने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी इस्तेमाल करते हैं जो आँख नहीं देख सकती। सोनार ध्वनि की पल्स नीचे भेजकर गूँज का समय नापता है: गहराई = 1500 × समय ÷ 2। GPS उपग्रह जगह बताते हैं, रेडियो और उपग्रह किनारे तक डेटा भेजते हैं, और सेंसर तापमान और मौसम नापते हैं। डेटा क़ीमती है, इसलिए पासवर्ड और मछली की जगहें सुरक्षित रखनी चाहिए और जानकारी का ईमानदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।
- डिजिटल मीडिया: चित्र, आवाज़ और वीडियो संख्याएँ कैसे बनते हैं – डिजिटल मीडिया यानी कंप्यूटर पर संख्याओं के रूप में सहेजा गया हर चित्र, आवाज़, वीडियो या एनिमेशन। रास्टर चित्र पिक्सेल का जाल है; हर पिक्सेल लाल, हरे और नीले के 0 से 255 तक के मानों में सहेजा जाता है। वेक्टर ग्राफ़िक्स आकृतियों को गणित से सहेजते हैं, इसलिए हर आकार में साफ़ रहते हैं। वीडियो और एनिमेशन बहुत सारे फ़्रेम तेज़ी से दिखाना है। रेज़ोल्यूशन बढ़ने से फ़ाइल बड़ी होती है, इसलिए संपीडन करते हैं। मीडिया बनाते-बाँटते समय कॉपीराइट, लाइसेंस और लोगों के चित्र-अधिकार का सम्मान करना ज़रूरी है।
- कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग: कंप्यूटर कैसे चलता है और हम उसे निर्देश कैसे देते हैं – कंप्यूटर इनपुट लेता है, CPU मेमोरी की मदद से उसे प्रोसेस करता है और आउटपुट देता है; स्टोरेज फ़ाइलें रखता है और ऑपरेटिंग सिस्टम सबको सँभालता है। सारी जानकारी (संख्याएँ, अक्षर, चित्र, ध्वनि) बिट यानी 1 और 0 के रूप में रखी जाती है, 8 के समूह को बाइट कहते हैं। समस्या हल करने के लिए पहले एल्गोरिद्म लिखते हैं (क्रम, निर्णय और दोहराव वाले साफ़ चरण) और फिर प्रोग्राम, जो प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा एल्गोरिद्म है। कंप्यूटर नेटवर्क के ज़रिए छोटे पैकेटों में जानकारी बाँटते हैं और विचारों को सुरक्षित रूप से परखने के लिए मॉडल और सिमुलेशन चला सकते हैं।
- कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट कैसे चलता है – नेटवर्क यानी आपस में जुड़े उपकरण जो डेटा बाँटते हैं। हर उपकरण का एक IP पता होता है। डेटा छोटे क्रमांकित पैकेटों में कटता है। राउटर हर पैकेट को एक-एक कदम उसके पते की ओर भेजते हैं, और TCP अंत में पैकेटों को क्रम से जोड़ता है। DNS वेबसाइट के नाम को IP पते में बदलता है। क्लाइंट माँगता है, सर्वर देता है। फ़ायरवॉल, पासवर्ड, अपडेट और एन्क्रिप्शन नेटवर्क को सुरक्षित रखते हैं।
- मछली और समुद्र के काम में IT का उपयोग – आज के जहाज़ और मछुआरे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का उपयोग करते हैं। सोनार आवाज़ की गूँज से मछली ढूँढता है, GPS जगह बताता है, रडार और AIS टक्कर से बचाते हैं, बॉय और उपग्रह समुद्र नापते हैं और तट केंद्र सारा डेटा जोड़कर सलाह देता है। गूँज से गहराई = ध्वनि की चाल x समय / 2।
5. Fisheries and Marine Science
Ocean and daily life · Ocean science · New developments in fisheries · Inquiry activities on the ocean
- मत्स्य पालन और जल-कृषि: समुद्र से थाली तक – मत्स्यन (fisheries) का अर्थ है जंगली मछली और जलीय जीवों को पकड़ना (पकड़ मत्स्यन), जबकि जल-कृषि (aquaculture) का अर्थ है मछली, झींगा, सीप या शैवाल को पालना। ज़्यादातर जंगली मछली उथले महाद्वीपीय मग्नतट और उत्प्रवाह (upwelling) वाले क्षेत्रों में पकड़ी जाती है, जहाँ पोषक तत्व प्लवक को भोजन देते हैं। फिर मछली एक शृंखला से गुज़रती है: बंदरगाह और बर्फ़, प्रसंस्करण (साफ़ करना, जमाना, सुखाना, डिब्बाबंदी), शीत भंडार और बाज़ार या निर्यात। जब पकड़ प्राकृतिक बढ़त से ज़्यादा हो, तो स्टॉक गिर जाता है: अति-मत्स्यन। अच्छे प्रबंधन में पकड़ की सीमा, बंद मौसम, जाल के छेद के नियम, संरक्षित क्षेत्र और ज़िम्मेदार जल-कृषि आते हैं।
- महासागर: समुद्र तल, चलता पानी और जीवन – महासागर पृथ्वी का लगभग 71% भाग ढकते हैं। उनके तल पर उथला महाद्वीपीय शेल्फ़, खड़ी ढलान, गहरा मैदान, पानी के नीचे कटक और बहुत गहरी खाइयाँ हैं। पानी तीन तरह चलता है: लहरें (हवा से), ज्वार-भाटा (चंद्रमा के खिंचाव से) और धाराएँ (समुद्र की नदियाँ, गरम और ठंडी)। महासागर मछली, नमक, तेल-गैस और व्यापार मार्ग देते हैं और करोड़ों लोगों की रोज़ी हैं। चक्रवात और सुनामी समुद्री आपदाएँ हैं; पहले की चेतावनी जान बचाती है। अंतरराष्ट्रीय नियम (UNCLOS) तय करते हैं कि देश के समुद्री अधिकार कहाँ तक हैं: 12 समुद्री मील प्रादेशिक सागर और 200 मील का अनन्य आर्थिक क्षेत्र।
- समुद्र पर खोज-गतिविधियाँ – खोज-गतिविधि (इन्क्वायरी) का मतलब है जवाब खुद ढूँढना। चरण: सवाल पूछो, निष्पक्ष परीक्षण की योजना बनाओ (एक चीज़ बदलो, बाक़ी वही रखो), नापो, तालिका या ग्राफ़ में लिखो, पैटर्न खोजो और प्रमाण के साथ बताओ। उदाहरण: गहराई बढ़ने पर समुद्र का तापमान घटता है।
6. Fisheries
Fisheries and marine environment · Fishery resources and fisheries management · Fishing technology · Foundations of fishery production · Fishery business management
- मत्स्य पालन और समुद्री पर्यावरण – मत्स्य पालन का मतलब है खाने और कमाई के लिए पानी के जीव पकड़ना या पालना। समुद्र में भोजन की शृंखला धूप और प्लवक से शुरू होती है। जहाँ गहराई से पोषक तत्व ऊपर आते हैं (अपवेलिंग) या जहाँ उथला महाद्वीपीय मग्नतट होता है, वहाँ अच्छे मत्स्य क्षेत्र बनते हैं। इको साउंडर, परीक्षण जाल और पानी की जाँच से मछली खोजी जाती है। साफ़ पानी, सुरक्षित आवास और समझदारी से शिकार समुद्र को उपजाऊ रखते हैं।
- मत्स्य संसाधन और मत्स्य प्रबंधन – मत्स्य भंडार किसी एक समुद्री क्षेत्र में एक प्रकार की सारी मछलियाँ हैं। यह हर साल दोबारा बढ़ता है, इसलिए नवीकरणीय संसाधन है। जब सालाना शिकार सालाना बढ़त से बड़ा नहीं होता, भंडार स्वस्थ रहता है। बढ़त से बड़ा शिकार भंडार घटाता है (अति-मत्स्यन) और वह ढह सकता है। प्रबंधन में शिकार की सीमा, बंद मौसम, जाली और औज़ार के नियम, सुरक्षित नर्सरी क्षेत्र और भंडार की निगरानी आती है।
- मछली पकड़ने की तकनीक – मछली पकड़ने के उपकरण अलग-अलग ढंग से काम करते हैं: काँटा-डोरी, फँसाने वाला जाल (गिल जाल), घेरने वाला जाल (पर्स सीन) और खींचकर समेटने वाला जाल (ट्रॉल)। जाली का आकार तय करता है कौन सी मछली रुकेगी। जाल मज़बूत, हल्के कृत्रिम रेशे (नायलॉन, पॉलीएथिलीन) से बनते हैं और उनमें तैराक व बोझ लगते हैं। नावों में विंच, इको साउंडर और रेडियो होते हैं और पकड़ को बर्फ़ या प्रशीतन से ताज़ा रखा जाता है। हैचरी से बच्चे छोड़ना और कृत्रिम भित्ति जैसे संवर्धन उपाय भंडार की मदद करते हैं।
- मत्स्य उत्पादन की बुनियाद – मत्स्य उत्पादन केवल मछली पकड़ना नहीं है। क़ानून और लाइसेंस तय करते हैं कौन, कहाँ मछली पकड़ेगा, और 200 समुद्री मील के आर्थिक क्षेत्र व संधियों से समुद्र दूसरे देशों के साथ बाँटा जाता है। मौसम, भाव और मछली की जगह की जानकारी हर कदम में मार्गदर्शन करती है। मछली एक शृंखला से गुज़रती है: नाव, बंदरगाह बाज़ार, प्रसंस्करण, शीत भंडार, व्यापार और दुकान। मछली जल्दी बिगड़ती है, इसलिए गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए उसे ठंडा, साफ़ और जाँचा हुआ रखना पड़ता है (जैसे HACCP से)।
- मत्स्य व्यवसाय प्रबंधन – मत्स्य व्यवसाय अपनी पकड़ी या पाली मछली बेचता है और ईंधन, चालक दल, जाल और मरम्मत पर ख़र्च करता है। आमदनी = बेची मात्रा × भाव। लाभ = आमदनी − कुल लागत। मालिक संगठन का रूप चुनते हैं (एकल स्वामी, साझेदारी, सहकारी समिति या कंपनी), हिसाब रखते हैं और मौसम की योजना बनाते हैं। कुशलता का मतलब है बर्बादी घटाना (ईंधन, ख़राबी), अच्छा बेचना (सहकारी समिति, प्रसंस्करण) और ऐसे मछली पकड़ना जिसे भंडार सह सके।
7. Navigation and Instruments
Overview of navigation · Navigational information · Instruments and navigation · Voyage planning · Maritime traffic laws · Maritime English
- नौवहन का परिचय: समुद्र में रास्ता ढूँढना – नौवहन (नेविगेशन) का मतलब है यह जानना कि जहाज़ कहाँ है और उसे सुरक्षित मंज़िल तक ले जाना। नाविक मार्ग (कोर्स, उत्तर से कोण), नॉटिकल मील में दूरी, नॉट में चाल और सूत्र दूरी = चाल × समय का उपयोग करता है। विधियाँ हैं: तटीय, रेडियो, खगोलीय और डेड रेकनिंग।
- नौवहन की जानकारी: चार्ट, सहायक चिह्न, धाराएँ और ज्वार – यात्रा से पहले और दौरान नाविक चार्ट (गहराई, ख़तरे), नौवहन सहायक चिह्न (प्रकाश-स्तंभ, बॉय, बीकन), ज्वार सारणी और धारा की जानकारी इस्तेमाल करता है। असली गहराई = चार्ट की गहराई + ज्वार की ऊँचाई। धाराएँ जहाज़ को बगल में धकेलती हैं (सेट और ड्रिफ़्ट), इसका हिसाब रखना पड़ता है।
- समुद्र में नौवहन के यंत्र और विधियाँ – बुनियादी यंत्र: कंपास (दिशा), लॉग (चाल), इको साउंडर (गहराई), घड़ी और क्रोनोमीटर (समय)। जगह तीन तरह से पक्की होती है: तटीय नौवहन (निशानों की बेयरिंग), रेडियो नौवहन (GNSS उपग्रह, रडार) और खगोलीय नौवहन (सेक्सटैंट से सूर्य-तारे)। दो या अधिक स्थिति-रेखाएँ जहाँ मिलें, वह फ़िक्स है।
- यात्रा योजना: बंदरगाह A से B तक सुरक्षित – यात्रा योजना घाट से घाट तक पूरे सफ़र को ढकती है। चार चरण: मूल्यांकन (जानकारी जुटाना), योजना (वेपॉइंट, खंड, चाल, समय, ईंधन, ज्वार और सुरक्षा-सीमा के साथ रास्ता बनाना), क्रियान्वयन (योजना पर चलना) और निगरानी (जगह जाँचना, ज़रूरत हो तो योजना बदलना)। समय = दूरी ÷ चाल।
- समुद्री यातायात क़ानून: समुद्र में सड़क के नियम – जहाज़ टक्कर रोकने के अंतरराष्ट्रीय नियम (COLREGs) मानते हैं जिन्हें हर देश अपने क़ानून में लिखता है। आमने-सामने: दोनों स्टारबोर्ड (दाईं) ओर मुड़ते हैं। कटान (क्रॉसिंग): जिस जहाज़ के स्टारबोर्ड ओर दूसरा आए वह रास्ता देता है और दूसरा सीधा चलता है। ओवरटेक: आगे निकलने वाला दूर रहता है। भीड़ वाले पानी में मार्ग-पट्टियाँ और बंदरगाहों में चाल, फ़ेयरवे और लंगर के नियम हैं।
8. Ship Operation
Overview of ships · Ship equipment · Ship's business · Marine weather · Ship handling · Safety and hygiene on board · Seafarer, ship and marine laws
- जहाज़ का परिचय – जहाज़ पानी पर तैरती एक बड़ी लोहे की इमारत है। वह इसलिए तैरता है कि उसके हटाए हुए पानी का भार जहाज़ के भार के बराबर होता है (आर्कीमिडीज़ का सिद्धांत)। जहाज़ के भाग हैं पतवार (अग्र, पश्च, कील, डेक); उसके प्रकार हैं मालवाहक, टैंकर, मछली जहाज़, यात्री जहाज़; और सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय नियम हैं जैसे लोड लाइन।
- जहाज़ के उपकरण (Ship Equipment) – जहाज़ तैरती हुई कार्यशाला और घर है। उसके उपकरण छह समूहों में हैं: चलाना, इंजन और रेडियो; लंगर और माल उठाना; सामान (stores); सुरक्षा और सफ़ाई; मछली पकड़ने के औज़ार; और फ्रीज़र व ठंडा भंडार। हर समूह का एक साफ़ काम है।
- जहाज़ का कामकाज (Ship's Business) – जहाज़ चलाने के पाँच काम हैं: क्रू और उसके काम तय करना, पतवार (hull) की देखभाल, डॉक में जाँच, रेडियो से संपर्क, और हर समय पहरा देकर जहाज़ को सुरक्षित रखना।
- समुद्री मौसम (Marine Weather) – समुद्री मौसम समुद्र के ऊपर का मौसम है। हवा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है। तेज़ हवा से ऊँची लहरें बनती हैं। ठंडे समुद्र पर गरम नम हवा से कोहरा बनता है। टाइफ़ून बीच में बहुत कम दाब वाला घूमता तूफ़ान है। जापान के पास हवाएँ ऋतु के साथ बदलती हैं।
- जहाज़ चलाना (Ship Handling) – ship handling यानी जहाज़ की गति और दिशा को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करना। पतवार जहाज़ को मोड़ती है, पर जहाज़ भारी है इसलिए देर से मुड़ता है और देर से रुकता है। हवा और लहरें उसे बगल में धकेलती हैं। भारी मौसम में दल धीमा करता है और लहरों को आगे से लेता है। आपात में शांत और सधे कदम जान बचाते हैं।
- जहाज़ पर सुरक्षा और सफ़ाई – जहाज़ मदद से दूर होता है, इसलिए दल को हादसे रोकने, आग जल्दी बुझाने, प्राथमिक उपचार देने और जहाज़ साफ़ रखने की ज़रूरत है। आग के त्रिकोण (ईंधन, गरमी, हवा) का एक हिस्सा हटाइए, आग बुझ जाती है। साँस न लेने वाले को 30 बार छाती दबाएँ और 2 साँसें दें। सफ़ाई और कीटाणुनाशन से कीटाणु, चूहे और कीड़े रुकते हैं।
- नाविक, जहाज़ और समुद्री कानून – जहाज़ कई जगहों से गुज़रता है, इसलिए उसके नियम कई स्तरों से आते हैं। IMO और संयुक्त राष्ट्र की संधियाँ आधार बनाती हैं: नाविकों के लिए STCW और MLC, सुरक्षा के लिए SOLAS और लोड लाइन, प्रदूषण के लिए MARPOL, स्वच्छता के नियम और समुद्र पर किसका अधिकार, यह UNCLOS बताता है। हर देश इन संधियों को अपना कानून बनाता है और अपने बंदरगाह में जहाज़ों की जाँच करता है।
9. Marine Engines
Overview of heat engines · Internal combustion engines · Propulsion systems · Fuels and lubricants · Auxiliary machinery · Boilers and refrigeration equipment · Ship operation and security
- ऊष्मा इंजन – ऊष्मा इंजन वह मशीन है जो ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलती है। ईंधन जलकर ऊष्मा Q = q × m देता है, जहाँ q ईंधन का ऊष्मीय मान (दहन की ऊष्मा) और m उसका द्रव्यमान है। गर्म गैस फैलकर पिस्टन को धकेलती है या टरबाइन घुमाती है। चार स्ट्रोक इंजन चूषण, संपीडन, शक्ति और निष्कासन दोहराता है। ऊष्मा का केवल कुछ भाग उपयोगी कार्य बनता है, बाक़ी बेकार ऊष्मा बनकर निकल जाता है। दक्षता η = W ÷ Q × 100%। इंजन CO₂ और दूसरी गैसें भी छोड़ते हैं जो हवा को गंदा और धरती को गर्म करती हैं।
- जहाज़ की प्रणोदन प्रणालियाँ – जहाज़ इसलिए चलता है क्योंकि इंजन शाफ़्ट को घुमाता है, शाफ़्ट प्रोपेलर को घुमाता है और प्रोपेलर पानी को पीछे धकेलता है, जिससे पानी जहाज़ को आगे धकेलता है। पीछे लगी पतवार पानी की धार मोड़कर जहाज़ को मोड़ती है। ट्विन स्क्रू, कंट्रोलेबल पिच, अज़ीमुथ पॉड और वॉटर जेट यही काम दूसरे तरीकों से करते हैं। ज़रूरी शक्ति लगभग गति के घन के साथ बढ़ती है, इसलिए धीमे चलने से बहुत ईंधन बचता है।
- ईंधन और स्नेहक (चिकनाई तेल) – जहाज़ के इंजन ईंधन तेल जलाते हैं: गाढ़ा और सस्ता भारी ईंधन तेल (HFO), जिसे गर्म और साफ़ करना पड़ता है, या पतले आसुत ईंधन जैसे समुद्री डीज़ल (MDO) और गैस तेल (MGO)। ईंधन के मुख्य गुण हैं: ऊष्मीय मान, श्यानता (गाढ़ापन), फ़्लैश पॉइंट और सल्फ़र। चिकनाई तेल चलते धातु के भागों के बीच पतली परत बनाता है। यह परत घर्षण और घिसाई घटाती है, गर्मी ले जाती है, सफ़ाई करती है, सील करती है और जंग से बचाती है। तेल गर्म होकर पतला और ठंडा होकर गाढ़ा हो जाता है, इसलिए ईंधन और चिकनाई तेल दोनों में तापमान मायने रखता है।
- जहाज़ की सहायक मशीनें – मुख्य इंजन जहाज़ चलाता है, पर उसे चालू रखने के लिए कई सहायक मशीनें होती हैं: पंप पानी, तेल और ईंधन को बहाते हैं; हाइड्रॉलिक प्रणालियाँ छोटे धक्के को क्रेन, विंच और स्टीयरिंग के लिए बड़े बल में बदलती हैं; मीठा पानी बनाने की मशीन समुद्री पानी को कम दबाव पर उबालकर पीने का पानी बनाती है; और तेल-पानी अलग करने की मशीन जैसे प्रदूषण-नियंत्रण उपकरण कचरे को जहाज़ से निकलने से पहले साफ़ करते हैं। हर मशीन में एक सरल भौतिकी विचार है: दबाव, पास्कल का नियम, उबलना और संघनन, या घनत्व से तैरना।
- बॉयलर, प्रशीतन (रेफ्रिजरेशन) और एयर कंडीशनिंग उपकरण – बॉयलर ईंधन जलाकर पानी को ऊँचे दाब की भाप बनाता है। दाब मापी और सेफ़्टी वाल्व उसे सुरक्षित रखते हैं। फ्रिज या एसी ठंडक नहीं बनाते, गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। प्रशीतक (रेफ्रिजरेंट) कंप्रेसर, कंडेंसर, विस्तार वाल्व और वाष्पक में घूमता है, ठंडी तरफ़ गर्मी सोखता है और गर्म तरफ़ छोड़ता है।
- जहाज़ का संचालन और सुरक्षा – जहाज़ को कप्तान के नीचे चालक दल अलग-अलग विभागों (डेक, इंजन, केटरिंग) में चलाता है। पतवार जलरोधी डिब्बों में बँटी होती है, इसलिए एक डिब्बे में पानी भरने से जहाज़ नहीं डूबता। उपकरण, सुरक्षा अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियम (जैसे बाएँ लाल और दाएँ हरी बत्ती) और रेडियो पर साफ़ अंग्रेज़ी सबको सुरक्षित रखते हैं।
10. Machine Design and Fabrication
Overview of machine design and fabrication · Machine design · Mechanical drawing · Machine materials · Machine shop practice
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग: मशीनें कैसे डिज़ाइन होती और बनती हैं – मैकेनिकल इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग की वह शाखा है जो मशीनें डिज़ाइन करती, बनाती और सँभालती है: हर वह चीज़ जिसमें चलने वाले पुर्ज़े हों और जो बल व ऊर्जा का उपयोग करे, साइकिल से जेट इंजन तक। मैकेनिकल इंजीनियर भौतिकी (बल, गति, ऊर्जा, ऊष्मा), पदार्थ विज्ञान और गणित का उपयोग करते हैं। मुख्य विचार: तंत्र (मैकेनिज़्म) गति और बल बदलते हैं (गियर, लीवर, क्रैंक); ऊर्जा रूप बदलती है (इंजन में ऊष्मा से गति, मोटर में बिजली से गति); पुर्ज़े पर्याप्त मज़बूत होने चाहिए (प्रतिबल, मुड़ना, सुरक्षा); और पुर्ज़े मशीनिंग, फ़िटिंग और असेंबली से सटीक माप और टॉलरेंस के साथ बनते हैं। मेकाट्रॉनिक्स इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और कंप्यूटर नियंत्रण जोड़ता है।
- मशीन डिज़ाइन: जोड़ने वाले पुर्ज़े, शाफ़्ट और गियर – मशीन छोटे-छोटे मानक पुर्ज़ों से बनती है, जिन्हें मशीन एलिमेंट कहते हैं। बोल्ट, नट, पेंच और रिवेट पुर्ज़े जोड़ते हैं। शाफ़्ट, की, कपलिंग और बेयरिंग घुमाव को सँभालते हैं। गियर, बेल्ट और चेन गति आगे पहुँचाते हैं। गियर अनुपात = चलने वाले गियर के दाँत ÷ चलाने वाले गियर के दाँत।
- मशीन ड्राइंग: डिटेल ड्राइंग बनाना और पढ़ना – मशीन ड्राइंग किसी एक पुर्ज़े की ऐसी सटीक तस्वीर है कि कारखाना बिना कुछ पूछे उसे बना सके। डिटेल (वर्किंग) ड्राइंग में पुर्ज़े के दृश्य (views), अंदर का हिस्सा दिखाने के लिए सेक्शन, हर माप (dimension), माप कितना ऊपर-नीचे हो सकता है (tolerance), सतह की चिकनाई, पदार्थ और टाइटल ब्लॉक होते हैं।
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- मशीन शॉप प्रैक्टिस: धातु से पुर्ज़ा कैसे बनता है – मशीन शॉप कच्ची धातु को पाँच तरह के कामों से पुर्ज़े में बदलती है: ढलाई और फोर्जिंग (आकार देना), शीट-मेटल का काम (चादर मोड़ना), वेल्डिंग और कटाई (जोड़ना और काटना), मशीनिंग (औज़ार से धातु छीलकर सही माप लाना), और हाथ की फ़िनिशिंग व असेंबली (रेती, फिटिंग, बोल्ट कसना)। हर काम के अपने सुरक्षा नियम हैं।
11. Electrical Theory
Basics of electric circuits · Electricity and magnetism · Semiconductor devices and electronic circuits · Electrical machines · Electrical measurement and automatic control · Distribution and electrical work
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
- विद्युत और चुंबकत्व – विद्युत आवेश और चुंबक एक ही बात के दो रूप हैं। रगड़ी वस्तु पर स्थिर आवेश रहता है; चुंबक के ध्रुव और क्षेत्र होता है; धारा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है; और बदलता चुंबकीय क्षेत्र धारा बनाता है (विद्युत चुंबकीय प्रेरण)। मोटर, जनित्र और ट्रांसफ़ॉर्मर इन्हीं चार बातों पर चलते हैं।
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
- विद्युत मशीनें: जनित्र, मोटर और ट्रांसफ़ॉर्मर – विद्युत मशीनें ऊर्जा का रूप बदलती हैं। जनित्र गति को बिजली में और मोटर बिजली को गति में बदलता है; दोनों में चुंबक और कुंडली होती है। सिंक्रोनस मशीन चुंबकीय क्षेत्र के ठीक बराबर चाल से घूमती है (Ns = 120f/P)। इंडक्शन मोटर थोड़ी धीमी चलती है (स्लिप)। DC मशीन में कम्यूटेटर होता है। ट्रांसफ़ॉर्मर Vs/Vp = Ns/Np से वोल्टता बदलता है। आपातकालीन सप्लाई (बैटरी और इंजन-जनित्र) मेन्स जाने पर बिजली बनाए रखती है।
- विद्युत मीटर, मापन और स्वचालित नियंत्रण – विद्युत मीटर किसी राशि को स्केल पर दिखाते हैं। अमीटर श्रेणी में जुड़ता है और उसका प्रतिरोध बहुत कम होता है; वोल्टमीटर समांतर में जुड़ता है और उसका प्रतिरोध बहुत ज़्यादा होता है। मापन का अर्थ मानक से तुलना करना और त्रुटि जानना है। स्वचालित नियंत्रण में मशीन खुद मान टिकाए रखती है: खुले लूप में परिणाम नहीं देखा जाता, बंद लूप में सेंसर और फ़ीडबैक से त्रुटि सुधारी जाती है। उदाहरण: थर्मोस्टैट, मोटर की चाल का नियंत्रण, पानी के स्तर का नियंत्रण।
- जहाज़ों और कारख़ानों में बिजली वितरण और विद्युत कार्य – वितरण बिजली को स्रोत (जनित्र या ग्रिड) से कई भारों तक पहुँचाता है। मुख्य स्विचबोर्ड तीन-फ़ेज़ सप्लाई लेकर फ़ीडरों से भेजता है, हर फ़ीडर पर ब्रेकर या फ़्यूज़ होता है। ट्रांसफ़ॉर्मर सही वोल्टता देते हैं (जैसे 440 V से 230 V)। जहाज़ और कारख़ाने में विचार वही हैं: शक्ति और रोशनी के अलग सर्किट, ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा, और अर्थ तार। विद्युत कार्य का अर्थ इस प्रणाली को सुरक्षित ढंग से लगाना, परखना और सुधारना है।
12. Mobile Communication Engineering
Overview of mobile communication · Radio communication equipment · Microwave circuits and antennas · Radio-wave propagation · Electronic navigation equipment · Applied electronic measurement
- रेडियो, टीवी और मोबाइल: संकेत कैसे चलते हैं – रेडियो, टीवी और मोबाइल रेडियो तरंगों से जानकारी भेजते हैं। आवाज़ और चित्र को छोटे बिजली-संकेत में बदला जाता है। संकेत टावर की तेज़ वाहक तरंग पर सवार होकर जाता है। रिसीवर एक आवृत्ति पर ट्यून होकर संकेत को वापस आवाज़ और चित्र बनाता है। मोबाइल नेटवर्क इलाक़े को सेल में बाँटता है, हर सेल का अपना टावर होता है।
- रेडियो संचार उपकरण – रेडियो ट्रांसमीटर में दोलित्र (वाहक बनाता है), मॉडुलक (संदेश चढ़ाता है), पावर प्रवर्धक और एंटीना होते हैं। रिसीवर में एंटीना, ट्यूनर, डिटेक्टर और स्पीकर होते हैं; सुपरहेटेरोडाइन रिसीवर पहले संकेत को एक तय मध्यवर्ती आवृत्ति (IF) पर लाता है। माइक्रोवेव लिंक में डिश सीधी रेखा में होती हैं। जहाज़ों पर संकट के लिए VHF, DSC, EPIRB और SART होते हैं।
- माइक्रोवेव परिपथ, एंटीना और फ़ीडर लाइन – एंटीना बिजली के संकेत को रेडियो तरंग में और तरंग को वापस संकेत में बदलता है। उसका आकार तरंगदैर्घ्य से जुड़ा है: अर्ध-तरंग द्विध्रुव की लंबाई λ/2 होती है। विकिरण पैटर्न अलग-अलग होते हैं: व्हिप और द्विध्रुव चारों ओर फैलाते हैं, याग़ी और डिश एक दिशा में केंद्रित करते हैं (अधिक लाभ)। फ़ीडर लाइन (कोएक्स, ट्विन-लीड, वेवगाइड) रेडियो और एंटीना के बीच शक्ति ले जाती है। माइक्रोवेव परिपथ (वेवगाइड, स्ट्रिपलाइन, अनुनादी गुहा, कप्लर, सर्कुलेटर) 1 से 30 GHz और ऊपर के संकेत सँभालते हैं।
- रेडियो तरंगों का संचरण – रेडियो तरंगें मुख्य रूप से तीन तरह से चलती हैं। भू-तरंगें (लगभग 2 MHz से नीचे) ज़मीन के साथ चलती हैं। आकाश तरंगें (लगभग 2 से 30 MHz) आयनमंडल से लौटती हैं और बहुत दूर पहुँचती हैं। अंतरिक्ष तरंगें (VHF और ऊपर) सीधी रेखा में चलती हैं और क्षितिज से सीमित हैं, d ≈ 4.12(√h1 + √h2) km। रास्ते में तरंगें परावर्तित, अपवर्तित, विवर्तित, अवशोषित या प्रकीर्णित हो सकती हैं, और आयनमंडल के बदलने तथा बहुपथ से संकेत फ़ेड हो सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक नौवहन उपकरण: रडार, उपग्रह नौवहन, सोनार – रडार रेडियो स्पंद भेजकर प्रतिध्वनि का समय नापता है: दूरी = c × t / 2। उपग्रह नौवहन (GPS, GNSS) कम से कम चार उपग्रहों से संकेत के यात्रा-समय द्वारा दूरी नापकर स्थिति बताता है। सोनार ध्वनि स्पंद भेजकर समुद्र-तल या लक्ष्य से लौटी प्रतिध्वनि का समय नापता है: गहराई = v × t / 2, समुद्री जल में v ≈ 1500 m/s। अन्य सहायक हैं जायरोकम्पास, लॉग, AIS और इलेक्ट्रॉनिक चार्ट।
- अनुप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक मापन – रेडियो और केबल ठीक चलें, इसलिए हम उन्हें मापते हैं। ऑसिलोस्कोप संकेत को समय के साथ दिखाता है (f = 1/T)। ट्रांसमीटर की आवृत्ति, शक्ति और मॉड्यूलेशन गहराई जाँचते हैं। रिसीवर की संवेदनशीलता जाँचते हैं। माइक्रोवेव और प्रकाश की हानि डेसिबल (dB) में गिनते हैं। एंटीना की क्षेत्र-प्रबलता दूरी के साथ घटती है।
13. Marine Communication Technology
Wired communication equipment · Communication laws · Communication English · Transport and communication geography · Practical communication
- तार वाले संचार उपकरण – तार वाले डेटा संचार में बिट (1 और 0) बिजली या प्रकाश के स्पंदों के रूप में केबल पर चलते हैं। डेटा पैकेट में कटता है और हर पैकेट पर पता होता है। सिरों पर टर्मिनल उपकरण (फ़ोन, कंप्यूटर, मोडेम) होते हैं; नेटवर्क उपकरण (स्विच, राउटर) पैकेट को सही जगह पहुँचाते हैं। फ़ायरवॉल और पासवर्ड डेटा की रक्षा करते हैं। अच्छे जोड़ के लिए सही केबल, सही तार-क्रम और जाँच ज़रूरी है।
- संचार कानून – रेडियो तरंगें साझा संसाधन हैं, इसलिए कानून तय करते हैं कि कौन-सी आवृत्ति कौन इस्तेमाल करे। राष्ट्रीय रेडियो कानून लाइसेंस देते हैं, ITU के रेडियो नियम देशों के बीच बैंड बाँटते हैं, तार वाले संचार के कानून केबल और नेटवर्क देखते हैं, और समुद्री कानून यह पक्का करते हैं कि हर जहाज़ मदद बुला सके।
- विश्व में परिवहन एवं संचार – परिवहन लोगों और सामान को ले जाता है; संचार संदेश ले जाता है। सड़कें कम दूरी और घर-घर तक के लिए सबसे अच्छी हैं, और राजमार्ग दूर के शहरों को जोड़ते हैं। पार-महाद्वीपीय रेलमार्ग, जैसे ट्रांस-साइबेरियन, पूरे महाद्वीप को पार करते हैं। ज़्यादातर विश्व व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, और स्वेज़ व पनामा जैसी नहरें लंबे चक्कर बचाती हैं। राइन और सेंट लॉरेंस समुद्री मार्ग जैसे आंतरिक जलमार्ग भारी माल को ज़मीन के अंदर तक ले जाते हैं। वायु परिवहन सबसे तेज़ पर महँगा है, पाइपलाइन तेल और गैस लगातार ले जाती है, और उपग्रह व इंटरनेट सूचना को सेकंडों में दुनिया भर पहुँचाते हैं।
- संचार का अभ्यास: भेजना, पाना और संचालन – मोर्स कोड में बिंदु 1 इकाई का और डैश 3 इकाई का होता है; अक्षर इन दोनों के नमूने हैं। भेजने के लिए ट्रांसमीटर की कुंजी दबाकर चालू-बंद करते हैं; पाने के लिए सुनते या देखते हैं और नमूना लिखते हैं। अच्छा संचालन तय क्रम (कॉल साइन, "मैं हूँ", संदेश, "ओवर") मानता है, फ़ोनेटिक अल्फ़ाबेट से साफ़ वर्तनी बोलता है, संकट-संदेश सही चैनल पर देता है और हर बातचीत लॉग में लिखता है।
14. Resource Enhancement (Aquaculture)
Overview of resource enhancement · Feed (livestock and fish) · Diseases and pest control · Product safety and environmental measures · Aquatic breeding and biotechnology · Main aquaculture and stock-enhancement techniques · Aquaculture management and laws
- संसाधन वृद्धि अभ्यास: हैचरी से समुद्र तक – संसाधन वृद्धि का मतलब है जंगली मछलियों की संख्या फिर बढ़ाने में मदद करना। हैचरी में जनक मछलियाँ रखते हैं, अंडे लेते हैं, लार्वा और बाल मछलियाँ साफ़ टैंक में पालते हैं, कुछ पर टैग लगाते हैं और सही आकार पर छोड़ देते हैं। हर चरण में कुछ मछलियाँ कम होती हैं, इसलिए गिनती, सही खाना और साफ़ पानी ज़रूरी है।
- मछली का भोजन और पोषण – मछली और शंख-जीवों को प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज चाहिए। नन्ही मछलियों (लार्वा) को रोटिफ़र और आर्टेमिया जैसा छोटा जीवित भोजन चाहिए; बड़ी मछलियाँ मछली चूरा, पौधों का आटा, तेल और विटामिन से बना मिश्रित दाना खाती हैं। अच्छे भोजन का मतलब है कम FCR (FCR = दिया दाना ÷ बढ़ा वज़न) और साफ़ पानी।
- मछली के रोग और कीट नियंत्रण – मछली तब बीमार होती है जब रोगाणु (वायरस, जीवाणु, फफूँद या परजीवी), कमज़ोर मछली और बुरी परिस्थितियाँ मिलती हैं। रोग पानी, संपर्क और उपकरणों से फैलते हैं। पालक व्यवहार, शरीर के लक्षण और लैब जाँच से रोग पहचानता है, फिर पहले रोकथाम (साफ़ पानी, कम मछली, क्वारंटीन, टीका) और ज़रूरत पर ही दवा से नियंत्रण करता है।
- सुरक्षित मछली और साफ़ पानी – फ़ार्म की मछली खाने में सुरक्षित होनी चाहिए और फ़ार्म को पानी को नुक़सान नहीं पहुँचाना चाहिए। सुरक्षा का मतलब है साफ़ संभाल, मछली में दवा न बचना (निकासी अवधि), हर खेप का ट्रेस होने वाला टैग, और लगभग 0 से 4 डिग्री सेल्सियस की कोल्ड चेन। पर्यावरण की देखभाल का मतलब है दाने का कचरा घटाना, एक जगह बहुत मछलियाँ न रखना (वहन क्षमता), जगह को आराम देना, और मछली के साथ शैवाल व सीप उगाना।
- जलीय प्रजनन और जैव प्रौद्योगिकी – प्रजनक सबसे अच्छी मछलियों (तेज़ बढ़ने वाली, रोग-प्रतिरोधी) को माता-पिता चुनते हैं, इसलिए हर पीढ़ी औसतन बेहतर होती है। जैव प्रौद्योगिकी के औज़ार: संकरण, गुणसूत्र-सेट बदलना (ट्रिप्लॉइड मछली प्रजनन नहीं करती और बड़ी बढ़ती है), लिंग नियंत्रण, शुक्राणु को जमाना (क्रायोप्रिज़र्वेशन), DNA मार्कर और जीन संपादन। चयन का प्रभाव R = h² × S, जहाँ h² आनुवंशिकता और S चयन-अंतर है।
- मुख्य जलकृषि और स्टॉक-संवर्धन तकनीकें – जल-जीव चार मुख्य तरीक़ों से उगाए जाते हैं: समुद्री जानवर पिंजरों, बेड़ों और तालाबों में (मछली, झींगा, सीप, एबलोन), समुद्री पौधे जैसे शैवाल रस्सियों और जालों पर, विदेशों में प्रयुक्त तंत्र जैसे झींगा तालाब, सैल्मन पेन और पुनर्चक्रण टंकियाँ, और सजावटी मछली एक्वेरियम में। स्टॉक संवर्धन में हैचरी के बच्चे समुद्र में छोड़े जाते हैं ताकि जंगली संख्या बढ़े।
- जलकृषि प्रबंधन और कानून – जलकृषि यानी मछली, शंख-सीप और शैवाल की खेती। फ़ार्म तभी लाभ कमाता है जब आमदनी खर्च से ज़्यादा हो, और मछलियों की संख्या, चारा तथा पानी की गुणवत्ता संतुलित हों। कानून और नियम (लाइसेंस, स्थान की अनुमति, पानी व कचरे की सीमा, बीमारी नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा, संरक्षित प्रजातियाँ) फ़ार्म को इंसान और प्रकृति के लिए सुरक्षित रखते हैं।
15. Marine Biology
Outline of marine organisms · Marine animals · Marine plants · Plankton · Fishery resource management · Marine organism experiments
- समुद्री जीव विज्ञान: समुद्र में जीवन – समुद्री जीव विज्ञान समुद्र के जीवन का अध्ययन है। समुद्री जीवों को उनके जीने के ढंग से बाँटते हैं: प्लवक बहते हैं, तरणक तैरते हैं और नितलक तल पर रहते हैं। गहराई के साथ प्रकाश घटता है, इसलिए भोजन बनाने वाले पादप प्लवक सतह के पास रहते हैं और लगभग हर समुद्री खाद्य शृंखला को भोजन देते हैं। प्रवाल भित्ति, मैंग्रोव, खुला समुद्र और गहरा समुद्र मुख्य पारितंत्र हैं। समुद्र भोजन, दवाएँ और विलवणीकरण से मीठा पानी देता है, पर उसे अति-मत्स्यन, प्रदूषण और गर्मी से ख़तरा है।
- समुद्री जंतु: समुद्र में कौन रहता है? – समुद्री जंतु खारे पानी में तीन तरह से रहते हैं: तैराक (नेक्टन) जैसे मछली और व्हेल, बहने वाले (प्लवक) जैसे जेलीफ़िश, और तल के निवासी (बेंथोस) जैसे केकड़ा, सीप और तारा मछली। मुख्य समूह हैं: मछली, स्तनधारी, क्रस्टेशियन, मोलस्क, जेलीफ़िश (सीलेंटरेट) और एकाइनोडर्म।
- समुद्री पौधे: धूप वाले उथले पानी का जीवन – समुद्री पौधे और शैवाल प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाते हैं, इसलिए वे वहीं रहते हैं जहाँ रोशनी पहुँचती है: किनारे के पास और ऊपरी 200 मीटर में। सी-ग्रास जड़ों वाला फूल वाला पौधा है। समुद्री शैवाल में जड़ नहीं, होल्डफास्ट होता है। हरे शैवाल उथले में, भूरे बीच में, लाल सबसे गहरे रहते हैं।
- प्लवक: समुद्र के नन्हे बहने वाले जीव – प्लवक छोटे जीव हैं जो पानी के साथ बहते हैं, क्योंकि वे धारा के विरुद्ध तैर नहीं सकते। पादप प्लवक पौधे जैसे हैं और रोशनी से भोजन बनाते हैं; जंतु प्लवक जानवर जैसे हैं और उन्हें खाते हैं। प्लवक ही लगभग सारे समुद्री जीवों का भोजन है और हमारी आधी ऑक्सीजन बनाते हैं।
- मत्स्य संसाधन और मत्स्य प्रबंधन – मत्स्य भंडार किसी एक समुद्री क्षेत्र में एक प्रकार की सारी मछलियाँ हैं। यह हर साल दोबारा बढ़ता है, इसलिए नवीकरणीय संसाधन है। जब सालाना शिकार सालाना बढ़त से बड़ा नहीं होता, भंडार स्वस्थ रहता है। बढ़त से बड़ा शिकार भंडार घटाता है (अति-मत्स्यन) और वह ढह सकता है। प्रबंधन में शिकार की सीमा, बंद मौसम, जाली और औज़ार के नियम, सुरक्षित नर्सरी क्षेत्र और भंडार की निगरानी आती है।
- समुद्री जीवों पर प्रयोग – समुद्री जीव प्रयोग यह जाँचते हैं कि सागर के जीव अपने माहौल पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। जंतु प्रयोग: गर्म पानी में मछली तेज़ साँस लेती है। पादप प्रयोग: ज़्यादा रोशनी में शैवाल ज़्यादा बढ़ता है। प्लवक प्रयोग: जाल खींचो, जार में गिनो। हमेशा निष्पक्ष परीक्षण करो (एक ही चीज़ बदलो), नियंत्रण रखो, दोहराओ और जीवों का ध्यान रखो।
16. Marine Environment
Marine environment and humans · Marine industries and environmental conservation · Fishing-ground environment and surveys · Ocean development and environmental improvement · Responding to marine natural disasters
- मत्स्य पालन और समुद्री पर्यावरण – मत्स्य पालन का मतलब है खाने और कमाई के लिए पानी के जीव पकड़ना या पालना। समुद्र में भोजन की शृंखला धूप और प्लवक से शुरू होती है। जहाँ गहराई से पोषक तत्व ऊपर आते हैं (अपवेलिंग) या जहाँ उथला महाद्वीपीय मग्नतट होता है, वहाँ अच्छे मत्स्य क्षेत्र बनते हैं। इको साउंडर, परीक्षण जाल और पानी की जाँच से मछली खोजी जाती है। साफ़ पानी, सुरक्षित आवास और समझदारी से शिकार समुद्र को उपजाऊ रखते हैं।
- समुद्र का विकास और पर्यावरण सुधार – हम समुद्र को मछली पकड़ने और रहने के लिए बेहतर बना सकते हैं। मछली के ठिकाने बनाते हैं (कृत्रिम रीफ़, समुद्री घास, उथली गीली ज़मीन), तट विकसित करते हैं (ब्रेकवाटर, घाट, मछली बंदरगाह) और समुद्र को साफ़ करते हैं (गंदे पानी का उपचार, तेल-घेरा, गाद निकालना)। हर काम में समुद्री जीवन की रक्षा ज़रूरी है।
- समुद्री प्राकृतिक आपदाओं का सामना – सुनामी, चक्रवात, तूफ़ानी लहरें और ऊँची लहरें तटों और मछुआरा समुदायों पर चोट करती हैं। अच्छे जवाब के तीन हिस्से हैं: समझना कि आपदा रोज़ के जीवन पर कैसे असर करती है, चेतावनी, अभ्यास और ऊँची जगह से लोगों को सुरक्षित रखना, और काम-रोज़गार को मज़बूत और टिकाऊ तरीकों से बचाना।
17. Small Vessels
Conduct as a small-vessel operator · Navigation methods · Ship operation · Engines · Handling small vessels · Operating small vessels
- छोटे जलयान के संचालक का आचरण – छोटी नाव चलाने वाले को मास्टर या कप्तान कहते हैं। वह नाव और उसमें सबकी ज़िम्मेदारी लेता है। पानी का सफ़र सड़क से अलग है: नाव में ब्रेक नहीं होते, वह पानी और हवा से बह जाती है और मदद दूर होती है। इसलिए मास्टर नाव और मौसम जाँचता है, सुरक्षित सवारी ही बैठाता है, नज़र रखता है और गति, सुरक्षा-सामान, लाइसेंस और प्रदूषण के नियम मानता है।
- नौचालन की विधियाँ: नावें सुरक्षित कैसे निकलती हैं – टक्कर से बचने के लिए नावें साझा नियम मानती हैं। खुले पानी में आमने-सामने आने पर दोनों दाएँ मुड़ती हैं; रास्ता काटने में जिस नाव के दाएँ से दूसरी आ रही हो वह रास्ता देती है; आगे निकलने वाली नाव दूर रहती है। बंदरगाह में धीमे चलें और रास्ते के दाएँ रहें। तय समुद्री क्षेत्रों में लेन मानें। नदी और झील में दाएँ किनारे के पास रहें और स्थानीय नियम देखें।
- जहाज़ का संचालन – नाव को ठीक से चलाने के लिए छह बातें चाहिए: ढाँचा, डेक और पुर्ज़े जानना; पतवार और इंजन से चलाना; कम्पास और चार्ट पढ़ना; मौसम और समुद्र समझना; सफ़र की योजना (रास्ता, समय, ईंधन, सुरक्षित बंदरगाह) बनाना; और तेज़ मौसम में हादसों से बचने के तरीके जानना।
- छोटी नाव का इंजन: संचालन, देखभाल और खराबी – छोटी नाव का इंजन ईंधन जलाकर प्रोपेलर घुमाता है। चालू करने से पहले ईंधन, तेल, ठंडा पानी और प्रोपेलर जाँचिए। चलते समय गेज देखिए और ठीक से बंद कीजिए। देखभाल में तेल बदलना, फ़िल्टर साफ़ करना और इंजन धोना आता है। खराबी में शांत रहिए, नाव सुरक्षित कीजिए, फिर ईंधन, फ़िल्टर, पानी और प्रोपेलर एक-एक करके जाँचिए।
- छोटी नाव संभालना: जाँच, बाँधना, गाँठें और दिशा – छोटी नाव संभालने का मतलब है निकलने से पहले तैयार रहना और घाट पर शांत रहना। मौसम, ईंधन, इंजन, लाइफ़ जैकेट और रस्से जाँचिए। अगले-पिछले रस्से और फ़ेंडर से नाव बाँधिए, और रस्से एक-एक करके खोलिए। कुछ गाँठें सीखिए (क्लीट हिच, बोलाइन, राउंड टर्न और दो हाफ़ हिच, रीफ़ गाँठ)। कंपास से दिशा खोजिए: बेयरिंग उत्तर से घड़ी की दिशा में नापा कोण है, 000 से 359 डिग्री।
- छोटी नाव चलाना: बुनियादी और उन्नत संचालन – नाव में ब्रेक नहीं होते। पतवार घुमाने पर वह अपने बीच के चारों ओर मुड़ती है, और थ्रॉटल बंद करने पर भी फिसलती रहती है। हवा और धारा उसे बगल में धकेलती हैं। बुनियादी संचालन में चलाना, गति नियंत्रित करना, रुकना और चौकसी रखना आता है। उन्नत संचालन में कोई पानी में गिर जाए, लंगर, खराब मौसम, संकरे रास्ते और कम दिखाई देने की स्थिति आती है। लोगों और दूसरी नावों के पास हमेशा धीमे चलें।
18. Food Manufacturing
Overview of food manufacturing · Food preservation and processing · Seafood manufacturing · Food manufacturing equipment · Preventing pollution · Management and production control
- खाद्य निर्माण का परिचय और आज का समुद्री भोजन – खाद्य निर्माण खेतों और समुद्र से आए कच्चे भोजन को धोने, पकाने, पैक करने जैसे चरणों से सुरक्षित, स्वादिष्ट और देर तक टिकने वाले उत्पाद बनाता है। इससे बर्बादी घटती है, खाना ले जाना आसान होता है और रोज़गार मिलता है। भोजन शिक्षा सुरक्षित और संतुलित भोजन चुनना सिखाती है। आज खाई जाने वाली लगभग आधी मछली पाली हुई है और लगभग एक तिहाई मछली खराब या बेकार जाती है, इसलिए पूरी मछली का उपयोग और अच्छे उत्पाद ज़रूरी हैं।
- खाद्य परिरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन – भोजन तब खराब होता है जब उसमें सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं और उसके अपने एंज़ाइम, हवा, रोशनी व कीट उसे नुकसान पहुँचाते हैं। परिरक्षण सूक्ष्मजीवों की ज़रूरत की चीज़ हटा देता है: पानी (सुखाना, नमक, चीनी), गर्माहट (फ्रिज, फ्रीज़र), हल्का pH (अम्ल, किण्वन) या स्वयं सूक्ष्मजीव (गर्मी, कैनिंग, पाश्चरीकरण, अनुमत परिरक्षक)। भोजन शीघ्र नाशवान, अर्ध-नाशवान या अनाशवान होते हैं, और कम, मध्यम या अधिक प्रसंस्कृत होते हैं। अच्छा भंडारण और प्रसंस्करण नुकसान घटाते हैं और मूल्य बढ़ाते हैं, जिससे किसान और खाद्य उद्योग ज़्यादा कमाते हैं।
- समुद्री भोजन प्रसंस्करण अभ्यास – मछली जल्दी ख़राब होती है, क्योंकि उसके नरम, गीले और प्रोटीन वाले गूदे में कीटाणु तेज़ी से बढ़ते हैं। प्रसंस्करण से मछली सुरक्षित रहती है: तुरंत ठंडा करना, साफ़ पानी और साफ़ औज़ारों से सफ़ाई, फ़िलेट काटना, फिर सुखाकर, नमक लगाकर, पकाकर या डिब्बे में बंद करके रखना। ठंड और सफ़ाई दो बड़े नियम हैं।
- खाद्य निर्माण की मशीनें: बॉयलर और फ्रीज़र – फूड फैक्ट्री में मशीनें बहुत सारा खाना गरम करती, पकाती, ठंडा करती और जमाती हैं। बॉयलर ईंधन जलाकर पानी को भाप बनाता है, और भाप खाना पकाती या कीटाणु-रहित करती है। रेफ्रिजरेशन मशीन एक गैस को लूप में घुमाकर फ्रीज़र की गर्मी बाहर निकालती है: कंप्रेसर, कंडेंसर, एक्सपेंशन वाल्व, इवैपोरेटर। मछली -18 °C या उससे ठंडी रखी जाती है।
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
- प्रबंधन और उत्पादन नियंत्रण – प्रबंधन का मतलब है लोगों, सामान, पैसे और जानकारी से व्यवसाय को इस तरह चलाना कि वह अपने लक्ष्य तक पहुँचे। एक सरल औज़ार है योजना-करो-जाँचो-सुधारो का चक्र। उत्पादन प्रबंधन उत्पाद बनाने की योजना और नियंत्रण करता है। इसके तीन लक्ष्य हैं: गुणवत्ता (अच्छा और सुरक्षित), लागत (कम बर्बादी, उचित दाम) और समय पर सही मात्रा। तेज़ चलाने से गुणवत्ता घट सकती है; ज़्यादा जाँच में समय और पैसा लगता है, इसलिए प्रबंधक तीनों में संतुलन रखते हैं।
19. Food Control
Overview of food control · Food components and their changes · Food and microbes · Food control experiments · Food safety management · Food control laws
- खाद्य नियंत्रण का परिचय – खाद्य नियंत्रण नियमों, जाँचों और रिकॉर्ड का वह तंत्र है जो समुद्र या खेत से थाली तक खाने को सुरक्षित, ईमानदार और अच्छी गुणवत्ता का रखता है। सरकारें क़ानून बनाती और निरीक्षण करती हैं, कंपनियाँ अपनी जाँच चलाती हैं, और कोडेक्स जैसे साझा मानक देशों को सहमत होने में मदद करते हैं। नियम धीरे-धीरे बने: बाज़ार के स्थानीय नियम, 1800 के दशक में मिलावट पकड़े जाने के बाद पहले खाद्य क़ानून, 1960 के दशक से विश्व मानक, और आज HACCP तथा खाने को उसके स्रोत तक खोज पाना। कोई एक जाँच पूरी नहीं होती, इसलिए बहुत-सी जाँचें साथ मिलकर सबसे अच्छा काम करती हैं।
- खाद्य विज्ञान: हमारे भोजन का रसायन – खाद्य विज्ञान पढ़ता है कि भोजन किससे बना है और खेत से थाली तक कैसे बदलता है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, पानी, विटामिन और खनिज होते हैं। पकाने से ये बदलते हैं: गर्मी प्रोटीन को खोलती है (विकृतीकरण), स्टार्च पानी में फूलता है (जिलेटिनीकरण), और सूखी गर्मी मेयार्ड अभिक्रिया व कैरामेलीकरण से भोजन भूरा करती है। सूक्ष्मजीव किण्वन से ब्रेड, दही और अचार बनाते हैं, पर भोजन ख़राब भी कर सकते हैं। प्रसंस्करण, परिरक्षण और सही तापमान भोजन को सुरक्षित और पौष्टिक रखते हैं।
- भोजन और सूक्ष्मजीव, और प्रोजेक्ट से सीखना – सूक्ष्मजीव (जीवाणु, ख़मीर और फफूँदी) हर भोजन में और उस पर होते हैं। लाभदायक सूक्ष्मजीव दही, ब्रेड, पनीर, इडली और अचार बनाते हैं। हानिकारक सूक्ष्मजीव भोजन ख़राब करते हैं या बीमारी फैलाते हैं। प्रोजेक्ट सीखने में तुम सवाल चुनते हो, निष्पक्ष जाँच की योजना बनाते हो, करते हो, नतीजे जाँचते हो और जो पाया वह बताते हो।
- खाद्य नियंत्रण प्रयोग – खाद्य प्रयोगशाला में सुरक्षित आदतें अपनाते हैं, ध्यान से नापते हैं और हर पाठ्यांक लिखते हैं। अनुमापन जैसी रासायनिक जाँच से खाने में अम्ल की मात्रा पता चलती है। सूक्ष्मजीव जाँच में नमूने को पतला करके प्लेट पर कॉलोनियाँ गिनते हैं और CFU प्रति ग्राम निकालते हैं।
- खाद्य सुरक्षा प्रबंधन – खाद्य कारखाना साफ़ आदतों और योजना से नुकसान रोकता है। वह कच्चे और साफ़ क्षेत्र अलग रखता है, हाथ धोता है, खतरे खोजता है, पकाने जैसे क्रांतिक बिंदु पर 75 °C जैसी सीमा से उन्हें रोकता है (HACCP), और खाद्य योजक केवल थोड़ी, कानूनी मात्रा में डालकर लेबल पर लिखता है।
- खाद्य नियंत्रण कानून – खाद्य कानून खरीदार की रक्षा करते हैं। सुरक्षा कानून कहते हैं कि खाना नुकसान न करे। मानक कानून अंदर की चीज़ों की सीमा तय करते हैं, जैसे सूखे खाने में पानी की अधिकतम मात्रा। लेबल कानून कहते हैं कि पैक पर नाम, सामग्री, एलर्जी कारक, अंतिम तिथि और वज़न लिखा हो। निरीक्षक रोक सकते हैं, वापस मँगवा सकते हैं और जुर्माना लगा सकते हैं।
20. Fishery Products Distribution
Overview of fishery distribution · Distribution of fishery products · Distribution technology and management · Fishery product distribution system · Marketing of fishery products · Distribution laws and intellectual property
- खाद्य वितरण, भंडारण और लॉजिस्टिक्स – खाना हम तक वितरण की कड़ी से पहुँचता है: उत्पादक, संग्राहक, थोक व्यापारी, खुदरा दुकानदार और डिलीवरी। रास्ते में उसे सही भंडारण (सूखा, ठंडा या कोल्ड चेन), ट्रैकिंग वाला परिवहन, गुणवत्ता जाँच और देशों के बीच व्यापार में आयात-निर्यात के चरण चाहिए। लक्ष्य है खाना सुरक्षित, ताज़ा और सस्ता रहे।
- वितरण माध्यम: सामान आप तक कैसे पहुँचता है – वितरण माध्यम वह रास्ता है जिससे सामान उत्पादक से उपभोक्ता तक जाता है। प्रत्यक्ष माध्यम में कोई मध्यस्थ नहीं; अप्रत्यक्ष में थोक और खुदरा विक्रेता सेवाएँ और अपना लाभ जोड़ते हैं। इंटरनेट से कंपनियाँ मध्यस्थ हटा सकती हैं, पर नए मध्यस्थ भी आते हैं। कंपनियाँ सघन, चयनात्मक या अनन्य पहुँच चुनती हैं, और क्योंकि ग्राहक ऑनलाइन और दुकान के बीच घूमते हैं, सब माध्यम ओमनीचैनल में जोड़े जाते हैं।
- विपणन प्रबंध – विपणन का मतलब है ख़रीदारों की ज़रूरत पहचानना और मूल्य के बदले, लाभ के साथ, उसे पूरा करना। इसके कई कार्य हैं (अनुसंधान, योजना, ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग, कीमत, संवर्धन, वितरण, सेवा) और पाँच विचारधाराएँ (उत्पादन, उत्पाद, विक्रय, विपणन, सामाजिक विपणन)। विपणन मिश्र 4P है: उत्पाद (ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग के साथ), कीमत (लागत, माँग, प्रतियोगिता, सरकारी नियम, उद्देश्य और विपणन तरीकों से तय), स्थान (माध्यम और भौतिक वितरण) और संवर्धन (विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, जनसंपर्क)।
- वितरण कानून और बौद्धिक संपदा – खाना बेचते समय कानून लोगों की रक्षा करते हैं। मछली के लिए मुख्य नियम हैं: स्वच्छता और सुरक्षा, लेबल और ट्रेसेबिलिटी, कोल्ड चेन बनाए रखना, और व्यापारी तथा बाज़ार के लाइसेंस। बौद्धिक संपदा (IP) वह है जो दिमाग रचता है: आविष्कार के लिए पेटेंट, ब्रांड नाम के लिए ट्रेडमार्क, लेखन और चित्र के लिए कॉपीराइट, आकार के लिए डिज़ाइन, और क्षेत्रीय उत्पाद के लिए स्थान-नाम अधिकार। नियम देश के हिसाब से अलग हैं, इसलिए अपने देश का कानून देखिए।
21. Diving
Overview of diving · Diving environment · Physiology of diving · Diving equipment · Diving techniques · Diving laws and regulations
- गोताखोरी का परिचय – गोताखोरी यानी काम, भोजन, विज्ञान या मज़े के लिए पानी के नीचे जाना। पहले लोग साँस रोककर जाते थे, फिर घंटी में फँसी हवा, फिर पाइप से हेलमेट तक आती हवा, और अब टैंक की हवा (स्कूबा)। गोताखोर स्वस्थ, तैरना जाननेवाला और शांत होना चाहिए। मुख्य प्रकार हैं: साँस रोककर, स्कूबा, सतह से हवा (हेलमेट/फुल-फेस मास्क) और बहुत गहरे काम के लिए सैचुरेशन।
- गोताखोरी का पर्यावरण – पानी के नीचे दुनिया बदल जाती है। हर 10 मी पर दाब लगभग 1 वायुमंडल बढ़ता है, इसलिए हवा सिकुड़ती है (बॉयल का नियम)। ठंड और अँधेरा बढ़ता है, और लाल रोशनी सबसे पहले गायब होती है। चीज़ें पास दिखती हैं, और आवाज़ तेज़ चलती है इसलिए दिशा पता नहीं चलती। उत्प्लावन तय करता है कि गोताखोर तैरेगा या डूबेगा। धाराएँ धकेलती हैं और कुछ समुद्री जीव डंक या काट सकते हैं।
- गोताखोरी का शरीर-विज्ञान – पानी का दाब शरीर के हवा वाले स्थानों पर पड़ता है: कान, साइनस, मास्क और फेफड़े। गोताखोर को कान इक्वलाइज़ करने हैं और ऊपर आते समय कभी साँस नहीं रोकनी। गहराई पर खून में ज़्यादा नाइट्रोजन घुलती है, इसलिए धीरे ऊपर आना है वरना बुलबुले बनते हैं (डीकंप्रेशन सिकनेस)। अन्य खतरे: नाइट्रोजन नार्कोसिस, ठंड और थकान। प्राथमिक उपचार: पानी से निकालें, साँस जाँचें, ऑक्सीजन दें, लिटाकर गर्म रखें और मदद बुलाएँ।
- गोताखोरी के उपकरण – स्कूबा उपकरण से गोताखोर अपनी हवा साथ ले जाता है: टैंक, रेगुलेटर, उत्प्लावन जैकेट (BCD), गेज, मास्क, फिन, वेटसूट और वज़न। हेलमेट-प्रकार में सतह से पाइप द्वारा सख़्त हेलमेट तक हवा आती है, साथ में फ़ोन-लाइन और जीवन-रस्सी। फुल-फेस मास्क आँख, नाक और मुँह ढकता है और हवा सतह या टैंक से लेता है। अन्य औज़ार: टॉर्च, चाकू, काटने के औज़ार और संचार सेट।
- गोताखोरी की तकनीकें – गोताखोर को चाहिए हवा, उतरने का सुरक्षित तरीका, धीरे चढ़ने का तरीका और काम की योजना। हवा सतह से पाइप द्वारा या पीठ के सिलेंडर से मिलती है। हर 10 मीटर पर करीब 1 बार दबाव बढ़ता है, इसलिए नीचे हवा सिकुड़ती और ऊपर फैलती है। धीरे ऊपर आइए, साँस मत रोकिए और साथी व संकेतों के साथ काम कीजिए।
- गोताखोरी के कानून और नियम – काम करते गोताखोर की सुरक्षा तीन परतों के नियमों से होती है। सामान्य कार्यस्थल सुरक्षा कानून नियोक्ता को सुरक्षित काम का ज़िम्मेदार बनाता है। उच्च दाब काम के विशेष नियम हवा, उपकरण, समय-तालिका, साथी और रिकॉर्ड तय करते हैं। मछली-पालन कानून बताते हैं कि क्या, कहाँ और कब पकड़ सकते हैं। नियम देश के अनुसार बदलते हैं, इसलिए स्थानीय कानून ज़रूर देखिए।
22. Marine Sports
Use of the sea and environmental conservation · Fishing (angling) · Leisure diving · Marine leisure · Safety guidance and management
- समुद्र का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण – समुद्र हमें भोजन, परिवहन, ऊर्जा, नमक, रोज़गार और मनोरंजन देता है। ज़्यादा लेने या प्रदूषण करने पर वह सँभल नहीं पाता। सोच-समझकर उपयोग यानी मछलियों की सालाना बढ़त से कम पकड़ना, जगह साझा करना और प्रवाल भित्ति, मैंग्रोव व प्रजनन क्षेत्रों को बचाना।
- मछली पकड़ना (एंगलिंग) – एंगलिंग में छड़ी, डोरी, फ़्लोट, सिंकर, काँटे और चारे से एक-एक मछली पकड़ी जाती है। फ़्लोट बताता है कि मछली ने चारा खींचा, सिंकर चारे को नीचे ले जाता है और चारा उसी गहराई पर होना चाहिए जहाँ मछलियाँ तैरती हैं। समुद्र में लहरें, ज्वार और ताक़तवर मछलियाँ हैं; नदी में धारा। स्थानीय नियम, न्यूनतम आकार और सुरक्षा मानिए।
- मनोरंजक गोताखोरी – मनोरंजक गोताखोरी मज़े के लिए पानी में उतरना है। स्नॉर्कलिंग में सतह पर तैरते हुए नली से साँस लेते हैं। स्किन डाइविंग (साँस रोककर गोता) में मास्क और फ़िन के साथ एक साँस पर छोटा गोता लगाते हैं। स्कूबा में हवा का सिलेंडर होता है, इसलिए देर तक नीचे रह सकते हैं। तीनों में प्रशिक्षण, साथी और समुद्र का सम्मान ज़रूरी है।
- समुद्री मनोरंजन (मरीन लेज़र) – समुद्री मनोरंजन यानी समुद्र या झील पर खेल और मज़ा: सेलिंग, कैनो, कयाक, सर्फ़िंग आदि। सुरक्षित मज़े के लिए तीन बातें चाहिए: समुद्र के नियम जानो, हवा, लहर और ज्वार देखो, और सही सामान पहनो। पाल हवा को धक्के में बदलती है; चप्पू पानी को पीछे धकेलता है तो नाव आगे बढ़ती है।
- सुरक्षा मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रबंधन – सुरक्षा मार्गदर्शन यानी गतिविधि से पहले लोगों को नियम और कौशल सिखाना। सुरक्षा प्रबंधन यानी चीज़ों को ऐसे सँभालना कि दुर्घटना कम हो: सामान और मौसम जाँचो, गिनती रखो, आपात योजना बनाओ और बाद में समीक्षा करो। मार्गदर्शन लोगों के लिए है; प्रबंधन पूरी व्यवस्था के लिए।